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मप्र में सूरज के हीट अटैक का दौर : नर्मदापुरम का मार्च के दूसरे सप्ताह में ही चढ़ा पारा, खूब तप रहे रतलाम-मंडला भीमोटापा सिर्फ बढ़ता वजन नहीं : कई बीमारियों की बड़ी वजह, आसान उपाय संग ऐसे करें कंट्रोलसिनेमा का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं : संवेदनशीलता भी बड़ी जिम्मेदारी : प्रकाश झाउसने रन आउट करने का कर लिया था फैसला, : मेहदी हसन की हरकत पर सलमान आगा ने निकाली भड़ास, सुलह को लेकर कही यह बातयूनियन कार्बाइड फैक्ट्री : हाईकोर्ट ने मप्र सरकार से मांगी कार्ययोजना, 23 मार्च को पेश करना होगा दूषित मिट्टी और भूजल के आंकलन का ब्योरा

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रिटेल निवेशकों के लिए सबसे बेहतर रणनीति धैर्य : वैश्विक अस्थिरता पर सेबी चीफ की सलाह, बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में न दें प्रतिक्रिया

वैश्विक अस्थिरता पर सेबी चीफ की सलाह, बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में न दें प्रतिक्रिया

नई दिल्ली। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत के पूंजी बाजार लगातार मजबूत और व्यापक होते जा रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी में एक मीडिया कार्यक्रम में बोलते हुए सेबी प्रमुख ने रिटेल निवेशकों को सलाह दी कि वे बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया न दें।उन्होंने कहा, रिटेल निवेशकों के लिए सबसे बेहतर रणनीति धैर्य बनाए रखना है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक रूप से, बड़े वैश्विक संकटों के बाद बाजार में फिर से सुधार देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि भारत के पूंजी बाजार आकार, विविधता और मजबूती के मामले में तेजी से बढ़ रहे हैं। पांडे ने कहा, हमारे बाजार लगातार गहरे और विविध हो रहे हैं और उनकी मजबूती भी बढ़ रही है, लेकिन जैसे-जैसे बाजार का आकार और जटिलता बढ़ती है, वैसे-वैसे वे वैश्विक घटनाओं से भी अधिक प्रभावित होने लगते हैं।वैश्विक बाजारों में अस्थिरता को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी बदलाव और ऊर्जा संकट अनिश्चितता में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक संबंधों को आकार दे रहे हैं। मध्य पूर्व में संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा बड़ा असर उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है, जिसका प्रभाव वैश्विक पूंजी बाजारों पर भी पड़ा है। पांडे के अनुसार, आज के वित्तीय बाजारों की एक खासियत यह है कि उनमें अस्थिरता ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि जानकारी और खबरें तेजी से पूरी दुनिया में फैलती हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसे दौर स्थायी नहीं होते।अत्यधिक अस्थिरता के दौर हमेशा के लिए नहींउन्होंने कहा, एक बात स्पष्ट है कि अत्यधिक अस्थिरता के दौर हमेशा के लिए नहीं रहते। वैश्विक बाजारों में हो रहे संरचनात्मक बदलावों का जिक्र करते हुए सेबी चीफ ने कहा कि आर्थिक विभाजन, बदलते व्यापार मार्ग और तकनीक की बढ़ती भूमिका बाजारों को तेजी से बदल रही है। उन्होंने बताया कि एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स के कारण बाजार पहले से कहीं ज्यादा तेजी से काम कर रहे हैं।आज के दौर में बहुत तेजी से फैलती है जानकारीसेबी चेयरमैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जानकारी बहुत तेजी से फैलती है और राय उससे भी तेज, जिसके कारण बाजार अक्सर खबरों और कथाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगते हैं। उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बाजार की तेजी के साथ उसकी स्थिरता भी बनी रहे।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

सिनेमा का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं : संवेदनशीलता भी बड़ी जिम्मेदारी : प्रकाश झा

