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उपकार नहीं, सेवा करना हमारा धर्म : RSS चीफ ने मप्र से दिया संदेश, कहा - स्वयं के दु:ख के साथ समाज व देश का दु:ख दूर करना भारत का स्वभाव

 RSS चीफ ने मप्र से दिया संदेश, कहा  - स्वयं के दु:ख के साथ समाज व देश का दु:ख दूर करना भारत का स्वभाव

इंदौर/कसरावद । सभी परमेश्वर के स्वरूप है, अत: उपकार नहीं, सेवा करना हमारा धर्म है। हमारे यहां चैरिटी नहीं, अपितु सेवा है। जीवन में सेवा के जो भी अवसर मिलें, उसमें सेवा करना चाहिए। सेवा से हमारी शुद्धि होती हैं। जिसके पास जो हो, वो देना चाहिए। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनरावजी भागवत ने बुधवार को कसरावद के लेपा स्थित श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में आयोजित 'मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण विषय पर व्यक्त किए।डॉ. भागवत ने कहा कि मनुष्य देखकर ही सीखता है, सुनकर या बोलकर नहीं। भारत की यात्रा में यह सत्य सिद्ध हुआ कि सुख बाहर नहीं, अपितु मनुष्य के अंदर ही है। भारत में मनुष्य के अंदर की खोज की यात्रा प्रारंभ हुई। मनुष्य के अंदर की यात्रा से हमें शाश्वत सुख प्राप्त होता है। हमारे पूर्वजों ने अनुभव के आधार पर बताया कि माया का आधार अध्यात्म ही होना चाहिए। ईश्वर ने मनुष्य को संवेदना दी है। मनुष्य की संवेदना दूसरे के सुख-दु:ख को जानती है। किसी की उपेक्षा करके सुख भोगना, मनुष्य की संवेदना में नहीं है। जीवन मूल्यों के लिए जीवन में शिक्षा और शुचिता का आवश्यक है। मनुष्य को शिक्षा इसीलिए चाहिए कि उसे स्वयं का दु:ख दूर तो करना ही है, किंतु समाज और देश का भी दु:ख दूर करना है, यह स्वभाव भारत का स्वभाव है। ऐसा धर्म जब हमने दुनिया को दिया, तब भारत बना। परतंत्रता में भी हमारा स्वाभाव नहीं बदला।भारत का अर्थ स्वभाव हैभारतीय संदर्भों में शिक्षा के बारे में डॉ. भागवत ने कहा कि जन्मांतर का ज्ञान मनुष्य के मस्तिष्क में है, इसीलिए जो ज्ञान अंदर है, उसे बाहर निकालना चाहिए। टंट्या मामा और गाडगे महाराज जैसे महापुरुषों ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी, किंतु आज भी उनका सम्मान है। हमारे अंदर दैवीय गुण निहित है, उन्हें बाहर निकालना होगा उसका ज्ञान प्राप्त करना होगा। मनुष्य को विश्व मानवता का ज्ञान दिलाने वाली