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अजय हुड्डा और कविता जोशी की केमिस्ट्री : 'बालम माकोडे वर्गा' में देसी अंदाज से खींचा ध्यानमप्र में बिजली कंपनियों की मनमानी : स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं को थमा रहीं हजारों का बिल, शिकातयों के आंकड़ा एक लाख के पारवल्लभ भवन दलालों का अड्डा बना, : जीतू ने सरकार को घेरा, कहा- भाजपा जो आरोप कांग्रेस पर लगाती थी, वही अब लग रहे स्वयं परशैक्षणिक उपयोग के लिए आरक्षित जमीन पर फर्जीवाड़ा : 40,600 वर्गफीट भूमि कब्जाने वालों पर ईओडब्ल्यू ने कसा शिकंजा, दर्ज की एफआईआर

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अमेरिका, इज़रायल और ईरान तनाव : युद्ध की आग से गले की प्यास पर संटक!

युद्ध की आग से गले की प्यास पर संटक!

प्रसन्न शहाणे अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध का तनाव बढ़ता जा रहा है…जिसने दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। क्रूड ऑयल की आपूर्ति बाधित होना भारत के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। तो दूसरी ओर एक और बड़ी चिंता पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर को लेकर सामने आ रही है। क्योंकि युद्ध का बढ़ता तनाव गर्मी की तपिश में अब आपकी प्यास पर भारी पड़ सकता है…अमेरिका,इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध से केवल डीजल ,पेट्रोल ,एलएनजी ,सीएनजी की दिक्कतें नहीं बढ़ रही है बल्कि इस युद्ध का सीधा असर आपकी प्यास पर भारी पड़ सकता है ,,ये युद्ध गर्मियों में आपके कंठ को तर करने वाली पानी की बोतल को बाजार से गायब करने की ताकत भी रखता है। गर्मियों की दस्तक के साथ ही आग उगलता सूरज लोगों के कंठ सुखाने लगा है… और तपती गर्मियों में शायद आपको अपनी प्यास बुझाने के लिए पहले से ज्यादा जद्दोजहद करनी पड़े। वजह कोई कुदरती अकाल नहीं, बल्कि इंसानी ज़िद और युद्ध है। अमेरिका और ईरान के बीच गहराता तनाव अब समुद्र के रास्ते होते हुए भारत की प्लास्टिक इंडस्ट्री के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। दरअसल, खाड़ी देशों में युद्ध की आग धधकने और क्रूड ऑयल की सप्लाई बाधित होने से इसके बाय-प्रोडक्ट्स का उत्पादन प्रभावित होने लगा है। खासतौर पर प्लास्टिक इंडस्ट्री पर संकट की आहट सुनाई देने लगी है। बाय-प्रोडक्ट के रूप में बनने वाले प्लास्टिक के दानों से पीने के पानी की बोतलें बनाई जाती हैं… और इन्हीं ग्रेन्यूल्स की सप्लाई महज दो बड़ी कंपनियां देश में करती है । जिसकी उपलब्धता अब बाजार में दिन-ब-दिन कम होती जा रही है। प्लास्टिक का दाना, जिसे हम रेज़िन कहते हैं, सीधे तौर पर कच्चे तेल का बाय-प्रोडक्ट है। देश में बोतलबंद पानी बनाने वाले बड़े ब्रांड्स तो शायद इस झटके को कुछ हफ्तों तक सह जाएं, लेकिन असली संकट उन छोटी इकाइयों पर है जो हर शहर और कस्बे में बोतलबंद पानी मुहैया कराती हैं। भोपाल में बोतलबंद पानी बनाने वाली लाल आयन एक्सचेंज के एमडी आर. के. रवि ने बताया कि लागत सिर्फ पानी की नहीं है, बल्कि उस बोतल और ढक्कन की भी है। अगर कच्चा माल इसी तरह महंगा होता रहा और सप्लाई रुकी रही, तो छोटी यूनिट्स के लिए प्रोडक्शन जारी रखना नामुमकिन हो जाएगा। हम सप्लाई और मांग के बीच फंसे हुए हैं।