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रिटेल निवेशकों के लिए सबसे बेहतर रणनीति धैर्य : वैश्विक अस्थिरता पर सेबी चीफ की सलाह, बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में न दें प्रतिक्रिया

वैश्विक अस्थिरता पर सेबी चीफ की सलाह, बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में न दें प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत के पूंजी बाजार लगातार मजबूत और व्यापक होते जा रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी में एक मीडिया कार्यक्रम में बोलते हुए सेबी प्रमुख ने रिटेल निवेशकों को सलाह दी कि वे बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया न दें।उन्होंने कहा, रिटेल निवेशकों के लिए सबसे बेहतर रणनीति धैर्य बनाए रखना है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक रूप से, बड़े वैश्विक संकटों के बाद बाजार में फिर से सुधार देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि भारत के पूंजी बाजार आकार, विविधता और मजबूती के मामले में तेजी से बढ़ रहे हैं। पांडे ने कहा, हमारे बाजार लगातार गहरे और विविध हो रहे हैं और उनकी मजबूती भी बढ़ रही है, लेकिन जैसे-जैसे बाजार का आकार और जटिलता बढ़ती है, वैसे-वैसे वे वैश्विक घटनाओं से भी अधिक प्रभावित होने लगते हैं।वैश्विक बाजारों में अस्थिरता को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी बदलाव और ऊर्जा संकट अनिश्चितता में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक संबंधों को आकार दे रहे हैं। मध्य पूर्व में संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा बड़ा असर उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है, जिसका प्रभाव वैश्विक पूंजी बाजारों पर भी पड़ा है। पांडे के अनुसार, आज के वित्तीय बाजारों की एक खासियत यह है कि उनमें अस्थिरता ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि जानकारी और खबरें तेजी से पूरी दुनिया में फैलती हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसे दौर स्थायी नहीं होते।अत्यधिक अस्थिरता के दौर हमेशा के लिए नहींउन्होंने कहा, एक बात स्पष्ट है कि अत्यधिक अस्थिरता के दौर हमेशा के लिए नहीं रहते। वैश्विक बाजारों में हो रहे संरचनात्मक बदलावों का जिक्र करते हुए सेबी चीफ ने कहा कि आर्थिक विभाजन, बदलते व्यापार मार्ग और तकनीक की बढ़ती भूमिका बाजारों को तेजी से बदल रही है। उन्होंने बताया कि एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स के कारण बाजार पहले से कहीं ज्यादा तेजी से काम कर रहे हैं।आज के दौर में बहुत तेजी से फैलती है जानकारीसेबी चेयरमैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जानकारी बहुत तेजी से फैलती है और राय उससे भी तेज, जिसके कारण बाजार अक्सर खबरों और कथाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगते हैं। उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बाजार की तेजी के साथ उसकी स्थिरता भी बनी रहे।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

सिनेमा का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं : संवेदनशीलता भी बड़ी जिम्मेदारी : प्रकाश झा