शिक्षा, आत्मनिर्भर बनाने वाली शिक्षा, श्रम की प्रतिष्ठा वाली शिक्षा ही वास्तविक शिक्षा है। व्यक्ति की बजाय कर्म की मान्यता और परिणाम की बजाय प्रामाणिक और उत्कृष्ट कार्य करना, भारत का स्वभाव है। भारत का अर्थ केवल भूगोल नहीं, अपितु स्वभाव है। भारत की उन्नति का मतलब जल, जंगल, नदी, पहाड़, जानवर और मनुष्य सभी की उन्नति है। मंच पर भारती ताई ठाकुर, संस्था के उपाध्यक्ष महेश डाबक एवं संस्था के अध्यक्ष नीतीन करमलकर उपस्थित थे। कार्यक्रम में गोष्ट-नर्मदालयाची आडियोबुक का विमोचन भी हुआ।संस्थान 15 वर्षों से शिक्षा व कौशल विकास क्षेत्र में कार्य कर रहायह संस्थान पिछले 15 वर्षों से शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में कार्यरत है। श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 17-20 जनवरी को संपन्न हुआ, तत्पश्चात निकेतन और प्रकल्प के दर्शनार्थ पूजनीय सरसंघचालकजी का प्रवास लेपा में हो रहा है। संस्थान वनवासी क्षेत्रों के कुपोषित बच्चों को शिक्षा एवं कौशल विकास के कार्य करती है।निमाड़ अभ्युदय विद्यालय में 800 बच्चे अध्ययनरतसंस्थान वनवासी बच्चों के लिए कक्षा दसवीं तक एवं बेसिक रूरल टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा शिक्षा का प्रबंध कर रहा है। निमाड़ अभ्युदय के विद्यालयों में लगभग आठ सौ बच्चे अध्ययनरत है। अपनी नर्मदा परिक्रमा में वनवासी बच्चों का शिक्षा का संकल्प करने पर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह संस्थान प्रारंभ किया। रक्षा मंत्रालय की नौकरी छोड़ कर सुश्री भारती ठाकुर दीदी ने यह प्रकल्प प्रारंभ किया। दीदी को नागा साधु को पुनर्वास में मिला आश्रम दान में प्राप्त हुआ, जहां गौशाला सहित ये प्रकल्प चल रहा है।यह थे उपस्थितइस गरिमामय अवसर पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा ताई महाजन, प.पू. प्रतापे महाराज, भारती दीदी, मेवालाल पाटीदार, नितिन करमलकर, महेश दाबक, पद्मश्री महेश शर्मा, प्रांत प्रचारक राजमोहन तथा क्षेत्र प्रचारक स्वप्निल कुलकर्णी, प्रांत संघचालक डॉ. शास्त्री, प्रांत कार्यवाह विनित नवाथे, श्रीनाथ गुप्ता, राकेश भावसार, विकास दवे सहित कार्यक्रम में अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी एवं खरगोन जिलों से लगभग 300 गणमान्य अतिथि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