चलिए अब आपको बताते हैं कि भारत में पैकेज्ड पानी का बाजार कितना बड़ा है और कितनी तेजी से बढ़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार —6 साल पहले दैनिक पानी की खपत लगभग 15 करोड़ लीटर थी।2021 में वार्षिक खपत 23,605 मिलियन लीटर थी।2026 तक बढ़कर 2,744.47 करोड़ लीटर (लगभग 75 मिलियन लीटर दैनिक खपत) होने का अनुमान है।एक अनुमान के अनुसार हर महीने करीब 450 करोड़ बोतल पानी की खपत होती है।भारत में लगभग 12% शहरी परिवार बोतलबंद पानी का उपयोग करते हैं।उत्तर भारत 32.31% बाजार हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा बाजार है।जबकि पश्चिम भारत सबसे तेज गति से बढ़ रहा है।लगभग 92% से अधिक बाजार हिस्सेदारी के साथ PET (पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट) बोतलें सबसे प्रमुख हैं।मार्केटलाइन के अनुसार, 2022 में भारत का पैकेटबंद पानी का बाजार लगभग 905 अरब रुपये का था। अनुमान है कि यह बाजार 2027 तक 10.3% की CAGR से बढ़कर लगभग 1,480 अरब रुपये तक पहुंच जाएगा…भारत इस क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ता पैकेटबंद पानी का बाजार है…जो पूर्वानुमानित विकास दर के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ रहा है। लेकिन रॉ मटेरियल की कमी इस बाजार पर भारी संकट बनकर टूट सकती है। इसे लेकर आम जनता और बोतल सप्लायर्स ने भी चिंता व्यक्त की है। - हालांकि युद्ध को लेकर दिन-ब-दिन बढ़ते संकट के बीच अब कंपनियां कुछ नए प्रयोग करने के मूड में भी हैं। क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को अचानक बंद कर देना कई लोगों के रोजगार को भी प्रभावित कर सकता है लिहाजा कुछ पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर बनाने वाले अब प्लास्टिक की बोतलों की जगह कांच की बोतलों को बाजार में उतारने की व्यावहारिकता पर गंभीरता से सोच रहे हैं ।उपयोग करने पर विचार कर रहे हैं।संकट सिर्फ महंगाई का नहीं, बल्कि उपलब्धता का भी है। अगर सप्लाई चेन टूटी, तो आने वाले महीनों में बोतलबंद पानी बाजार से नदारद हो सकता है। एक तरफ उद्यमी काम बंद करने की कगार पर हैं, तो दूसरी तरफ आम आदमी यह सोचकर परेशान है कि क्या अब प्यास बुझाना भी उसकी पहुंच से बाहर हो जाएगा? साफ है कि सरहदों की लड़ाई अब हमारी थाली और पानी की बोतल तक आ पहुंची है… और इसके परिणाम क्या हो सकते हैं, इसे सोचकर आम आदमी डरा हुआ हैप्लास्टिक बनने की प्रक्रिया * कच्चा माल: सबसे पहले पेट्रोकेमिकल रिफाइनरियों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस को परिष्कृत किया जाता है, जिससे एथिलीन और प्रोपलीन जैसे छोटे अणु या मोनोमर प्राप्त होते हैं।* पॉलिमराइजेशन  इन छोटे अणुओं (मोनोमर) को एक विशेष प्रक्रिया के जरिए आपस में जोड़कर लंबी श्रृंखलाएं बनाई जाती हैं, जिन्हें 'पॉलिमर' कहते हैं।* दैनिक रूप में ढालना: तैयार प्लास्टिक पॉलिमर को अक्सर छोटे दानों (pellets) के रूप में उत्पादकों को भेजा जाता है।* आकार देना इन दानों को पिघलाकर, रंग और अन्य रसायन मिलाकर इंजेक्शन मोल्डिंग या ब्लो मोल्डिंग जैसी मशीनों का उपयोग करके बाल्टी, बोतल, कुर्सी जैसी वस्तुओं में ढाला जाता है

