Latest News

भोपाल। मप्र कांग्रेस ने एक बार फिर सरकार द्वारा मनाए जा रहे कृषक कल्याण वर्ष पर सवाल खड़े किए हैं। मप्र के किसानों से 2700 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर गेहूं खरीदने का वादा किया था, लेकिन गेहूं 1700 रुपए प्रति क्विंट की दर पर खरीदा जा रहा है। इसी तरह सोयाबीन एवं अन्य फसलों के दाम नहीं मिले। ऐसे में सरकार किस बात का कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, राष्ट्रीय पेनालिस्ट अभय दुबे और पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे ने किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा।
पटवारी ने कहा कि प्रदेश में किसानों के बुरे हाल हैं। कोईसुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने किसानों को तीन बड़ी गारंटियां दी थीं, गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल, धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल और सोयाबीन 6000 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने की बात कही थी। लेकिन हकीकत यह है कि उज्जैन मंडी में गेहूं 1800 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। यह स्थिति उज्जैन विधानसभा क्षेत्र की मंडी की है। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने इसका वीडियो भी जारी किया था, जिससे साफ है कि एक तरफ सरकार कृषि कल्याण की बात करती है और दूसरी तरफ किसानों को उचित दाम तक नहीं मिल पा रहा है।
मप्र में कृषि व्यवस्था की रीढ़ टूट रही
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री को पिछले एक साल का हिसाब देना चाहिए। अगर सरकार सच में किसानों के हित में काम कर रही है तो वह अपने एक साल के काम का ब्योरा सार्वजनिक करे। प्रदेश में कृषि व्यवस्था सरकारी उदासीनता के बोझ तले दम तोड़ रही है। कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद खाली हैं, यानी लगभग 60 प्रतिशत कर्मचारी नहीं हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन विभाग में 1,290 में से 722 पद रिक्त हैं, उद्यानिकी विभाग में 3,079 में से 1,459 पद खाली हैं और पशुपालन व डेयरी विभाग में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं।
Advertisement