50 की उम्र में लीसा रे ने बदली 'बीच बॉडी' की परिभाषा, : बोलीं- 'अब मंजूरी नहीं, आजादी जरूरी'

बोलीं- 'अब मंजूरी नहीं, आजादी जरूरी'

मुंबई । फिल्म और फैशन की दुनिया में फिटनेस और लुक्स काफी मायने रखते हैं। ऐसे में एक्ट्रेसेस के लिए उम्र बढ़ने के साथ यह दबाव और भी बढ़ता जाता है, लेकिन कुछ अभिनेत्रियां ऐसी हैं, जिन्होंने इन दबावों को नहीं माना और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीती हैं। अभिनेत्री लीसा रे उन्हीं में से एक हैं। 50 साल की उम्र में उन्होंने 'बीच बॉडी' की सोच को नए मायने दिए हैं और इसे आत्मस्वीकृति, आजादी और आत्मसम्मान से जोड़कर देखा है। लीसा रे ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर बीच से अपनी कुछ तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों के कैप्शन में उन्होंने लिखा, ''एक समय था जब बीच पर खूबसूरत दिखने का मतलब एक तय इमेज से जोड़ा जाता था, रेड स्विमसूट, रेड लिपस्टिक और हर हाल में परफेक्ट दिखने का दबाव। साल 1991 के ग्लैडरैग्स कवर ने मेरी यही छवि लोगों के मन में बसा दी थी और इसी छवि के सहारे मैंने अपना करियर भी बनाया। लेकिन, आज मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने आज रखती है।''उन्होंने आगे लिखा, ''शरीर समय के साथ बदला है, जिंदगी में उतार-चढ़ाव आए हैं, बीमारियों से लड़ी हूं और खुद को फिर से खड़ा किया है। अब दूसरों की मंजूरी से ज्यादा सुकून अपने आप को स्वीकार करने में मिलता है। उन असंभव सुंदरता मानकों से बाहर निकलना ही मुझे असली राहत है। ये मानक महिलाओं के लिए बनाए ही ऐसे गए थे कि उन्हें पूरा करना मुश्किल लगता है।'' लीसा रे ने हॉलीवुड अभिनेत्री पामेला एंडरसन का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "पामेला कभी रेड स्विमसूट में दिखाई देने वाली सबसे बड़ी फैंटेसी मानी जाती थीं। लेकिन आज वह खुद उस छवि को तोड़ चुकी हैं और अपनी पहचान खुद गढ़ रही हैं।"लीसा ने कहा, ''मुझे ग्लैमर या मेकअप से कोई परेशानी नहीं है। शूट, रील्स और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए सजना-संवरना मजेदार लगता है। बीच मेरे लिए वह जगह है, जहां मैं पूरी तरह नेचुरल रहना चाहती हूं।'' उन्होंने कहा, ''1990 के दशक में सनस्क्रीन का ज्यादा चलन नहीं था। मैं कई बार धूप में बुरी तरह झुलसी हूं। आज उसकी छाप मेरी त्वचा पर दिखती है। लेकिन यह मेरी कमजोरी नहीं है। यह सब उनकी जिंदगी का हिस्सा है और मैं इसके साथ पूरी तरह सहज हूं।''