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

अजय हुड्डा और कविता जोशी की केमिस्ट्री : 'बालम माकोडे वर्गा' में देसी अंदाज से खींचा ध्यान

'बालम माकोडे वर्गा' में देसी अंदाज से खींचा ध्यान

मुंबई । हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में अभिनेत्री और डांसर कविता जोशी का अपना एक अलग ही बोलबाला है। फैंस उन्हें प्यार से 'देसी क्वीन' भी कहते हैं। हरियाणवी गानों और फिल्मों के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है और सोशल मीडिया पर भी उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। शुक्रवार को कविता जोशी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक नई क्लिप साझा की है, जो उनके नए हरियाणवी गाने 'बालम माकोडे वर्गा' की शूटिंग से जुड़ी है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई वीडियो में 'बालम माकोडे वर्गा' गाने की शूटिंग के कुछ खास पल दिखाई दे रहे हैं। क्लिप में देसी सेटअप, हरियाणवी माहौल और कलाकारों का पारंपरिक अंदाज देखने को मिल रहा है। वीडियो में कविता जोशी का लुक भी काफी आकर्षक लग रहा है। गाने की लाइन्स के साथ उनके हाव-भाव और देसी अंदाज इसे और दिलचस्प बना देते हैं। वहीं इस गाने में उनके साथ हरियाणवी कलाकार अजय हुड्डा भी नजर आ रहे हैं। दोनों की केमिस्ट्री को लोग काफी पसंद कर रहे हैं।गाने की बात करें तो, गाना टी-सीरीज हरियाणवी नामक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है। इस गाने में विनू गौर और सुशीला तखर ने अपनी दमदार आवाज दी है। वहीं, संगीत विनू गौर ने दिया है, जबकि गीत अजय हुड्डा ने लिखे हैं।कविता जोशी ने हरियाणवी फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में लंबे समय से काम किया है। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 2007 में आई हरियाणवी फिल्म 'मन्नू धाकड़ मैन' से की थी। इसके बाद वह कई फिल्मों और म्यूजिक वीडियो में नजर आईं और धीरे-धीरे हरियाणवी दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गईं। उनकी फिल्मों की लिस्ट में 'सोनोटेक', 'झलक', 'नटखट', 'लाड़ साहब', 'हम दो भगोड़े', 'हद हो गई संजना', 'कट्टू कट्टू', 'फक्कड़ गोरी', 'कुनबा' जैसी कई फिल्में शामिल हैं।इसके अलावा उन्होंने 'विकास की बहू', 'फजीता', 'उलझ पलझ', 'निकडू सेनापति', 'जोड़ा ठाठ का', 'डिअर वर्सेज बियर', 'अकड़ 2', 'धाकड़ लवर' और 'ये कैसा पल दो पल का प्यार' जैसी फिल्मों में भी काम किया है। फिल्मों के अलावा कविता जोशी टेलीविजन पर भी नजर आ चुकी हैं। वह क्राइम आधारित टीवी शो 'क्राइम पेट्रोल' में काम कर चुकी हैं।

बिज़नेस

औंधे मुंह गिरे सेंसेक्स-निफ्टी : घरेलू शेयर बाजार फिर सहमा, निवेशकों को लगा करोड़ों का चूना

घरेलू शेयर बाजार फिर सहमा, निवेशकों को लगा करोड़ों का चूना

नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार दूसरे दिन बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। शुक्रवार को बाजार खुलते ही दबाव में आ गया और कुछ ही घंटों में निवेशकों की संपत्ति में करीब 7 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। इससे पहले गुरुवार को भी निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। गिरावट के चलते बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर लगभग 433 लाख करोड़ रुपये रह गया है।कारोबार के दौरान सेंसेक्स 923.58 अंक यानी करीब 1.21 प्रतिशत गिरकर 75,117.6 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं निफ्टी 50 भी 310 अंक या 1.32 प्रतिशत टूटकर 23,323 के स्तर पर आ गया। बैंकिंग शेयरों में भी भारी दबाव रहा और बैंक निफ्टी में 1000 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 26 लाल निशान में रहे, जबकि केवल 4 शेयरों में ही बढ़त देखने को मिली। टाटा स्टील, बीईएल, इंडिगो और एलएंडटी जैसे दिग्गज शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।बाजार की गिरावट के कई कारणबाजार की इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आया उछाल है। दरअसल ईरान द्वारा दो तेल टैंकरों पर हमले की खबर के बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते सप्लाई बाधित होने की आशंका पैदा हो गई। इसी कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, जिससे वैश्विक बाजारों में भी दबाव बढ़ गया।इन कंपनियों के शेयर गिरेवैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी भारतीय बाजार की धारणा को प्रभावित किया। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 225, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी भारी बिकवाली रही और डॉव जोन्स 700 अंकों से अधिक गिरकर इस साल पहली बार 47,000 के स्तर से नीचे बंद हुआ।विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर बना रही दबावइसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को एफआईआई ने भारतीय बाजार में 7,049 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशक करीब 39,000 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं।निवेशकों की नजर अमेरिका की बैठक परअब निवेशकों की नजर अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक पर टिकी हुई है, जो 17 मार्च को होने वाली है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल यह उम्मीद की जा रही है कि फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन उसके संकेतों का असर वैश्विक बाजारों पर जरूर पड़ेगा।

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खेल

संन्यास की अटकलों पर लगा विराम : सूर्या ने तय किए अपने अगले दो बड़े लक्ष्य, टी20 विश्व कप जीत कर धोनी-रोहित के क्लब में भी हुए शामिल

