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ग्रीनलैंड पर पीछे हटने का सवाल नहीं : ट्रंप ने यूरोपीय देशों को दिया सख्त संदेश, अमेरिका को बताया दुनिया को ताकतवर देश भीसिनेमा जगत के लिए यादगार दिन है 20 जनवरी : सिनेमेटोग्राफर वी.के. मूर्ति को आज के ही दिन नवाजा गया था दादा साहब फाल्के अवार्ड से सुबह के नाश्ते से बनती है पूरे दिन की एनर्जी : इन चीजों से दें शरीर को भरपूर ताकत शादी के 10 साल और यह सफर अभी भी जारी है : असिन ने दिखाई एनिवर्सरी सेलिब्रेशन की झलक

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भाजपा में युवा युग शुरू : नितिन नबीन को बधाई देने वालों की लंबी फेहरिस्त, शिवराज ने नए अध्यक्ष पर जताया बड़ा भरोसा

नितिन नबीन को बधाई देने वालों की लंबी फेहरिस्त, शिवराज ने नए अध्यक्ष पर जताया बड़ा भरोसा

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने मंगलवार को पदभार ग्रहण कर लिया है। इसके बाद से देशभर से नेताओं की ओर से उन्हें बधाइयों और शुभकामनाओं का सिलसिला जारी है। अलग-अलग राज्यों और केंद्र सरकार के मंत्रियों ने उनके नेतृत्व को पार्टी के लिए नया और युवा आरंभ बताया और भरोसा जताया कि उनके नेतृत्व में भाजपा नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नितिन नबीन को बधाई देते हुए कहा कि यह एक नए और युवा दौर की शुरुआत है। उन्होंने विश्वास जताया कि नितिन नबीन के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी नई ऊंचाइयों पर जाएगी। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि अगर कोई पार्टी जमीनी स्तर से एक युवा नेता को शीर्ष तक पहुंचा सकती है, तो वह भाजपा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसा कांग्रेस पार्टी में संभव नहीं है।केन्द्रीय मंत्री पाटिल ने नितिन नबीन की उम्र का किया जिक्रकेंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने नितिन नबीन की उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि 45 वर्ष की उम्र में उन्होंने पार्टी की कमान संभाली है और उन्हें इसके लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, नए नेतृत्व के साथ, सभी बीजेपी कार्यकर्ता पार्टी के विकास लक्ष्यों को हासिल करने और देश की प्रगति में योगदान देने के लिए पूरे उत्साह से आगे बढ़ेंगे।आठवले ने नितिन को दी बधाईपश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने नितिन नबीन को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पार्टी आगे बढ़ेगी। केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने नितिन नबीन को बधाई देते हुए कहा कि यह उनका पहला कार्यकाल है। उन्होंने यह भी बताया कि नितिन नबीन बिहार से हैं और पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं।शिवसेना नेता ने नितिन नबीन को दी बधाईशिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि भाजपा ने एक युवा अध्यक्ष चुना है, और उन्होंने अपनी ओर से और पार्टी की ओर से नितिन नबीन को हार्दिक बधाई दी। रायपुर में मंत्री राजेश अग्रवाल ने खुशी जताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व और खुशी का विषय है। उन्होंने भरोसा जताया कि नितिन नबीन के मार्गदर्शन में देशभर में पार्टी का काम और मजबूती से आगे बढ़ेगा।

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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मनोरंजन

सिनेमा जगत के लिए यादगार दिन है 20 जनवरी : सिनेमेटोग्राफर वी.के. मूर्ति को आज के ही दिन नवाजा गया था दादा साहब फाल्के अवार्ड से

सिनेमेटोग्राफर वी.के. मूर्ति को आज के ही दिन नवाजा गया था दादा साहब फाल्के अवार्ड से