 संवेदनशीलता भी बड़ी जिम्मेदारी : प्रकाश झा

मुंबई । फिल्म निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा अक्सर गंभीर विषयों पर बेबाकी से अपनी राय रखते नजर आते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने समाज में दमन और क्रांति के बीच गहरा संबंध बताते हुए कहा कि जब दमन एक निश्चित हद पार कर जाता है, तो क्रांति होना तय हो जाता है। यह किसी ट्रेन दुर्घटना की तरह अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे सुलगते हुए फूट पड़ती है।प्रकाश झा ने बताया, "क्रांति स्वाभाविक और कुदरती प्रक्रिया है। ज्वालामुखी फटेगा ही। दमन से अंदर बहुत कुछ जमा होता रहता है और जब बर्दाश्त की सीमा पार हो जाती है, तो वह फूट पड़ता है। हम अचानक नींद से नहीं जागते। क्रांतियां भी धीरे-धीरे बनती हैं। समय सबसे बड़ा शिक्षक है। अगर हम समय के साथ जिएं और उसे समझें, तो वह हमें सब कुछ सिखा देता है।" प्रकाश झा का मानना है कि सिनेमा समाज को आईना दिखाने का माध्यम है। यह दमन, असमानता और अन्याय जैसे मुद्दों पर बात कर सकता है, लेकिन हमेशा जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ।प्रकाश झा ने सिनेमा की जिम्मेदारी पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि फिल्ममेकर को हर संवाद, हर छवि और हर कहानी की संवेदनशीलता समझनी चाहिए। सिनेमा का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ना और कुछ खास भावनाएं जगाना भी है। अगर आप कुछ कहना चाहते हैं, तो कहिए, लेकिन संवेदनशीलता के साथ। लोगों से कतराना नहीं चाहिए, अस्थिरता नहीं फैलानी चाहिए। रचनात्मक तरीके से बातचीत करनी चाहिए, इसे दिलचस्प और आकर्षक बनाए रखना चाहिए।"फिल्ममेकर ने थिएटर और ओटीटी के बीच बढ़ते अंतर पर भी बात की। वे खुद जमशेदपुर में एक मल्टीप्लेक्स चलाते हैं, इसलिए उन्हें भारत के थिएटर इकोसिस्टम की जमीनी हकीकत अच्छी तरह पता है। उन्होंने कहा कि बड़े बजट वाली मनोरंजक फिल्में स्क्रीन शेयरिंग में छोटी फिल्मों को पीछे छोड़ देती हैं, लेकिन हर फिल्म का अपना मार्केट होता है और हर फिल्म के लिए जगह है। ओटीटी पर सीधे रिलीज का फैसला ज्यादातर व्यावसायिक कारणों से लिया जाता है, क्योंकि थिएटर में रिलीज के जोखिम और खर्च ज्यादा होते हैं।

बिज़नेस

औंधे मुंह गिरे सेंसेक्स-निफ्टी : घरेलू शेयर बाजार फिर सहमा, निवेशकों को लगा करोड़ों का चूना

घरेलू शेयर बाजार फिर सहमा, निवेशकों को लगा करोड़ों का चूना

नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार दूसरे दिन बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। शुक्रवार को बाजार खुलते ही दबाव में आ गया और कुछ ही घंटों में निवेशकों की संपत्ति में करीब 7 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। इससे पहले गुरुवार को भी निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। गिरावट के चलते बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर लगभग 433 लाख करोड़ रुपये रह गया है।कारोबार के दौरान सेंसेक्स 923.58 अंक यानी करीब 1.21 प्रतिशत गिरकर 75,117.6 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं निफ्टी 50 भी 310 अंक या 1.32 प्रतिशत टूटकर 23,323 के स्तर पर आ गया। बैंकिंग शेयरों में भी भारी दबाव रहा और बैंक निफ्टी में 1000 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 26 लाल निशान में रहे, जबकि केवल 4 शेयरों में ही बढ़त देखने को मिली। टाटा स्टील, बीईएल, इंडिगो और एलएंडटी जैसे दिग्गज शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।बाजार की गिरावट के कई कारणबाजार की इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आया उछाल है। दरअसल ईरान द्वारा दो तेल टैंकरों पर हमले की खबर के बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते सप्लाई बाधित होने की आशंका पैदा हो गई। इसी कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, जिससे वैश्विक बाजारों में भी दबाव बढ़ गया।इन कंपनियों के शेयर गिरेवैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी भारतीय बाजार की धारणा को प्रभावित किया। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 225, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी भारी बिकवाली रही और डॉव जोन्स 700 अंकों से अधिक गिरकर इस साल पहली बार 47,000 के स्तर से नीचे बंद हुआ।विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर बना रही दबावइसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को एफआईआई ने भारतीय बाजार में 7,049 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशक करीब 39,000 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं।निवेशकों की नजर अमेरिका की बैठक परअब निवेशकों की नजर अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक पर टिकी हुई है, जो 17 मार्च को होने वाली है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल यह उम्मीद की जा रही है कि फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन उसके संकेतों का असर वैश्विक बाजारों पर जरूर पड़ेगा।

