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ईरानः खामेनेई सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश सड़कों पर : अब तक 544 की मौत, 10 हजार से ज्यादा गिरफ्तार, 48 घंटे से ठप है इंटरनेट-फोन सेवा

अब तक 544 की मौत, 10 हजार से ज्यादा गिरफ्तार, 48 घंटे से ठप है इंटरनेट-फोन सेवा

नई दिल्ली। ईरान में दो हफ्ते से ज्यादा समय से लोगों का प्रदर्शन जारी है। खामेनेई सरकार के खिलाफ जनता सड़कों पर उतरी हुई है। 84 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ईरान में इंटरनेट सेवा बंद है और लोग फोन पर भी एक-दूसरे से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। इस बीच अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान में विरोध प्रदर्शन के दौरान अब तक 544 लोग मारे जा चुके हैं। वहीं गिरफ्तार होने वाले लोगों का आंकड़ा 10 हजार के पार जा चुका है।पहले मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि 15 दिनों से जारी इस विरोध प्रदर्शन में करीब 115 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जबकि दो हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, अब अमेरिकी राइट्स ग्रुप ने देश में बड़े पैमाने पर हो रहे सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच मरने वालों की संख्या 544 बताई है।मृतकों में 8 बच्चे भी शामिलईरान में ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स संगठन की न्यूज सर्विस, ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (एचआरएएनए), ने बताया कि पिछले 15 दिनों में प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 544 लोग मारे गए हैं। इनमें आठ बच्चे भी शामिल हैं। एजेंसी ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद 10,681 से ज्यादा लोगों को जेलों में भी भेजा गया है। बता दें, बीते दिन एक वीडियो सामने आई थी, जिसमें प्रदर्शनकारी बच्चों को टारगेट करते हुए विस्फोटक फेंकते हैं। हालांकि, वीडियो में नजर आ रहे बच्चे बाल-बाल बच गए।अमेरिका से बात करने ईरान ने भरी हामीदूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है कि ईरान ने बातचीत के लिए हामी भरी है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सरकार मामले में हस्तक्षेप के लिए संभावित सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है। इसलिए ईरान बात करने के लिए तैयार हो गया है। इससे पहले ईरानी संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिकी सेना दखल देती है तो अमेरिकी मिलिट्री और कमर्शियल बेस को बदले की कार्रवाई का टारगेट माना जाएगा।वीडियो जारी कर खामेनेई ने ट्रंप को दिखाया आईनाइससे पहले अमेरिकी मीडिया न्यूयॉर्क टाइम्स ने जानकारी दी थी कि ट्रंप को ईरान के मामले में सैन्य विकल्पों की ब्रीफिंग दी गई थी। ऐसे में ईरान की ओर से बातचीत की पहल की गई है। इससे पहले खामेनेई का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वो कहते हैं, शत्रुओं की तमाम कोशिशों के बावजूद, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान आज दुनिया में मजबूत, ताकतवर और खुशहाल है। उन लोगों ने पिछले 40 सालों में हमारे खिलाफ हर संभव एक्शन लेने की पूरी कोशिश की। उन्होंने हम पर सैन्य, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक मोर्चे पर सभी तरह के प्रहार किए, लेकिन वे हार गए और उन्हें कुछ हासिल नहीं हो पाया। आज खुदा का शुक्र है कि ईरान पर इस्लामिक रिपब्लिक का राज है। यह इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान है।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

बार्डर 2ः मेकर्स ने रिलीज किया जाते हुए लम्हों का नया सांग : पुराने गाने के री-क्रिएटेड वर्जन ने बढ़ाया दर्शकों का उत्साह

