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तेहरान को जल्द हो जाना चाहिए गंभीर, : धमकी भरे अंदाज में बोले ट्रंप, दावा- डील की भीख मांग रहा है ईरान

 धमकी भरे अंदाज में बोले ट्रंप, दावा- डील की भीख मांग रहा है ईरान

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान उनके सामने गिड़गिड़ा रहा है और वो डील की भीख मांग रहा है। ट्रंप का यह भी कहना है कि ईरानी वातार्कार बहुत अजीब हैं। उन्होंने धमकी भरे अंदाज में कहा है कि तेहरान को "जल्द ही गंभीर हो जाना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।" अपने ट्रुथ सोशल ऐप पर ट्रंप ने कहा: ईरानी वातार्कार बहुत अलग और "अजीब" हैं। वे हमसे डील करने के लिए "गुजारिश" कर रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए क्योंकि वो सैन्य रूप से खत्म हो चुके हैं, और वापसी का कोई मौका उनके पास नहीं है, और फिर भी वे सबके सामने कहते हैं कि वे सिर्फ "हमारे प्रस्ताव को देख रहे हैं।" गलत!!! उन्हें जल्द ही गंभीर हो जाना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, क्योंकि एक बार ऐसा हो गया, तो पीछे मुड़ना मुमकिन नहीं है, और यह अच्छा नहीं होगा!यह बोला ईरानईरान ने बातचीत की संभावना पर मिले-जुले संकेत दिए हैं, जब ऐसी खबरें आईं कि ट्रंप प्रशासन ने इस हफ्ते की शुरूआत में पाकिस्तान के जरिए तेहरान को 15-सूत्रीय संघर्ष विराम योजना पेश की है। सार्वजनिक रूप से, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि तेहरान ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।अराघची ने अमेरिका के दावों को नकाराईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी मीडिया को बताया कि उनकी सरकार ने युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत नहीं की है और न ही उनकी किसी बातचीत की योजना है। हालांकि उन्होंने माना कि यूएस ने दूसरे देशों के जरिए ईरान को संदेश भेजने की कोशिश की थी, उन्होंने कहा कि यह "न तो बातचीत थी और न ही कोई नेगोशिएशन।"दुनिया के लिए कल का दिन अहमधमकी, चेतावनी और विरोध के बीच पश्चिम एशिया ही नहीं पूरी दुनिया के लिए 27 मार्च का दिन काफी अहम है। 23 मार्च को ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता का दावा करते हुए कहा था कि बातचीत "सकारात्मक और रचनात्मक" है, इसलिए वो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले के फैसले को "5 दिन के लिए टाल रहे हैं।" इसकी मियाद शुक्रवार को समाप्त हो रही है।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

सौम्या टंडन : धुरंधर की सफलता के बाद अब बादशाह की सवारी करेंगी अभिनेत्री, शुरू की घुड़सवारी की ट्रेनिंग

धुरंधर की सफलता के बाद अब बादशाह की सवारी करेंगी अभिनेत्री, शुरू की घुड़सवारी की ट्रेनिंग

