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भारत की असली ताकत उसके किसान : ट्रेड डील को लेकर राहुल ने फिर पीएम मोदी पर किया वार, एपस्टीन फाइलों को लेकर भी बोले कांग्रेस नेता

ट्रेड डील को लेकर राहुल ने फिर पीएम मोदी पर किया वार, एपस्टीन फाइलों को लेकर भी बोले कांग्रेस नेता

कन्नूर। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद से केन्द्र सरकार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के निशाने पर है। जहां भी दौरे पर जाते हैं, वहीं इस मसले को उठाकर सरकार को कोसने से परहेज नहीं करते। अब राहुल ने केरल से ट्रेड डील को लेकर मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। राहुल गांधी ने गुरुवार को कन्नूर जिले के पेरावूर में आयोजित एक किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत की असली ताकत उसके किसान हैं और जब तक किसानों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित नहीं किया जाएगा, तब तक देश वास्तविक अर्थों में सफल नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ऐसा व्यापार समझौता करने जा रही है जिससे भारतीय कृषि और छोटे किसानों को गंभीर नुकसान हो सकता है।कृषि क्षेत्र को नजरअंदाज कर रही सरकारराहुल गांधी ने कहा कि सरकार आईटी और अन्य आधुनिक क्षेत्रों की बात तो करती है, लेकिन देश की नींव यानी कृषि क्षेत्र को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसी इमारत की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है, उसी तरह भारत की अर्थव्यवस्था किसानों पर टिकी है। अगर किसानों को कमजोर किया गया तो देश की आर्थिक संरचना भी कमजोर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हम रोज भोजन करते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि उसे उगाने और हमारी थाली तक पहुंचाने में किसानों की कितनी मेहनत लगती है।भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांतराहुल गांधी ने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रम्प ने एपस्टीन फाइलों का हवाला देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर दबाव बनाया ताकि भारत एक ऐसे व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करे, जिससे अमेरिकी कंपनियों को भारतीय कृषि बाजार में प्रवेश मिल सके। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते से भारतीय किसानों की ‘बलि’ चढ़ जाएगी क्योंकि अमेरिकी किसान बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खेती करते हैं, जबकि भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं।भारतीयों किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना होगा मुश्किलउन्होंने कहा कि अमेरिकी किसानों के पास विशाल भूमि और आधुनिक तकनीक है, जिससे वे कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकते हैं। ऐसे में यदि अमेरिकी कंपनियों को भारत में सोयाबीन, सब्जियां और फल बेचने की अनुमति दी जाती है तो भारतीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा। राहुल गांधी ने दावा किया कि पहले किसी भी प्रधानमंत्री ने अमेरिकी कृषि उत्पादों को इस तरह भारतीय बाजार में खुली पहुंच नहीं दी।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

लीला मजूमदार जयंती विशेष : बच्चों को 'पाताल दीदी' जैसी रचना देने वाली रचनाकार, जो कहलाईं बाल साहित्य की जादूगरनी

बच्चों को 'पाताल दीदी' जैसी रचना देने वाली रचनाकार, जो कहलाईं बाल साहित्य की जादूगरनी

