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मकर संक्रांति- माघ मेला : संगम की रेत पर आध्यात्मिक लक्जरी, श्रद्धालुओं को नया अनुभव दे रही आधुनिक टेंट सिटी

संगम की रेत पर आध्यात्मिक लक्जरी, श्रद्धालुओं को नया अनुभव दे रही आधुनिक टेंट सिटी

लखनऊ। मकर संक्रांति और माघ मेला 2026 के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी विकसित की गई है, जो आध्यात्मिक पर्यटन का नया मानक स्थापित कर रही है। देश-दुनिया से संगम स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यादगार अनुभव देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा संगम क्षेत्र की रेत पर अत्याधुनिक टेंट कॉलोनी बसाई गई है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परिकल्पना के अनुरूप विकसित यह टेंट सिटी माघ मेला को केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि पर्यटन, संस्कृति और रोजगार से जोड़ने का सशक्त माध्यम बना रही है। उन्होंने बताया कि प्रयागराज के अरैल सेक्टर-7 में त्रिवेणी पुष्प से पूर्व विकसित टेंट कॉलोनी में कुल 50 आधुनिक कॉटेज तैयार किए गए हैं। श्रद्धालु इन कॉटेज की ऑनलाइन बुकिंग यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं। टेंट सिटी को तीन श्रेणियों- प्रीमियम, लग्जरी और डीलक्स में विभाजित किया गया है। निर्धारित किया गया किरायाप्रीमियम कॉटेज का किराया 15 हजार रुपये, लग्जरी का 11 हजार 500 रुपये और डीलक्स कॉटेज का किराया 7 हजार 500 रुपये निर्धारित किया गया है। इनमें क्रमशः 12 प्रीमियम, 8 लग्जरी और 30 डीलक्स टेंट शामिल हैं। पर्यटन मंत्री ने बताया कि टेंट सिटी में ठहरने वाले श्रद्धालुओं को उसी शुल्क में सात्विक भोजन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। परिसर में यज्ञशालाओं का निर्माण किया गया है, जहां नियमित रूप से भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। साथ ही, सांस्कृतिक वातावरण को सजीव बनाने के लिए कलाग्राम भी विकसित किया गया है, जहां स्थानीय लोककला और शिल्प को बढ़ावा दिया जा रहा है। माघ मेले में रोजार और नवाचार को मिल रहा बढ़ावाजयवीर सिंह ने बताया कि माघ मेला 2026 में रोजगार और नवाचार को विशेष बढ़ावा मिला है। संगम टेंट कॉलोनी परिसर में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत प्रदर्शनी लगाई गई है, जहां प्रयागराज की पारंपरिक मूंज कला के स्टॉल लगाए गए हैं। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि माघ मेला अब केवल आध्यात्मिक पहचान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के लिए एक बड़े व्यावसायिक मंच के रूप में उभर रहा है। श्रद्धालुओं को भा रहे यह सबदेश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मूंज से बने डलिया, पेन स्टैंड, रोटी रखने के बर्तन, गमले और सजावटी उत्पादों को विशेष रूप से पसंद कर रहे हैं। नैनी क्षेत्र के महेवा इलाके की यह पारंपरिक कला, जिसे वर्षों से स्थानीय कारीगर आगे बढ़ा रहे हैं, अब आधुनिक स्वरूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि प्रदेश का हर बड़ा आयोजन आस्था के साथ-साथ रोजगार, पर्यटन और स्थानीय कला को सशक्त करे। संगम टेंट सिटी इस सोच का सजीव उदाहरण है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक वातावरण का अनूठा अनुभव श्रद्धालुओं को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि माघ मेला 2026 प्रदेश के सांस्कृतिक वैभव और आर्थिक संभावनाओं को एक साथ आगे बढ़ाता हुआ दिखाई दे रहा है।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

हीरामंडी के ताहा शाह ने फिर जीता दिल : ऑस्कर 2026 की रेस में शामिल हुई फिल्म पारो

