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भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कुल 3 महीने 22 दिन की अवधि में अपनी 25 सदस्यीय प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी। इसके अलावा सात में से 6 मोर्चा अध्यक्ष भी घोषित कर दिए हैं। लेकिन 62 में से 24 जिलों के अध्यक्ष अब तक अपनी कार्यकारिणी घोषित नहीं कर सके हैं।
क्यों अटकी जिलों की कार्यकारिणी
सूत्रों का कहना है कि जिन 24 जिलों की कार्यकारिणी घोषित नहीं हो सकी है, वहां पार्टी के स्थानीय वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच नाम और कार्यकारिणी में पदों को लेकर समन्वय नहीं हो पाया है। पार्टी चाहती है कि कम से कम 30 प्रतिशत महिला पदाधिकारियों के साथ सभी जिलों की कार्यकारिणी समन्वय और सहमति से ही तय हो, ताकि भविष्य में आपसी टकराव की स्थिति न बने।
इन 38 जिलों की कार्यकारिणी हुई घोषित
आगर मालवा, अलीराजपुर, अनूपपुर, अशोक नगर, बालाघाट, बड़वानी, बैतूल, भोपाल ग्रामीण, छिंदवाड़ा, दमोह, दतिया, देवास, डिण्डौरी, गुना, हरदा, इंदौर महानगर, जबलपुर ग्रामीण, झाबुआ, खण्डवा, मैहर, मण्डला, मंदसौर, मऊगंज, नर्मदापुरम, नीमच, निवाड़ी, पांढुर्णा, रायसेन, रतलाम, रीवा, सागर ग्रामीण, शहडोल, शाजापुर, श्योपुर, सीधी, सिंगरौली, उज्जैन ग्रामीण और नगर उज्जैन।
इन जिलों की घोषित नहीं हो सकी कार्यकारिणी
भिण्ड, भोपाल (नगर), बुरहानपुर, छतरपुर, धार, धार (ग्रामीण), ग्वालियर (नगर), ग्वालियर (ग्रामीण), इंदौर (ग्रामीण), जबलपुर (नगर), कटनी, खरगौन, मुरैना, नरसिंहपुर, पन्ना, राजगढ़, सागर, सतना, सीहोर, सिवनी, शिवपुरी, टीकमगढ़, उमरिया, विदिशा।
छूटे मण्डल अध्यक्षों की हो रहीं घोषणा
प्रदेश कार्यकारिणी और 38 जिलों की कार्यकारिणी घोषित हो जाने के बाद अभी कई जिलों के शेष बचे मंडलों की कार्यकारिणी भी पार्टी घोषित कर रही है। इनमें ऐसे मण्डल शामिल हैं, जिनमें अध्यक्ष पद के लिए स्थानीय नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पाई थी, अथवा घोषित नाम पर आपत्ति या अपात्र पाए गए थे।
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