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खेल

भगवान सच में हैं बहुत दयालु : लगातार दूसरा टी-20 विश्व कप जीतने से गदगद बुमराह, बोले- मैं कभी पीछे नहीं छिपना चाहता

लगातार दूसरा टी-20 विश्व कप जीतने से गदगद बुमराह, बोले- मैं कभी पीछे नहीं छिपना चाहता

नई दिल्ली। भारतीय टीम को टी20 विश्व कप 2024 के बाद टी20 विश्व कप 2026 में चैंपियन बनाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने कहा है कि वह हमेशा चुनौतीपूर्ण काम करना चाहते थे। इसी वजह से उन्होंने क्रिकेट को चुना। बुमराह ने कहा है कि कुछ अलग कर पाना उन्हें बहुत खुशी देता है।बीसीसीआई टीवी पर शेयर किए गए एक वीडियो में जसप्रीत बुमराह ने कहा, मैं कभी पीछे नहीं छिपना चाहता। मैं चीजों के बीच रहना चाहता हूं। मैं हमेशा एक मुश्किल काम करना चाहता था। मैंने क्रिकेट उसी के लिए खेलना शुरू किया। जब मैं कुछ अलग कर पाता हूं, तो मुझे बहुत खुशी होती है। इससे बेहतर कोई एहसास नहीं हो सकता। मैंने अपना क्रिकेट अहमदाबाद में ही शुरू किया और सारा क्रिकेट यहीं खेला। गुजरात के लिए खेलकर रैंक में ऊपर आया। अब यहां विश्व कप खेल रहा हूं और मैन ऑफ द मैच बन रहा हूं। पिछली बार हम बस पीछे रह गए थे, इस बार हम आगे निकल गए। मैं बहुत खुश हूं।लगातार दो विश्व कप कभी नहीं हुएबुमराह ने कहा, मेरा बेटा आया, वह पिछली बार भी वहां था। इस बार, वह वहां था, मेरी मां आई थी, जो बहुत खास था। मुझे पूरे सर्कल के बारे में नहीं पता, लेकिन सच में बहुत खुश हूं। लगातार दो विश्व कप कभी नहीं हुए। भगवान सच में बहुत दयालु हैं, और मैं इससे ज्यादा शुक्रगुजार नहीं हो सकता।न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर भारत ने लगातार जीता दूसरा टी-20 विश्व कपभारतीय टीम ने 8 मार्च को टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर लगातार दूसरा टी20 विश्व कप जीता। लगातार 2 टी20 विश्व कप और कुल तीन टी20 विश्व कप जीतने वाली भारत पहली टीम है। इसके साथ ही अपने घर में टी20 विश्व कप जीतने वाली भी भारतीय टीम पहली टीम है। सेमीफाइनल में बेहतरीन गेंदबाजी करने वाले बुमराह ने फाइनल में भी शानदार गेंदबाजी की और 4 ओवर में 15 रन देकर 4 विकेट लिए। इस शानदार और यादगार प्रदर्शन के लिए बुमराह को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

लाइफस्टाइल

मोटापा सिर्फ बढ़ता वजन नहीं : कई बीमारियों की बड़ी वजह, आसान उपाय संग ऐसे करें कंट्रोल

