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रीवा का पचमठा मंदिर : जहां आदि गुरु ने की थी शिवलिंग की स्थापना, सनातन धर्म के लिए बेहद खास माना जाता है यह स्थान

जहां आदि गुरु ने की थी शिवलिंग की स्थापना, सनातन धर्म के लिए बेहद खास माना जाता है यह स्थान
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admin

Feb 10, 202612:29 PM

नीरज द्विवेदी, रीवा

भारत के महान दार्शनिक, धर्म-सुधारक और अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक आदि गुरु शंकराचार्य ने देश में सनातन धर्म को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से चार प्रमुख मठों की स्थापना की थी। ये मठ भारत की चारों दिशाओं-उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में स्थापित किए गए।

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आदि गुरु शंकराचार्य भारत के मध्य भाग में भी एक मठ की स्थापना करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने मध्यप्रदेश के रीवा क्षेत्र को चुना। इसी स्थान पर उन्होंने शिवलिंग की स्थापना की और एक मठ की नींव रखी। जिसको मचमठा के नाम से जाना जाता है। यह शिवलिंग आज भी उसी स्थान पर विद्यमान है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह उस कालखंड की स्मृति भी है, जब आदि शंकराचार्य पूरे देश में भ्रमण कर सनातन धर्म को एकजुट करने का कार्य कर रहे थे। यहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। विशेष रूप से महाशिवरात्रि के पर्व पर इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर-दराज से आए श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं, जलाभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से यहाँ भगवान शिव की आराधना करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। इसी कारण यह मठ न केवल रीवा बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

बता दें कि आदि शंकराचार्य ने देश के चार कोनों में चार मठों की स्थापना की थी, उत्तर में बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारिका, दक्षिण में मैसूर क्षेत्र, और पूर्व में पुरी। इन मठों का उद्देश्य था देशभर में सनातन धर्म और अद्वैत वेदांत का प्रचार-प्रसार करना। लेकिन इसके साथ ही आदि शंकराचार्य भारत के मध्य क्षेत्र को भी आध्यात्मिक रूप से सशक्त करना चाहते थे।

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