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इंदौर। दो महीने पहले इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण दो दर्जन से अधिक मौतों के बाद गठित राज्य स्तरीय जांच समिति को सरकार ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। समिति निरस्तीकरण का कारण विधानसभा में कांड की जांच के लिए एकल सदस्यीय आयोग का गठन बताया गया है। अब आयोग राज्य स्तरीय समिति की जिम्मेदारियों को संभालेगा।
राज्य स्तरीय समिति के अध्यक्ष सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल थे। इसमें प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी. नरहरि, आयुक्त संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे और आयुक्त इंदौर संभाग सुदाम खाड़े सदस्य-सचिव थे। समिति का उद्देश्य घटना की विस्तृत समीक्षा कर सुझाव और अनुशंसाएं तैयार करना था, जो अब एकल सदस्यीय आयोग करेगा।
सरकार ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय आयोग गठित किया है। आयोग को चार हफ्ते में रिपोर्ट जमा करनी है, जिसमें मृतकों की संख्या, रोग की प्रकृति, मेडिकल रिस्पांस, निवारक उपायों की समीक्षा और दीर्घकालिक सुधार के सुझाव शामिल होंगे। आयोग को प्रभावितों के मुआवजे और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने के अधिकार भी दिए गए हैं।
समिति निरस्तीकरण और आयोग गठन से सरकार की जांच प्रक्रिया तेज और केंद्रीकृत होगी। अधिकारियों को अभिलेख प्राप्त करने, स्थल निरीक्षण करने और जल जांच के आदेश देने का अधिकार आयोग को प्राप्त है। समय सीमा पूरी होने में अभी एक हफ्ता शेष है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है। इस निर्णय से अब भागीरथपुरा कांड की जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की उम्मीद है।
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