पुराने गाने के री-क्रिएटेड वर्जन ने बढ़ाया दर्शकों का उत्साह

मुंबई। बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म बॉर्डर 2 अपनी रिलीज से पहले ही चर्चा में बनी हुई है। सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी की स्टार कास्ट ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। फिल्म का पहला गाना घर कब आओगे पहले ही रिलीज हो चुका है। अब मेकर्स ने फिल्म का दूसरा री-क्रिएटेड गाना जाते हुए लम्हों का ऑडियो वर्जन रिलीज किया है, जो पुराने गाने की भावनाओं को बनाए रखते हुए नई ताजगी के साथ पेश किया गया है। जाते हुए लम्हों गाना मूल फिल्म बॉर्डर के आइकॉनिक गाने का रीक्रिएटेड वर्जन है। इस रीमेक को विशाल मिश्रा ने अपनी आवाज दी है, वहीं ऑरिजनल सॉन्ग के सिंगर रूप कुमार राठौड़ की आवाज भी गाने में शामिल है। इसमें मिथुन ने म्यूजिक दिया है, जिन्होंने पहले भी श्घर कब आओगेश् के लिए अपनी संगीत प्रतिभा का जादू दिखाया था। मिथुन का कहना है कि इस गाने में भावनाओं को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी प्राथमिकता थी। उन्होंने बताया कि गाने की धुन धीरे-धीरे उभरती है और सुनने वाले को सैनिकों और उनके परिवारों की जुदाई, त्याग और उम्मीद से जोड़ देती है।बॉर्डर 2 फिल्म में दर्शकों को युद्ध और देशभक्ति की कहानी देखने को मिलेगी। फिल्म में मोना सिंह, सोनम बाजवा, आन्या सिंह और मेधा राणा भी महत्वपूर्ण किरदार निभा रही हैं। फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है और इसे भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म की कहानी सैनिकों की जिंदगियों, उनके संघर्ष और उनके परिवारों की भावनाओं को दर्शाती है।फिल्म से पहले रिलीज हुए गाने घर कब आओगे को दर्शकों ने बेहद पसंद किया था। इस गाने ने सैनिकों के त्याग और उनके परिवारों की भावनाओं को सामने लाया और लोगों के दिलों को छू लिया। इसके बाद फिल्म का दूसरा रोमांटिक गाना इश्क दा चेहरा रिलीज हुआ था, जो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। अब जाते हुए लम्हों के रिलीज होने से फिल्म के संगीत का जादू और बढ़ गया है और दर्शकों में फिल्म को लेकर उत्सुकता और अधिक बढ़ गई है।बॉर्डर 2 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।

बिज़नेस

शेयर बाजार : शेयर प्राइस, टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस क्या होता है? निवेशकों के लिए यह सब जानना जरूरी

शेयर प्राइस, टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस क्या होता है? निवेशकों के लिए यह सब जानना जरूरी

मुंबई। शेयर बाजार में हर निवेशक के लिए कुछ बुनियादी शब्दों (टर्म्स) को समझना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि बाजार के ये टर्म्स ही निवेशकों के ज्ञान और विश्वास को बढ़ाते हैं और इसी के आधार पर उनके मुनाफे की सीढ़ी ऊंचाई छूती है। इनमें सबसे अहम हैं शेयर प्राइस, टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस। अगर निवेशक इन तीनों को सही तरह से समझ ले, तो वह नुकसान को कम कर सकता है और समझदारी से निवेश का फैसला ले सकता है।दरअसल, शेयर प्राइस उस कीमत को कहा जाता है, जिस पर किसी कंपनी का शेयर स्टॉक मार्केट में खरीदा या बेचा जाता है। यह कीमत हर सेकेंड बदलती रहती है और कंपनी के कारोबार, मुनाफे, खबरों, मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी का शेयर बाजार में 500 रुपए पर ट्रेड कर रहा है, तो वही उसका मौजूदा शेयर प्राइस कहलाता है।एक्सपर्ट्स का कहना है कि टारगेट प्राइस वह अनुमानित कीमत होती है, जहां तक किसी शेयर के पहुंचने की उम्मीद की जाती है। निवेशक या एक्सपर्ट यह तय करते हैं कि अगर शेयर सही दिशा में चला यानी ऊपर की ओर भागा, तो उसे किस कीमत पर बेचकर मुनाफा लिया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर आपने किसी शेयर को 200 रुपए में खरीदा है और आपको लगता है कि आने वाले समय में यह 300 रुपए तक जा सकता है, तो यही उस शेयर का टारगेट प्राइस कहलाएगा।वहीं, स्टॉप लॉस वह कीमत होती है जिस पर निवेशक नुकसान बढ़ने से पहले शेयर बेचने का फैसला करता है। इसका मकसद नुकसान को सीमित रखना होता है। मान लीजिए आपने 200 रुपए में कोई शेयर खरीदा और तय किया कि अगर यह 170 रुपए से नीचे गया तो आप शेयर बेच देंगे। ऐसे में 170 रुपए आपका स्टॉप लॉस होगा। इस तरह टारगेट प्राइस मुनाफा कमाने में मदद करता है और स्टॉप लॉस नुकसान से बचाता है।बाजार के जानकारों का कहना है कि शेयर प्राइस से आपको शेयर मार्केट की मौजूदा स्थिति का पता चलता है। टारगेट प्राइस आपको लालच से बचाता है और सही समय पर मुनाफा लेने में मदद करता है। वहीं स्टॉप लॉस आपको बड़े नुकसान से बचाता है। इन तीनों का सही इस्तेमाल निवेश को सुरक्षित और अनुशासित बनाता है।एक्सपर्ट्स का कहना है कि शेयर बाजार में बेहतर निवेश के लिए सिर्फ सही शेयर चुनना ही काफी नहीं होता, बल्कि निवेश के लिए सही रणनीति बनानी भी जरूरी होती है। शेयर प्राइस, टारगेट प्राइस और स्टॉप लॉस को समझकर और अपनाकर निवेशक जोखिम को कम कर सकता है और लंबे समय में बेहतर परिणाम हासिल कर सकता है।

