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भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिकी दौरे को बताया प्रोडक्टिव-सकारात्मक : शेयर की ऐतिहासिक व्यापार समझौते की पूरी डिटेल

शेयर की ऐतिहासिक व्यापार समझौते की पूरी डिटेल

वॉशिंगटन। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका में थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो से भी मुलाकात की। जयशंकर ने अमेरिकी दौरे को प्रोडक्टिव और सकारात्मक बताया। उन्होंने ऐतिहासिक व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंध में मजबूत रफ्तार साफ दिख रही है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कर ईएएम एस. जयशंकर ने लिखा, अमेरिका का एक प्रोडक्टिव और सकारात्मक दौरा खत्म हुआ। सेक्रेटरी रुबियो को उनकी अच्छी मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद। ऐतिहासिक भारत-अमेरिका व्यापार समझौता डिटेलिंग के आखिरी स्टेज में है जो बहुत जल्द पूरी हो जाएगी। यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक नया दौर शुरू करता है, जिसमें संबंधों के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं।उन्होंने कहा कि हमारा जरूरी खनिज सहयोग भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में रणनीतिक मुद्दों, रक्षा और ऊर्जा पर बातचीत की उम्मीद है। कुल मिलाकर एक मजबूत मोमेंटम दिख रहा है। इस अहम दौरे में विदेश मंत्री ने अमेरिकी सरकार के सीनियर सदस्यों के साथ मीटिंग भी की। इसमें अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट के साथ अलग-अलग मीटिंग शामिल थीं। इस दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी पर बड़े पैमाने पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि रुबियो के साथ बातचीत में भारत-अमेरिका संबंध के कई अहम पहलुओं पर बात हुई। ईएएम जयशंकर ने कहा, भारत-यूएस रणनीतिक साझेदारी के जिन पहलुओं पर बात हुई, उनमें व्यापार, ऊर्जा, न्यूक्लियर, रक्षा, जरूरी खनिज और तकनीक शामिल थे। विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष फॉलो-अप कामों पर तेजी से आगे बढ़ने पर सहमत हुए। हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीकों की जल्द मीटिंग पर सहमति हुई।अमेरिकी विभाग की ओर से साझा जानकारी के अनुसार विदेश मंत्री जयशंकर और रुबियो ने जरूरी मिनरल्स की खोज, माइनिंग और प्रोसेसिंग पर द्विपक्षीय सहयोग को औपचारिक बनाने पर चर्चा की। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो भारत-अमेरिका आर्थिक और रणनीतिक संबंध का एक अहम हिस्सा बनकर उभरा है। बुधवार को हुई यह मीटिंग अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के व्यापार समझौते की घोषणा के एक दिन बाद हुई, जिसका मकसद दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच रुकावटों को कम करना और मार्केट एक्सेस को बढ़ाना है।

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'दो भाषाओं में एक साथ शूट करना आसान नहीं' : सई मांजरेकर ने साझा किया 'द इंडिया हाउस' का अनुभव

