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इजरायल-हमास के बीच गाजा में टूटा सीजफायर : पश्चिमी राफा में आईडीएफ ने कई आतंकियों को किया ढेरसर्दी, खांसी और जुकाम से चाहिए राहत? : घर में मौजूद यह विंटर कॉम्बो देगा आरामजीटी के शानदार प्रदर्शन पर खराब फील्डिंग ने फेरा पानी : एमआई के खिलाफ छूटे कैचों पर कोच ने कही यह बात 'मेरी तुलना ओम पुरी से करना संभव नहीं' : 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' में कैमियों को लेकर बोले अभिषेक बनर्जी पिता की परंपरा या बेटे की चाहत : 'शब्द– रीत और रिवाज' ला रहा पारंपरिक परिवार की कहानी

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कांग्रेस सत्ता में आए तो एसएस-एसटी का बने सीएम : दिग्गी की पैरवी से गदगद हुए प्रदीप अहिरवार, दिल खोलकर की तारीफ

दिग्गी की पैरवी से गदगद हुए प्रदीप अहिरवार, दिल खोलकर की तारीफ

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा राज्य की सत्ता में कांग्रेस के आने पर अनुसूचित जाति और जनजाति का मुख्यमंत्री बनाए जाने संबंधी बयान की चैतरफा चर्चा है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को सामाजिक न्याय और दलित उत्थान का हितैषी करार दिया है। दरअसल, बीते रोज पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भोपाल डिक्लेरेशन पर चर्चा के दौरान राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग का मुख्यमंत्री कांग्रेस की ओर से बनाए जाने की पैरवी की थी। उनके इस बयान के बाद से सियासी गर्माहट है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अहिरवार ने उन्हें पत्र लिखा है, जिसमें कहा है कि दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल को सामाजिक न्याय और उत्थान के लिए याद किया जाएगा।कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने संवेदनशील, लोकतांत्रिक, समतामूलक वक्तव्य के लिए दोनों वर्गों की ओर से दिग्विजय सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वास्तव में यह बयान सामाजिक न्याय और समावेशी राजनीति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दर्शाता है।अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष अहिरवार ने आगे लिखा कि राज्य की लगभग 17 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति है और इसकी भावना और अपेक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग से प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। यह न केवल सामाजिक संतुलन और संवैधानिक भावना के अनुरूप होगा बल्कि दलित समाज के आत्मसम्मान और राजनीतिक सहभागिता को भी व्यक्त करेगा।इस पत्र में आगे कहा गया है कि दिग्विजय सिंह के अनुभव, मार्गदर्शन और प्रभावशाली भूमिका के माध्यम से राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष इस संदर्भ में पहल भी की जाएगी और सामाजिक न्याय की आवाज को मजबूती प्रदान की जाएगी। यहां यह बताना लाजमी होगा कि दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल इसी साल अप्रैल में समाप्त हो रहा है और दिग्विजय सिंह ने आगे राज्यसभा में न जाने की इच्छा जताई है। इसके चलते ही राज्य में एक बार फिर कांग्रेस के भावी दावेदारों के नाम की चर्चा शुरू हो गई है।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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मनोरंजन

'मेरी तुलना ओम पुरी से करना संभव नहीं' : 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' में कैमियों को लेकर बोले अभिषेक बनर्जी

'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' में कैमियों को लेकर बोले अभिषेक बनर्जी