बिज़नेस

शेयर मार्केट को रास नहीं आ रहा निर्मला का बजट : आज भी बदली-बदली नजर आ रही सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

आज भी बदली-बदली नजर आ रही सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

मुंबई। शेयर बाजार में बीते कारोबारी दिन रविवार को भारी गिरावट देखने को मिली थी। यही नहीं सेंसेक्स-निफ्टी देखते ही देखते क्रैश हो गए थे। शेयर बाजार में बजट का असर सोमवार को भी जारी रहा। सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स की चाल बदली-बदली नजर आई है, कभी ग्रीन, तो कभी रेड जोन में ये कारोबार करते दिखे।बीएसई सेंसेक्स 167.26 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 80,555.68 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 28.95 अंक या 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,796.50 पर खुला। हालांकि कुछ ही मिनटों बाद बाजार हरे निशान में आ गया। खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9.34 बजे) 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 331.67 अंकों यानी 0.41 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,054.61 पर था, तो वहीं एनएसई निफ्टी 72.80 अंकों यानी 0.29 प्रतिशत की उछाल के साथ 24,898.25 पर था।व्यापक बाजार की बात करें तो शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.30 प्रतिशत तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.41 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। वहीं विभिन्न सेक्टर्स में निफ्टी मेटल और निफ्टी ऑयल एंड गैस को छोड़कर अन्य सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में थे।सेंसेक्स पैक में शुरुआती कारोबार के दौरान एनटीपीसी, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाइटन और ट्रेंट टॉप लूजर्स वाले शेयरों में शामिल थे, जिनमें 1.79 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। जबकि लार्सन एंड टुब्रो, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और इंडिगो 2.5 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स रहे।रविवार, 1 फरवरी को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा और अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफ एंड ओ) पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में बढ़ोतरी करने की घोषणा की और फ्यूचर्स पर एसटीटी बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया। तो वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम पर एसटीटी को 0.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया।इस बड़ी घोषणा के बाद घरेलू बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली और प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी धराशायी हो गए। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 79,899.42 के निचले स्तर तक पहुंच गया था और करीब 3,000 अंकों की इंट्राडे गिरावट देखने को मिली। वहीं, निफ्टी50 भी फिसलकर 24,572 तक आ गया।चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने बताया कि पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी ने एक मजबूत बेयरिश कैंडल बनाई है और यह 200-डे ईएमए से नीचे बंद हुआ है, जो ट्रेंड के कमजोर होने का संकेत देता है। फिलहाल 24,950-25,000 के बीच मजबूत रेजिस्टेंस है, जबकि 24,650-24,700 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। आरएसआई घटकर 31 पर आ गया है, जो ओवरसोल्ड स्थिति दिखाता है। वहीं, इंडिया वीआईएक्स में 10.73 प्रतिशत की तेजी आई और यह 15.09 पर पहुंच गया, जिससे बाजार में बढ़ी हुई घबराहट साफ दिखती है।एक्सपर्ट ने आगे कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती वोलैटिलिटी को देखते हुए निवेशकों और ट्रेडर्स को फिलहाल चुनिंदा और अनुशासित रणनीति अपनाने की सलाह दी जाती है। गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही नजर रखें। निफ्टी में 25,000 के ऊपर मजबूत और टिकाऊ ब्रेकआउट आने के बाद ही नई लॉन्ग पोजिशन बनाना बेहतर रहेगा, क्योंकि यही स्तर बाजार की धारणा में वास्तविक सुधार का संकेत देगा।