सई मांजरेकर ने साझा किया 'द इंडिया हाउस' का अनुभव

मुंबई। भारतीय सिनेमा की पैन-इंडिया फिल्मों में काम करना जितना रोमांचक होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। इस कड़ी में अभिनेत्री सई मांजरेकर इन दिनों अपनी आने वाली पैन-इंडिया पीरियड ड्रामा फिल्म 'द इंडिया हाउस' को लेकर काफी बिजी हैं। यह फिल्म हिंदी और तेलुगु भाषा में एक साथ शूट की जा रही है। सई का कहना है कि इस तरह की फिल्म में काम करने के लिए कलाकार को हर समय भावनात्मक और मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार रहना पड़ता है। सई मांजरेकर ने कहा, "'द इंडिया हाउस' मेरे लिए अब तक का अलग अनुभव रहा है। जब एक ही सीन को दो भाषाओं में शूट किया जाता है, तो कलाकार को भाषा की लय, भाव और भावनात्मक गहराई को बारीकी के साथ समझना पड़ता है। कई बार ऐसा होता है कि एक ही सीन पहले एक भाषा में और तुरंत बाद दूसरी भाषा में करना होता है, जिससे कलाकार को हर पल सतर्क रहना पड़ता है।"उन्होंने कहा, ''इस तरह की फिल्मों में अभिनय का तरीका भी थोड़ा बदल जाता है। यहां सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि भावनाओं से कहानी को आगे बढ़ाना होता है। हर भाषा की अपनी एक संवेदना होती है और उसी के अनुसार किरदार की भावनाएं भी बदलती हैं। ऐसे में कलाकार को अपने अभिनय को बार-बार ढालना पड़ता है, ताकि किरदार हर भाषा में उतना ही सच्चा लगे।''सई ने कहा, ''मेरी पिछली फिल्म 'मेजर' की शूटिंग का अनुभव इस फिल्म में काफी काम आया। उस फिल्म से मुझे यह समझने में मदद मिली कि द्विभाषी फिल्मों की शूटिंग कैसे होती है और कलाकार को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। हालांकि हर प्रोजेक्ट की अपनी अलग पहचान और चुनौतियां होती हैं। 'द इंडिया हाउस' की कहानी और उसका ऐतिहासिक संदर्भ इसे बाकी फिल्मों से अलग बनाता है।'''द इंडिया हाउस' फिल्म में सई मांजरेकर 'सती' नाम की महिला का किरदार निभा रही है। इस पर सई ने कहा, ''सती का किरदार निभाने के लिए मुझे उस समय के माहौल, सोच और भावनाओं को गहराई से समझना पड़ा। सती बाहर से शांत दिखाई देती है, लेकिन उसके भीतर साहस, दर्द और संघर्ष छिपा है। इन भावनाओं को बिना ज्यादा शब्दों के दर्शकों तक पहुंचाना मेरे लिए एक बड़ी जिम्मेदारी हैं।''पैन-इंडिया फिल्मों की खास बात बताते हुए सई ने कहा, ''ऐसे प्रोजेक्ट्स में काम करने का सबसे अच्छा पहलू टीमवर्क होता है। सेट पर अलग-अलग राज्यों और भाषाओं से आए कलाकार और तकनीशियन एक साथ काम करते हैं। सबका लक्ष्य कहानी को ईमानदारी से पर्दे पर उतारना होता है। यह सामूहिक भावना कलाकार को और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है।''सई ने अपने सह-कलाकार निखिल सिद्धार्थ, निर्देशक वामसी और पूरी टीम की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, ''सेट पर काम करने का माहौल बेहद सकारात्मक और कहानी पर केंद्रित रहता है। जब निर्देशक और पूरी टीम कहानी को लेकर गंभीर होती है, तो कलाकार भी अपने किरदार में और गहराई से उतर पाता है।''

बिज़नेस

भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिकी दौरे को बताया प्रोडक्टिव-सकारात्मक : शेयर की ऐतिहासिक व्यापार समझौते की पूरी डिटेल

शेयर की ऐतिहासिक व्यापार समझौते की पूरी डिटेल

वॉशिंगटन। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका में थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो से भी मुलाकात की। जयशंकर ने अमेरिकी दौरे को प्रोडक्टिव और सकारात्मक बताया। उन्होंने ऐतिहासिक व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंध में मजबूत रफ्तार साफ दिख रही है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कर ईएएम एस. जयशंकर ने लिखा, अमेरिका का एक प्रोडक्टिव और सकारात्मक दौरा खत्म हुआ। सेक्रेटरी रुबियो को उनकी अच्छी मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद। ऐतिहासिक भारत-अमेरिका व्यापार समझौता डिटेलिंग के आखिरी स्टेज में है जो बहुत जल्द पूरी हो जाएगी। यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक नया दौर शुरू करता है, जिसमें संबंधों के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं।उन्होंने कहा कि हमारा जरूरी खनिज सहयोग भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में रणनीतिक मुद्दों, रक्षा और ऊर्जा पर बातचीत की उम्मीद है। कुल मिलाकर एक मजबूत मोमेंटम दिख रहा है। इस अहम दौरे में विदेश मंत्री ने अमेरिकी सरकार के सीनियर सदस्यों के साथ मीटिंग भी की। इसमें अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट के साथ अलग-अलग मीटिंग शामिल थीं। इस दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी पर बड़े पैमाने पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि रुबियो के साथ बातचीत में भारत-अमेरिका संबंध के कई अहम पहलुओं पर बात हुई। ईएएम जयशंकर ने कहा, भारत-यूएस रणनीतिक साझेदारी के जिन पहलुओं पर बात हुई, उनमें व्यापार, ऊर्जा, न्यूक्लियर, रक्षा, जरूरी खनिज और तकनीक शामिल थे। विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष फॉलो-अप कामों पर तेजी से आगे बढ़ने पर सहमत हुए। हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीकों की जल्द मीटिंग पर सहमति हुई।अमेरिकी विभाग की ओर से साझा जानकारी के अनुसार विदेश मंत्री जयशंकर और रुबियो ने जरूरी मिनरल्स की खोज, माइनिंग और प्रोसेसिंग पर द्विपक्षीय सहयोग को औपचारिक बनाने पर चर्चा की। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो भारत-अमेरिका आर्थिक और रणनीतिक संबंध का एक अहम हिस्सा बनकर उभरा है। बुधवार को हुई यह मीटिंग अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के व्यापार समझौते की घोषणा के एक दिन बाद हुई, जिसका मकसद दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच रुकावटों को कम करना और मार्केट एक्सेस को बढ़ाना है।