नई दिल्ली । बांग्ला साहित्य में ऐसे कई रचनाकार हुए, जिनके कलम का जादू आज भी कविता-कहानियों समेत अन्य विधा के रूप में अमर है। ऐसी एक बाल साहित्य की जादूगरनी कहलाईं लीला मजूमदार, उन चुनिंदा महिला साहित्यकारों में से एक, जिन्होंने बच्चों की कहानियों से लेकर वयस्क उपन्यासों तक हर उम्र के पाठकों को अपनी रचना से समृद्ध किया। लीला मजूमदार की रचनाएं बालमन की पसंद तो हैं ही, साथ ही महिलाओं के जीवन, भावनाओं और संघर्षों की सच्ची हितैषी भी साबित हुईं। लीला मजूमदार का जन्म 26 फरवरी 1908 को कोलकाता में एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनके पिता प्रमदा रंजन रे, प्रसिद्ध लेखक उपेंद्रकिशोर राय चौधरी के छोटे भाई थे। बचपन के शुरुआती साल उन्होंने शिलांग में बिताए। स्कूली शिक्षा लोरेटो कॉन्वेंट और सेंट जॉन्स डायोसेसन स्कूल से पूरी की, जहां मेधावी लीला अक्सर उच्च अंक लाती थीं।कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में ऑनर्स और मास्टर्स दोनों में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्होंने शिक्षण कार्य दार्जिलिंग के महारानी गर्ल्स स्कूल में शुरू किया, फिर रवींद्रनाथ टैगोर के आग्रह पर शांतिनिकेतन में शामिल हुईं। बाद में आशुतोष कॉलेज और ऑल इंडिया रेडियो में काम किया। रेडियो पर उन्होंने ‘महिला महल’ सीरीज में ‘मोनिमाला’ नामक किरदार रचा, जो एक साधारण मध्यमवर्गीय बंगाली लड़की की जिंदगी को खूबसूरती से दिखाता है। यह किरदार लाखों महिलाओं से जुड़ गया।लीला मजूमदार के साहित्यिक सफर की शुरुआत किशोरावस्था में चाचा उपेंद्रकिशोर द्वारा शुरू की गई पत्रिका ‘संदेश’ में कहानी ‘लक्खी छेले’ से हुई। उनकी पहली बच्चों की किताब ‘बैद्यनाथर बोरी’ आई, लेकिन ‘दिन दुपुरे’ ने आलोचकों की तारीफ बटोरी और उन्हें ख्याति दिलाई। उन्होंने कुल 125 से अधिक किताबें लिखीं, जिनमें कहानी संग्रह, उपन्यास, कविताएं, संस्मरण, रसोई की किताबें, अनुवाद और संपादित ग्रंथ शामिल हैं।लीला मजूमदार की कहानियां रोजमर्रा की जिंदगी की सच्चाई को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करती थीं, लेकिन उनमें गहरा जादू और संवेदनशीलता थी। उन्होंने मजबूत महिला पात्र रचे, जो घरेलू जीवन की जटिलताओं को बखूबी उजागर करते थे। बच्चों के लिए उन्होंने सपनों भरी दुनिया बनाई, जबकि वयस्क पाठकों को पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मुद्दों पर सोचने को मजबूर किया।उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना ‘बक बध पाला’ एक हास्य-नाटक है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार भी मिला। उपन्यास ‘पाडी पिशिर बोरमी बक्शो’ पर सत्यजीत रे फिल्म बनाने की योजना बना चुके थे, बाद में अरुंधति देवी ने इसे फिल्माया। उन्होंने शेक्सपियर, जोनाथन स्विफ्ट और अर्नेस्ट हेमिंग्वे जैसे लेखकों के कार्यों का बांग्ला अनुवाद भी किया।

बिज़नेस

कीमती धातुओं की कीमतों में जबरदस्त इजाफा : सिल्वर के भाव में आया 14,530 रुपये का उछाल, जानें गोल्ड के बारे में भी

 सिल्वर के भाव में आया 14,530 रुपये का उछाल, जानें गोल्ड के बारे में भी

नई दिल्ली। देश में सोने-चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। सोमवार को चांदी की कीमत में 14,530 रुपये की बड़ी बढ़त दर्ज की गई, जिसके बाद इसका भाव 2.67 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। वहीं सोना भी 2,680 रुपये महंगा होकर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। कीमती धातुओं में आई इस तेजी ने निवेशकों और खरीदारों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।बाजार जानकारों के अनुसार, घरेलू सर्राफा बाजार में यह उछाल वैश्विक संकेतों के चलते देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती बनी हुई है। स्पॉट मार्केट में सोना 5,027.13 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। वहीं कॉमेक्स पर सोने के वायदा भाव में 1.94 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है, जिससे यह 5,179 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।चांदी की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसमें 5.42 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई है। चांदी का भाव बढ़कर 86.805 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में आई इस मजबूती का सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ रहा है।विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है। खासकर अमेरिका की व्यापार नीतियों और टैरिफ को लेकर सख्ती के संकेतों ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भी सोने-चांदी की मांग को समर्थन दिया है।बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी वैश्विक स्तर पर आर्थिक या राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर सोना और चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि बीते कुछ समय से कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है।आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए बाजार में तेजी का रुख बरकरार रह सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सोना नया रिकॉर्ड स्तर बनाएगा या कीमतों में कुछ समय के लिए ठहराव देखने को मिलेगा।

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खेल

टी-20 विश्व कप : टीम इंडिया के लिए आज का दिन करो या मरो का, इन धुरंधरों के भविष्य पर भी लटकी है तलवार

टीम इंडिया के लिए आज का दिन करो या मरो का, इन धुरंधरों के भविष्य पर भी लटकी है तलवार