मुंबई। भारतीय सिनेमा जगत के लिए 20 जनवरी का दिन बेहद यादगार और महत्वपूर्ण है। यह दिन बताता है कि पर्दे पर एक्टिंग का जलवा दिखाने वाले एक्टर्स ही नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे से योगदान देने वाले भी सिनेमा जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 20 जनवरी के दिन ही सिनेमेटोग्राफर वी.के. मूर्ति को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया था। इसी दिन साल 2010 में महान सिनेमेटोग्राफर वी.के. मूर्ति को दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया था। यह पुरस्कार उन्हें वर्ष 2008 के लिए दिया गया था और वह इस सम्मान को पाने वाले पहले सिनेमेटोग्राफर बने।भारत दुनिया में फिल्म निर्माण की संख्या के मामले में पहले स्थान पर है। हर फिल्म के पीछे निर्देशक, अभिनेता के साथ-साथ तकनीकी टीम का बड़ा योगदान होता है, जिसमें सिनेमेटोग्राफर की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। वे ही फिल्म की रोशनी, दिशा, फ्रेमिंग और दृश्यों की खूबसूरती तय करते हैं।दादा साहब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत साल 1969 में हुई थी, जो भारतीय सिनेमा में विशेष योगदान के लिए दिया जाता है। लेकिन इतने वर्षों में पहली बार किसी सिनेमेटोग्राफर को यह सर्वोच्च सम्मान मिला, जब वी.के. मूर्ति को चुना गया। वी.के. मूर्ति का नाम पुरानी पीढ़ी के सिने प्रेमियों के लिए बहुत जाना-पहचाना है। वह मशहूर निर्देशक गुरु दत्त के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे। 1950 के दशक में उन्होंने गुरु दत्त की क्लासिक ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों को अपनी कमाल की छायांकन कला से अमर बना दिया। वी के मूर्ति की फिल्मों की लिस्ट में प्यासा, कागज के फूल, चैदहवीं का चांद और साहिब बीवी और गुलाम।इन फिल्मों में उनकी रोशनी और कैमरा तकनीक आज भी सिनेमा के छात्रों के लिए मिसाल है। हालांकि, वी.के. मूर्ति को यह सम्मान मिलने में काफी लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन उनकी मेहनत और योगदान को आखिरकार वह पहचान मिली जो वे हकदार थे। यह घटना भारतीय सिनेमा में तकनीकी कलाकारों के महत्व को सामने लाती है।

बिज़नेस

भारतीय परिवार बन रहे निवेशक : एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट दे रही गवाही, देखें बीते दस सालों का आंकड़ा

एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट दे रही गवाही, देखें बीते दस सालों का आंकड़ा

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2015 से 2025 के बीच भारतीय बैंकों में जमा राशि और कर्ज की रकम लगभग तीन गुना हो गई है। इससे यह साफ होता है कि देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत हुआ है और कर्ज देने की प्रक्रिया फिर से तेज हुई है। सोमवार को जारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। भारतीय स्टेट बैंक की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2015 से 2025 के दौरान बैंकों में जमा राशि 85.3 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई। वहीं, बैंकों द्वारा दिया गया कर्ज 67.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बैंकों की कुल संपत्ति देश की जीडीपी के मुकाबले बढ़कर 94 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 77 प्रतिशत थी। इससे पता चलता है कि देश की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग प्रणाली मजबूत हुई है।रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई राज्यों में अब परिवार सिर्फ बचत ही नहीं कर रहे, बल्कि निवेश की ओर भी रुख करने लगे हैं। गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में बैंक में जमा राशि का एक हिस्सा तेजी से शेयर बाजार और अन्य वित्तीय बाजारों की ओर जा रहा है। लंबे समय की बात करें तो वित्त वर्ष 2005 से 2025 के बीच बैंकों में जमा राशि 18.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई। इसी तरह बैंकों का कर्ज 11.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए हो गया। इससे साफ है कि बैंकिंग प्रणाली का आकार काफी बढ़ गया है।हालांकि, रिपोर्ट में बताया गया है कि कर्ज देने की रफ्तार जमा की तुलना में तेज रही है, जिससे कर्ज और जमा का अनुपात वित्त वर्ष 2021 में 69 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 79 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी बैंक भी धीरे-धीरे फिर से ज्यादा कर्ज देने लगे हैं। पहले कुछ वर्षों में उनका हिस्सा कम हो गया था, लेकिन अब उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है और वे ज्यादा कर्ज देने को तैयार हैं।वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में बैंकों में नई जमा राशि 8.6 लाख करोड़ रुपए से घटकर 8.1 लाख करोड़ रुपए रह गई, जबकि इस दौरान कर्ज बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपए हो गया। एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ने के पीछे ब्याज से होने वाली कमाई, सरकारी बॉन्ड से लाभ और खुदरा तथा छोटे कारोबारियों को दिए गए कर्ज की अहम भूमिका रही है।रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में बैंकों का मुनाफा और बेहतर होगा। त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग, कर्ज में तेजी, कम कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) आवश्यकता से मिलने वाले फायदे और असुरक्षित व एमएफआई सेगमेंट में डिफॉल्ट के मामलों के धीरे-धीरे सामान्य होने से बैंकों को फायदा मिलेगा।