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16 साल के Owen Cooper ने Golden Globe 2026 जीतकर रचा इतिहास #tv27newsdigital #hindinews #tv27news

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MP का सियासी संग्राम TV27 News के साथ #tv27newsdigital #currentaffairs #latestupdate #news

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अनुष्का शर्मा ने साझा किया अनुभव  #hindinews #latestnews #breakingnews #tv27news #tv27newsdigital

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ड्रीम गर्ल का बेरुखी भरा अंदाज,रवैये पर छिड़ी बहस  #hindinews #latestnews  #tv27newsdigital

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रानी मुखर्जी की 'मर्दानी 3' अब 30 जनवरी को होगी रिलीज  #hindinews #news #latestnews #tv27newsdigital

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बिहार की सड़कें अब लाएंगी इनाम, गड्ढा दिखाओ पैसा कमाओ! #hindinews #news #latestnews #tv27newsdigital

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खेल

मलेशिया ओपन में भारत के अभियान पर लगा ब्रेक : सेमीफाइन में चीनी प्लेयर से हारी सिंधु, फैंस निराश

सेमीफाइन में चीनी प्लेयर से हारी सिंधु, फैंस निराश

क्वालालंपुर। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु मलेशिया ओपन से बाहर हो गई हैं। शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल में उन्हें दुनिया की नंबर 2 खिलाड़ी चीन की वांग झियी से 16-21, 15-21 से हार का सामना करना पड़ा। उनकी इस हार से फैंस को निराश हो गए हैं।पीवी सिंधु दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट वांग झियी के खिलाफ दबाव नहीं बना सकीं। पैर की चोट से उबरने के बाद अपना पहला टूर्नामेंट खेल रही सिंधु ने दूसरे गेम में 11-6 की बढ़त भी गंवा दी। हार के साथ ही टूर्नामेंट में उनके सफर का निराशाजनक अंत हो गया। शुरुआती मैच में सिंधु ने लगाए जोरदार शाॅटसिंधु ने वांग झियी को मुकाबले की शुरुआत में कड़ी टक्कर दी। उन्होंने जोरदार शॉट लगाए और अपने खास क्रॉस-कोर्ट स्मैश लगाकर 5-2 की बढ़त बना ली, लेकिन वांग के हल्के टच ने उन्हें लगातार अंक दिलाकर बराबरी करने में मदद की। पहले गेम में एक समय सिंधु 9-7 से आगे चल रही थीं, लेकिन चीनी खिलाड़ी ने एक बार फिर वापसी की और इंटरवल पर सिंधु के नेट पर शॉट चूकने पर एक अंक की मामूली बढ़त बना ली।वांग ने लगातार आक्रामक शॉट्स से सिंधु पर बढ़ाया दबाव मैच फिर से शुरू होने के बाद स्कोर एक समय 13-13 से बराबर था। 15-14 पर, वांग ने लगातार आक्रामक शॉट्स से दबाव बढ़ाया। वह 18-14 पर पहुंच गईं, एक जबरदस्त रैली में एक अंक गंवाया, फिर चार गेम अंक हासिल किए और ओपनर खत्म किया क्योंकि सिंधु वाइड चली गईं।दूसरे गेम में दो गलतियां सिंधु को पड़ी भारीदूसरे गेम में सिंधु दो गलतियों के बाद 1-3 पर फिसल गईं, लेकिन उन्होंने वापसी की, और 6-3 से आगे निकलने के लिए जोरदार रैली बनाईं। वांग ने अंतर कम किया, फिर भी सिंधु ने बीच के समय में अपनी विरोधी खिलाड़ी को तेज एंगल से कोनों की ओर धकेलकर अपना दबदबा बनाया, जिससे ब्रेक तक 11-6 की बढ़त हो गई। वांग ने दोबारा गेम शुरू होने के बाद जोरदार वापसी की, तेज रैलियों में हिस्सा लिया, लेकिन सिंधु ने लगभग परफेक्ट नेट शॉट्स से जवाब दिया और 13-9 से आगे रहीं। वांग ने फिर वापसी की, जब सिंधु के शॉट्स बाहर और नेट में चले गए, और 13-13 से बराबरी कर ली। इसके बाद 16-13 की बढ़त के साथ वांग झियी ने मैच अपने नाम कर लिया।