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#shorts भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगा पाकिस्तान #breakingnews #news #newstoday #viralfeed

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खेल

सिद्धिविनायक मंदिर : टी20 वर्ल्ड कप से पहले बप्पा की शरण में पहुंचे टीम इंडिया के हेड कोच, भारत के सफल होने की कामना

टी20 वर्ल्ड कप से पहले बप्पा की शरण में पहुंचे टीम इंडिया के हेड कोच, भारत के सफल होने की कामना

मुंबई । टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी से होने जा रही है, जिससे पहले गुरुवार को टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे। कोच ने बप्पा के दर्शन के साथ भारत के सफल होने की प्रार्थना की। गौतम गंभीर इस साल जनवरी में न्यूजीलैंड के विरुद्ध वनडे सीरीज से पहले मध्य प्रदेश के मां बगलामुखी मंदिर पहुंचे थे। वह इसी सीरीज के बीच में उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर पर दर्शन के लिए गए। इसके बाद टी20 सीरीज के दौरान उन्होंने कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना की थी।टीम इंडिया इस समय शानदार फॉर्म में है। हाल ही में भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड के विरुद्ध टी20 सीरीज 4-1 से अपने नाम की है। बुधवार को खेले गए वार्म-अप मैच में भी टीम इंडिया ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया है। गौतम गंभीर को साल 2024 में भारतीय क्रिकेट टीम का हेड कोच नियुक्त किया गया था। उनके मार्गदर्शन में टीम इंडिया पिछले साल एशिया कप की विजेता बनी। इसके साथ ही भारत ने टी20 फॉर्मेट में अपने प्रदर्शन को भी निखारा है।भारत और श्रीलंका की सह-मेजबानी में खेला जाना है टी20 वर्ल्ड कप टी20 वर्ल्ड कप 2026 भारत और श्रीलंका की सह-मेजबानी में खेला जाना है। टीम इंडिया 7 फरवरी को अपने अभियान की शुरुआत करेगी। उसका पहला मैच यूएसए से होगा, जिसके बाद टीम इंडिया 12 फरवरी को नामीबिया से भिड़ेगी। तय कार्यक्रम के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को हाई-वोल्टेज मैच खेला जाना है, लेकिन इस मैच को लेकर फिलहाल सस्पेंस है। पाकिस्तानी सरकार ने अपनी टीम को भारत के खिलाफ यह मुकाबला खेलने की इजाजत नहीं दी है। टीम इंडिया 18 फरवरी को नीदरलैंड के विरुद्ध अपना अंतिम लीग मैच खेलेगी।टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीमः सूर्यकुमार यादव (कप्तान), तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, अभिषेक शर्मा, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, संजू सैमसन, ईशान किशन, हर्षित राणा, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह।

