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यूपी की रूह कंपा देने वाली घटना : दीवार पर खुदकुशी की वजह लिख एक ही परिवार के 5 लोगों ने दी जान, मथुरा के महावन क्षेत्र में फैली सनसनी

दीवार पर खुदकुशी की वजह लिख एक ही परिवार के 5 लोगों ने दी जान, मथुरा के महावन क्षेत्र में फैली सनसनी

मथुरा। उत्तरप्रदेश से एक लोमहर्षक घटना सामने आई है। यहां के मथुरा के महावन क्षेत्र में एक ही परिवार के 5 लोगों ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। मृतकों में पति-पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा शामिल हैं। इस परिवार के आत्महत्या के पीछे की आखिर वजह क्या रही, ये फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। गांव खप्पर पुर की है घटनातहसील महावन क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम खप्पर पुर की ये घटना है। यहां के रहने वाले 35 वर्षीय किसान मनीष, उनकी पत्नी सीमा, दो बेटियां हनी और प्रियांशी और दो वर्षीय बेटे पंकज का शव मिला। आत्महत्या से पहले सुसाइड नोट भी लिखा गया। बताया गया है कि मनीष की शादी आठ साल पहले मड़नई सादाबाद से हुई थी। मनीष के दो भाई और हैं, जो गांव में ही अलग-अलग घरों में रहते हैं। मनीष अपनी पत्नी और बच्चों के साथ इस मकान में रहता था। दीवार पर लिखे ये शब्द घर के अंदर परिवार के सभी लोगों की लाशें मिलीं हैं। पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया। पुलिस के अनुसार घर के अंदर दीवार पर लिखा है कि अपनी इच्छा से आत्महत्या कर रहा हूं।सबकुछ हो गया खत्म, रो पड़े सीमा के पिताबेटी सीमा और दामाद मनीष के साथ मासूम धेवता और धेवती की मौत की खबर मिलते ही विजेन्द्र भी गांव पहुंच गए। विजेन्द्र ने बताया कि बेटी और दामाद से एक दिन पहले ही मिलने आए थे। उन लोगों से बात भी हुई थी। ऐसा कुछ हो जाएगा, इसका अंदाजा भी नहीं था। उन्होंने बताया कि किसी तरह की कोई समस्या तो नहीं थी, लेकिन कुछ समय से मनीष का अपने भाई बिल्लू से विवाद चला आ रहा था।

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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मनोरंजन

शर्लिन चोपड़ा बर्थडे: : 15 साल की उम्र में जीता मिस आंध्र का खिताब, 'प्लेबॉय' में फोटोशूट से मिली शोहरत