मुंबई। भारतीय सिनेमा ने हमेशा से ही कई दिग्गज कलाकार दिए हैं, जिनकी कला और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनते हैं। ऐसे ही एक अभिनेता थे ओम पुरी, जिन्हें उनकी बेहतरीन अदाकारी और सच्चे सिनेमा प्रेम के लिए याद किया जाता है। ओम पुरी ने कभी बड़े या छोटे रोल की परवाह किए बिना हर किरदार में जान डाल दी। इस बीच अभिनेता अभिषेक बनर्जी ने अपने एक छोटे से रोल को उन्हें समर्पित किया। आईएएनएस से बात करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा, "मुझे हमेशा से ओम पुरी बेहद पसंद रहे हैं; उनका काम शानदार था। उन्होंने अपने करियर में जो रास्ता अपनाया, जो किरदार निभाए, वह किसी असली हीरो से कम नहीं था। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि रोल बड़ा है या छोटा, बस इस बात पर जोर दिया कि किरदार कैसे निभाया जाए। यही सोच मैंने अपनी कैमियो भूमिका में अपनाई।"'फ्रीडम एट मिडनाइट' सीरीज में अभिषेक का किरदार एक ऐसे आदमी का है, जो अपनी गर्भवती पत्नी को सांप्रदायिक हिंसा में खो देता है। उसका किरदार बदले की भावना से भरा है, लेकिन कहानी उसे अंततः महात्मा गांधी के सामने आत्मसमर्पण की ओर ले जाती है। यह कहानी केवल व्यक्तिगत दुख तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय की धार्मिक और सामाजिक जटिलताओं को भी दर्शाती है।यह किरदार ऐतिहासिक रूप से भी खास है, क्योंकि इसकी भावना ओम पुरी द्वारा फिल्म 'गांधी' (1982) में निभाए गए किरदार को दर्शाती है। इस फिल्म में बेन किंग्सले मुख्य भूमिका में थे और फिल्म का निर्देशन रिचर्ड एटनबरो ने किया था। अभिषेक ने कहा, "जब निर्देशक निखिल ने मुझे यह रोल ऑफर किया, तो मैंने तुरंत हां कर दी। मेरा मानना है कि इंडस्ट्री की असली भावना यह है कि कलाकार को हमेशा अपनी भूमिका निभाने का मौका मिलना चाहिए, चाहे वह रोल छोटा ही क्यों न हो।"अभिषेक ने कहा, ''मेरी तुलना ओम पुरी से करना संभव नहीं है। ओम पुरी एक सिनेमा के आइकॉन हैं, और उनके नक्शेकदम पर चलना अपने आप में सम्मान की बात है। छोटे रोल कभी-कभी सबसे बड़ा असर छोड़ते हैं, और 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' के रिलीज के बाद मुझे सोशल मीडिया पर दर्शकों की ओर से काफी प्रशंसा मिली।'' सीरीज के दूसरे सीजन में विभाजन के बाद के समय की अशांति, सांप्रदायिक हिंसा, शरणार्थियों की समस्या, रियासतों का विलय और नेताओं के बीच राजनीतिक तनाव को भी दिखाया गया है। 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' सोनी लिव पर स्ट्रीम है।

बिज़नेस

86 प्रतिशत भारतीयों के लिए ज्वेलरी सबसे अहम संपत्ति : डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट में खुलासा, नई पीढ़ी तेजी से अपना रही नया ट्रेंड

डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट में खुलासा, नई पीढ़ी तेजी से अपना रही नया ट्रेंड