ऑस्कर 2026 की रेस में शामिल हुई फिल्म पारो

मुंबई। हीरामंडी सीरीज में मशहूर अभिनेता ताहा शाह बहुशा अब नई उपलब्धि के साथ सुर्खियों में हैं। हाल ही में उनकी फिल्म श्पारोः द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ब्राइड स्लेवरी को 98वें ऑस्कर अवॉर्ड्स (2026) की कंटेंशन लिस्ट में जगह मिल गई है।इसकी जानकारी खुद ताहा शाह ने इंस्टाग्राम के जरिए फैंस को दी। उन्होंने शूटिंग की कुछ तस्वीरें शेयर कीं। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने लिखा, मेरा दिल खुशी से भर गया है, क्योंकि मेरी फिल्म पारो द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ब्राइड स्लेवरी 98वें ऑस्कर अवॉर्ड्स की कंटेंशन लिस्ट में शामिल हो गई है।अभिनेता ने बताया कि यह फिल्म दुल्हन खरीद-फरोख्त (ब्राइड स्लेवरी) जैसी सामाजिक बुराई पर आधारित है। साथ ही, उन महिलाओं की दर्दनाक कहानी को भी पेश करती है, जिन्हें अगवा कर बेचा जाता है और कई लोगों के साथ गुलामी की जिंदगी जीने को भी मजबूर होती हैं। उन्होंने लिखा, ष्यह समस्या भारत, पाकिस्तान, वियतनाम जैसे देशों में काफी देखने को मिलती है। ताहा ने आगे लिखा, दुल्हन प्रथा में होने वाले शोषण पर बनी यह फिल्म दुनियाभर में लोगों के दिलों को छू रही है। अलग-अलग देशों में हुई स्क्रीनिंग के दौरान दर्शकों की नम आंखें और प्यार भरे संदेश इस सफर को मेरे दिल के बहुत करीब बना देते हैं।ताहा ने पोस्ट के अंत में टीम का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने लिखा, मैं अपने निर्देशक, निर्माता, कलाकारों और पूरी टीम का दिल से धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने उन अनसुनी महिलाओं की कहानियों को ईमानदारी से सामने रखा। इस कहानी पर भरोसा करने और इसे इतनी संवेदनशीलता से पेश करने के लिए आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया।अभिनेता ने दर्शकों को भी धन्यवाद दिया और लिखा, मेरे दर्शकों का भी धन्यवाद। आपका प्यार, आपकी दया और आपकी उम्मीद हमेशा मेरे साथ रहेगी। हीरामंडी के बाद अभिनेता की यह फिल्म सामाजिक मुद्दे पर वैश्विक मंच पर चर्चा बटोर रही है। ऑस्कर की यह कंटेंशन लिस्ट फिल्म के लिए पहला बड़ा कदम है। उम्मीद है कि आगे चलकर यह नामांकन और अवॉर्ड तक पहुंचेगी।

बिज़नेस

भारतीय परिवार बन रहे निवेशक : एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट दे रही गवाही, देखें बीते दस सालों का आंकड़ा

एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट दे रही गवाही, देखें बीते दस सालों का आंकड़ा