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Pm Modi ने BJPheadquarters में की Nitin Nabin से मुलाकात #tv27newsdigital #politicalnews #pilitical

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नोएडा के लोग पानी की जगह पी रहे मल मूत्र #noida #breakingnews #headlinestoday #headlines #latestnews

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खेल

भारत-न्यूजीलैंड वनडे सीरीज : निर्णायक मुकाबले में गिल ने जीता टॉस, बल्लेबाजी के लिए कीवियों को न्योता, भारतीय टीम में अर्शदीप को मिला मौका

निर्णायक मुकाबले में गिल ने जीता टॉस, बल्लेबाजी के लिए कीवियों को न्योता, भारतीय टीम में अर्शदीप को मिला मौका

इंदौर। भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी और निर्णायक मुकाबला इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जा रहा है। टीम इंडिया के कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया है। भारतीय टीम इस मैच में एक बदलाव के साथ उतरी है। प्रसिद्ध कृष्णा की जगह पर अर्शदीप सिंह को बुलाया गया है। यह इस सीरीज का निर्णायक मुकाबला है क्योंकि अभी तक दोनों टीमों ने एक-एक मैच जीता है। टॉस के बाद कप्तान गिल ने कहा कि हम जानते हैं हमारे लिए बड़ी चुनौती है। न्यूजीलैंड टीम ने शानदार खेल दिखाया है और हमें कुछ हद तक दबाव में रखा है। हालांकि, इन चीजों का खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन के लिए इंतजार होता है। यह मुकाबला इंदौर के होल्कर स्टेडियम में हो रहा है, जिस पर काफी रन बनते हैं। गिल ने कहा कि मैदान पर ज्यादा रन बनना भी उन वजहों में से एक हैं जिनके चलते उन्होंने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है।उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि यहां ओस पड़ेगी, लेकिन पिच बहुत अच्छी लग रही है और ऐसी सतह पर एक स्कोर सेट करके चेज करना हमेशा बेहतर रहता है।" वहीं, न्यूजीलैंड की टीम में कोई बदलाव नहीं है। कप्तान माइकल ब्रेसवेल ने कहा कि यदि वे टॉस जीतते तो पहले गेंदबाजी ही चुनना पसंद करते। बता दें कि दोनों टीमों के बीच इस सीरीज की शुरूआत 11 जनवरी को हुई थी, जब मेजबान टीम ने कीवियों को 4 विकेट से मात दी थी। इसके बाद 14 जनवरी को हुए अगले मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी करते हुए भारत को 7 विकेट से हराया।तीसरे और निर्णायक मुकाबले के लिए दोनों टीमों की प्लेइंग 11 इस प्रकार है-भारत (प्लेइंग इलेवन): रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, नीतीश कुमार रेड्डी, हर्षित राणा, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, मोहम्मद सिराजन्यूजीलैंड (प्लेइंग इलेवन): डेवोन कॉनवे, हेनरी निकोल्स, विल यंग, ??डेरिल मिशेल, ग्लेन फिलिप्स, मिशेल हे (विकेटकीपर), माइकल ब्रेसवेल (कप्तान), जैकरी फाउल्क्स, काइल जैमीसन, क्रिस्टियन क्लार्क, जेडन लेनोक्स

