हाथों में मेहनत, दिल में भक्ति : असम के श्रमिक पहुंचे रामलला के दरबार, प्रभु के दर्शन ने किया आस्था का संचार

अयोध्या। सदियों की आस्था से सराबोर रामनगरी में इस बार एक अनोखा संगम देखने को मिला, जब असम के चाय बागानों में जीवन बिताने वाले कर्मयोगी पहली बार अपने सीमित संसार से निकलकर आध्यात्मिक भारत की मुख्य धारा से जुड़े। यह यात्रा उनके लिए महज तीर्थदर्शन नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कृति और आत्मबोध का अद्भुत अनुभव बन गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से शुरू हुई इस पहल ने उन श्रमिकों के जीवन में नई रोशनी जगाई, जो अब तक देश की व्यापक सांस्कृतिक विरासत से दूर थे। रामलला के दर्शन ने उनके मन में गर्व, आस्था और जुड़ाव का नया संचार किया।
असम के डिब्रूगढ़ स्थित मनोहारी टी एस्टेट से आए 30 कर्मयोगियों का पहला दल रविवार को अयोध्या पहुंचा, जहां उनकी यात्रा की शुरुआत कारसेवकपुरम से हुई। स्नान के बाद दल ने मां सरयू, नागेश्वरनाथ मंदिर और राम की पैड़ी के दिव्य दृश्यों का अवलोकन किया। इसके बाद कर्मयोगियों ने हनुमानगढ़ी, दशरथ महल और कनक भवन जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। हर स्थल उनके लिए एक नए अनुभव और गहरे कौतूहल का केंद्र बना रहा।
भव्यता और कलात्मकता को देखकर कई सदस्य भाव-विह्वल हो उठा दल
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचने पर दल की भावनाएं चरम पर पहुंच गईं। भव्यता और कलात्मकता को देखकर कई सदस्य भाव-विह्वल हो उठे। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वे उसी मंदिर परिसर में खड़े हैं, जिसे अब तक केवल सुना या कल्पना में देखा था। अंगद टीला और सीता रसोई जैसे स्थलों पर पहुंचकर उन्होंने अपने अनुभव साझा किए।
कर्मयोगियों के सम्मान में सहभोज का किया गया आयोजन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कर्मयोगियों के सम्मान में सहभोज का आयोजन किया गया और उन्हें रामनामी ओढ़ाकर सम्मानित करते हुए प्रसाद भेंट किया गया। ट्रस्ट के न्यासी डॉ. अनिल मिश्र ने यात्रा की रूपरेखा साझा करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान स्थानीय पदाधिकारी और अशोक सिंघल फाउंडेशन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
यह बोले ट्रस्ट के न्यासी
अनिल मिश्रा ने कहा कि आज असम चाय बाग के श्रमिकों ने राममंदिर के दर्शन किए हैं। अशोक सिंगल फाउंडेशन की पहल से उनको भगवान रामलला के दर्शन हो सके। सभी श्रमिक दर्शन कर भाव विभोर हो गए। दल का नेतृत्व कर रहे रूपम गोगोई, अजित मुरा, दिलीप पूर्त्या, बसू नायक और संजीब धान ने अयोध्या में मिले आत्मीय आतिथ्य के लिए आभार जताया। अयोध्या के इस आध्यात्मिक अनुभव के बाद यह दल अब अपनी अगली यात्रा के लिए वाराणसी (काशी) के लिए रवाना हो गया है।
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