मुंबई । अभिनेत्री सौम्या टंडन इन दिनों स्पाई एक्शन फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' को लेकर सुर्खियों में छाई हैं। इस बीच, अभिनेत्री ने अपने नए शौक का खुलासा किया और बताया कि उन्होंने उसकी ट्रेनिंग भी शुरू कर दी हैं। अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताया कि उन्हें घुड़सवारी का काफी शौक था, जिसकी उन्होंने ट्रेनिंग शुरू कर दी है।फिल्म की सफलता के बाद सौम्या अब अपनी नई रुचि पर फोकस कर रही हैं। घुड़सवारी उनके लिए न सिर्फ नया शौक है बल्कि एक सपने को पूरा करने की दिशा में पहला कदम भी है। सौम्या ने कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। इसमें वे घोड़ों के साथ नजर आ रही हैं। वहीं, कुछ तस्वीरों में वे घुड़सवारी सीखते हुए भी दिख रही हैं। सौम्या ने लिखा, "पहला दिन और पहली घुड़सवारी की क्लास।"अभिनेत्री ने बताया कि उन्हें बचपन से ही घोड़े बहुत पसंद रहे हैं। उन्होंने लिखा, "घोड़े बहुत सुंदर और नाजुक जानवर होते हैं। मैं हमेशा उनसे आकर्षित रही हूं। मैं बचपन में एक बड़े फार्म का सपना देखती थी, जहां खूबसूरत घोड़े और कुत्ते हों। मैं खुद उन घोड़ों पर सवारी करते हुए खुद को देखती थी।" सौम्या ने लिखा, "पहला दिन थोड़ा मुश्किल रहा, लेकिन मैंने घुड़सवारी सीखना शुरू कर दिया है, तो पहला दिन काफी खतरनाक और थकाऊ था। मेरी पीठ में दर्द हो रहा है, लेकिन इस क्लास में मुझे एक नया दोस्त मिल गया। वह दोस्त है एक सुंदर सफेद घोड़ा, जिसका नाम ‘बादशाह’ है।"सौम्या ने मजाकिया अंदाज में बताते हुए लिखा, "मैंने बादशाह से बहुत बातें कीं। सच कहूं तो वह बहुत अच्छा सुनने वाला था या शायद उसके पास और कोई चारा नहीं था, लेकिन उसने मेरी सारी बातें ध्यान से सुनीं। मुझे लगता है कि हमारे बीच एक खास कनेक्शन बन गया है। हम अच्छे दोस्त बन गए हैं।" अंत में सौम्या ने लिखा, "फिर मिलेंगे बादशाह, जल्दी ही। उम्मीद है एक दिन हम साथ में घोड़ी चलाएंगे और तेज दौड़ लगाएंगे।"

बिज़नेस

सर्राफा बाजार में सुनामी : चांदी 12,000 टूटी, सोना भी फिसला जोर से, क्या रहे गिरावट के कारण जानें

चांदी 12,000 टूटी, सोना भी फिसला जोर से, क्या रहे गिरावट के कारण जानें

नई दिल्ली। गुरुवार को वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के बीच सोने और चांदी की कीमतों में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी के दाम में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी करीब 2.5 प्रतिशत तक फिसल गया। दोपहर करीब 12ः30 बजे चांदी की कीमतों में तेज टूट शुरू हुई और कुछ ही समय में यह लगभग 12,000 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई। वहीं सोने की कीमतों में करीब 4,500 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई। फिलहाल चांदी करीब 2.35 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे कारोबार कर रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया है। हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ने के बाद तेल से जुड़े ठिकानों पर हमले हुए हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। आमतौर पर ऐसे हालात में सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार निवेशकों का रुख अलग नजर आ रहा है।अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से बाजार में बढ़ा दबावइसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया फैसले ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है और संकेत दिए हैं कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना कम है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का जिक्र किया, जिसके बाद निवेशकों ने कीमती धातुओं में मुनाफावसूली शुरू कर दी।4.20 लाख के रिकार्ड स्तर को छुआ था चांदी नेगौरतलब है कि पिछले दो वर्षों में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी देखी गई थी। जनवरी 2026 में चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, लेकिन इसके बाद से कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। जानकारों का कहना है कि मौजूदा गिरावट निवेशकों की मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक संकेतों का मिश्रित असर है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर निर्भर करेगी।

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खेल

बंद दरवाजों के पीछे खेला जाएगा पीएसएल : कंगाल पीसीबी की फिर हुई इंटरनेशनल बेइज्जती

