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मप्र में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू : जयभान सिंह पवैया को मिली वित्त आयोग की बड़ी जिम्मेदारी, अन्य सदस्यों को जल्द मिलेगी शुखशबरी

जयभान सिंह पवैया को मिली वित्त आयोग की बड़ी जिम्मेदारी, अन्य सदस्यों को जल्द मिलेगी शुखशबरी

भोपाल। मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने राज्य वित्त आयोग के गठन को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे प्रदेश की वित्तीय संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। राजधानी भोपाल से जारी आदेश के अनुसार वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके साथ के.के. सिंह को सदस्य और वीरेंद्र कुमार को सदस्य सचिव बनाया गया है, जबकि अन्य सदस्यों की नियुक्ति जल्द की जाएगी।यह आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 और मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग अधिनियम, 1994 के तहत गठित किया गया है। आयोग का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित किया गया है। आयोग का मुख्य उद्देश्य पंचायतों और नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति का गहन पुनर्विलोकन करना और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए ठोस सिफारिशें देना होगा।राज्य वित्त आयोग के पास रहेगी यह बड़ी जिम्मेदारीराज्य वित्त आयोग कर, शुल्क, पथकर और फीस से प्राप्त आय को राज्य और स्थानीय निकायों के बीच किस प्रकार बांटा जाए, इसके सिद्धांत तय करेगा। साथ ही यह पंचायतों और नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले अनुदानों, वित्तीय सुधारों और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी सुझाव देगा।आयोग इन पर देगा अपनी अनुशंसाएंइसके अलावा आयोग भूमि कर के बंटवारे, पेट्रोलियम उत्पादों से मिलने वाले राजस्व में हिस्सेदारी, स्थानीय निकायों की ऋण सीमा और पुनर्भुगतान व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी अपनी अनुशंसाएं देगा। जन सुविधाओं के विस्तार, सेवाओं की गुणवत्ता सुधार और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे भी इसकी प्राथमिकता में शामिल रहेंगे। आयोग 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच वर्षीय अवधि के लिए अपनी सिफारिशें राज्यपाल को सौंपेगा, जो प्रदेश के विकास और स्थानीय शासन को नई दिशा दे सकती हैं।

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'धुरंधर' हिंदी सिनेमा के लिए एक बड़ा बदलाव : राम गोपाल ने थपथपाई आदित्य की पीठ