सूर्या ने तय किए अपने अगले दो बड़े लक्ष्य, टी20 विश्व कप जीत कर धोनी-रोहित के क्लब में भी हुए शामिल

अहमदाबाद। अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने इतिहास रच दिया है। एमएस धोनी और रोहित शर्मा के बाद सूर्यकुमार भारत के ऐसे तीसरे कप्तान बन गए हैं जिनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने टी20 विश्व कप जीता है। भारतीय टीम ने रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर टी20 विश्व कप का खिताब जीता। भारत की खिताबी जीत के बाद सूर्यकुमार यादव ने अपने अगले दो लक्ष्य भी स्पष्ट कर दिए हैं। 35 साल के हो चुके सूर्यकुमार यादव की विश्व कप के बाद संन्यास की अटकले लगाई जा रही थीं। मैच के बाद मीडिया से बात करते हुए भारतीय कप्तान ने इन तमाम अटकलों को खारिज करते हुए अपने अगले दो बड़े लक्ष्य स्पष्ट कर दिए। सूर्या के बयान से हुआ स्पष्टसूर्यकुमार यादव ने कहा, मेरा अगला लक्ष्य 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में ओलंपिक गोल्ड जीतना है। साथ ही, उसी साल हमें अपने टी20 वर्ल्ड कप खिताब का बचाव भी करना है। इसे भूलिएगा मत। सूर्या के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कम-से-कम अगले दो साल वह कहीं नहीं जाने वाले हैं। 2024 में सूर्या को सौंपी गई थी कप्तानीसूर्यकुमार यादव को टी20 विश्व कप 2024 के बाद इस फॉर्मेट की कप्तानी सौंपी गई थी। उनका लक्ष्य 2026 में खिताब को अपने घरेलू दर्शकों के सामने बचाना था, और इसमें वह सफल रहे। सूर्यकुमार आईसीसी के पूर्ण सदस्य देशों वाले कप्तानों में सबसे सफल कप्तान बन गए हैं। कुल 52 टी20 मैचों में उन्होंने कप्तानी की है, जिनमें टीम इंडिया ने 42 मैच जीते हैं। 8 मैचों में हार मिली है, और 2 मैचों का परिणाम नहीं आया है। सूर्या की जीत का प्रतिशत 80.77 है। दूसरे स्थान पर रोहित शर्मा हैं। सूर्या की छोटी पारियों ने कई मैचों में टीम को संभालाटी20 विश्व कप 2026 के पहले मैच में यूएसए के खिलाफ नाबाद 84 रन की पारी खेल टीम इंडिया को जीत दिलाने वाले सूर्या बाद के मैचों में बेशक बड़ी पारियां न खेल पाए हों, लेकिन उनकी छोटी पारियों ने कई मैचों में टीम को संभाला और बड़े स्कोर की नींव रखी। सूर्यकुमार यादव ने विश्व कप की 9 मैचों की पारियों में 30.25 की औसत से 242 रन बनाए। सैमसन और ईशान के बाद वह टीम के तीसरे श्रेष्ठ स्कोरर रहे।

