Latest News

भोपाल। मप्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 70 साल पुराना समाज कल्याण बोर्ड को भंग करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड 1956 से महिलाओं, बच्चों और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए काम कर रहा था। हाल ही में कैबिनेट ने मप्र राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग करने का फैसला लिया है। इस बोर्ड से जुड़े 30-40 से अधिक एनजीओ, सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता और प्रदेश भर में 28 पारिवारिक परामर्श केंद्र सक्रिय थे।
सिंघार ने एक्स पर लिखा कि बोर्ड का मुख्य उद्देश्य नागरिक समाज, स्वैच्छिक संगठनों और जमीनी स्तर के समूहों के माध्यम से महिलाओं-बच्चों से संबंधित कल्याणकारी गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा सरकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना था। विभागीय रिपोर्टों के अनुसार, बोर्ड के जरिए हर वर्ष 30,000 से 35,000 प्रत्यक्ष लाभार्थियों तक सहायता पहुँचती थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बोर्ड के अचानक भंग होने से बड़ी संख्या में लोग, संगठन और कार्यकर्ता प्रभावित होंगे। सिंघार ने सरकार से मांग की है कि अपने फैसले पर फिर से विचार करे।
केंद्र से आर्थिक मदद मिलना बंद
यह बोर्ड 50:50 केंद्र-राज्य फंडिंग मॉडल पर चलता था। केंद्र सरकार ने पिछले साल से अपनी फंडिंग रोक दी और राज्यों से इसे स्वयं संचालित करने को कहा। मप्र की भाजपा सरकार ने इसे बंद करने का निर्णय लिया। हालांकि, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा सहित कई अन्य भाजपा शासित राज्यों (लगभग एक दर्जन) में यह बोर्ड अभी भी सक्रिय है और वंचित वर्गों की मदद कर रहा है।
Advertisement