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खेल

100 फीसदी होगा भारत-पाकिस्तान के बीच हाइवोल्टेज मुकाबला : टीम इंडिया के पूर्व स्पिनर ने किया दावा, पीसीबी कितने दिन में मारेगा पल्टी, इसका भी किया खुलासा

टीम इंडिया के पूर्व स्पिनर ने किया दावा, पीसीबी कितने दिन में मारेगा पल्टी, इसका भी किया खुलासा

नई दिल्ली। टी-20 विश्वकप का काउंटडाउन शुरू हो गया है। 7 फरवरी से टूर्नामेंट का आगाज होगा। खास बात यह है कि 15 फरवरी को भारत-पाकिस्तान के बीच हाईवोल्टेज मुकाबला होना है, लेकिन पाकिस्तान ने भारत के साथ होने वाले मैच का बायकाट करने का फैसला किया है। पाकिस्तान के इस रवैए पर टीम इंडिया के पूर्व स्पिनर रविचन्द्रन अश्विन ने बड़ा बयान दिया है। बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच यह हाईवोल्टेज मुकाबला 15 फरवरी को कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में निर्धारित है। रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि पाकिस्तान आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत के खिलाफ खेलने से इनकार करने के अपने फैसले से पीछे हटेगा। अश्विन के मुताबिक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अंततः अपना रुख बदलेगा और बहुप्रतीक्षित भारत-पाकिस्तान मुकाबला तय समय पर खेला जाएगा। अपने यूट्यूब चैनल पर रविचंद्रन अश्विन ने कहा, 100 प्रतिशत मैच होगा। मुझे लगता है पाकिस्तान चार-पांच दिनों में पीछे हटेगा। ब्रॉडकास्टर्स को भारी नुकसान होगा, आईसीसी के बाकी सदस्य भी नुकसान झेलेंगे और बैठक में पाकिस्तान पर दबाव बनाएंगे। पीएसएल के लिए खिलाड़ियों को शायद एनओसी भी नहीं मिले। यह खेल भावना के खिलाफः अश्विनरविचंद्रन अश्विन ने साफ कहा कि किसी खास प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ खेलने से मना करना खेल की भावना के खिलाफ है. अश्विन कहते हैं, भारत-पाकिस्तान मैच न्यूट्रल वेन्यू पर है, इसलिए वेन्यू का कोई मुद्दा नहीं है. यह कहना कि हम किसी एक टीम से नहीं खेलेंगे, स्वीकार्य नहीं है। बता दें कि पाकिस्तान सरकार ने टीम को श्रीलंका जाने की अनुमति दी है, लेकिन भारत के खिलाफ ना खेलने की घोषणा ने विवाद खड़ा कर दिया है। इस पर रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि अगर पाकिस्तान अपने फैसले पर कायम रहता है तो उसे आर्थिक और कूटनीतिक दोनों तरह का नुकसान झेलना पड़ सकता है।अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 का दिया उदाहरणरविचंद्रन अश्विन ने आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाकिस्तान मैच का एक उदाहरण दिया। अश्विन ने बताया कि जब क्वालिफिकेशन का गणित जुनून और भावनाओं से टकराता है, तो टीमें कैसे गलत फैसले लेने लगती हैं. अश्विन ने कहा, श्मान लीजिए एक टीम को क्वालिफाई करने के लिए 33 ओवर में रनचेज करना है. यह एक सामान्य गणित है. अगर आप 33 ओवर में नहीं बना सकते, तो आप क्वालिफाई नहीं करेंगे. ऐसे में यह सोचने की जरूरत है कि आप 250 रन कैसे बनाएंगे।ऐसे नहीं खेला जाता खेलरविचंद्रन अश्विन का मानना है कि जब टीम के भीतर संदेश यह होता है कि किसी भी हालत में भारत से नहीं हारना है, तब रणनीति से ज्यादा भावनाएं फैसले लेने लगती हैं, जो अंततः टीम के ही खिलाफ जाता है। अश्विन ने बताया, संदेश बिल्कुल साफ था कि जो भी हो जाए, भारत से हारना नहीं है। खेल ऐसे नहीं खेला जाता। आपको इस सोच से खेलना चाहिए कि हमें क्वालिफाई करना है, वर्ल्ड कप जीतना है।रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि पाकिस्तान को हल्के में नहीं लेना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि उसकी सबसे बड़ी चुनौती मानसिकता है। अश्विन कहते हैं, अगर पाकिस्तान फाइनल तक पहुंच जाए तो मुझे हैरानी नहीं होगी. लेकिन उसकी सबसे बड़ी दुश्मन उनकी अपनी सोच है। भारत के खिलाफ ना हारने का दबाव ही उसे नुकसान पहुंचा सकता है।आईसीसी ने पीसीबी को कड़े परिणामों की चेतावनीइस पूरे विवाद के बीच आईसीसी ने पीसीबी को कड़े परिणामों की चेतावनी दी है, साथ ही भारत के खिलाफ मैच ना खेलने के फैसले के दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करने को कहा है। अब तक पीसीबी ने आईसीसी को कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है, जिससे गतिरोध बना हुआ है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान ग्रुप-ए में हैं, जहां उनके साथ नामीबिया, नीदरलैंड्स और यूएसए भी शामिल हैं. दोनों टीमें 7 फरवरी से अपने अभियान की शुरुआत करेंगी।

