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पीएम मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का किया उद्घाटन : कहा- भारत से दुनिया को बढ़ी उम्मीदेंफिल्म इंडस्ट्री से दुखद खबर : 'इंडियन आइडल' सीजन 3 के विजेता प्रशांत तमांग का निधन, महज 43 की उम्र में ही छोड़ दी दुनिया, मौत की वजह बना स्ट्रोकआई-पैक छापेमारी विवाद : पश्चिम बंगाल सरकार खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, दायर की कैविएटवेनेजुएला के बाद ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर : मैक्सिको को दी हमले की धमकी, अवैध प्रवासी भेजने का भी लगया आरोपसोमनाथ स्वाभिमान पर्व : पीएम मोदी के स्वागत के लिए तैयारियां पूरी, अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकार देंगे सांस्कृतिक प्रस्तुति

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संघ बदल नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होकर आ रहा सामने : आरएसएस चीफ ने हेडगेवार के योगदान का भी किया जिक्र

आरएसएस चीफ ने हेडगेवार के योगदान का भी किया जिक्र

नई दिल्ली। आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने रविवार दिल्ली में आयोजित संघ के कार्यक्रम शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने संघ की आने वाली फिल्म 'शतक' के गाने के एल्बम को लॉन्च किया गया। जो आरएसएस के 100 साल के सफर की कहानी बयां करेगा। इस मौके पर सिंगर सुखविंदर सिंह, डायरेक्टर आशीष मल्ल, को-प्रोड्यूसर आशीष तिवारी और आरएसएस पदाधिकारी भैयाजी जोशी मौजूद रहे। संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) बदल नहीं रहा है, बल्कि समय के साथ धीरे-धीरे विकसित हो रहा है और बस सामने आ रहा है। आरएसएस प्रमुख भागवत ने अपने संबोधन में कहा, 'संगठन (फरर) अपनी शताब्दी मना रहा है। लेकिन जैसे-जैसे संगठन विकसित होता है और नए रूप लेता है, लोग इसे बदलते हुए देखते हैं। हालांकि यह असल में बदल नहीं रहा है बस धीरे-धीरे सामने आ रहा है।'संघ को लेकर दिया ये उदाहरणउन्होंने आगे कहा, 'जैसे एक बीज से अंकुर निकलता है और फलों और फूलों से लदा हुआ परिपक्व पेड़ का एक अलग रूप होता है, ये दोनों रूप अलग-अलग हैं। फिर भी पेड़ मूल रूप से उसी बीज जैसा है, जिससे वह उगा है।" भागवत ने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार एक 'जन्मजात देशभक्त' थे और उन्होंने बचपन में ही अपना जीवन राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था।'संघ और डॉक्टर साहब पर्यायवाची शब्द'उन्होंने कहा, 'संघ और डॉक्टर साहब (हेडगेवार) पर्यायवाची शब्द हैं। वो जब सिर्फ 11 साल के थे, जब उनके माता-पिता का प्लेग से निधन हो गया था, लेकिन उन्हें उस उम्र में या बाद में भी, बात करने या भरोसा करने वाला कोई नहीं मिला। मोहन भागवत ने कहा कि जब इतनी कम उम्र में इतना बड़ा सदमा लगता है, तो इंसान अकेला हो जाता है और उसके स्वभाव और व्यक्तित्व पर बुरा असर पड़ने का खतरा रहता है, लेकिन हेडगेवार के साथ ऐसा नहीं हुआ।'उन्होंने आगे कहा, 'उनके व्यक्तित्व में बड़े से बड़े झटकों को भी सहने की क्षमता थी, बिना अपने विश्वास या स्वभाव को थोड़ा भी डगमगाने दिए- यह बेहतरीन मानसिक स्वास्थ्य, एक मजबूत और स्वस्थ दिमाग की निशानी है, जो उनमें शुरू से ही था।' उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि डॉक्टर साहब की साइकोलॉजी भी अध्ययन और रिसर्च का विषय हो सकती है।