नई दिल्ली। भारत में लगभग 86 प्रतिशत लोग सोने और आभूषणों (ज्वेलरी) को संपत्ति बनाने का एक अच्छा साधन मानते हैं। यह संख्या लगभग म्यूचुअल फंड और शेयरों जैसे बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों के बराबर है, जिन्हें 87 प्रतिशत लोग पसंद करते हैं। इससे साफ है कि गहनों की अहमियत आज भी बहुत ज्यादा है। बुधवार को जारी डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ज्वेलरी मार्केट तेजी से बदल रहा है। अब लोग आभूषणों को सिर्फ शादी या परंपरा से नहीं जोड़ते, बल्कि अपनी पहचान, जीवनशैली और रोजमर्रा के पहनावे का हिस्सा भी मानते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 56 प्रतिशत लोग ज्वेलरी को, निवेश और फैशन, दोनों के रूप में देखते हैं। वहीं, 28 प्रतिशत लोग केवल निवेश के रूप में गहने खरीदते हैं। इससे पता चलता है कि आभूषणों की भूमिका अब सिर्फ सेविंग्स तक सीमित नहीं रही।रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष और 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोग आभूषणों को ज्यादा निवेश के रूप में खरीदते हैं। वहीं, युवा वर्ग गहनों में स्टाइल, अपने हिसाब से डिजाइन और अलग-अलग तरह से पहनने की सुविधा को ज्यादा महत्व देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जेनजी और युवा पीढ़ी तेजी से हल्के और रोज पहनने वाले गहनों की ओर रुख कर रही है। 51 प्रतिशत जेनजी को चांदी और 34 प्रतिशत को प्लेटिनम वाली ज्वेलरी पसंद है। करीब 49 प्रतिशत लोग हल्के और सादे गहनों को भारी और ज्यादा सजावटी गहनों से ज्यादा पसंद करते हैं।रिपोर्ट में बताया गया कि 45 प्रतिशत जेनजी और युवा सिल्वर की ज्वेलरी में निवेश करना पसंद करते हैं। इसकी वजह है अच्छा डिजाइन, कम कीमत और आसानी से खरीदना। अब चांदी को सोने के साथ रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए भी चुना जा रहा है। डेलॉइट इंडिया के अनुसार, पहले भारत में लगभग 70 प्रतिशत गहने शादियों के लिए खरीदे जाते थे, लेकिन अब यह समीकरण बदल रहा है। युवा जन्मदिन और सालगिरह (38 प्रतिशत), रोजाना और आॅफिस में पहनने वाले परिधान (32 प्रतिशत) और पदोन्नति व पढ़ाई जैसी करियर संबंधी उपलब्धियों के लिए आभूषण खरीदते हैं।रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 49 प्रतिशत लोग अंगूठियां, चेन और कान की बालियां जैसे गहनों को निजी और गैर-धार्मिक मौकों के लिए पसंद करते हैं, जो पारंपरिक भारी गहनों से ज्यादा हैं। हालांकि आॅनलाइन प्लेटफॉर्म का असर बढ़ रहा है, लेकिन गहनों के मामले में लोग अब भी दुकान पर जाकर उसे खरीदना ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में आभूषण उद्योग की तरक्की के लिए बेहतर कामकाज, सही योजना और भरोसे पर ध्यान देना सबसे जरूरी होगा।

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सऊदी से ज्यादा तेल फिर भी दाने-दाने को मोहताज वेनेजुएला #tv27newsdigital #hindinews #national

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बिग बॉस 19 फेम फरहाना का भावुक बयान #news #newstoday  #hindinews #tv27newsdigital #latestnews

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शहीद प्रमोद जाधव की अधूरी कहानी, बेटी के जन्म के 8 घंटे बाद पिता की शहादत #tv27newsdigital #video

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जेब में ज़िंदा सांप लेकर अस्पताल पहुँचा चालक #breakingnews #news #newstoday #tv27newsdigital

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बागपत के कॉलेज प्रबंधक पर उत्पीड़न के आरोप #tv27newsdigital #tv27news #breakingnews #latestnews

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बिजनौर में चमत्कार, कुत्ता ने प्रभु का किया परिक्रमा #breakingnews #newstoday #news #tv27newsdigital

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खेल

भारत-न्यूजीलैंड वनडे सीरीजः : टीम इंडिया को लगा दूसरा झटका, पंत के बाद सुंदर भी सीरीज से हुए बाहर, पसली में चोट बनी वजह

टीम इंडिया को लगा दूसरा झटका, पंत के बाद सुंदर भी सीरीज से हुए बाहर, पसली में चोट बनी वजह

नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के खिलाफ चल रही वनडे सीरीज में भारतीय टीम को दूसरा बड़ा झटका लगा है। जानकारी के मुताबिक ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर सीरीज के बाकी दो वनडे मैचों से बाहर हो गए हैं। सुंदर से पहले ऋषभ पंत भी इंजरी की वजह से टीम से बाहर हुए थे। रविवार को वडोदरा में न्यूजीलैंड का खिलाफ सीरीज का पहला मैच के खेला गया था। गेंदबाजी के दौरान सुंदर इंजर्ड हो गए थे। उन्हें साइड स्ट्रेन की चोट लगी थी। इस वजह से वे बल्लेबाजी में भी हर्षित राणा से नीचे उतरे और रन के लिए दौड़ते समय उन्हें परेशानी हो रही है। बीसीसीआई सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वॉशिंगटन सुंदर वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं। हालांकि बीसीसीआई की तरफ से आधिकारिक पुष्टि होनी बाकी है। टी20 सीरीज के लिए उपलब्ध रहने पर भी संशयसूत्र के मुताबिक सुंदर के बाईं पसली में चोट लगने के बाद उन्हें साइड स्ट्रेन हुआ है, जिससे वह बाकी दो वनडे मैचों में नहीं खेल पाएंगे। इस बात पर भी संशय है कि वह न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 टी20 मैचों की सीरीज के लिए उपलब्ध होंगे, क्योंकि साइड स्ट्रेन ठीक होने में समय लगता है। मैच के बाद कप्तान शुभमन गिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था, ष्सुंदर को स्कैन के लिए ले जाया जाएगा, उसके बाद हमें उनकी इंजरी की गंभीरता की जानकारी मिलेगी।ष्भारतीय टीम की मुश्किल बढ़ाने वाली है सुंदर की इंजरीवॉशिंगटन सुंदर की इंजरी भारतीय टीम की मुश्किल बढ़ाने वाली है। वॉशिंगटन सुंदर की चोट और टीम में बदलाव से भारतीय टीम के लिए चयन और रणनीति पर असर पड़ सकता है। सुंदर टी20 विश्व कप 2026 के लिए चुनी गई भारतीय टीम का हिस्सा हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ इस सीमित ओवरों की सीरीज में यह भारत के लिए तीसरा झटका है। इससे पहले ऋषभ पंत साइड स्ट्रेन की वजह से वनडे और और तिलक वर्मा ग्रोइन इंजरी की वजह से हुए ऑपरेशन के कारण तीन टी20 मैचों से बाहर हो चुके हैं।

लाइफस्टाइल

मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग : हिन्दू धर्म के लिए माना गया है बेहद शुभ, तिल दान से मिलेगा विशेष पुण्य

हिन्दू धर्म के लिए माना गया है बेहद शुभ, तिल दान से मिलेगा विशेष पुण्य

नई दिल्ली। 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व बहुत खास रहने वाला है, क्योंकि इस दिन षटतिला एकादशी भी पड़ रही है। इन दोनों का संयोग हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। इस दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। संक्रांति पर अन्न दान के साथ अन्य पुण्य कर्म किए जाते हैं और गुड़-तिल से बने खाद्य पदार्थों के सेवन और दान का भी विशेष महत्व है। साथ ही सूर्य देव को जल देने का भी विशेष पर्व है।इस बार मकर संक्रांति के साथ ही माघ मास की कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी भी पड़ रही है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होती है। षटतिला का अर्थ है छह प्रकार से तिल का उपयोग। तिल को पवित्र और शुभ फल देने वाला माना जाता है। इस एकादशी पर तिल से जुड़े कार्य करने से पापों का नाश होता है, गरीबी दूर होती है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।उत्तरायण काल में किए गए दान, व्रत और भक्ति का कई गुना फल मिलता है। इसलिए इस संयोग में तिल दान का महत्व और भी बढ़ जाता है। षटतिला एकादशी पर तिल का छह तरह से उपयोग करने की परंपरा है। पहला तिल मिले हुए पानी से स्नान करना। शरीर पर तिल का लेप लगाना। हवन में तिल की आहुति देना। ब्राह्मण या जरूरतमंद लोगों को तिल दान करना। व्रत के नियमों के अनुसार तिल से बने व्यंजन खाना और तिल मिश्रित जल पीना या पितरों को तर्पण करना शामिल है। ये सभी कार्य करने से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।वहीं, दृक पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी को एकादशी तिथि शाम 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी। बुधवार को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 1 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, इस दौरान कोई नया शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। अनुराधा नक्षत्र 15 जनवरी सुबह 3 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचार करेंगे। सूर्योदय 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 45 मिनट पर होगा।