15 साल की उम्र में जीता मिस आंध्र का खिताब, 'प्लेबॉय' में फोटोशूट से मिली शोहरत

मुंबई । हिंदी सिनेमा में जहां सशक्त मुख्य भूमिकाओं के लिए अभिनेत्रियों की अहमियत बनी रही है, वहीं कुछ बोल्ड अभिनेत्रियों और मॉडलों ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है। इन कलाकारों ने पारंपरिक अभिनय से इतर अपनी बेबाक छवि और बोल्ड प्रजेंटेशन के जरिए दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। इसी कड़ी में नाम आता है शर्लिन चोपड़ा का, जो 11 फरवरी को अपना 38वां जन्मदिन मना रही हैं। आज भी वह ओटीटी मंचों पर सक्रिय हैं और अपने बोल्ड दृश्यों के कारण चर्चा में रहती हैं। मीडिया में भी उनकी मौजूदगी लगातार बनी रहती है, जिससे वह सुर्खियों में रहती हैं।कम ही लोग जानते हैं कि शर्लिन चोपड़ा को असली पहचान फिल्मों के जरिए नहीं, बल्कि मैग्जीन जगत से मिली। एक प्रतिष्ठित मैग्जीन में उनकी बोल्ड फोटोज ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई, जिसके बाद वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चर्चा का विषय बनीं। यही पहचान आगे चलकर उनके करियर की दिशा तय करने में भी अहम साबित हुई।हैदराबाद में जन्मी शर्लिन को मॉडल बनने का शौक बचपन से था और यही वजह रही कि मात्र 15 साल की उम्र में अभिनेत्री ने मिस आंध्र का खिताब जीता था। मॉडलिंग के बाद अभिनेत्री फिल्मों में काम करने के लिए कई ऑडिशन दिए और साल 2002 में उन्हें तमिल फिल्म वेंडी मब्बू' में काम किया था, जो एरोटिक फिल्म थी। उसी साल, उन्होंने एक तमिल फिल्म 'यूनिवर्सिटी' और एक अंग्रेजी फिल्म 'बीपर' में भी अभिनय किया। तीनों फिल्में पर्दे पर रिलीज हुई लेकिन बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में अपना बजट भी नहीं निकाल पाई।बॉलीवुड में शर्लिन ने एंट्री 2005 में आई फिल्म 'टाइम पास' से की थी। जिसके बाद 'दोस्ती: फ्रेंड्स फॉरएवर', जवानी दीवानी: ए यूथफुल जॉयराइड', 'नॉटी बॉय','गेम','रकीब', 'रेड स्वस्तिक',और 'दिल बोले हड़िप्पा! जैसी फिल्मों में काम किया। शर्लिन की फिल्में कब आईं और कब चली गईं, किसी को पता नहीं चला, लेकिन साल 2012 में ग्लोबल लेवल पर शर्लिन के नाम की सुनामी आ गई।अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा उस समय सुर्खियों में आईं, जब वह प्लेबॉय मैग्जीन के लिए बिना कपड़ों के फोटो शूट कराने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। हालांकि, इस मामले में विवाद तब खड़ा हुआ, जब प्लेबॉय मैग्जीन ने यह कहकर इनकार किया कि उनकी शर्लिन के साथ किसी तरह की प्रत्यक्ष मुलाकात हुई थी। इसके बावजूद बाद में अभिनेत्री का डिजिटल फोटो शूट जारी किया गया। डिजिटल फोटो शूट के सामने आते ही व्यापक चर्चा शुरू हो गई और रातो-रात शर्लिन देशभर के अखबारों और टीवी चैनलों की सुर्खियां बन गईं। इस घटनाक्रम ने मनोरंजन जगत में खासा हलचल पैदा की।मैग्जीन के अलावा शर्लिन चोपड़ा ने रियलिटी शो बिग बॉस-3 में भी हिस्सा लिया था। शो के दौरान उनके पहनावे और बयानों को लेकर भी खूब चर्चा हुई। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि वह अभिनेता अमिताभ बच्चन की बड़ी प्रशंसक हैं और भविष्य में ऐसे ही लंबे कद और मजबूत कद-काठी वाले जीवनसाथी से विवाह करना चाहेंगी। शर्लिन चोपड़ा अपने बेबाक बयानों और बोल्ड अंदाज के कारण आज भी अक्सर खबरों में बनी रहती हैं और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय रहती हैं।

बिज़नेस

भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिकी दौरे को बताया प्रोडक्टिव-सकारात्मक : शेयर की ऐतिहासिक व्यापार समझौते की पूरी डिटेल

शेयर की ऐतिहासिक व्यापार समझौते की पूरी डिटेल

वॉशिंगटन। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका में थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो से भी मुलाकात की। जयशंकर ने अमेरिकी दौरे को प्रोडक्टिव और सकारात्मक बताया। उन्होंने ऐतिहासिक व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंध में मजबूत रफ्तार साफ दिख रही है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कर ईएएम एस. जयशंकर ने लिखा, अमेरिका का एक प्रोडक्टिव और सकारात्मक दौरा खत्म हुआ। सेक्रेटरी रुबियो को उनकी अच्छी मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद। ऐतिहासिक भारत-अमेरिका व्यापार समझौता डिटेलिंग के आखिरी स्टेज में है जो बहुत जल्द पूरी हो जाएगी। यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक नया दौर शुरू करता है, जिसमें संबंधों के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं।उन्होंने कहा कि हमारा जरूरी खनिज सहयोग भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में रणनीतिक मुद्दों, रक्षा और ऊर्जा पर बातचीत की उम्मीद है। कुल मिलाकर एक मजबूत मोमेंटम दिख रहा है। इस अहम दौरे में विदेश मंत्री ने अमेरिकी सरकार के सीनियर सदस्यों के साथ मीटिंग भी की। इसमें अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट के साथ अलग-अलग मीटिंग शामिल थीं। इस दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी पर बड़े पैमाने पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि रुबियो के साथ बातचीत में भारत-अमेरिका संबंध के कई अहम पहलुओं पर बात हुई। ईएएम जयशंकर ने कहा, भारत-यूएस रणनीतिक साझेदारी के जिन पहलुओं पर बात हुई, उनमें व्यापार, ऊर्जा, न्यूक्लियर, रक्षा, जरूरी खनिज और तकनीक शामिल थे। विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष फॉलो-अप कामों पर तेजी से आगे बढ़ने पर सहमत हुए। हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीकों की जल्द मीटिंग पर सहमति हुई।अमेरिकी विभाग की ओर से साझा जानकारी के अनुसार विदेश मंत्री जयशंकर और रुबियो ने जरूरी मिनरल्स की खोज, माइनिंग और प्रोसेसिंग पर द्विपक्षीय सहयोग को औपचारिक बनाने पर चर्चा की। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो भारत-अमेरिका आर्थिक और रणनीतिक संबंध का एक अहम हिस्सा बनकर उभरा है। बुधवार को हुई यह मीटिंग अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के व्यापार समझौते की घोषणा के एक दिन बाद हुई, जिसका मकसद दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच रुकावटों को कम करना और मार्केट एक्सेस को बढ़ाना है।