 संवेदनशीलता भी बड़ी जिम्मेदारी : प्रकाश झा

मुंबई । फिल्म निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा अक्सर गंभीर विषयों पर बेबाकी से अपनी राय रखते नजर आते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने समाज में दमन और क्रांति के बीच गहरा संबंध बताते हुए कहा कि जब दमन एक निश्चित हद पार कर जाता है, तो क्रांति होना तय हो जाता है। यह किसी ट्रेन दुर्घटना की तरह अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे सुलगते हुए फूट पड़ती है।प्रकाश झा ने बताया, "क्रांति स्वाभाविक और कुदरती प्रक्रिया है। ज्वालामुखी फटेगा ही। दमन से अंदर बहुत कुछ जमा होता रहता है और जब बर्दाश्त की सीमा पार हो जाती है, तो वह फूट पड़ता है। हम अचानक नींद से नहीं जागते। क्रांतियां भी धीरे-धीरे बनती हैं। समय सबसे बड़ा शिक्षक है। अगर हम समय के साथ जिएं और उसे समझें, तो वह हमें सब कुछ सिखा देता है।" प्रकाश झा का मानना है कि सिनेमा समाज को आईना दिखाने का माध्यम है। यह दमन, असमानता और अन्याय जैसे मुद्दों पर बात कर सकता है, लेकिन हमेशा जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ।प्रकाश झा ने सिनेमा की जिम्मेदारी पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि फिल्ममेकर को हर संवाद, हर छवि और हर कहानी की संवेदनशीलता समझनी चाहिए। सिनेमा का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ना और कुछ खास भावनाएं जगाना भी है। अगर आप कुछ कहना चाहते हैं, तो कहिए, लेकिन संवेदनशीलता के साथ। लोगों से कतराना नहीं चाहिए, अस्थिरता नहीं फैलानी चाहिए। रचनात्मक तरीके से बातचीत करनी चाहिए, इसे दिलचस्प और आकर्षक बनाए रखना चाहिए।"फिल्ममेकर ने थिएटर और ओटीटी के बीच बढ़ते अंतर पर भी बात की। वे खुद जमशेदपुर में एक मल्टीप्लेक्स चलाते हैं, इसलिए उन्हें भारत के थिएटर इकोसिस्टम की जमीनी हकीकत अच्छी तरह पता है। उन्होंने कहा कि बड़े बजट वाली मनोरंजक फिल्में स्क्रीन शेयरिंग में छोटी फिल्मों को पीछे छोड़ देती हैं, लेकिन हर फिल्म का अपना मार्केट होता है और हर फिल्म के लिए जगह है। ओटीटी पर सीधे रिलीज का फैसला ज्यादातर व्यावसायिक कारणों से लिया जाता है, क्योंकि थिएटर में रिलीज के जोखिम और खर्च ज्यादा होते हैं।

बिज़नेस

शेयर बाजार में आई सुनामी जैसी तेजी : ट्रंप का बयान बना टर्निंग पॉइंट, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों बने राॅकेट

 ट्रंप का बयान बना टर्निंग पॉइंट, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों बने राॅकेट

नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और युद्ध की आशंकाओं के कारण पिछले कुछ दिनों से गिरावट झेल रहे भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार वापसी देखने को मिली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर हालात में नरमी के संकेत मिलने के बाद बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटा और प्रमुख सूचकांक तेज उछाल के साथ खुले।मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,566 के मुकाबले करीब 800 अंकों की तेजी के साथ 78,375 पर खुला। शुरुआती कारोबार में ही इसमें और तेजी आई और यह 900 अंक से अधिक चढ़कर लगभग 78,526 के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 भी मजबूती के साथ 24,280 पर खुला और कुछ ही देर में 24,303 के स्तर तक पहुंच गया।यूएस की भूमिका को लेकर वैश्वि बाजारों में अस्थिरतादरअसल, बीते कुछ दिनों से ईरान और इजरायल के बीच युद्ध की स्थिति और यूनाइटेड स्टेट की भूमिका को लेकर वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता बनी हुई थी। सोमवार को भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स करीब 1,352 अंक गिरकर 77,566 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी कमजोर होकर 24,028 के स्तर पर बंद हुआ था।ट्रंप का दावाः ईरानी सेना हो चुकी है काफी कमजोर मंगलवार को बाजार में आई तेजी के पीछे डोनाल्ड ट्रंप के बयान को अहम माना जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी सेना काफी कमजोर हो चुकी है और युद्ध अपने अंतिम चरण में हो सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में तनाव कुछ कम हुआ और निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला।90-91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा कच्चा तेलइसी के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज गिरावट आई। हाल ही में 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा कच्चा तेल घटकर करीब 90-91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती है, जिससे शेयर बाजार में खरीदारी बढ़ी। मजबूत वैश्विक संकेतों का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा। जापान और साउथ कोरिया समेत कई एशियाई बाजार तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए। इसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दिया।कई शेयरों में दिखी तेजीतेजी के माहौल में कई प्रमुख शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इंटरग्लोब एविएशन इंडिगो एशियन पेंट्स टाइटन कंपनी वीकेएसजे और एचडीएफसी बैंक जैसे लार्जकैप शेयर बढ़त में रहे। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की खरीदारी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में शेयर बाजार में और स्थिरता देखने को मिल सकती है।

