Latest News

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने जल संसाधन विभाग की निविदा प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए टेंडर फिक्सिंग के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने पत्रकारवार्ता में आरोप लगाते हुए कहा कि बड़े टेंडरों में पहले से कमीशन तय किए जाने की व्यवस्था की जाती है। एक प्रभावशाली बिचैलिया तंत्र के माध्यम से विभागीय स्तर पर उच्च स्तर पर कमीशन के आधार पर टेंडर की सांठगांठ होती है। यदि शर्तें पूरी नहीं होती हैं तो टेंडर प्रक्रिया बाधित कर दी जाती है। इसी वजह से पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से जल संसाधन विभाग में बड़े नए टेंडर नहीं लगे?
मुकेश नायक ने कहा कि नौशाद कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है, फिर भी विभागीय निर्णयों में उसकी भूमिका क्यों दिखाई देती है? नौशाद का जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से क्या संबंध है? मोंटेना नामक कंपनी को कमलनाथ सरकार ने ब्लैकलिस्ट किया था, वह अलग-अलग नामों से फिर टेंडर प्रक्रिया में कैसे शामिल हो रही है? क्या नौशाद के बेटे की हर टेंडर में जगदीश गुप्ता के साथ साझेदारी है? राजू मोंटाना (मोंटेना कंपनी, हैदराबाद निवासी) का इस पूरे नेटवर्क में क्या भूमिका है? क्या दुबई में कोई साझा व्यवसाय या आर्थिक लेनदेन संचालित हो रहा है? कांग्रेस के आरोपों पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधा, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
कांग्रेस ने की ठेकों की स्वतंत्र जांच की मांग
प्रदेश कांग्रेस ने जल संसाधन विभाग के 2023-24 के सभी टेंडरों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच की जाए। संदिग्ध परिसरों की जांच कर मनी ट्रेल उजागर की जाए। टेंडर प्रक्रिया में वास्तविक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जाए। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। यह केवल टेंडर का प्रश्न नहीं, बल्कि पारदर्शिता, युवाओं के रोजगार और किसानों के भविष्य का प्रश्न है।
Advertisement