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फिल्म इंडस्ट्री से दुखद खबर : 'इंडियन आइडल' सीजन 3 के विजेता प्रशांत तमांग का निधन, महज 43 की उम्र में ही छोड़ दी दुनिया, मौत की वजह बना स्ट्रोक

'इंडियन आइडल' सीजन 3 के विजेता प्रशांत तमांग का निधन, महज 43 की उम्र में ही छोड़ दी दुनिया, मौत की वजह बना स्ट्रोक

मुंबई। फिल्म इंडस्ट्री से दुखद खबर सामने आई है। गायक और अभिनेता प्रशांत तमांग का रविवार को 43 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनकी मौत की वजह स्ट्रोक बताई जा रही है। फिल्ममेकर राजेश घाटानी ने इस दुखद खबर की पुष्टि की है। वहीं, दार्जिलिंग के जाने-माने सिंगर महेश सेवा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपने मित्र को श्रद्धांजलि दी। शोक व्यक्त करते हुए उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा, प्यारे भाई प्रशांत के निधन पर गहरी संवेदना।प्रशांत तमांग का नाम इंडियन आइडल सीजन 3 के विजेता के रूप में सबसे ज्यादा जाना जाता है। उनका जन्म 4 जनवरी 1983 को दार्जिलिंग में हुआ था, वह मूल रूप से नेपाल में रहते थे। उन्हें प्रशंसक 'पहाड़ का गौरव' भी कहते थे। उनके परिवार में मां, दादी और एक बहन है। साल 2011 में उन्होंने गीता थापा से शादी रचाई थी। जानकारी के अनुसार, वह पत्नी के साथ दिल्ली में रह रहे थे।शो में आने से पहले वह कोलकाता पुलिस में तैनात थे और पुलिस आॅर्केस्ट्रा का हिस्सा थे। वहां वह कार्यक्रमों में गाया करते थे। उनके सीनियर अधिकारियों ने ही उन्हें इंडियन आइडल में हिस्सा लेने की सलाह दी थी।इंडियन आइडल शो जीतने के बाद प्रशांत ने सोनी बीएमजी के साथ अपना पहला एलबम रिलीज किया, जिसमें हिंदी और नेपाली गाने शामिल थे। बाद में उन्होंने नेपाली फिल्मों में बतौर प्लेबैक सिंगर और अभिनेता काम किया। उनकी आवाज और अभिनय ने खूब सराहना बटोरी।प्रशांत ने अमेजन प्राइम की वेब सीरीज 'पाताल लोक 2' में एक महत्वपूर्ण किरदार निभाया था। इस सीरीज में उन्होंने विलेन डेनियल लेचो का रोल किया, जो दर्शकों के लिए एकदम अलग और चौंकाने वाला था। इस भूमिका में उन्हें दर्शकों ने काफी पसंद किया और सीरीज में उनके एक्टिंग को सराहना मिली।

बिज़नेस

86 प्रतिशत भारतीयों के लिए ज्वेलरी सबसे अहम संपत्ति : डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट में खुलासा, नई पीढ़ी तेजी से अपना रही नया ट्रेंड

डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट में खुलासा, नई पीढ़ी तेजी से अपना रही नया ट्रेंड

