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सिडनी। सिडनी में खेले जाने वाले एशेज सीरीज के आखिरी टेस्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का ऐलान कर चुके उस्मान ख्वाजा ने अपने विदाई भाषण में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में नस्लीय सोच पर टिप्पणी की है। उस्मान ख्वाजा ने दावा किया कि उनकी जाति और धर्म की वजह से उनके साथ करियर के दौरान अलग तरह का बर्ताव किया गया है।
ख्वाजा ने पर्थ टेस्ट से पहले तीन दिन गोल्फ खेलने के लिए हुई आलोचना के बारे में कहा, पीठ में ऐंठन की वजह से वह दोनों पारियों में ओपनिंग नहीं कर पाए थे। यह कुछ ऐसा था जिसे मैं नियंत्रित नहीं कर सकता था, जिस तरह से मीडिया और पुराने खिलाड़ी बाहर आए और मुझ पर हमला किया। मैं दो दिन तक इसे झेल सकता था, लेकिन मैंने उसे लगभग पांच दिन तक लगातार झेला।
ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम में किसी के साथ नहीं हुआ ऐसा बर्ताव
उन्होंने कहा, ये वही नस्लीय सोच हैं जिसके साथ मैं अपनी पूरी जिंदगी बड़ा हुआ हूं। जाहिर है, हम उनसे पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पाए हैं, क्योंकि मैंने पहले कभी ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम में किसी के साथ ऐसा बर्ताव होते नहीं देखा। उन बेकाबू लोगों के लिए नहीं जिस तरह से तुम लोगों ने मुझ पर हमला किया।
ख्वाजा ने कहा, अभी भी थोड़ा बहुत है, जिससे मुझे हर दिन लड़ना पड़ता है, जो मेरे लिए सबसे निराशाजनक बात है। मैं आपको ऐसे अनगिनत लोगों के बारे में बता सकता हूं जिन्होंने (टेस्ट से) एक दिन पहले गोल्फ खेला हो और चोटिल हो गए हों, लेकिन उनके बारे में कुछ नहीं कहा गया। मैं आपको और भी ऐसे लोग बता सकता हूं जिन्होंने पिछली रात 15 स्कूनर खाए हों और फिर चोटिल हो गए हों, लेकिन किसी ने एक शब्द भी नहीं कहा।
उन्होंने कहा, मैं समझता हूं कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम में जगह बनाना मुश्किल है। 11 जगहें हैं। यह आसान नहीं है, और हम लोगों को बस जगहें गिफ्ट नहीं करना चाहते। अभी भी चुनौतियों का सामना करना बाकी है। मैं श्अगले उस्मान ख्वाजाश् की जिंदगी आसान बनाना चाहता हूं।
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