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2015 से 2025 के बीच भारतीय बैंकों में जमा राशि और कर्ज की रकम लगभग तीन गुना हो गई है। इससे यह साफ होता है कि देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत हुआ है और कर्ज देने की प्रक्रिया फिर से तेज हुई है। सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। भारतीय स्टेट बैंक की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2015 से 2025 के दौरान बैंकों में जमा राशि 85.3 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई। वहीं, बैंकों द्वारा दिया गया कर्ज 67.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बैंकों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी के मुकाबले बढ़कर 94 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 77 प्रतिशत थी। इससे पता चलता है कि देश की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग प्रणाली मजबूत हुई है।रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई राज्यों में अब परिवार सिर्फ बचत ही नहीं कर रहे, बल्कि निवेश की ओर भी रुख करने लगे हैं। गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में बैंक में जमा राशि का एक हिस्सा तेजी से शेयर बाजार और अन्य वित्तीय बाजारों की ओर जा रहा है। लंबे समय की बात करें तो वित्त वर्ष 2005 से 2025 के बीच बैंकों में जमा राशि 18.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई। इसी तरह बैंकों का कर्ज 11.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए हो गया। इससे साफ है कि बैंकिंग प्रणाली का आकार काफी बढ़ गया है।हालांकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि कर्ज देने की रफ्तार जमा की तुलना में तेज रही है, जिससे कर्ज और जमा का अनुपात वित्त वर्ष 2021 में 69 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 79 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी बैंक भी धीरे-धीरे फिर से ज्यादा कर्ज देने लगे हैं। पहले कुछ वर्षों में उनका हिस्सा कम हो गया था, लेकिन अब उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है और वे ज्यादा कर्ज देने को तैयार हैं।वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में बैंकों में नई जमा राशि 8.6 लाख करोड़ रुपए से घटकर 8.1 लाख करोड़ रुपए रह गई, जबकि इस दौरान कर्ज बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपए हो गया। एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ने के पीछे ब्याज से होने वाली कमाई, सरकारी बॉन्ड से लाभ और खुदरा तथा छोटे कारोबारियों को दिए गए कर्ज की अहम भूमिका रही है।रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में बैंकों का मुनाफा और बेहतर होगा। त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग, कर्ज में तेजी, कम कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) आवश्यकता से मिलने वाले फायदे और असुरक्षित व एमएफआई सेगमेंट में डिफॉल्ट के मामलों के धीरे-धीरे सामान्य होने से बैंकों को फायदा मिलेगा।

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क्या चीन-पाक समझौता भारत के लिए चुनौती है?  #hindinews #tv27news #news #latestnews #tv27newsdigital

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दिल्ली समेत कई राज्यों में शीतलहर का रेड अलर्ट!  #hindinews #tv27news #latestnews #tv27newsdigital

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प्रयागराज में माघ मेला का आयोजन जारी #tv27newsdigital #tv27news #breakingnews #news #paryagraj

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कौन था अलवर में शॉल वाला संदिग्ध?  #hindinews#breakingnews  #tv27newsdigital #tv27news #latestnews

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का कर्नाटक दौरा आज  #tv27newsdigital #hindinews #tv27news #latestnews

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खेल

क्रिकेट : इस मामले में राहुल ने पछाड़ा किंग कोहली को, माही के नाम पर अब भी दर्ज है रिकाॅर्ड

इस मामले में राहुल ने पछाड़ा किंग कोहली को, माही के नाम पर अब भी दर्ज है रिकाॅर्ड

