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क्या है लेटेंट टीबी? : नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, जानें लक्षण और बचावकांग्रेस ने खराब की हिमाचल की सेहत : भाजपा सांसद ने लगाया गंभीर आरोप, अनुराग ने खटाखट माडल का भी किया जिक्रआज जो कुछ भी हूं... : जब सुधा चंद्रन ने ‘जयपुर फुट’ को दिया इंटरनेशनल सेलिब्रिटी बनने का श्रेयनिगम मंडल नियुक्तियां : हारे हुए नेताओं के लिए बीजेपी की नामप्र में फिर करवट लेगा मौसम : राहत के बाद गर्मी ने दिखाने शुरू किए तीखे तेवर, 38 डिग्री पर पहुंचा रायसेन का पारा, तपे यह जिले भी

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पश्चिम एशिया जंग : राहुल ने भारत की विदेशी नीति पर खड़े किए सवाल, ट्रंप का नाम लेकर पीएम पर भी किया वार

राहुल ने भारत की विदेशी नीति पर खड़े किए सवाल, ट्रंप का नाम लेकर पीएम पर भी किया वार

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति को लेकर देश की राजनीति में तीखी बहस देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए हैं।संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति अब संस्थागत न होकर प्रधानमंत्री की “निजी विदेश नीति” बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि प्रभावित हो रही है और दुनिया इसे गंभीरता से नहीं ले रही। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव है और वे उनके दबाव में निर्णय लेते हैं।पीएम की स्थिति कमजोर होती है तो विदेशी नीति पर पड़ेगा असरराहुल गांधी ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप को यह पहले से पता होता है कि प्रधानमंत्री मोदी क्या कदम उठाएंगे और क्या नहीं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री की स्थिति कमजोर होती है, तो इसका सीधा असर देश की विदेश नीति पर पड़ेगा। उनके अनुसार, हाल के व्यापार समझौतों और संसद में दिए गए बयानों से भारत का कोई स्पष्ट और मजबूत रुख सामने नहीं आया है।राहुल ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को भी उठायाइसके अलावा राहुल गांधी ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का असर सीधे तौर पर लोगों पर पड़ रहा है, जिसमें एलपीजी और पेट्रोल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने मौजूदा हालात की तुलना कोविड काल से की, लेकिन उस समय हुई जनहानि और कठिनाइयों का जिक्र नहीं किया।अमेरिका और इस्राइल के हितों को ध्यान में रख फैसले ले रही सरकारराहुल गांधी ने यह भी बताया कि वे केरल में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने बैठक की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें संरचनात्मक खामियां हैं, जिन्हें सुधारा नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका और इस्राइल के हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है, न कि देश और किसानों के हित में। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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मनोरंजन

आज जो कुछ भी हूं... : जब सुधा चंद्रन ने ‘जयपुर फुट’ को दिया इंटरनेशनल सेलिब्रिटी बनने का श्रेय