 कई बीमारियों की बड़ी वजह, आसान उपाय संग ऐसे करें कंट्रोल

नई दिल्ली। मोटापा अब सिर्फ दिखावे की समस्या नहीं रहा, बल्कि यह हृदय रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर समेत कई गंभीर बीमारियों का बड़ा कारण बन चुका है। ऐसे में बढ़ती वजन की समस्या से परेशान लोगों को हेल्थ एक्सपर्ट कुछ आसान उपाय की सलाह देते हैं, जो मोटापे की समस्या को खत्म करने में कारगर हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, यह समस्या अब बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों में तेजी से फैल रही है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जंक फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना और अनियमित जीवनशैली मोटापे की मुख्य वजह बन गई है। बच्चे मोबाइल-टीवी पर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे उनकी शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है। वहीं, बड़ों में ऑफिस की नौकरी, तनाव और फास्ट फूड की आदत ने मोटापे को और बढ़ावा दिया है।ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा सिर्फ वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर में सूजन पैदा करता है, इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाता है और धमनियों में फैट जमा होने से हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एनएचएम ने लोगों को मोटापे से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपाय बताए हैं।वास्तव में मोटापा एक ऐसी समस्या है, जिसे दवाइयों से ज्यादा जीवनशैली में बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों के दर्द और यहां तक कि अन्य गंभीर रोगों का कारण भी बन सकता है।इसके लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करें। तेज चलना, साइकिल चलाना, योग या खेलकूद इसमें शामिल हो सकता है। संतुलित और पौष्टिक आहार लें। घर का बना खाना, ताजी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम तेल-चीनी का इस्तेमाल करें। जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं। स्क्रीन टाइम को सीमित करें। खासकर बच्चों को टीवी, मोबाइल या कंप्यूटर पर दो घंटे से ज्यादा समय न बिताने दें। पर्याप्त नींद लें। रात को 7-8 घंटे की अच्छी नींद मोटापे को नियंत्रित रखने में बहुत मदद करती है। एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं। लिफ्ट की बजाय सीढ़ियां चढ़ें, छोटे-छोटे काम खुद करें और बैठे रहने की आदत छोड़ें।

राजनीती

इस वैश्विक संकट को भी कर लेंगे पार : पीएम मोदी ने वीडियो शेयर देश की जनता को बंधाया ढांढस

पीएम मोदी ने वीडियो शेयर देश की जनता को बंधाया ढांढस

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के खिलाफ इजरायल-अमेरिका की संयुक्त लड़ाई के बाद आए वैश्विक संकट को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संकट से निपटने में भारत कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा है। पीएम मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए अपना एक वीडियो शेयर किया। पीएम मोदी ने पोस्ट में लिखा, आज युद्ध के चलते जो वैश्विक संकट बना है, उससे निपटने में भारत कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा है।वीडियो में पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, आजकल बहुत चर्चा एलपीजी को लेकर हो रही है। कुछ लोग हैं जो पैनिक क्रिएट करने का प्रयास कर रहे हैं, अपना एजेंडा चलाना चाहते हैं। मैं इस समय उन पर राजनीतिक टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि ऐसा करके वो जनता के समक्ष खुद तो एक्सपोज हो ही रहे हैं और देश का भी बड़ा नुकसान कर रहे हैं।वैश्विक संकट के प्रभाव से कोई देश अछूता नहींउन्होंने आगे कहा, आज युद्ध से जो ये वैश्विक संकट आया है, उसके प्रभाव से कोई देश अछूता नहीं है। कम या अधिक मात्रा में हर कोई शिकार है। भारत सरकार भी इस संकट से निपटने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है। हम अलग-अलग स्तरों पर प्रयास कर रहे हैं। बीते दिनों दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेताओं से मेरी इसको लेकर बातचीत हुई है। सप्लाई चेन में जो बाधाएं आई हैं, उनसे हम कैसे पार पाएं, इसके लिए भी निरंतर प्रयास चल रहे हैं।देश का आत्मनिर्भर होना क्यों जरूरी, पीएम ने दोहरायापीएम मोदी ने कहा, इस वैश्विक संकट ने एक बार फिर दिखाया है कि किसी भी देश का आत्मनिर्भर होना इतना अधिक जरूरी क्यों है। इसलिए ही बीते वर्षों में हमने भारत को एनर्जी सेक्टर्स में आत्मनिर्भर बनाने के लिए होलिस्टिक तरीके से काम किया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि हम इस वैश्विक संकट को भी पार कर लेंगे। उन्होंने कहा, मैं फिर दोहराउंगा जहां तक सरकार का प्रश्न है, हम किसी भी प्रकार के प्रयत्न या प्रयास में कोई कमी नहीं आने देंगे। हमारे हर निर्णय में जनता का हित सर्वोपरि रहेगा।

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