राम गोपाल ने थपथपाई आदित्य की पीठ

मुंबई । आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर' और इसका अगला भाग रिलीज के बाद से ही चर्चाओं में छाए हुए हैं और हर तरफ निर्देशक की तारीफ हो रही है। अब इस लिस्ट में मशहूर निर्देशक रामगोपाल वर्मा का नाम शामिल हो गया है। दरअसल, वर्मा ने निर्देशक आदित्य धर के शानदार काम को लेकर उनकी पीठ थपथपाई है। राम गोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा नोट शेयर किया। इस पोस्ट में निर्देशक ने 'धुरंधर' को हिंदी सिनेमा के लिए एक बड़ा बदलाव बताया।उन्होंने लिखा कि यह फिल्म एक तरह का 'हॉरर' है, लेकिन डराने के लिए नहीं, बल्कि उन फिल्ममेकर्स के लिए जो सस्ता, दिखावटी और मसाला सिनेमा बनाकर नाम और पैसा कमाते हैं। रामगोपाल ने लिखा, "पहले का सिनेमा सिर्फ जोर-शोर वाली आवाजें और एक्शन दिखाता था, लेकिन अब ऐसा सिनेमा खत्म होने की कगार पर है। 'धुरंधर' उन फिल्ममेकर्स को डराएगी जो अभी भी 'सुपरहीरो' स्टाइल की पूजा करते हैं।"निर्देशक ने रणवीर सिंह के काम की तारीफ की। उन्होंने लिखा, "रणवीर सिंह के किरदार ने असली, जटिल और कमजोरियों वाले हीरो को जन्म दिया है, जो दर्द महसूस करता है और जिसके कामों से हीरोइज्म आता है न कि बैकग्राउंड म्यूजिक या दिखावे से। इस नए तरह के हीरो के सामने, पुराने 'देवता जैसे हीरो' अचानक हास्यास्पद लगेंगे, जैसे सर्कस में जोकर। उनके फैंस भी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन सुनकर बेबस महसूस करेंगे।"रामगोपाल ने लिखा कि यह फिल्म उन एक्शन सीन बनाने वालों के लिए भी डरावनी है, जहां फिजिक्स का मजाक उड़ाया जाता है और लोग 50 फुट ऊपर फेंके जाते हैं, उछलते हैं, विस्फोटों से बच जाते हैं और फिर भी डायलॉगबाजी करते हैं। अब दर्शक असली दर्द, खून और सच्चा एक्शन देखना चाहते हैं, पुराने 'उड़ते गुंडे' सीन नकली लगेंगे।रामगोपाल ने निर्देशक को चेतावनी देते हुए लिखा, "यह पैन इंडिया के निर्देशकों के लिए चेतावनी है, जो अब भी सोचते हैं कि किरदार सिर्फ हेयरस्टाइल, कपड़े, फोटोशॉप किए हुए सिक्स पैक और डिजाइनर कपड़ों से बनते हैं, ना कि उनकी मनोवैज्ञानिक गहराई से। धुरंधर में हीरो की ताकत दिमाग से आती है, न कि बाइसेप्स से। पुराने 'हेयर और कॉस्ट्यूम' वाले हीरो अब बच्चों जैसे लगेंगे।"रामगोपाल ने लिखा, "धुरंधर सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि एक फैसला है। आदित्य धर ने उस सिनेमा की कटाई कर दी जो दर्शकों की समझदारी का अपमान करता था, जिसमें कहानी की जगह चमक-दमक, हीरो को भगवान, और दर्शकों को भेड़ बनाया जाता था। बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पुरानी सोच को दफन कर रहे हैं। आरजीवी ने चेताया कि अगर फिल्ममेकर्स अपनी फिल्मों के तरीके नहीं बदलते और धुरंधर को कई बार नहीं देखते, तो उनकी फिल्में और सोच बचना मुश्किल होगा। समस्या यह है कि उनके पास आदित्य धर जैसी समझ और दिमाग नहीं है।"

बिज़नेस

सर्राफा बाजार में सुनामी : चांदी 12,000 टूटी, सोना भी फिसला जोर से, क्या रहे गिरावट के कारण जानें

चांदी 12,000 टूटी, सोना भी फिसला जोर से, क्या रहे गिरावट के कारण जानें

नई दिल्ली। गुरुवार को वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के बीच सोने और चांदी की कीमतों में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी के दाम में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी करीब 2.5 प्रतिशत तक फिसल गया। दोपहर करीब 12ः30 बजे चांदी की कीमतों में तेज टूट शुरू हुई और कुछ ही समय में यह लगभग 12,000 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई। वहीं सोने की कीमतों में करीब 4,500 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई। फिलहाल चांदी करीब 2.35 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे कारोबार कर रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया है। हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ने के बाद तेल से जुड़े ठिकानों पर हमले हुए हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। आमतौर पर ऐसे हालात में सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार निवेशकों का रुख अलग नजर आ रहा है।अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से बाजार में बढ़ा दबावइसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया फैसले ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है और संकेत दिए हैं कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना कम है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का जिक्र किया, जिसके बाद निवेशकों ने कीमती धातुओं में मुनाफावसूली शुरू कर दी।4.20 लाख के रिकार्ड स्तर को छुआ था चांदी नेगौरतलब है कि पिछले दो वर्षों में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी देखी गई थी। जनवरी 2026 में चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, लेकिन इसके बाद से कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। जानकारों का कहना है कि मौजूदा गिरावट निवेशकों की मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक संकेतों का मिश्रित असर है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर निर्भर करेगी।