जब सुधा चंद्रन ने ‘जयपुर फुट’ को दिया इंटरनेशनल सेलिब्रिटी बनने का श्रेय

मुंबई । अभिनेत्री और नृत्यांगना सुधा चंद्रन ने अपनी प्रेरणादायक यात्रा को याद करते हुए कहा कि उन्हें इंटरनेशनल सेलिब्रिटी का दर्जा दिलाने में ‘जयपुर फुट’ का सबसे बड़ा योगदान है। लहरें टीवी द्वारा शेयर किए गए एक पुराने वीडियो में सुधा भावुक होकर डॉ. पी.के. सेठी और राजस्थान का शुक्रिया अदा करती नजर आईं। वीडियो में सुधा चंद्रन कहती नजर आईं, “आज सुधा चंद्रन ‘जयपुर फुट’ (एक प्रकार का कृत्रिम पैर) की वजह से एक इंटरनेशनल सेलिब्रिटी बन गई है। डॉ. पी.के. सेठी का शुक्रिया। मैं आज जो कुछ भी हूं, राजस्थान की वजह से हूं।”उन्होंने आगे कहा, “इस तेजी से आगे बढ़ती दुनिया में भी कुछ लोगों के पास समाज सेवा के लिए समय है और मुझे बहुत खुशी है कि मैं भी इस नेक काम में छोटा सा योगदान दे पा रही हूं।”सुधा चंद्रन की यह यात्रा कई दिव्यांगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। उनका मानना है कि सपोर्ट और इच्छाशक्ति से बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है। ‘जयपुर फुट’ जैसी आसान लेकिन बेहतरीन तकनीक ने न सिर्फ सुधा का जीवन बदला, बल्कि हजारों दिव्यांगों को नई जिंदगी दी। सुधा चंद्रन ने यह भी उम्मीद जताई कि वे दिव्यांगता से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने में मदद कर पाएंगी। उन्होंने कहा, “मैं डिक्शनरी से ‘हैंडिकैप’ या ‘दिव्यांग’ जैसे शब्दों को मिटाने की कोशिश करना चाहूंगी। इसके लिए आपका साथ और प्यार हमेशा मेरे साथ रहेगा।”एक दुर्घटना में सुधा चंद्रन ने अपना एक पैर खो दिया था। इसके बाद उन्हें ‘जयपुर फुट’ लगाया गया। इसी की मदद से वह दोबारा नृत्य और अभिनय की दुनिया में लौट पाईं। उनकी इस संघर्षपूर्ण यात्रा को 1989 में रिलीज हुई फिल्म ‘नाचे मयूरी’ में दिखाया गया था, जिसमें उन्होंने खुद अपनी कहानी को पर्दे पर जिया था। टेलीविजन पर सुधा चंद्रन ‘कहीं किसी रोज’ शो में ‘रमोला सिकंद’ के नेगेटिव किरदार के लिए खूब चर्चित रहीं। उनके स्टाइल स्टेटमेंट और अनोखे तरीके से बिंदी लगाने का अंदाज दर्शकों को बहुत पसंद आया था।

बिज़नेस

मिडिल ईस्ट वार से सहमा भारतीय शेयर बाजार : प्री-ओपनिंग में औंधे मुंह गिरा सेंसेक्स, डाॅलर के मुकाबले रिकार्ड निलचले स्तर पर पहुंचा रुपया

प्री-ओपनिंग में औंधे मुंह गिरा सेंसेक्स, डाॅलर के मुकाबले रिकार्ड निलचले स्तर पर पहुंचा रुपया

मुंबई। मिडिल ईस्ट जंग का असर भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त देखने को मिल रहा है। यही नहीं गुरुवार को बाजार भारी गिरावट के साथ खुला। प्री-ओपनिंग में सेंसेक्स करीब 2000 अंक तक गिरकर 74,750.92 और निफ्टी 580 अंक या 2.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,197.75 पर था। वहीं शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 49 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 92.89 पर पहुंच गया।बाजार में हर ओर गिरावट देखी जा रही है। रियल्टी, प्राइवेट बैंक, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, सर्विसेज, डिफेंस और मेटल के साथ सभी सूचकांक लाल निशान में थे। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बड़ी गिरावट देखी जा रही है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,194.40 अंक या 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,095.45 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 246.50 अंक या 1.52 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 15,930.95 पर था। सेंसेक्स के 28 शेयर लाल निशान पर खुलेसेंसेक्स पैक में 30 में से 28 शेयर लाल निशान में थे। एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, एक्सिस बैंक, एमएंडएम, ट्रेंट, इटरनल, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट,बजाज फिनसर्व और इंडिगो लूजर्स थे। केवल एनटीपीसी और पावर ग्रिड ही हरे निशान में थे। जंग ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। ईरान के प्रमुख गैस उत्पादन क्षेत्र पर हमले और कतर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी उत्पादन सुविधा को निशाना बनाए जाने से ऊर्जा आपूर्ति पर असर की आशंका गहरा गई है। बैंकिंग और मार्केट विशेषज्ञ अजय बग्गा कहा कि इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र के तनाव को बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है। उनके अनुसार, इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में बाधा की आशंका बढ़ी है, जिसका असर महंगाई और बाजारों पर साफ दिख सकता है।ज्यादातर बिकवाली एशियाई बाजारों मेंज्यादातर एशियाई बाजारों में बिकवाली देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल लाल निशान में थे। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को लाल निशान में बंद हुए थे। मुख्य सूचकांक डाओ 1.63 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी नैस्डैक 1.46 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से बिकवाली जारी है। एफआईआई ने बुधवार को 2,714.35 करोड़ रुपए की इक्विटी में बिकवाली की थी। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,253.03 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया था।