चेन्नई। टी-20 विश्व कप 2026 में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए गुरुवार (26 फरवरी) का दिन ‘आर या पार’ जैसा है। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में जिम्बाब्वे राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाफ सुपर 8 का मुकाबला सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए बेहद अहम है। इससे पहले भारत को दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रीय क्रिकेट टीम और वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम से हार का सामना करना पड़ा है, जिससे समीकरण उलझ गए हैं।भारत को न सिर्फ जिम्बाब्वे को हराना होगा, बल्कि यह दुआ भी करनी होगी कि दिन के पहले मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज को मात दे। वेस्टइंडीज का नेट रन रेट 5 से अधिक है, जबकि दक्षिण अफ्रीका+3.800 पर है। भारत का नेट रन रेट -3.800 तक गिर चुका है। डिफेंडिंग चैंपियन और मेजबान होने के कारण टीम पर दोहरा दबाव है। अहमदाबाद में दोपहर 3 बजे होने वाले मुकाबले पर चेन्नई में भी सभी की नजरें टिकी रहेंगी।अगर भारत सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर होता है तो कुछ खिलाड़ियों के टी20 करियर पर बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है।अभिषेक शर्मा इस समय सबसे ज्यादा आलोचना झेल रहे हैं। चार मैचों में सिर्फ 15 रन बनाना किसी भी शीर्ष बल्लेबाज के लिए चिंता की बात है। टी20 रैंकिंग में नंबर 1 होने के बावजूद उनका हालिया प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। पहले विकेट के लिए भारत का औसत 6.80 है, जो टूर्नामेंट की 20 टीमों में सबसे कम है। हालांकि 1 जनवरी 2025 से अब तक उनके आंकड़े शानदार रहे हैंकृ30 मैचों में 1056 रन, 37.71 का औसत और 196.64 का स्ट्राइक रेट। फिर भी मौजूदा फॉर्म ने टीम की टेंशन बढ़ा दी है। बेंच पर यशस्वी जायसवाल और युवा वैभव सूर्यवंशी जैसे विकल्प मौजूद हैं।तिलक वर्मा भी तीसरे नंबर पर उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। पांच पारियों में 107 रन, 21.40 का औसत और 118.88 का स्ट्राइक रेट किसी भी नंबर-3 बल्लेबाज के लिए आदर्श नहीं माना जाता। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लापरवाह शॉट पर आउट होने के बाद उनकी आलोचना भी हुई। उनकी जगह श्रेयस अय्यर जैसे अनुभवी बल्लेबाज विकल्प हो सकते हैं।रिंकू सिंह को सीमित मौके मिले हैं। पांच मैचों में सिर्फ 29 गेंदें खेलने का मौका मिला और 24 रन ही बना सके। हालांकि क्रिकेट विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिला, इसलिए उनके प्रदर्शन का सही आकलन मुश्किल है।सबसे बड़ी चर्चा कप्तान सूर्यकुमार यादव को लेकर है। इस वर्ल्ड कप में उन्होंने 5 पारियों में 180 रन बनाए हैं, 45.00 का औसत रहा है, लेकिन 127.65 का स्ट्राइक रेट उनके करियर स्ट्राइक रेट 162.77 से काफी कम है। 35 साल की उम्र में अगर टीम बाहर होती है तो उनके भविष्य पर भी सवाल उठ सकते हैं।कुल मिलाकर, चेन्नई की यह शाम भारतीय क्रिकेट के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। जीत से उम्मीदें जिंदा रहेंगी, लेकिन हार कई करियर की दिशा बदल सकती है।