लाइफस्टाइल

सेहत : ब्रेन फॉग कहीं दिल की बीमारी का संकेत तो नहीं? जानें वैज्ञानिक कारण

ब्रेन फॉग कहीं दिल की बीमारी का संकेत तो नहीं? जानें वैज्ञानिक कारण

नई दिल्ली । आज की तेजतर्रार जिंदगी में अक्सर लोग थकान, तनाव और भूलने की आदत को आम परेशानी मान लेते हैं। लेकिन, कभी‑कभी यह केवल मानसिक थकान नहीं होती, बल्कि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। कई डॉक्टर मानते हैं कि बार‑बार ध्यान भटकना, नाम भूलना या दिमाग का भारी लगना सिर्फ दिमाग की कमजोरी नहीं, बल्कि दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। हार्ट डिजीज हमेशा सीने में दर्द या सांस फूलने के जरिए ही सामने नहीं आती। कई बार यह धीरे‑धीरे दिमाग के लक्षणों के जरिए सामने आती है। ब्रेन फॉग दिमाग की उस हालत को कहते हैं जब आपको चीजें याद नहीं रहतीं, सोचने में दिक्कत होती है, और आप खुद को थोड़ा सुस्त महसूस करते हैं। अक्सर लोग इसे उम्र बढ़ने या तनाव का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।दिमाग और दिल के बीच गहरा संबंध है। जब दिल सही से काम करता है, तो दिमाग भी सही ढंग से काम करता है और जब दिल कमजोर होता है, तो दिमाग भी थक जाता है। यही वजह है कि ब्रेन फॉग सिर्फ दिमाग की समस्या नहीं, बल्कि दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसे पहचानना, जांच कराना और समय पर इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है।डॉक्टर बताते हैं कि यह केवल सतही कमजोरी नहीं होती, बल्कि कई मामलों में दिमाग तक पहुंचने वाले ब्लड सर्कुलेशन में कमी का कारण होती है। जब दिल ठीक से ब्लड पंप नहीं करता, तो दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता, जिससे मेमोरी, फोकस, और सोचने‑समझने की क्षमता प्रभावित होती है।जनरल ऑफ सेरेब्रल ब्लड फ्लो एंड मेटाबॉलिज्म में 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दिल की हल्की कमजोरी भी दिमाग तक ब्लड फ्लो घटा सकती है। इसका असर सीधे याददाश्त, ध्यान और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ता है। अगर आप अक्सर भूलते हैं, ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते या सोचने में सुस्ती महसूस करते हैं, तो यह सिर्फ दिमाग की समस्या नहीं, बल्कि दिल की चेतावनी भी हो सकती है।ऐसे में अपने दिल की जांच कराएं। छोटे‑छोटे बदलाव जैसे ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट या ब्लड फ्लो का निरीक्षण करना आपके लिए बड़े फायदे ला सकता है।

राजनीती

राहुल ने मीडिया के सामने लहराई नरवणे की अप्रकाशित बुक : दावा- चीनी टैंकों पर हमला करना चाहती हमारी सेना, पर....

दावा- चीनी टैंकों पर हमला करना चाहती हमारी सेना, पर....

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की किताब को मीडिया के सामने पेश करते हुए दावा किया कि हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वे भारत की सीमा में घुस आए थे। राहुल गांधी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा, वे कहते हैं कि यह किताब मौजूद नहीं है, लेकिन यह रही वह किताब। भारत के हर युवा को यह देखना चाहिए कि यह किताब मौजूद है। यह मिस्टर नरवणे की किताब है। यह जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब है, लेकिन मुझे कहा गया है कि मैं इसे कोट नहीं कर सकता हूं। किताब के हवाले से कांग्रेस सांसद ने कहा, इसमें एक लाइन प्रमुख है, जिसमें सेना प्रमुख से कहा गया कि जो उचित समझो, वो करो।नरवणे को किसी ने नहीं दिया जवाबराहुल गांधी ने कहा, जब पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन कर बताया कि चीनी टैंक कैलाश रिज (सीमा क्षेत्र) तक पहुंच गए हैं, तो हमें क्या करना है? लेकिन तब राजनाथ सिंह का कोई जवाब नहीं आया। नरवणे ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा, एनएसए से पूछा और फिर से राजनाथ सिंह से पूछा। किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। नरवणे ने उन्हें फिर फोन किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने कहा- मैं टॉप से पूछता हूं। टॉप से ऑर्डर आया कि जब चीन की सेना हमारे बॉर्डर के अंदर आए तो बिना हमसे पूछे फायर न करें।कांग्रेस सांसद ने कहा, हमारी सेना चीन के टैंकों पर हमला करना चाहती थी, क्योंकि वे भारत की सीमा में घुस आए थे। लेकिन इस मुश्किल समय में टॉप ने मैसेज दिया कि जो उचित समझो, वो करो। मतलब टॉप ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की और सेना से कहा कि आपको जो करना है करो, मेरे बस की नहीं है। राहुल गांधी ने आगे कहा, पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने अपनी किताब में साफ लिखा है, मुझे सच में बहुत अकेला महसूस हुआ। पूरे सिस्टम ने मुझे छोड़ दिया था। कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि अगर लोकसभा में प्रधानमंत्री आते हैं तो वह इस किताब को स्वयं उन्हें सौंपेंगे।

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