लाइफस्टाइल

मोरिंगा ऑयल : प्रदूषण और धूप से खराब स्किन पर असरदार, दाग-धब्बों को भी करे दूर

प्रदूषण और धूप से खराब स्किन पर असरदार, दाग-धब्बों को भी करे दूर

मुंबई । बदलती लाइफस्टाइल, प्रदूषण, धूप, तनाव और गलत खानपान का असर सबसे पहले चेहरे पर दिखाई देता है। झुर्रियां, एज स्पॉट्स, दाग-धब्बे और रूखी त्वचा जैसी परेशानियां अब कम उम्र की भी समस्या बनने लगी हैं। ऐसे में प्राकृतिक उपाय बेहद कारगर हैं, जिनमें मोरिंगा तेल बेहतर विकल्प है। मोरिंगा को आयुर्वेद में शोभांजन कहा जाता है। इसके पत्ते, फल, छाल और खासतौर पर इसके बीज औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। मोरिंगा के सूखे बीजों से निकाला गया तेल बेहद पोषक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह तेल त्वचा के दोषों को संतुलित करता है और शरीर के अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर काम करता है।इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च एंड एप्लीकेशंस में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, मोरिंगा तेल में ओलिक एसिड, विटामिन ए, सी और ई, फ्लेवोनॉयड्स और पॉलीफेनॉल जैसे तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये सभी तत्व मिलकर त्वचा को पोषण देते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-एजिंग, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा को भीतर से स्वस्थ बनाते हैं।एज स्पॉट्स, चेहरे पर पड़ने वाले काले धब्बे, अक्सर फ्री रेडिकल्स, धूप और कोलेजन की कमी के कारण होते हैं। मोरिंगा तेल इस समस्या पर सीधे काम करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं। वहीं, विटामिन सी त्वचा में कोलेजन के निर्माण को बढ़ावा देता है, जिससे त्वचा की इलास्टिसिटी बनी रहती है और धब्बे कम होते हैं। तेल से हल्के हाथों से मसाज करने से त्वचा की गहराई तक पहुंचकर डार्क स्पॉट्स को हल्का करने में मदद मिलती है।आयुर्वेद में एज स्पॉट्स को पित्त दोष के असंतुलन से भी जोड़ा जाता है। मोरिंगा तेल में ठंडक देने वाले गुण होते हैं, जो त्वचा की गर्मी को शांत करते हैं और पित्त को संतुलन में लाने में सहायक होते हैं। इससे पिगमेंटेशन से बचाव होता है। नहाने के बाद या रात को सोने से पहले चेहरे पर इसकी कुछ बूंदों से मसाज करने पर त्वचा लंबे समय तक नरम और मुलायम बनी रहती है।एज स्पॉट्स के अलावा, मोरिंगा तेल त्वचा की कई दूसरी समस्याओं में भी राहत देता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण मुंहासों, जलन और एलर्जी में मददगार माने जाते हैं। यह त्वचा की प्राकृतिक नमी को बनाए रखता है, जिससे रूखापन और खिंचाव कम होता है। फटे होंठों, बेजान त्वचा और सन डैमेज में भी इसका इस्तेमाल लाभकारी माना जाता है।

राजनीती

ज्ञान की कोई सीमा नहीं, अज्ञान की कोई उम्र नहीं : नड्डा के अबोध बालक बयान पर सुधांशु ने राहुल पर ऐसे कसा तंज

नड्डा के अबोध बालक बयान पर सुधांशु ने राहुल पर ऐसे कसा तंज

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने नेता सदन जेपी नड्डा के उस बयान पर अपनी बात रखी, जिसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बिना नाम लिए सदन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को कहा कि अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए।अब सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने यदि अबोध शब्द का प्रयोग किया है तो यह बोध शब्द में अ प्रत्यय लगाकर बना है। अर्थात जिसे ज्ञान ही न हो। वैसे ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती है और अज्ञान की कोई उम्र नहीं होती है। यह बात नेता प्रतिपक्ष के आचरण से प्रमाणित होती है।सदन के पटल पर मीडिया रिपोर्ट प्रामाणिक तथ्य नहींभाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आगे कहा कि अबोध होने का प्रमाण ये है कि जिसे ये न पता हो कि फ्लोर ऑफ द हाउस में सब्सटेंशियल एविडेंस मीडिया रिपोर्ट्स नहीं होती, सदन के पटल पर मीडिया रिपोर्ट प्रामाणिक तथ्य नहीं हैं। जिसे ये न पता हो कि सेना अध्यक्ष-प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के बीच का कम्युनिकेशन राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और गोपनीय होता है, अतः यह ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 में आता है, वो पब्लिक डोमेन में नहीं हो सकता, उस पर सार्वजनिक चर्चा नहीं हो सकती। जो यह न जानता हो, वो अबोध है।सुधांशु ने नेहरू को भी घेरोसुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अगर किताब की बात है तो मैं कोट करता हूं और इसे सिद्ध कर सकता हूं। 19 नवंबर 1962 में जवाहरलाल नेहरू ने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी को लिखा डिक्लासिफाइड बाय जेके लाइब्रेरी इन 2010 कि हमें बी2 बॉम्बर चाहिए, स्क्वाड्रन चाहिए उसके लिए पायलट, जमीन पर तकनीक स्टाफ और रडार पर लोग भी आपके (यानी अमेरिकी) रहेंगे, यानी एक प्रकार से भारत की वायुसेना की कमान अमेरिकी ले लें। उस समय अमेरिका में भारत के राजदूत बीके नेहरू, जो जवाहरलाल नेहरू जी के भतीजे भी थे। उन्होंने अपनी किताब नाइस गाइज फिनिश सेकंड में लिखा कि मैं जब वो पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार को देने जा रहा था तो उन्हें इतनी शर्म महसूस हो रही थी कि वो अपने को रोने से नहीं रोक पाए।शर्मनाक सरेंडर, भतीजे की जुबानीउन्होंने लिखा कि चाचाजी के शर्मनाक सरेंडर की कहानी खुद उनके सगे भतीजे की जुबानी। राज्यसभा में गुरुवार को जेपी नड्डा ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को संबोधित करते हुए सदन में कहा कि अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए। इससे मल्लिकार्जुन खड़गे भड़क गए और उन्होंने सदन में जेपी नड्डा की बात का खंडन किया।

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