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भारत-US डील पर बोले चिराग पासवान #latestnews #hindinews #newstoday #breakingnews #shortfeed

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खेल

आईसीसी का चला हंटर तो पाक की अकड़ पड़ी ढीली : बातचीत की टेबल में इन तीन शर्तों के साथ भारत से मैच खेलने हुआ तैयार

बातचीत की टेबल में इन तीन शर्तों के साथ भारत से मैच खेलने हुआ तैयार

दुबई। भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर छाया सस्पेंस अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। आईसीसी की सख्ती के बाद अब पीसीबी बातचीत के टेबल पर आने को मजबूर हुआ। यही नहीं रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) भारत के खिलाफ खेलने को तैयार है। हालांकि पाकिस्तान ने मीटिंग में नाटक किया। आईसीसी की मीटिंग में उसने तीन हैरान करने वाली शर्तें रख दी हैं। जिसमें बढ़ी हुई फंडिंग, द्विपक्षीय क्रिकेट की बहाली और हैंडशेक प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने की मांग शामिल हैबता दें कि लाहौर में रविवार, 8 फरवरी को पीसीबी और आईसीसी के बीच हाई-लेवल बैठक हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब ग्रुप स्टेज में दोनों टीमों की भिड़ंत में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। आईसीसी चाहता है कि दुनिया के सबसे हाई-वोल्टेज और कमाई वाले मुकाबले पर किसी तरह का खतरा न रहे।क्या हैं पाकिस्तान की तीन मांगें?क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पाकिस्तान को अपना बहिष्कार वापस लेना है तो उसे कुछ गारंटी चाहिए। पीसीबी ने कथित तौर पर ये तीन शर्तें रखी हैंरूआईसीसी रेवेन्यू में बड़ा हिस्साभारत के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट की बहालीहैंडशेक प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करनाइन मांगों ने साफ कर दिया है कि मामला सिर्फ एक मैच का नहीं, बल्कि लंबे समय के रिश्तों और आर्थिक हिस्सेदारी का भी है। हालांकि, पाकिस्तान की इन मांगों का कोई मतलब नहीं बनता, क्योंकि भारत लंबे समय से पाकिस्तान से द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलता। जहां तक आईसीसी रेवेन्यू में बड़े हिस्से की बात है तो यह तभी संभव है जब आप आईसीसी को उतना रेवेन्यू जनरेट करके दें। भारत क्रिकेट का बड़ा मार्केट है। पाकिस्तान क्रिकेट के बिग थ्री में भी नहीं आता है।विवाद की शुरुआत कैसे हुई?पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान सरकार ने सार्वजनिक रूप से एलान किया कि टीम भारत के खिलाफ नहीं खेलेगी, भले ही मैच न्यूट्रल वेन्यू पर क्यों न हो। सरकार ने इसके पीछे स्पष्ट वजह नहीं बताई।क्रिकेट जगत में यह माना गया कि पाकिस्तान का रुख बांग्लादेश के समर्थन में है, जिसने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अपने मैच भारत से बाहर कराने की मांग की थी, जिसे आईसीसी ने खारिज कर दिया।बातचीत की कोशिशें तेजतनाव बढ़ने के बाद आईसीसी ने तुरंत पहल की। लाहौर में हुई बैठक में पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी, आईसीसी डिप्टी चेयरमैन इमरान ख्वाजा और बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल मौजूद रहे। आईसीसी के सीईओ संजोग गुप्ता वर्चुअली जुड़े। क्रिकबज के मुताबिक, बांग्लादेश भी आईसीसी से मुआवजे की मांग कर सकता है, और इस समझौते को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान की भूमिका अहम हो सकती है।फैसला किस दिशा में?अब सबकी नजर इस बात पर है कि आईसीसी इन शर्तों पर क्या रुख अपनाता है। अगर कोई रास्ता निकलता है तो क्रिकेट फैंस को राहत मिलेगी, क्योंकि भारत-पाकिस्तान मैच सिर्फ खेल नहीं, बल्कि वैश्विक इवेंट है।