लाइफस्टाइल

प्रेग्नेंसी में इन फलों का करें सेवन : मां के साथ शिशु के लिए भी फायदेमंद

 मां के साथ शिशु के लिए भी फायदेमंद

नई दिल्ली । मां बनना जीवन का सबसे खूबसूरत और भावुक अहसास है। गर्भावस्था के इस खास सफर में मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। सही और संतुलित पोषण इस दौरान नींव की तरह काम करता है। ऐसे में सेब, अनार, संतरा और केला का नियमित सेवन मां को एनर्जी देता है। शिशु के विकास को बढ़ावा देता है और दोनों को सेहतमंद रखता है। नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, सही आहार मां की ताकत और बच्चे की अच्छी शुरुआत का आधार बनता है। इस दौरान कुछ फलों को रोजाना डाइट में शामिल करने से मां और बच्चे दोनों को भरपूर फायदा मिलता है। ये फल विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो प्राकृतिक रूप से सेहतमंद रहने में मदद करते हैं।सेब गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। इसमें फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो पाचन सुधारते हैं और कब्ज से राहत देते हैं। नियमित सेवन से बच्चे के विकास में भी मदद मिलती है।अनार हीमोग्लोबिन बढ़ाने का बेहतरीन स्रोत है। यह आयरन, फोलेट और विटामिन से भरपूर होता है, जिससे एनीमिया का खतरा कम होता है। अनार का सेवन मां को एनर्जी देता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है और बच्चे की ग्रोथ को सपोर्ट करता है। यह मॉर्निंग सिकनेस और थकान में भी राहत देता है।संतरा विटामिन सी का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है, संक्रमण से बचाता है और आयरन को एब्जॉर्ब करने में मदद करता है। संतरे में फोलेट भी होता है, जो बच्चे के ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड के विकास के लिए जरूरी है। यह हाइड्रेशन बनाए रखता है और क्रेविंग्स को कंट्रोल करता है।केला गर्भावस्था में आने वाली थकान और कमजोरी को दूर करने में मददगार और एनर्जी देता है। इसमें पोटैशियम, विटामिन बी6 और फाइबर भरपूर होता है, जो मसल क्रैंप्स रोकता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखता है और पाचन सुधारता है। केला आसानी से पच जाता है। इन सुपरफ्रूट्स को रोजाना थाली में शामिल करने से मां को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। डॉक्टर की सलाह से इन्हें संतुलित मात्रा में खाएं।

राजनीती

भारत की असली ताकत उसके किसान : ट्रेड डील को लेकर राहुल ने फिर पीएम मोदी पर किया वार, एपस्टीन फाइलों को लेकर भी बोले कांग्रेस नेता

ट्रेड डील को लेकर राहुल ने फिर पीएम मोदी पर किया वार, एपस्टीन फाइलों को लेकर भी बोले कांग्रेस नेता

कन्नूर। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद से केन्द्र सरकार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के निशाने पर है। जहां भी दौरे पर जाते हैं, वहीं इस मसले को उठाकर सरकार को कोसने से परहेज नहीं करते। अब राहुल ने केरल से ट्रेड डील को लेकर मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। राहुल गांधी ने गुरुवार को कन्नूर जिले के पेरावूर में आयोजित एक किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत की असली ताकत उसके किसान हैं और जब तक किसानों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित नहीं किया जाएगा, तब तक देश वास्तविक अर्थों में सफल नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ऐसा व्यापार समझौता करने जा रही है जिससे भारतीय कृषि और छोटे किसानों को गंभीर नुकसान हो सकता है।कृषि क्षेत्र को नजरअंदाज कर रही सरकारराहुल गांधी ने कहा कि सरकार आईटी और अन्य आधुनिक क्षेत्रों की बात तो करती है, लेकिन देश की नींव यानी कृषि क्षेत्र को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसी इमारत की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है, उसी तरह भारत की अर्थव्यवस्था किसानों पर टिकी है। अगर किसानों को कमजोर किया गया तो देश की आर्थिक संरचना भी कमजोर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हम रोज भोजन करते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि उसे उगाने और हमारी थाली तक पहुंचाने में किसानों की कितनी मेहनत लगती है।भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांतराहुल गांधी ने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रम्प ने एपस्टीन फाइलों का हवाला देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर दबाव बनाया ताकि भारत एक ऐसे व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करे, जिससे अमेरिकी कंपनियों को भारतीय कृषि बाजार में प्रवेश मिल सके। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते से भारतीय किसानों की ‘बलि’ चढ़ जाएगी क्योंकि अमेरिकी किसान बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खेती करते हैं, जबकि भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं।भारतीयों किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना होगा मुश्किलउन्होंने कहा कि अमेरिकी किसानों के पास विशाल भूमि और आधुनिक तकनीक है, जिससे वे कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकते हैं। ऐसे में यदि अमेरिकी कंपनियों को भारत में सोयाबीन, सब्जियां और फल बेचने की अनुमति दी जाती है तो भारतीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा। राहुल गांधी ने दावा किया कि पहले किसी भी प्रधानमंत्री ने अमेरिकी कृषि उत्पादों को इस तरह भारतीय बाजार में खुली पहुंच नहीं दी।

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