लाइफस्टाइल

जटामांसी : बालों का झड़ना रोकने और ग्रोथ बढ़ाने की आयुर्वेदिक औषधि, जानिए फायदे

बालों का झड़ना रोकने और ग्रोथ बढ़ाने की आयुर्वेदिक औषधि, जानिए फायदे

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, गलत खान-पान और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स के कारण बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं, ऐसे में जटामांसी एक प्राकृतिक समाधान के रूप में सामने आती है। यह बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें मज़बूत बनाती है और हेयर फॉल को धीरे-धीरे कम करने में मदद करती है। जटामांसी आयुर्वेद की एक बेहद प्रभावशाली जड़ी-बूटी है। यह हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है और इसकी जड़ औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती है। पुराने समय से ही जटामांसी का इस्तेमाल बालों के झड़ने, रूसी और कमजोर बालों की समस्याओं में किया जाता रहा है।जटामांसी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह स्कैल्प में रक्त संचार को बेहतर बनाती है। जब सिर की त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है तो बालों के रोमछिद्रों तक जरूरी पोषक तत्व आसानी से पहुंचते हैं, जिससे नए बाल उगने की प्रक्रिया तेज होती है। यही कारण है कि जटामांसी को हेयर ग्रोथ बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है। इसके अलावा, यह वात दोष को संतुलित करती है जो आयुर्वेद के अनुसार बालों के झड़ने का एक मुख्य कारण होता है। नियमित उपयोग से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और टूटना कम होता है।रूसी, खुजली और स्कैल्प की जलन से परेशान लोगों के लिए भी जटामांसी बहुत फायदेमंद है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-फंगल गुण स्कैल्प को शांत करते हैं और रूसी की समस्या को धीरे-धीरे खत्म करने में मदद करते हैं। साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बालों को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं, जिससे समय से पहले बालों का सफेद होना कम हो सकता है। यह बालों के तंतुओं को मजबूती देता है, दोमुंहे बालों की समस्या घटाता है और बालों में प्राकृतिक चमक लाता है।जटामांसी का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है। इसके तेल को नारियल या तिल के तेल में मिलाकर हफ्ते में दो-तीन बार स्कैल्प पर मालिश करना बेहद लाभकारी होता है। वहीं जटामांसी पाउडर को दही या पानी में मिलाकर हेयर मास्क की तरह लगाया जा सकता है। हालांकि इसका अत्यधिक या गलत इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए बेहतर है कि इसका उपयोग सीमित मात्रा में और किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह से किया जाए।