नई दिल्ली। भारत में लगभग 86 प्रतिशत लोग सोने और आभूषणों (ज्वेलरी) को संपत्ति बनाने का एक अच्छा साधन मानते हैं। यह संख्या लगभग म्यूचुअल फंड और शेयरों जैसे बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों के बराबर है, जिन्हें 87 प्रतिशत लोग पसंद करते हैं। इससे साफ है कि गहनों की अहमियत आज भी बहुत ज्यादा है। बुधवार को जारी डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ज्वेलरी मार्केट तेजी से बदल रहा है। अब लोग आभूषणों को सिर्फ शादी या परंपरा से नहीं जोड़ते, बल्कि अपनी पहचान, जीवनशैली और रोजमर्रा के पहनावे का हिस्सा भी मानते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 56 प्रतिशत लोग ज्वेलरी को, निवेश और फैशन, दोनों के रूप में देखते हैं। वहीं, 28 प्रतिशत लोग केवल निवेश के रूप में गहने खरीदते हैं। इससे पता चलता है कि आभूषणों की भूमिका अब सिर्फ सेविंग्स तक सीमित नहीं रही।रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष और 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोग आभूषणों को ज्यादा निवेश के रूप में खरीदते हैं। वहीं, युवा वर्ग गहनों में स्टाइल, अपने हिसाब से डिजाइन और अलग-अलग तरह से पहनने की सुविधा को ज्यादा महत्व देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जेनजी और युवा पीढ़ी तेजी से हल्के और रोज पहनने वाले गहनों की ओर रुख कर रही है। 51 प्रतिशत जेनजी को चांदी और 34 प्रतिशत को प्लेटिनम वाली ज्वेलरी पसंद है। करीब 49 प्रतिशत लोग हल्के और सादे गहनों को भारी और ज्यादा सजावटी गहनों से ज्यादा पसंद करते हैं।रिपोर्ट में बताया गया कि 45 प्रतिशत जेनजी और युवा सिल्वर की ज्वेलरी में निवेश करना पसंद करते हैं। इसकी वजह है अच्छा डिजाइन, कम कीमत और आसानी से खरीदना। अब चांदी को सोने के साथ रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए भी चुना जा रहा है। डेलॉइट इंडिया के अनुसार, पहले भारत में लगभग 70 प्रतिशत गहने शादियों के लिए खरीदे जाते थे, लेकिन अब यह समीकरण बदल रहा है। युवा जन्मदिन और सालगिरह (38 प्रतिशत), रोजाना और आॅफिस में पहनने वाले परिधान (32 प्रतिशत) और पदोन्नति व पढ़ाई जैसी करियर संबंधी उपलब्धियों के लिए आभूषण खरीदते हैं।रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 49 प्रतिशत लोग अंगूठियां, चेन और कान की बालियां जैसे गहनों को निजी और गैर-धार्मिक मौकों के लिए पसंद करते हैं, जो पारंपरिक भारी गहनों से ज्यादा हैं। हालांकि आॅनलाइन प्लेटफॉर्म का असर बढ़ रहा है, लेकिन गहनों के मामले में लोग अब भी दुकान पर जाकर उसे खरीदना ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में आभूषण उद्योग की तरक्की के लिए बेहतर कामकाज, सही योजना और भरोसे पर ध्यान देना सबसे जरूरी होगा।

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हत्या के मामले में वांछित अभियुक्त गिरफ्तार #tv27newsdigital #tv27news #hindinews #latestnews #news

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अफ्रीका में जंगलों का कहर  #hindinews #news #latestnews #tv27news #tv27newsdigital #breakingnews

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क्या भारत को मिलेगी बुर्खा पहनने वाली पीएम ? #hindinews #news #latestnews #tv27news #tv27newsdigital

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दिल्ली में कड़ाके की ठंड का कहर #tv27newsdigital #tv27news #breakingnews #latestnews #newschannel

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सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका! #hindinews #tv27news #news #tv27newsdigital  #latestnews #breakingnews

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बिहार से बहार पांव पसार रही JJD #tv27newsdigital #tv27news #latestnews #breakingnews #news

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खेल

मलेशिया ओपन में भारत के अभियान पर लगा ब्रेक : सेमीफाइन में चीनी प्लेयर से हारी सिंधु, फैंस निराश