लाइफस्टाइल

स्ट्रोक के लक्षणों को न करें नजरअंदाज : 'बचाव' फॉर्मूला से बनेगी बात

'बचाव' फॉर्मूला से बनेगी बात

नई दिल्ली । स्ट्रोक या ब्रेन अटैक एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है। यह तब होता है जब मस्तिष्क तक खून पहुंचने में रुकावट आ जाती है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। ऐसे में हर मिनट मायने रखता है, क्योंकि जितनी जल्दी इलाज मिले, उतनी बेहतर रिकवरी की संभावना होती है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) स्ट्रोक के लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह देता है, क्योंकि समय पर पहचान और त्वरित कार्रवाई से जान बचाई जा सकती है। ऐसे में एनएचएम आसान और कारगर बचाव फॉर्मूला के बारे में जानकारी देता है। स्ट्रोक के मुख्य लक्षणों को याद रखने का सबसे आसान तरीका है 'बचाव'।स्ट्रोक में देरी मतलब मस्तिष्क में स्थायी नुकसान है। इसके लिए तुरंत अस्पताल पहुंचने से क्लॉट-बस्टिंग दवाएं या अन्य इलाज दिए जा सकते हैं, जो रिकवरी में मदद करते हैं। स्ट्रोक से बचाव के लिए ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें, धूम्रपान-शराब छोड़ें, नियमित व्यायाम करें और संतुलित आहार लें। वहीं, 'बचाव' फॉर्मूला लक्षणों को आसानी से समझाता है-ब मतलब बाजू (बाहों में कमजोरी): व्यक्ति से दोनों बाहें ऊपर उठाने को कहें। अगर एक बाजू नीचे गिर जाए या कमजोर लगे, तो यह स्ट्रोक का संकेत है।च मतलब चेहरा (चेहरा असमान): मुस्कुराने को कहें। अगर चेहरे का एक हिस्सा लटक जाए या असमान दिखे, तो ध्यान दें।आ मतलब आवाज (बोलने में कठिनाई): व्यक्ति से कोई सरल वाक्य बोलने या दोहराने को कहें। अगर आवाज अस्पष्ट, तुतलाती हो या बोलना मुश्किल हो, तो यह बड़ा खतरा है। व मतलब वक्त (समय): ऊपर के कोई भी लक्षण दिखें तो तुरंत समय बर्बाद न करें। 108 पर कॉल करें, एम्बुलेंस बुलाएं और नजदीकी अस्पताल (जहां सीटी स्कैन उपलब्ध हो, जैसे जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज) पहुंचें।हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, ये लक्षण अचानक दिखते हैं और ज्यादातर शरीर के एक तरफ प्रभावित होते हैं। अन्य संकेतों में अचानक संतुलन बिगड़ना, आंखों में धुंधलापन या गंभीर सिरदर्द शामिल हो सकता है। स्ट्रोक को 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है, क्योंकि कभी-कभी बिना चेतावनी के आ जाता है, लेकिन 'बचाव' फॉर्मूला से 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में जल्दी पहचान संभव है।

राजनीती

बजट सत्र का दूसरा चरणः एलपीजी क्राइसेस की गूंज संसद तक : चर्चा की मांग पर अड़ा विपक्ष, सांसदों के निलंबन पर भी मचाया शोर, स्पीकर ने दी नसीहत

चर्चा की मांग पर अड़ा विपक्ष, सांसदों के निलंबन पर भी मचाया शोर, स्पीकर ने दी नसीहत

नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को एलपीजी और 8 सांसदों के निलंबन को लेकर हंगामा हुआ। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्ष के सदस्यों का हंगामा जारी रहा। इसके कारण स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। शुक्रवार सुबर 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस के सांसद वेल के नजदीक पहुंच गए। उन्होंने एलपीजी संकट को लेकर चर्चा की मांग उठाई। इसके साथ ही, 8 सांसदों के निलंबन को वापस लेने के लिए हंगामा किया।स्पीकर ने विपक्षी सांसदों को शांत कराने की कोशिशस्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों को शांत कराने की कोशिश करते हुए कहा, मैंने पहले भी आग्रह किया था और फिर से आग्रह कर रहा हूं कि प्रश्नकाल सदन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। आज भी प्रतिपक्ष के 8 सदस्यों के प्रश्न सूचीबद्ध हुए हैं। प्रश्नकाल के अंदर देश के मुद्दे और क्षेत्र की समस्याएं उठती हैं, तो वहीं सरकार की जवाबदेही तय होती है। इसीलिए आग्रह है कि प्रश्नकाल के अंदर सभी को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए।उन्होंने विपक्षी सदस्यों को लेकर कहा, वे बोलते हैं कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए, उन्हें सदन में बोलने दिया जाए, लेकिन जब बोलने का अवसर दिया जाता है तो उस समय आप बोलते नहीं हैं और सदन में गतिरोध करना चाहते हैं। यह संसदीय मर्यादा नहीं है। स्पीकर ने विपक्षी सदस्यों को प्रश्नकाल के बाद अपना विषय उठाने के लिए कहा, लेकिन हंगामा जारी रहा।अगर मेजों पर चढ़ेंगे तो इसी तरह होगी कार्रवाई8 सदस्यों के निलंबन पर सख्त टिप्पणी करते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा, सदन के अंदर अगर मेजों पर चढ़ेंगे तो इसी तरह (निलंबन) की कार्रवाई होगी। मेरा एक और आग्रह है कि सदन की पवित्रता, चाहे वह संसद परिसर के अंदर हो या संसद के बाहर हो, उसकी पवित्रता, मर्यादा और प्रतिष्ठा बनाने की सबकी जिम्मेदारी है। जिस तरह का आचरण और व्यवहार विपक्ष के सदस्यों का रहा है, वे सदन की पवित्रता को समाप्त कर रहे हैं।लोकसभा स्पीकर ने दोहराया कि विपक्ष के सदस्य प्रश्नकाल नहीं चलने देना चाहते हैं और लगातार गतिरोध पैदा करते हैं। इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

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