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खेल

16 मार्च 2012 : क्रिकेट का स्वर्णिम दिन, जब सचिन तेंदुलकर ने छुआ 100वें शतक का आसमान

क्रिकेट का स्वर्णिम दिन, जब सचिन तेंदुलकर ने छुआ 100वें शतक का आसमान

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट इतिहास का महानतम बल्लेबाज माना जाता है। तेंदुलकर ने अपनी बल्लेबाजी से क्रिकेट को पहले से और रोमांचक बनाया और नया आयाम दिया, साथ ही कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किए। 16 मार्च का दिन सचिन और क्रिकेट की दुनिया के लिए बेहद खास है। 16 मार्च 2012 को सचिन ने कुछ ऐसा किया था जो क्रिकेट में पहले कभी नहीं हुआ था, और भविष्य में भी उस रिकॉर्ड के टूटने की संभावना बेहद कम है। 16 मार्च 2012 को भारत और बांग्लादेश के बीच वनडे मुकाबला शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम, मीरपुर में खेला गया था। भारत ने टॉस गंवाने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट पर 289 रन बनाए थे। पारी की शुरुआत करने आए सचिन तेंदुलकर ने 147 गेंदों पर 114 रन की पारी खेली थी। सचिन के अंतरराष्ट्रीय करियर का यह 100वां शतक था। वह इस उपलब्धि को हासिल करने वाले क्रिकेट इतिहास के एकमात्र बल्लेबाज हैं। सचिन से पहले शायद ही कोई सोच सकता था कि कोई बल्लेबाज 100 शतक लगा सकता है, लेकिन मास्टर ब्लास्टर सचिन ने इस असंभव को संभव किया था। यह उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय शतक भी था।भारतीय टीम के प्रमुख स्तंभ रहे तेंदुलकर1989 से 2013 के बीच सचिन तेंदुलकर भारतीय बल्लेबाजी के प्रमुख स्तंभ रहे। उनके नाम सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच, सर्वाधिक शतक, सर्वाधिक वनडे मैच और रन, सर्वाधिक टेस्ट मैच और रन का रिकॉर्ड है। वनडे में सबसे पहला दोहरा शतक भी सचिन ने ही लगाया था।सचिन ने वनडे में लगाए हैं 51 शतकसचिन ने 200 वनडे की 329 पारियों में 51 शतक लगाते हुए 15,921 रन बनाए थे। 463 वनडे में सचिन ने 49 शतक और 96 अर्धशतक लगाते हुए 18,426 रन बनाए हैं। नाबाद 200 उनका सर्वाधिक स्कोर है। वनडे में सर्वाधिक रनों के रिकॉर्ड का टूटना काफी मुश्किल है। सचिन ने 1 टी20 भी खेला था जिसमें उन्होंने 10 रन बनाए थे। 2011 वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे सचिन ने 16 नवंबर 2013 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। सचिन बेशक संन्यास ले चुके हैं, लेकिन उनके रिकॉर्ड क्रिकेट की दुनिया में हमेशा उन्हें प्रासंगिक बनाए रखेंगे।

लाइफस्टाइल

मोटापा सिर्फ बढ़ता वजन नहीं : कई बीमारियों की बड़ी वजह, आसान उपाय संग ऐसे करें कंट्रोल