लाइफस्टाइल

कैल्शियम से भरपूर है शंख भस्म : हड्डियों और जोड़ों को देती है नया जीवन

हड्डियों और जोड़ों को देती है नया जीवन

नई दिल्ली । आयुर्वेद में उपचार के लिए सदियों से दुर्लभ जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता आया है। जड़ी-बूटियों के गुण बड़े से बड़े रोग से मुक्ति दिलाने की शक्ति रखते हैं, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि आयुर्वेद में भस्म के जरिए भी रोगों को दूर करने का काम पहले से होता आया है। हम बात कर रहे हैं शंख भस्म की, जिसे आयुर्वेद में चमत्कारी भस्म के नाम से जाना जाता है।शंख भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं के उपचार में किया जाता है। इसमें अम्लरोधी गुण होते हैं जो सीने में जलन और दर्द जैसे लक्षणों से राहत प्रदान करते हैं। रसशास्त्र में शंख को शुद्ध वर्ग के अंतर्गत एक खनिज के रूप में वर्णित किया गया है। शंख भस्म आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा दैनिक अभ्यास में उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण भस्मों में से एक है।शंख भस्म का उपयोग पेट से जुड़े विकारों से लेकर हड्डियों और जोड़ों के विकारों को ठीक करने में किया जाता है, लेकिन ध्यान रखने वाली बात ये है कि बिना चिकित्सक के शंख भस्म का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इसे सीधा खाया नहीं जाता है, बल्कि किसी न किसी चीज में मिक्स कर इसका सेवन किया जाता है। ये स्वाद में तीखी होती है और रोग के अनुसार इसके सेवन की मात्रा तय की जाती है।अगर पेट की पाचन अग्नि कमजोर हो गई है, पेट में दर्द रहता है, गैस बनने की वजह से उल्टी की परेशानी या सिर में दर्द होता है, तो शंख भस्म का इस्तेमाल किया जा सकता है। शंख भस्म पाचन अग्नि को रीसेट करती है, जिससे खाना अच्छे से पचता है और पाचन की प्रक्रिया में सुधार आता है।शंख भस्म मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट होता है। यह हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने, ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने और दांतों की मजबूती को बनाए रखने में मदद करता है। अगर शरीर में कैल्शियम की कमी है, तब भी शंख भस्म का सेवन किया जा सकता है, लेकिन गर्भवती महिलाएं सेवन से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें।शंख भस्म शरीर में वात और कफ दोषों को संतुलित करने का काम भी करती है। अगर ये दोनों ही दोष शरीर में असंतुलित हैं तो कई बीमारियों का जन्म होता है। इससे पेट से लेकर स्किन से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं। इसके अलावा, चेहरे के मुहांसों और दाग धब्बों से छुटकारा पाने के लिए भी शंख भस्म का लेपन और सेवन कर सकते हैं।

राजनीती

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ीं मुश्किलें : संगम में धरने पर बैठने के मामले में प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने थमाया नोटिस, एससी के आदेश का दिया हवाला

संगम में धरने पर बैठने के मामले में प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने थमाया नोटिस, एससी के आदेश का दिया हवाला

प्रयागराज। प्रयागराज संगम में मौनी अमावस्या पर स्नान न करने के बाद धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस भेजा है। नोटिस में सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया है कि संबंधित व्यक्ति ज्योतिषपीठ के अधिकृत शंकराचार्य नहीं हैं, ऐसे में वे अपने नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ शब्द का प्रयोग किस आधार पर कर रहे हैं? नोटिस में मेला प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब मांगा है। इसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि वे किस वैधानिक या धार्मिक आधार पर स्वयं को शंकराचार्य कह रहे हैं। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। पत्र में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन ब्रह्मलीन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के लंबित मुकदमे का जिक्र किया गया है। नोटिस प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है।धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर प्रशासन सतर्कसूत्रों के अनुसार, मेला क्षेत्र में आयोजित हो रहे धार्मिक कार्यक्रमों और शिविरों को लेकर प्रशासन पहले से ही सतर्क है। सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए सभी धार्मिक आयोजनों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। किसी भी पद, उपाधि या पहचान का गलत इस्तेमाल प्रशासन के लिए गंभीर विषय माना जा रहा है।नोटिस मिलने के बाद भड़के समर्थकनोटिस के सामने आने के बाद संत के समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि शंकराचार्य एक परंपरागत धार्मिक पद है और इस पर प्रशासनिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। समर्थकों का आरोप है कि मेला प्रशासन धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहा है। वहीं, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि न्यायालय के आदेशों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है, चाहे वह धार्मिक व्यक्ति ही क्यों न हो।

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