लाइफस्टाइल

पाचन से लेकर थायरॉयड तक : सेहत को भला चंगा रखती है विपरीतकरणी मुद्रा

सेहत को भला चंगा रखती है विपरीतकरणी मुद्रा

नई दिल्ली । योगासन भारत की प्राचीन परंपरा है जो शारीरिक के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है। विपरीतकरणी मुद्रा एक ऐसी ही प्रैक्टिस है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करने से लेकर थायरॉयड तक को नियंत्रित रखती है। इसके अभ्यास से स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा इस मुद्रा के अभ्यास से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ को गिनाते हुए विस्तार से जानकारी देता है। विपरीतकरणी मुद्रा एक ऐसी योग मुद्रा है जिसमें पैर दीवार की तरफ ऊपर करके लेटा जाता है और शरीर को उल्टे स्थिति में रखा जाता है। यह मुद्रा प्राण ऊर्जा को ऊपर की ओर ले जाने में मदद करती है और गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से शरीर के विभिन्न अंगों को लाभ पहुंचाती है।एक्सपर्ट के अनुसार, इसके नियमित अभ्यास से शरीर को कई लाभ मिलते हैं। इस मुद्रा से सबसे पहले पाचन तंत्र में सुधार होता है। यह पेट के अंगों की मालिश करती है, जिससे भोजन अच्छी तरह पचता है और पाचन क्रिया मजबूत होती है। कब्ज की समस्या को दूर करने में भी यह बहुत प्रभावी है। लंबे समय तक बैठे रहने या अनियमित खान-पान से होने वाली कब्ज से राहत मिलती है, क्योंकि मुद्रा आंतों में रक्त संचार बढ़ाती है।मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी यह मुद्रा फायदेमंद है। अभ्यास से मानसिक सतर्कता बढ़ती है, दिमाग शांत रहता है और एकाग्रता में सुधार होता है। तनाव और चिंता कम होने से व्यक्ति ज्यादा चुस्त-दुरुस्त महसूस करता है। त्वचा और बालों के लिए भी यह खास है। विपरीतकरणी मुद्रा से त्वचा में निखार आता है, क्योंकि चेहरे और सिर में रक्त प्रवाह बढ़ने से पोषण बेहतर मिलता है। साथ ही बालों से संबंधित समस्याएं भी दूर होती हैं, बाल मजबूत और चमकदार बनते हैं।विपरीतकरणी मुद्रा का एक और बड़ा लाभ थायरॉयड नियंत्रण है। इससे गर्दन के क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ता है, जिससे थायरॉयड ग्रंथि बेहतर काम करती है। हाइपोथायरॉयडिज्म जैसी समस्याओं में यह कारगर साबित हो सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार, इसके रोजाना अभ्यास से शरीर और मन दोनों में संतुलन बना रहता है। हालांकि, शुरुआत में 5-10 मिनट से अभ्यास करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। गर्भवती महिलाओं, हाई ब्लड प्रेशर या गंभीर समस्या वाले मरीजों को डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही अभ्यास करना चाहिए।

राजनीती

मप्र में 70 साल पुराना समाज कल्याण बोर्ड भंग : कांग्रेस का आरोप लाखों वंचितों की मदद पर संकट

कांग्रेस का आरोप लाखों वंचितों की मदद पर संकट

भोपाल। मप्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 70 साल पुराना समाज कल्याण बोर्ड को भंग करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड 1956 से महिलाओं, बच्चों और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए काम कर रहा था। हाल ही में कैबिनेट ने मप्र राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग करने का फैसला लिया है। इस बोर्ड से जुड़े 30-40 से अधिक एनजीओ, सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता और प्रदेश भर में 28 पारिवारिक परामर्श केंद्र सक्रिय थे। सिंघार ने एक्स पर लिखा कि बोर्ड का मुख्य उद्देश्य नागरिक समाज, स्वैच्छिक संगठनों और जमीनी स्तर के समूहों के माध्यम से महिलाओं-बच्चों से संबंधित कल्याणकारी गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा सरकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना था। विभागीय रिपोर्टों के अनुसार, बोर्ड के जरिए हर वर्ष 30,000 से 35,000 प्रत्यक्ष लाभार्थियों तक सहायता पहुँचती थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बोर्ड के अचानक भंग होने से बड़ी संख्या में लोग, संगठन और कार्यकर्ता प्रभावित होंगे। सिंघार ने सरकार से मांग की है कि अपने फैसले पर फिर से विचार करे। केंद्र से आर्थिक मदद मिलना बंदयह बोर्ड 50:50 केंद्र-राज्य फंडिंग मॉडल पर चलता था। केंद्र सरकार ने पिछले साल से अपनी फंडिंग रोक दी और राज्यों से इसे स्वयं संचालित करने को कहा। मप्र की भाजपा सरकार ने इसे बंद करने का निर्णय लिया। हालांकि, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा सहित कई अन्य भाजपा शासित राज्यों (लगभग एक दर्जन) में यह बोर्ड अभी भी सक्रिय है और वंचित वर्गों की मदद कर रहा है।

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