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भोपाल। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)के विरोध में मध्यप्रदेश के शिक्षक लामबंद हो गये हैं। रविवार संयुक्त मोर्चा गठित कर सामूहिक रूप से आंदोलन की रणनीति बनायी। रणनीति के तहत आठ अप्रैल से पूरे प्रदेश में तीन चरणों में आंदोलन करने का निर्णय लिया गया।
गांधी भवन में हुई इस बैठक में 12 शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि पात्रता परीक्षा के साथ-साथ इस बैठक में श्शिक्षक एप से अटेंडेंस् और श्सेवा वृद्ध्यि जैसे मुद्दों पर भी विचार किया गया। इसके लिये अप्रैल में तीन चरणों में प्रदर्शन की योजना बनाई गई है। इसका शुभारंभ आठ अप्रैल को जिला मुख्यालय पर और 11 अप्रैल को ब्लाक में शिक्षक प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 18 अप्रैल को राजधानी में शिक्षक एक जुट हो कर मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा निकालेंगे।
1.5 लाख शिक्षकों को असुरक्षा का भय
शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने के लिए निकले आदेश से प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। इनमें से लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जो 2011 से पहले नियुक्त हुए थे। इन शिक्षकों का कहना है कि जब उनकी नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्य नहीं था, तो अब उन्हें इसके आधार पर आंकना गलत है। इससे उनकी नौकरी तक खतरे में पड़ सकती है, जो उनके लिए बड़ा संकट बन गया है। कुल मिलाकर नौकरी जाने के खतरे को भांपते हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा का विरोध कर रहे हैं।शक्षकों का कहना है कि यह विवाद केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि श्नीति बनाम न्याय्य का रूप ले चुका है।
शिक्षकों का कहना है कि यहां आरटीई एक्ट 2009 साल 2010 से लागू हुआ। टीईटी 2011 से अनिवार्य हुआ, जबकि हजारों शिक्षक इससे पहले नियुक्त हो चुके थे। पुराने नियमों से नियुक्ति हुई, तो नए नियम लागू नहीं हो सकते।
सरकार अपने रुख पर कायम
आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा, अन्यथा सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जा सकती है। इसकी वजह से शिक्षकों में असंतोष बढ़ गया है। इस तरह शिक्षा विभाग शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए पात्रता परीक्षा को जरूरी बता रहा है। इस तरह सरकार अपने रुख पर कायम है। उसका कहना है कि उसका निर्णय पूरी तरह विधि सम्मत है।
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