सेमीफाइन में चीनी प्लेयर से हारी सिंधु, फैंस निराश

क्वालालंपुर। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु मलेशिया ओपन से बाहर हो गई हैं। शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल में उन्हें दुनिया की नंबर 2 खिलाड़ी चीन की वांग झियी से 16-21, 15-21 से हार का सामना करना पड़ा। उनकी इस हार से फैंस को निराश हो गए हैं।पीवी सिंधु दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट वांग झियी के खिलाफ दबाव नहीं बना सकीं। पैर की चोट से उबरने के बाद अपना पहला टूर्नामेंट खेल रही सिंधु ने दूसरे गेम में 11-6 की बढ़त भी गंवा दी। हार के साथ ही टूर्नामेंट में उनके सफर का निराशाजनक अंत हो गया। शुरुआती मैच में सिंधु ने लगाए जोरदार शाॅटसिंधु ने वांग झियी को मुकाबले की शुरुआत में कड़ी टक्कर दी। उन्होंने जोरदार शॉट लगाए और अपने खास क्रॉस-कोर्ट स्मैश लगाकर 5-2 की बढ़त बना ली, लेकिन वांग के हल्के टच ने उन्हें लगातार अंक दिलाकर बराबरी करने में मदद की। पहले गेम में एक समय सिंधु 9-7 से आगे चल रही थीं, लेकिन चीनी खिलाड़ी ने एक बार फिर वापसी की और इंटरवल पर सिंधु के नेट पर शॉट चूकने पर एक अंक की मामूली बढ़त बना ली।वांग ने लगातार आक्रामक शॉट्स से सिंधु पर बढ़ाया दबाव मैच फिर से शुरू होने के बाद स्कोर एक समय 13-13 से बराबर था। 15-14 पर, वांग ने लगातार आक्रामक शॉट्स से दबाव बढ़ाया। वह 18-14 पर पहुंच गईं, एक जबरदस्त रैली में एक अंक गंवाया, फिर चार गेम अंक हासिल किए और ओपनर खत्म किया क्योंकि सिंधु वाइड चली गईं।दूसरे गेम में दो गलतियां सिंधु को पड़ी भारीदूसरे गेम में सिंधु दो गलतियों के बाद 1-3 पर फिसल गईं, लेकिन उन्होंने वापसी की, और 6-3 से आगे निकलने के लिए जोरदार रैली बनाईं। वांग ने अंतर कम किया, फिर भी सिंधु ने बीच के समय में अपनी विरोधी खिलाड़ी को तेज एंगल से कोनों की ओर धकेलकर अपना दबदबा बनाया, जिससे ब्रेक तक 11-6 की बढ़त हो गई। वांग ने दोबारा गेम शुरू होने के बाद जोरदार वापसी की, तेज रैलियों में हिस्सा लिया, लेकिन सिंधु ने लगभग परफेक्ट नेट शॉट्स से जवाब दिया और 13-9 से आगे रहीं। वांग ने फिर वापसी की, जब सिंधु के शॉट्स बाहर और नेट में चले गए, और 13-13 से बराबरी कर ली। इसके बाद 16-13 की बढ़त के साथ वांग झियी ने मैच अपने नाम कर लिया।

लाइफस्टाइल

स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया : बिस्तर पर लेटने के बाद भी नहीं आती नींद, जानें इसका कारण

