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भोपाल। मध्यप्रदेश के शासकीय कर्मचारियों ने अगर वेतन विसंगति के कारण अधिक वेतन प्राप्त किया है, तो सेवानिवृत्ति के बाद उनकी पेंशन से उस अधिक राशि की वसूली की जाएगी। वित्त विभाग ने सभी पेंशन अधिकारियों को इसके लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत उन कर्मचारियों और अधिकारियों से राशि वसूल की जाएगी जिन्होंने अधिक वेतन लेने के बाद लिखित रूप में लौटाने का वचन (अंडरटेकिंग) दिया था।
वित्त विभाग के निर्देश में कहा गया है कि राज्य शासन के शासकीय कर्मचारियों के विसंगतिपूर्ण वेतन निर्धारण से हुए अधिक भुगतान की वसूली सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार की जाएगी। इस संबंध में वित्त विभाग ने समय-समय पर पूर्व में भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने अब यह सुनिश्चित किया है कि ऐसे मामलों में कोई ढील नहीं दी जाएगी, भले ही कर्मचारी या अधिकारी पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हों।
वित्त विभाग ने विशेष रूप से कहा है कि जिन कर्मचारियों और अधिकारियों ने अंडरटेकिंग दी है, उनसे सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर वसूली कर सकती है। यह आदेश 12 जून 2020 को जारी किए गए थे और अब उन्हें लागू कर रिटायर हो चुके कर्मचारियों से भी अधिक वेतन की वसूली की जाएगी।
हालांकि, जिन कर्मचारियों ने वसूली के लिए कोई लिखित वचन नहीं दिया है, उनसे रिकवरी नहीं की जाएगी। यह कदम अदालत द्वारा भी सुझाया गया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रस्तोगी के अनुसार, इस नीति से कोर्ट में अनावश्यक मुकदमों की संख्या कम होगी और कार्यवाही सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न होगी।
इस कदम से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि वित्तीय अनुशासन और सरकारी नियमों का पालन आवश्यक है। शासकीय कर्मचारियों को अधिक वेतन प्राप्त होने पर तुरंत इसकी जानकारी देना और अगर आवश्यक हो तो राशि लौटाना जरूरी है। इस दिशा में जारी किए गए निर्देशों का उद्देश्य न केवल वसूली सुनिश्चित करना है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकना भी है।
वित्त विभाग ने सभी जिला और संभागीय पेंशन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे इस आदेश का पालन कर सुनिश्चित करें कि केवल उन कर्मचारियों से ही राशि वसूली जाए जिन्होंने अंडरटेकिंग दी है। इससे कर्मचारियों की न्यायिक परेशानियों में कमी आएगी और प्रशासनिक प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।
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