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भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार की कृषि कैबिनेट को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य के किसानों की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील से राज्य के किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए नीति बनाई जाए। प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने कहा कि कृषि कैबिनेट जनजातीय अंचल बड़वानी में हो रही है, इसलिए किसानों की समस्याओं पर चर्चा जरूरी है।
पीसीसी चीफ ने कहा है कि कृषि कैबिनेट जनजातीय अंचल बड़वानी में हो रही है, इसलिए किसानों की समस्याओं पर चर्चा जरूरी है। राज्य का किसान संकट में है और गेहूं कटकर मंडियों में आ चुके हैं लेकिन सरकारी खरीद की पुख्ता व्यवस्था अब तक नहीं की गई है जिसके चलते किसान उपज को फिर से औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर होगा।
एमएसपी को लेकर भी दागा सवाल
उन्होंने कहा कि गेहूं, सोयाबीन और धान के लिए बढ़े हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य का वादा किया गया था लेकिन वह पूरी कीमत किसानों को कब और कैसे मिलेगी और क्या यह भी सिर्फ झूठी घोषणा बनकर रह जाएगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीत पटवारी का आरोप है कि प्रधानमंत्री द्वारा अमेरिकी दबाव में की गई ट्रेड डील से सस्ते कृषि उत्पाद देश में आएंगे। एमपी के किसानों को नुकसान से बचाने की राज्य सरकार की ठोस रणनीति क्या है, क्या कोई राज्यस्तरीय प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड बनाया गया है, इसका खुलासा किया जाए।
जीतू ने किसानों की समस्याओं का भी किया जिक्र
किसानों की अन्य समस्याओं का जिक्र करते हुए पटवारी ने कहा है कि प्राकृतिक आपदाओं, ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को फसल बीमा और मुआवजे का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है और बड़ी संख्या में किसानों के दावे लंबित हैं। खेती पर बढ़ती लागत का जिक्र करते हुए पटवारी ने कहा कि कृषि लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, डीजल और बिजली महंगी हो चुकी है। क्या सरकार खेती की लागत को कम करने के लिए कोई विशेष राहत पैकेज लाएगी।
पटवारी ने राज्य सरकार की कृषि कैबिनेट के बड़वानी में होने का जिक्र करते हुए कहा की एक तरफ किसानों की समस्याएं हैं तो दूसरी ओर आदिवासी सुविधाओं से वंचित हैं और उनकी सुरक्षा भी एक बड़ा मामला बना हुआ है। एमपी सरकार इस दिशा में कब पहल करेगी, ये बड़ा सवाल है।
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