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खेल

1983-2011 के सामने फीका टी20 वर्ल्ड कप! : महशहूर कमेंटेटर के बयान से मचा बवाल

महशहूर कमेंटेटर के बयान से मचा बवाल

नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब टीम इंडिया ने अपने नाम कर लिया है। अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में बीते रविवार को खेले गए फाइनल मैच में भारत ने 96 रनों से शानदार जीत हासिल की और तीसरी बार ये खिताब अपने नाम कर लिया। लेकिन टीम इंडिया के चैंपियन बनने के बाद पूर्व क्रिकेटर और मौजूदा दौर के मशहूर कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने कुछ ऐसा बयान दे दिया है, जिसको लेकर वह सुर्खियों में आ गए हैं। दरअसल संजय मांजरेकर की नजर में वनडे के 2 विश्व कप (1983, 2011) की तुलना में टी20 विश्व कप (2007, 2024 और 2026) की जीत कम अहमियत रखती है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, ष्समय के साथ हमें हर साल दिए जाने वाले इन विश्व कप खिताबों को सही नजरिए से देखना होगा। भारत की टी20 विश्व कप जीत, कपिल देव की कप्तानी में 1983 और धोनी की कप्तानी में 2011 की 50 ओवर की विश्व कप जीत के मुकाबले, अपनी असली चुनौती और पवित्रता के मामले में कहीं नहीं ठहरती।भारतीय टीम के टी20 विश्व कप 2026 जीतने के ठीक बाद आया मांजरेकर का यह बयान उन्हें फिर से आलोचना के घेरे में ले आया है। मांजरेकर को भारतीय क्रिकेट फैंस की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय क्रिकेट टीम ने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में वेस्टइंडीज को हराकर अपना वनडे विश्व कप जीता था। दूसरा वनडे विश्व कप जीतने में भारत को 28 साल का समय लगा। यह इंतजार 2011 में समाप्त हुआ जब एमएस धोनी की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को हराकर विश्व कप जीता। भारत ने अपना पहला टी20 विश्व कप एमएस धोनी की कप्तानी में ही 2007 में जीता था। दूसरे टी20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम को 17 साल का इंतजार करना पड़ा। रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को फाइनल में हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता था। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने 8 मार्च को अहमदाबाद में न्यूजीलैंड को फाइनल में हराकर टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता। टीम इंडिया लगातार 2 टी20 विश्व कप और कुल 3 टी20 विश्व कप जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी। इसके अलावा अपने घर में टी20 विश्व कप जीतने का रिकॉर्ड भी टीम इंडिया के नाम दर्ज हो गया।

लाइफस्टाइल

मोटापा सिर्फ बढ़ता वजन नहीं : कई बीमारियों की बड़ी वजह, आसान उपाय संग ऐसे करें कंट्रोल