कंगाल पीसीबी की फिर हुई इंटरनेशनल बेइज्जती

नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) हमेशा से ही पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) की तुलना इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से करता रहा है। हालांकि, बीसीसीआई की तरह पीसीबी कभी भी पीएसएल का आयोजन नहीं कर सका है। इसका ताजा उदाहरण आगामी सीजन की शुरुआत से पहले ही सामने आ गया है। पाकिस्तान सुपर लीग 2026 का आयोजन बंद दरवाजों के पीछे किया जाएगा, मतलब दर्शकों को स्टेडियम में आने की परमिशन नहीं होगी। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि पीएसएल के सभी मुकाबले अब छह की जगह महज दो शहरों में खेले जाएंगे। पीसीबी ने अपने इस फैसले का कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन संकट को बताया है। पीसीबी ने खर्च कटौती का दिया हवालापाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि खर्चे में कटौती करने की खातिर टूर्नामेंट का आयोजन सिर्फ दो वेन्यू पर करने का निर्णय लिया गया है। पीएसएल की शुरुआत 26 मार्च से होनी है और फाइनल मुकाबला 3 मई को खेला जाना है।आईपीएल के आयोजनों में कोई कमी नहींअमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर जितना पाकिस्तान पर हो रहा है, उतना ही भारत पर भी हो रहा है। तेल की कीमतों में यहां भी उछाल आया है और बाकी चीजों के दाम भारत में भी बढ़े हैं। हालांकि, इसके बावजूद आईपीएल 2026 के आयोजन में कोई कमी नहीं रखी गई है। पीएसएल का आयोजन तो छह शहरों में किया जाना था, जबकि आईपीएल 2026 कुल 10 शहरों में खेला जाना है। इसके बावजूद खर्चे में कटौती के नाम पर बीसीसीआई ने टूर्नामेंट के शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं किया है। यह दर्शाता है कि पीसीबी के मुकाबले बीसीसीआई का कद काफी ऊंचा है।पीएसएल छोड़कर आईपीएल से जुड़ रहे विदेशी खिलाड़ीसिर्फ यही नहीं, बल्कि इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने के लिए विदेशी खिलाड़ी बिना कुछ सोचे ही पाकिस्तान सुपर लीग को छोड़कर भारत आ रहे हैं। ब्लेसिंग मुजारबानी और दासुन शनाका इसके ताजा उदाहरण भी हैं। पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने पीएसएल छोड़कर आईपीएल में खेलने जा रहे खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही है। हालांकि, इसके बावजूद खिलाड़ी आईपीएल की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। इसका पहला कारण आईपीएल में मिलने वाला पैसा तो है ही, लेकिन इसके साथ ही पीएसएल के मुकाबले आईपीएल की ज्यादा लोकप्रियता भी है। पीएसएल को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के दावे एक बार फिर खोखले साबित हो रहे हैं। वहीं, आईपीएल की बराबरी करना पीएसएल और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए अभी दूर की कौड़ी ही लगता है।

लाइफस्टाइल

पेट से जुड़े रोगों के लिए खा रहे हैं अजवाइन : सेवन की यह गलती बिगाड़ सकती है पाचन