बिस्तर पर लेटने के बाद भी नहीं आती नींद, जानें इसका कारण

नई दिल्ली। आजकल रात को अच्छी नींद लेना भी कई लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार ऐसा होता है कि बिस्तर पर लेटने के बावजूद भी नींद नहीं आती। इसे मेडिकल भाषा में स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया यानी नींद न आने की समस्या कहते हैं। यह केवल एक आम परेशानी नहीं है, बल्कि यह आपके पूरे दिन की ऊर्जा, मूड और स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। नींद की कमी मस्तिष्क और शरीर दोनों को थका देती है, जिससे दिनभर तनाव, चिड़चिड़ापन और ध्यान में कमी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। आज के दौर में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। सोने से ठीक पहले इन उपकरणों का इस्तेमाल करना शरीर में नींद के हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन को रोक देता है। आयुर्वेद में इसे मानसिक अशांति और प्रकाश से उत्पन्न विकार कहा जा सकता है। जब स्क्रीन की नीली रोशनी आंखों में पड़ती है, तो मस्तिष्क सोचने लगता है कि दिन अभी खत्म नहीं हुआ। परिणामस्वरूप शरीर बिस्तर पर होने के बावजूद रिलैक्स नहीं होता और नींद नहीं आती।इसके अलावा, बिस्तर पर जाते ही कई लोग दिनभर की घटनाओं या आने वाले कल की चिंताओं में डूब जाते हैं। आयुर्वेद इसे चित्त विकार कहता है। जब मस्तिष्क लगातार अलर्ट मोड में रहता है, तो शरीर को नींद की जरूरत होने के बावजूद भी आराम नहीं मिल पाता। यह सोचने का सिलसिला कई बार अनजाने में आदत बन जाता है, जिससे नींद न आने की समस्या होती है।एक और बड़ा कारण है कैफीन का सेवन, खासकर दोपहर के बाद चाय या कॉफी पीना। विज्ञान के अनुसार कैफीन का असर शरीर में 6 से 8 घंटे तक रहता है। इसका मतलब यह है कि अगर आप शाम को चाय पीते हैं, तो रात को बिस्तर पर जाने पर आपका मस्तिष्क सक्रिय रहता है और नींद नहीं आती। आयुर्वेद में इसे पित्त और वात के असंतुलन से जोड़ा जाता है, जो शरीर को गर्म और उत्तेजित रखता है।स्लीप ऑनसेट इंसोमनिया का एक और कारण अनियमित सोने और जागने का समय है। जब रोज अलग-अलग समय पर सोते और जागते हैं, तो हमारा शरीर यह संकेत नहीं देता कि कब सोना है और कब जागना है। आयुर्वेद में इसे शरीर की प्राकृतिक लय के विघटन के रूप में देखा जाता है। इस वजह से नींद आने में देर होती है और नींद की गुणवत्ता भी कम हो जाती है।नींद की समस्या को दूर करने के लिए कुछ आसान उपाय हैं। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का इस्तेमाल कम करें और कमरे को अंधेरा रखें। हल्का संगीत सुनना, गहरी सांस लेना या आयुर्वेदिक हर्ब्स जैसे अश्वगंधा और ब्राह्मी का सेवन मानसिक शांति में मदद कर सकता है। दोपहर के बाद कैफीन से बचें और रोजाना एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। आयुर्वेद के अनुसार यह वात और पित्त को संतुलित करके नींद को प्राकृतिक रूप से सुधारता है।

राजनीती

आई-पैक छापेमारी विवाद : पश्चिम बंगाल सरकार खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, दायर की कैविएट

पश्चिम बंगाल सरकार खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, दायर की कैविएट

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच जारी खींचतान के बीच शनिवार को एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट एप्लीकेशन दाखिल कर दी है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब आई-पैक से जुड़े मामले में ईडी के सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की संभावनाएं जताई जा रही थीं।कैविएट दाखिल कर पश्चिम बंगाल सरकार ने शीर्ष अदालत से स्पष्ट रूप से आग्रह किया है कि यदि इस मामले में कोई भी याचिका या अपील दायर की जाती है, तो राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए। सरकार के इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अदालत किसी भी एकतरफा आदेश से पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर दे। दरअसल, ममता सरकार को आशंका थी कि ईडी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है।दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय भी इस पूरे मामले में अपनी कानूनी रणनीति पर मंथन कर रहा है। माना जा रहा है कि ईडी भी कानूनी विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिनमें सुप्रीम कोर्ट जाना भी शामिल है। हालांकि, अंतिम फैसला लेने से पहले ईडी सभी पहलुओं और संभावित कानूनी रास्तों का आकलन कर रही है।इससे पहले, ईडी ने शुक्रवार को हाईकोर्ट का रुख किया था। ईडी ने अदालत का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया था कि उसकी जांच में जानबूझकर रुकावट पैदा की गई ताकि काम प्रभावित हो। ईडी की ओर से दायर याचिका में मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई। साथ ही, एजेंसी ने अदालत में आवेदन दाखिल कर इस संबंध में केस दर्ज करने की भी अनुमति मांगी। इस दौरान ईडी ने अदालत को बताया कि गुरुवार को की गई जांच के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कई अहम दस्तावेज और जानकारियां अपने साथ ले गईं।बता दें कि आई-पैक के कार्यालय और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर गुरुवार को हुई ईडी की छापेमारी के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार को राज्य प्रशासन और पुलिस के सीनियर अधिकारियों के साथ प्रतीक जैन के घर और फिर कार्यालय पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर कुछ फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज निकालकर अपनी गाड़ी में रखवाए थे।

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