राजनीती

राहुल गिरगिट की तरह रूप बदलने वाले हैं शुद्ध कालनेमी : कांग्रेस नेता के अयोध्या दौरे पर महंतों ने दी तीखी प्रतिक्रिया, बताया डीएनए में खोट भी

कांग्रेस नेता के अयोध्या दौरे पर महंतों ने दी तीखी प्रतिक्रिया, बताया डीएनए में खोट भी

अयोध्या। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राम मंदिर में दर्शन को लेकर चल रही अटकलों पर अयोध्या के संतों और महंतों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी समय-समय पर गिरगिट की तरह रूप बदलने वाले शुद्ध कालनेमी हैं, उनके डीएनए में भी खोट है। हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने कहा कि जो व्यक्ति हिंदुओं को हिंसक कहे, जो यह कहे कि युवा मंदिर लड़कियों को छेड़ने के लिए जाते हैं, जिनकी पार्टी राम मंदिर के विरोध में 17 वकील खड़े कर दे, जो हमेशा सनातन की संस्कृति की अवहेलना करे, लेकिन राम मंदिर का विरोध करने वाली पार्टी के नेता आते हैं तो स्वागत है। कालनेमि से सचेत होने की जरूरत है। जब ये सत्ता में होते हैं तो सनातन पर प्रहार करते हैं।यह बोले हनुमानगढ़ी देवेशाचार्यहनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि देखिए, सूचना मिली है कि वे आ सकते हैं। स्वागत योग्य है। देर ही सही, राम की शरण में आ रहे हैं, कल्याण होगा। रामलला का दर्शन कर रहे हैं तो उनकी पार्टी का भी कल्याण होगा। किसी भी राजनीतिक दल को राम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।राहुल की मानसिकता ने दिखाया वे राम विरोधीमहामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा कि राहुल गांधी तो भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। सद्बुद्धि कहां से आ गई कि वे राम मंदिर आ रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राम पर सवाल उठाने वाले क्यों आ रहे हैं। यह राहुल गांधी की मानसिकता को दिखाता है कि वे राम विरोधी हैं। कभी कहते हैं हिंदू हिंसा फैलाता है, राम के वजूद पर सवाल उठाते हैं। वे राजनीति से प्रेरित होकर आ रहे हैं।सीताराम दास ने कहा- राहुल के डीएन में खोटसीताराम दास महाराज ने कहा कि राहुल गांधी के डीएनए में खोट है। समय-समय पर गिरगिट की तरह रूप बदलने वाले शुद्ध कालनेमी हैं। यूपी चुनाव को देखते हुए राम मंदिर आ रहे हैं। मैं पूछता हूं कि वे राम प्राण प्रतिष्ठा में क्यों नहीं आए। वे राम सेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। भगवान राम का दर्शन करने से उनका कल्याण नहीं होगा। इनकी पार्टी के लोग साधु-संतों पर अभद्र टिप्पणी करते हैं। इन्हें सनातन कभी स्वीकार नहीं करेगा। ये मजार पर चादर चढ़ाते हैं।उन्होंने कहा कि जो राम को काल्पनिक कहते थे, जो राम सेतु को काल्पनिक मानते हैं, अब राम की शरण में जाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?

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