सेवन की यह गलती बिगाड़ सकती है पाचन

नई दिल्ली । गलत खान-पान और शारीरिक गतिविधि के कम होने के कारण आज के समय में पेट से जुड़े विकार सबसे ज्यादा परेशान करते हैं। भूख का कम लगना या खाने के बाद पेट फूलना जैसी परेशानियां होने लगती हैं। पहले तो इन परेशानियों को छोटा समझकर नजर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन यहीं छोटी-छोटी दिक्कतें सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित करती हैं। कई लोग रोग पाचन से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए रोजाना अजवाइन खाते हैं, लेकिन यह नहीं जानते हैं कि कैसे और कितनी मात्रा में अजवाइन खाना लाभकारी होता है।अजवाइन में थाइमोल नाम का यौगिक पाया जाता है, जो पाचन से जुड़ी परेशानियों में राहत देता है और इसकी गर्म तासीर सर्दी और खांसी से भी बचाती हैं। हालांकि अजवाइन का सेवन करने से पहले उसके सेवन का तरीका भी जान लेना जरूरी है। कुछ लोग अजवाइन को कच्चा ही खा लेते हैं और किसी भी समय खाली पेट या फिर रात के समय इसका सेवन बेधड़क करते हैं लेकिन यह तरीका बिल्कुल गलत है।अजवाइन को खाने से पहले हल्का भून लेना चाहिए। अजवाइन को इतना भूनना चाहिए कि उसके रंग में किसी तरह का परिवर्तन न हो लेकिन उसमें से हल्की-हल्की सुगंध आने लगे। ऐसे में आधे से कम चम्मच का सेवन करना चाहिए और सेवन भी हमेशा गुनगुने पानी के साथ करना करना चाहिए। गुनगुने पानी के साथ सेवन से अजवाइन के गुण बढ़ जाते हैं और पाचन तेजी से ठीक होता है। इससे पेट की जठराग्नि तेज होती है और भूख भी समय पर लगती है।अब सवाल है कि किस समय अजवाइन का सेवन करना लाभकारी है। कुछ लोग सुबह के वक्त खाली पेट अजवाइन का पानी या सूखी अजवाइन का सेवन करते हैं, लेकिन यह तरीका बिल्कुल गलत है। अजवाइन को हमेशा भोजन के बाद ही लेना चाहिए। खाना खाने के बाद तकरीबन आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से इसका सेवन किया जा सकता है। ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि अजवाइन का सेवन तब ही करें जब पाचन में परेशानी हो, बिना परेशानी के उसे अपने दिनचर्या का हिस्सा न बनाएं। गर्म तासीर होने की वजह से यह पेट में जलन कर सकती है। इसलिए जब गैस और पेट फूलने की परेशानी हो, तभी इसका सेवन करें।

राजनीती

पश्चिम एशिया संघर्ष : पीएम कल राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे हाईलेवल मीटिंग, मौजूदा हालातों से कराएंगे रूबरू

पीएम कल राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे हाईलेवल मीटिंग, मौजूदा हालातों से कराएंगे रूबरू

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बीते 28 दिनों से जंग जारी है। इस भीषण युद्ध के कारण दुनिया भर में संकट गहराता जा रहा है। भारत में भी इसे लेकर लोगों में पैनिक फैल रहा है। हालांकि केन्द्र सरकार लगातार स्थिति कंट्रोल में होने की बात कह रही है। इसी बीच बड़ी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल शुक्रवार शाम 6:30 बजे मिडिल ईस्ट में जारी जंग को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअली हाईलेवल मीटिंग करेंगे। एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत करेंगे, जिसमें वे पश्चिम एशिया संघर्ष के संबंध में राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा करेंगे। अधिकारी ने कहा कि इस बैठक का मुख्य मकसद 'टीम इंडिया' की भावना के साथ मिलकर काम करने की कोशिशों में तालमेल बिठाना होगा।संकट से निपटने सहमति बनाने की होगी कोशिशजैसे-जैसे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और इसका वैश्विक असर ज्यादा साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, यह बैठक पीएम मोदी के लिए एक मंच का काम कर सकती है। इस मंच के जरिए पीएम मोदी मुख्यमंत्रियों को मौजूदा हालात के बारे में जानकारी देंगे और इस संकट से निपटने के भारत के तरीके पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश करेंगे।चुनावी राज्यों में सीएस के साथ करेंगे बैठकअधिकारी ने बताया, "चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि वहां 'आचार संहिता' लागू है।" उन्होंने बताया कि चुनाव वाले राज्यों के मुख्य सचिवों के लिए एक अलग बैठक होगी, जिसका आयोजन कैबिनेट सचिवालय के जरिए किया जाएगा। इससे पहले, बुधवार शाम को नई दिल्ली में संसद भवन परिसर में सरकार ने पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा के लिए एक 'सर्वदलीय बैठक' बुलाई थी।यह बैठक पीएम मोदी के संसद में पश्चिम एशिया के हालात पर दिए गए भाषण के बाद हुई। अपने बयान में पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के असर को कम करने के लिए ईंधन, सप्लाई चेन, खाद और दूसरे क्षेत्रों में रणनीतियां बनाने के लिए सात 'अधिकार प्राप्त समूह' बनाए हैं।

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