राजनीती

अहिंसा संस्कार पदयात्राः : आचार्य बोले- हमारा मकसद मानवता का संदेश देना, बापू और विनोवा भावे से प्रेरित होकर निकाल रहे यात्रा

 आचार्य बोले- हमारा मकसद मानवता का संदेश देना, बापू और विनोवा भावे से प्रेरित होकर निकाल रहे यात्रा

बहरोड़। आचार्य प्रसन्न सागर महाराज इन दिनों ‘अहिंसा संस्कार पदयात्रा’ निकाल रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न तबकों के लोगों से मुखातिब होकर उन्हें मानवता का संदेश देकर उनके अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। आचार्य का मानना है कि अब वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और विनोबा भावे से प्रेरित होकर यह यात्रा निकाल रहे हैं। उन्हें विश्वास है कि आगामी दिनों में यह यात्रा लोगों के बीच में एक अमिट छाप छोड़ेगी। आचार्या ने इस यात्रा के बारे में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में पूरी जानकारी दी। 2 अक्टूबर को गुवाहाटी और असम से शुरू हुई थी यात्राउन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर 2004 को इस यात्रा का शुभारंभ गुवाहाटी और असम से किया था। तब वहां के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने हमसे सवाल किया था कि आखिर इस यात्रा का उद्देश्य क्या है? आप इस यात्रा के जरिए आम लोगों के बीच में क्या साबित करना चाहते हैं और उनके बीच किस तरह का संदेश प्रचारित करना चाहते हैं? तो हमने बताया कि आज की तारीख में लोगों के बीच में नैतिकता और भाईचारा समाप्त हो चुका है। हम इस यात्रा के जरिए लोगों के बीच इसी नैतिकता को जिंदा करना चाहते हैं। निसंदेह अगर हम ऐसा करने में सफल हुए, तो हम यह मान लेंगे कि हमारी यह यात्रा सार्थक साबित हुई।मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुकी है नैतिकता और भाईचाराआचार्य ने कहा कि आज लोगों के बीच में नैतिकता और भाईचारा अपनी मरणासन्न स्थिति में पहुंच चुकी है। हमारा मकसद इस यात्रा के जरिए इसी भाईचारे और नैतिकता को जिंदा करना है। इस नैतिकता को हम विभिन्न तरीके से जिंदा कर सकते हैं, जिसमें सबसे प्रमुख मैं समझता हूं कि पेड़ लगाना है। आप अपने घर के पास एक ऐसा पेड़ लगाइए जिससे आपके पड़ोसी को भी उसकी छांव मिले। ऐसा करके आप अपनी नैतिकता को जिंदा रख सकते हैं।मनुष्य की दुर्दशा पशुओं से भी बदतरउन्होंने कहा कि अगर मनुष्य चाहे तो वह अपने स्तर को बढ़ा सकता है। आज की तारीख में मनुष्य किस दोयम दर्जे में पहुंच चुका है, इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। आज मनुष्य की दुर्दशा पशुओं से भी बदतर हो चुकी है। ना ही उसके खाने का कोई निर्धारित समय है और ना ही नहाने का। उसकी दुर्गति अपने चरम पर पहुंच चुकी है, लेकिन वह इसमें किसी भी प्रकार का सुधार करता हुआ नजर नहीं आ रहा है।खाने के लिए जी रहा आज का मनुष्यआचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि आप हम जैसे साधुओं की स्थिति देख लीजिए। हम लोग दिन में एक बार ही भोजन ग्रहण करते हैं और 30 से 35 किलोमीटर बहुत ही आराम से चल लेते हैं। हमें इसमें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है। वहीं, आज की तारीख में मनुष्य की दुर्गति का अंदाजा आप महज इसी से लगा सकते हैं कि वो एक दिन में कई बार भोजन करता है। लेकिन, वो मंदिर तक जाने की जहमत नहीं उठाता। ऐसी स्थिति में आप ईश्वर के प्रति उसकी निष्क्रियता का अंदाजा सहज ही लगा सकते हैं। आज का मनुष्य खाने के लिए जी रहा है और मरने का इंतजार कर रहा है।

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