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने रविवार को वडोदरा में खेले गए पहले वनडे मुकाबले में न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हरा दिया। केएल राहुल ने छक्का लगाकर भारतीय टीम को जीत दिलायी। छक्का लगाकर टीम इंडिया को जीत दिलाने के मामले में राहुल ने विराट कोहली को पीछे छोड़ दिया है। केएल राहुल ने भारतीय पारी के 49वें ओवर में क्रिस्टियन क्लार्क की आखिरी 3 गेंदों पर 4, 4, और 6 रन लगाते हुए भारतीय टीम को जीत दिलायी। वनडे क्रिकेट में यह छठा मौका था, जब केएल राहुल ने छक्का लगाकर टीम इंडिया को जीत दिलायी। वनडे में छक्का लगाकर भारतीय टीम को जीत दिलाने के मामले में राहुल ने विराट कोहली को पीछे छोड़ा। वनडे फॉर्मेट के किंग माने जाने वाले कोहली ने अपने करियर में 5 बार अब तक ऐसा किया है। वनडे क्रिकेट में छक्का लगाकर अब तक सबसे ज्यादा बार भारतीय टीम को जीत दिलाने का रिकॉर्ड पूर्व कप्तान एमएस धोनी के नाम है। धोनी ने अपने करियर में 9 बार ऐसा किया है। राहुल के पास धोनी का भी रिकॉर्ड तोड़ने का समय है। देखना होगा कि वह ऐसा कर पाने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं। केएल राहुल ने 21 गेंदों पर 2 चैकों और 1 छक्के की मदद से नाबाद 29 रन की पारी खेली। मैच की बात करें तो भारतीय टीम ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया था। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए डेरिल मिचेल के 84, हेनरी निकोलस के 62, और डेवोन कोनवे के 56 रन की मदद से 8 विकेट पर 300 रन बनाए थे। भारतीय टीम ने विराट कोहली के 93, शुभमन गिल के 56, और श्रेयस अय्यर के 49 रन की पारी की बदौलत 49 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 306 रन बनाकर मैच 4 विकेट से जीता था। विराट कोहली प्लेयर ऑफ द मैच रहे थे। अगले दो वनडे मैचों से पहले भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। इंजरी की वजह से वॉशिंगटन सुंदर सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह आयुष बडोनी को टीम में शामिल किया गया है।

लाइफस्टाइल

बॉडी डिटॉक्स से मजबूत इम्युनिटी तक : सुबह खाली पेट गुनगुने नींबू पानी के जबरदस्त फायदे

सुबह खाली पेट गुनगुने नींबू पानी के जबरदस्त फायदे

नई दिल्ली। शरीर की साफ-सफाई सिर्फ बाहर से नहीं, बल्कि अंदरूनी तौर पर भी बहुत जरूरी है। इसके लिए महंगे उपायों की जरूरत नहीं। बस हर सुबह उठते ही खाली पेट एक गिलास गुनगुना पानी में ताजा नींबू निचोड़कर पी लें। यह आसान आदत अपनाने से पाचन बेहतर होता है, शरीर डिटॉक्स होता है और सेहत में कई गुना सुधार आता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी इस सरल घरेलू नुस्खे को काफी फायदेमंद बताया है। यह आदत न केवल सेहत को बेहतर बनाती है, बल्कि रोजमर्रा की कई छोटी-मोटी परेशानियों से भी छुटकारा दिला सकती है।एक्सपर्ट के अनुसार, सुबह खाली पेट गर्म नींबू पानी पीने के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। नींबू में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी होता है, जो शरीर की रक्षा प्रणाली को सक्रिय रखता है और सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से बचाव में मदद करता है। यह वजन घटाने में भी कारगर है। गुनगुना नींबू पानी पाचन तंत्र को तेज करता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है और शरीर में जमा अतिरिक्त वसा को कम करने में सहायक होता है। जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक आसान उपाय है।इसके नियमित सेवन से पेट फूलना, गैस और अपच जैसी समस्याएं भी दूर रहती हैं। यह लिवर के लिए बहुत अच्छा है। नींबू पानी लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। सुबह खाली पेट पीने से लिवर टॉक्सिन्स को आसानी से बाहर निकाल पाता है, जिससे यह स्वस्थ और मजबूत रहता है। यह त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। नींबू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-सी त्वचा को साफ और चमकदार बनाते हैं। यह मुंहासों को कम करता है, दाग-धब्बों को हल्का करता है और त्वचा को जवां रखने में मदद करता है। नियमित पीने से चेहरा निखरता है और त्वचा स्वाभाविक रूप से स्वस्थ दिखती है।यह नुस्खा बनाना भी बहुत आसान है। एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़कर मिलाएं। स्वाद के लिए थोड़ा शहद भी डाल सकते हैं, लेकिन चीनी से बचें। ध्यान रखें कि बहुत गर्म पानी न लें, सिर्फ गुनगुना ही काफी है।

राजनीती

अहिंसा संस्कार पदयात्राः : आचार्य बोले- हमारा मकसद मानवता का संदेश देना, बापू और विनोवा भावे से प्रेरित होकर निकाल रहे यात्रा