 कई बीमारियों की बड़ी वजह, आसान उपाय संग ऐसे करें कंट्रोल

नई दिल्ली। मोटापा अब सिर्फ दिखावे की समस्या नहीं रहा, बल्कि यह हृदय रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर समेत कई गंभीर बीमारियों का बड़ा कारण बन चुका है। ऐसे में बढ़ती वजन की समस्या से परेशान लोगों को हेल्थ एक्सपर्ट कुछ आसान उपाय की सलाह देते हैं, जो मोटापे की समस्या को खत्म करने में कारगर हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, यह समस्या अब बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों में तेजी से फैल रही है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जंक फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना और अनियमित जीवनशैली मोटापे की मुख्य वजह बन गई है। बच्चे मोबाइल-टीवी पर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे उनकी शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है। वहीं, बड़ों में ऑफिस की नौकरी, तनाव और फास्ट फूड की आदत ने मोटापे को और बढ़ावा दिया है।ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा सिर्फ वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर में सूजन पैदा करता है, इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाता है और धमनियों में फैट जमा होने से हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एनएचएम ने लोगों को मोटापे से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपाय बताए हैं।वास्तव में मोटापा एक ऐसी समस्या है, जिसे दवाइयों से ज्यादा जीवनशैली में बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों के दर्द और यहां तक कि अन्य गंभीर रोगों का कारण भी बन सकता है।इसके लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करें। तेज चलना, साइकिल चलाना, योग या खेलकूद इसमें शामिल हो सकता है। संतुलित और पौष्टिक आहार लें। घर का बना खाना, ताजी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम तेल-चीनी का इस्तेमाल करें। जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं। स्क्रीन टाइम को सीमित करें। खासकर बच्चों को टीवी, मोबाइल या कंप्यूटर पर दो घंटे से ज्यादा समय न बिताने दें। पर्याप्त नींद लें। रात को 7-8 घंटे की अच्छी नींद मोटापे को नियंत्रित रखने में बहुत मदद करती है। एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं। लिफ्ट की बजाय सीढ़ियां चढ़ें, छोटे-छोटे काम खुद करें और बैठे रहने की आदत छोड़ें।

राजनीती

मप्र में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू : जयभान सिंह पवैया को मिली वित्त आयोग की बड़ी जिम्मेदारी, अन्य सदस्यों को जल्द मिलेगी शुखशबरी

जयभान सिंह पवैया को मिली वित्त आयोग की बड़ी जिम्मेदारी, अन्य सदस्यों को जल्द मिलेगी शुखशबरी

भोपाल। मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने राज्य वित्त आयोग के गठन को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे प्रदेश की वित्तीय संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। राजधानी भोपाल से जारी आदेश के अनुसार वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके साथ के.के. सिंह को सदस्य और वीरेंद्र कुमार को सदस्य सचिव बनाया गया है, जबकि अन्य सदस्यों की नियुक्ति जल्द की जाएगी।यह आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 और मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग अधिनियम, 1994 के तहत गठित किया गया है। आयोग का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित किया गया है। आयोग का मुख्य उद्देश्य पंचायतों और नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति का गहन पुनर्विलोकन करना और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए ठोस सिफारिशें देना होगा।राज्य वित्त आयोग के पास रहेगी यह बड़ी जिम्मेदारीराज्य वित्त आयोग कर, शुल्क, पथकर और फीस से प्राप्त आय को राज्य और स्थानीय निकायों के बीच किस प्रकार बांटा जाए, इसके सिद्धांत तय करेगा। साथ ही यह पंचायतों और नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले अनुदानों, वित्तीय सुधारों और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी सुझाव देगा।आयोग इन पर देगा अपनी अनुशंसाएंइसके अलावा आयोग भूमि कर के बंटवारे, पेट्रोलियम उत्पादों से मिलने वाले राजस्व में हिस्सेदारी, स्थानीय निकायों की ऋण सीमा और पुनर्भुगतान व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी अपनी अनुशंसाएं देगा। जन सुविधाओं के विस्तार, सेवाओं की गुणवत्ता सुधार और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे भी इसकी प्राथमिकता में शामिल रहेंगे। आयोग 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच वर्षीय अवधि के लिए अपनी सिफारिशें राज्यपाल को सौंपेगा, जो प्रदेश के विकास और स्थानीय शासन को नई दिशा दे सकती हैं।

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