 कई बीमारियों की बड़ी वजह, आसान उपाय संग ऐसे करें कंट्रोल

नई दिल्ली। मोटापा अब सिर्फ दिखावे की समस्या नहीं रहा, बल्कि यह हृदय रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर समेत कई गंभीर बीमारियों का बड़ा कारण बन चुका है। ऐसे में बढ़ती वजन की समस्या से परेशान लोगों को हेल्थ एक्सपर्ट कुछ आसान उपाय की सलाह देते हैं, जो मोटापे की समस्या को खत्म करने में कारगर हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, यह समस्या अब बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों में तेजी से फैल रही है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जंक फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना और अनियमित जीवनशैली मोटापे की मुख्य वजह बन गई है। बच्चे मोबाइल-टीवी पर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे उनकी शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है। वहीं, बड़ों में ऑफिस की नौकरी, तनाव और फास्ट फूड की आदत ने मोटापे को और बढ़ावा दिया है।ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा सिर्फ वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर में सूजन पैदा करता है, इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ाता है और धमनियों में फैट जमा होने से हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एनएचएम ने लोगों को मोटापे से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपाय बताए हैं।वास्तव में मोटापा एक ऐसी समस्या है, जिसे दवाइयों से ज्यादा जीवनशैली में बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों के दर्द और यहां तक कि अन्य गंभीर रोगों का कारण भी बन सकता है।इसके लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या शारीरिक गतिविधि करें। तेज चलना, साइकिल चलाना, योग या खेलकूद इसमें शामिल हो सकता है। संतुलित और पौष्टिक आहार लें। घर का बना खाना, ताजी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम तेल-चीनी का इस्तेमाल करें। जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं। स्क्रीन टाइम को सीमित करें। खासकर बच्चों को टीवी, मोबाइल या कंप्यूटर पर दो घंटे से ज्यादा समय न बिताने दें। पर्याप्त नींद लें। रात को 7-8 घंटे की अच्छी नींद मोटापे को नियंत्रित रखने में बहुत मदद करती है। एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं। लिफ्ट की बजाय सीढ़ियां चढ़ें, छोटे-छोटे काम खुद करें और बैठे रहने की आदत छोड़ें।

राजनीती

वल्लभ भवन दलालों का अड्डा बना, : जीतू ने सरकार को घेरा, कहा- भाजपा जो आरोप कांग्रेस पर लगाती थी, वही अब लग रहे स्वयं पर

जीतू ने सरकार को घेरा, कहा- भाजपा जो आरोप कांग्रेस पर लगाती थी, वही अब लग रहे स्वयं पर

भोपाल। मध्यप्रदेश में 6 साल पहले कांग्रेस की कमलनाथ सरकार पर भाजपा द्वारा वल्लभ भवन को दलालों का अड्डा बनाने के आरोप लगाए जाते थे, अब वही आरोप कांगे्रस भाजपा सरकार पर लगा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि वल्लभ भवन मंत्रालय को दलालों का अड्डा बन गया है, जहां आम जनता के काम बिना दलालों के नहीं होते। प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल है और कई विश्वविद्यालय डिग्री बेचने वाले संस्थान बन गए हैं। कमलनाथ सरकार में जीतू पटवारी खुद मंत्री थे और उच्च शिक्षा विभाग की कमान थी। दरअसल, पटवारी ने प्रदेश में मौजूदा स्थिति पर सरकार को घेरा हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के हितों के खिलाफ काम कर रही है और उसकी किसान विरोधी नीति समझ से परे है। पटवारी ने बढ़ती गैस कीमतों पर भी केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि गलत नीतियों के कारण आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। पटवारी ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है और सरकार की नीतियों से आम जनता परेशान है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में कांग्रेस की सरकार बनेगी और प्रदेश को कर्ज के बोझ से मुक्त कर विकास की नई दिशा दी जाएगी।बीना उपचुनाव करके बताए भाजपाबीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने के बाद सदस्यता से जुड़ा मामला विधानसभा सचिवालय और उच्च न्यायालय के बीच चल रहा है। सप्रे की सदस्यता को लेकर अभी भी स्थिति साफ नहीं हुई है। इस बीच पटवारी ने कहा कि भाजपा इस मामले में एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय तक लोगों को गुमराह कर रही है। यदि भाजपा में दम है तो निर्मला सप्रे का चुनाव कराकर दिखाए।

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