 आचार्य बोले- हमारा मकसद मानवता का संदेश देना, बापू और विनोवा भावे से प्रेरित होकर निकाल रहे यात्रा

बहरोड़। आचार्य प्रसन्न सागर महाराज इन दिनों ‘अहिंसा संस्कार पदयात्रा’ निकाल रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न तबकों के लोगों से मुखातिब होकर उन्हें मानवता का संदेश देकर उनके अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। आचार्य का मानना है कि अब वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और विनोबा भावे से प्रेरित होकर यह यात्रा निकाल रहे हैं। उन्हें विश्वास है कि आगामी दिनों में यह यात्रा लोगों के बीच में एक अमिट छाप छोड़ेगी। आचार्या ने इस यात्रा के बारे में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में पूरी जानकारी दी। 2 अक्टूबर को गुवाहाटी और असम से शुरू हुई थी यात्राउन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर 2004 को इस यात्रा का शुभारंभ गुवाहाटी और असम से किया था। तब वहां के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने हमसे सवाल किया था कि आखिर इस यात्रा का उद्देश्य क्या है? आप इस यात्रा के जरिए आम लोगों के बीच में क्या साबित करना चाहते हैं और उनके बीच किस तरह का संदेश प्रचारित करना चाहते हैं? तो हमने बताया कि आज की तारीख में लोगों के बीच में नैतिकता और भाईचारा समाप्त हो चुका है। हम इस यात्रा के जरिए लोगों के बीच इसी नैतिकता को जिंदा करना चाहते हैं। निसंदेह अगर हम ऐसा करने में सफल हुए, तो हम यह मान लेंगे कि हमारी यह यात्रा सार्थक साबित हुई।मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुकी है नैतिकता और भाईचाराआचार्य ने कहा कि आज लोगों के बीच में नैतिकता और भाईचारा अपनी मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुकी है। हमारा मकसद इस यात्रा के जरिए इसी भाईचारे और नैतिकता को जिंदा करना है। इस नैतिकता को हम विभिन्न तरीके से जिंदा कर सकते हैं, जिसमें सबसे प्रमुख मैं समझता हूं कि पेड़ लगाना है। आप अपने घर के पास एक ऐसा पेड़ लगाइए जिससे आपके पड़ोसी को भी उसकी छांव मिले। ऐसा करके आप अपनी नैतिकता को जिंदा रख सकते हैं।मनुष्य की दुर्दशा पशुओं से भी बदतरउन्होंने कहा कि अगर मनुष्य चाहे तो वह अपने स्तर को बढ़ा सकता है। आज की तारीख में मनुष्य किस दोयम दर्जे में पहुंच चुका है, इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। आज मनुष्य की दुर्दशा पशुओं से भी बदतर हो चुकी है। ना ही उसके खाने का कोई निर्धारित समय है और ना ही नहाने का। उसकी दुर्गति अपने चरम पर पहुंच चुकी है, लेकिन वह इसमें किसी भी प्रकार का सुधार करता हुआ नजर नहीं आ रहा है।खाने के लिए जी रहा आज का मनुष्यआचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि आप हम जैसे साधुओं की स्थिति देख लीजिए। हम लोग दिन में एक बार ही भोजन ग्रहण करते हैं और 30 से 35 किलोमीटर बहुत ही आराम से चल लेते हैं। हमें इसमें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है। वहीं, आज की तारीख में मनुष्य की दुर्गति का अंदाजा आप महज इसी से लगा सकते हैं कि वो एक दिन में कई बार भोजन करता है। लेकिन, वो मंदिर तक जाने की जहमत नहीं उठाता। ऐसी स्थिति में आप ईश्वर के प्रति उसकी निष्क्रियता का अंदाजा सहज ही लगा सकते हैं। आज का मनुष्य खाने के लिए जी रहा है और मरने का इंतजार कर रहा है।

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