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खेल

बंद दरवाजों के पीछे खेला जाएगा पीएसएल : कंगाल पीसीबी की फिर हुई इंटरनेशनल बेइज्जती

कंगाल पीसीबी की फिर हुई इंटरनेशनल बेइज्जती

नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) हमेशा से ही पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) की तुलना इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से करता रहा है। हालांकि, बीसीसीआई की तरह पीसीबी कभी भी पीएसएल का आयोजन नहीं कर सका है। इसका ताजा उदाहरण आगामी सीजन की शुरुआत से पहले ही सामने आ गया है। पाकिस्तान सुपर लीग 2026 का आयोजन बंद दरवाजों के पीछे किया जाएगा, मतलब दर्शकों को स्टेडियम में आने की परमिशन नहीं होगी। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि पीएसएल के सभी मुकाबले अब छह की जगह महज दो शहरों में खेले जाएंगे। पीसीबी ने अपने इस फैसले का कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन संकट को बताया है। पीसीबी ने खर्च कटौती का दिया हवालापाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि खर्चे में कटौती करने की खातिर टूर्नामेंट का आयोजन सिर्फ दो वेन्यू पर करने का निर्णय लिया गया है। पीएसएल की शुरुआत 26 मार्च से होनी है और फाइनल मुकाबला 3 मई को खेला जाना है।आईपीएल के आयोजनों में कोई कमी नहींअमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर जितना पाकिस्तान पर हो रहा है, उतना ही भारत पर भी हो रहा है। तेल की कीमतों में यहां भी उछाल आया है और बाकी चीजों के दाम भारत में भी बढ़े हैं। हालांकि, इसके बावजूद आईपीएल 2026 के आयोजन में कोई कमी नहीं रखी गई है। पीएसएल का आयोजन तो छह शहरों में किया जाना था, जबकि आईपीएल 2026 कुल 10 शहरों में खेला जाना है। इसके बावजूद खर्चे में कटौती के नाम पर बीसीसीआई ने टूर्नामेंट के शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं किया है। यह दर्शाता है कि पीसीबी के मुकाबले बीसीसीआई का कद काफी ऊंचा है।पीएसएल छोड़कर आईपीएल से जुड़ रहे विदेशी खिलाड़ीसिर्फ यही नहीं, बल्कि इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने के लिए विदेशी खिलाड़ी बिना कुछ सोचे ही पाकिस्तान सुपर लीग को छोड़कर भारत आ रहे हैं। ब्लेसिंग मुजारबानी और दासुन शनाका इसके ताजा उदाहरण भी हैं। पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने पीएसएल छोड़कर आईपीएल में खेलने जा रहे खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही है। हालांकि, इसके बावजूद खिलाड़ी आईपीएल की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। इसका पहला कारण आईपीएल में मिलने वाला पैसा तो है ही, लेकिन इसके साथ ही पीएसएल के मुकाबले आईपीएल की ज्यादा लोकप्रियता भी है। पीएसएल को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के दावे एक बार फिर खोखले साबित हो रहे हैं। वहीं, आईपीएल की बराबरी करना पीएसएल और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए अभी दूर की कौड़ी ही लगता है।

लाइफस्टाइल

क्या है लेटेंट टीबी? : नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, जानें लक्षण और बचाव

 नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, जानें लक्षण और बचाव

नई दिल्ली । टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो बैक्टीरिया माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरकुलोसिस के कारण होती है और मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। साथ ही दिमाग, हड्डी, किडनी और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। यह हवा के जरिए फैलती है। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो टीबी खतरनाक हो सकती है और जान भी ले सकती है। लेकिन टीबी की एक स्थिति ऐसी होती है, जिसमें टीबी के बैक्टीरिया शरीर में मौजूद होते हैं, लेकिन वे निष्क्रिय अवस्था में रहते हैं।24 मार्च को हर साल विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद लेटेंट टीबी के बारे में जागरूक करता है। यह वह स्थिति है जिसमें टीबी के बैक्टीरिया शरीर में मौजूद होते हैं, लेकिन वे निष्क्रिय अवस्था में रहते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं दिखते, न ही वह बीमार महसूस करता है और न ही वह दूसरों में संक्रमण फैलाता है।आयुर्वेद इंस्टीट्यूट के अनुसार, लेटेंट टीबी को सक्रिय टीबी रोग से अलग समझना जरूरी है। इसमें संक्रमित व्यक्ति टीबी का वाहक बना रहता है, लेकिन रोग नहीं फैलाता। हालांकि, अगर समय पर ध्यान न दिया जाए और इलाज न किया जाए, तो यह निष्क्रिय संक्रमण किसी भी समय सक्रिय टीबी में बदल सकता है, जो खांसी, बुखार, वजन घटना, रात में पसीना आना और थकान जैसे लक्षण पैदा करता है। लेटेंट टीबी आमतौर पर उन लोगों में पाई जाती है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है, जैसे एचआईवी संक्रमित, डायबिटीज के मरीज, कैंसर रोगी, या जो लंबे समय से स्टेरॉयड दवाएं ले रहे हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी इसका खतरा अधिक होता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में भर की बड़ी आबादी लेटेंट टीबी से संक्रमित है। भारत जैसे देश में यह संख्या और भी ज्यादा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लेटेंट टीबी का पता लगाना और समय पर इलाज करना बहुत जरूरी है। आसान ब्लड टेस्ट या ट्यूबरकुलिन स्किन टेस्ट से इसका पता लगाया जा सकता है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो डॉक्टर आमतौर पर 3 से 9 महीने तक की दवा देते हैं, जिससे संक्रमण को सक्रिय होने से रोका जा सकता है।एक्सपर्ट के अनुसार, अगर परिवार में किसी को लंबी खांसी, बुखार या वजन घटने की शिकायत है, तो तुरंत जांच कराएं। लेटेंट टीबी को नजरअंदाज करने से बाद में सक्रिय टीबी हो सकती है, जो न सिर्फ व्यक्ति के लिए बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए खतरा बन सकती है।

राजनीती

पश्चिम एशिया जंग : राहुल ने भारत की विदेशी नीति पर खड़े किए सवाल, ट्रंप का नाम लेकर पीएम पर भी किया वार

राहुल ने भारत की विदेशी नीति पर खड़े किए सवाल, ट्रंप का नाम लेकर पीएम पर भी किया वार

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति को लेकर देश की राजनीति में तीखी बहस देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए हैं।संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति अब संस्थागत न होकर प्रधानमंत्री की “निजी विदेश नीति” बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि प्रभावित हो रही है और दुनिया इसे गंभीरता से नहीं ले रही। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव है और वे उनके दबाव में निर्णय लेते हैं।पीएम की स्थिति कमजोर होती है तो विदेशी नीति पर पड़ेगा असरराहुल गांधी ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप को यह पहले से पता होता है कि प्रधानमंत्री मोदी क्या कदम उठाएंगे और क्या नहीं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री की स्थिति कमजोर होती है, तो इसका सीधा असर देश की विदेश नीति पर पड़ेगा। उनके अनुसार, हाल के व्यापार समझौतों और संसद में दिए गए बयानों से भारत का कोई स्पष्ट और मजबूत रुख सामने नहीं आया है।राहुल ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को भी उठायाइसके अलावा राहुल गांधी ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का असर सीधे तौर पर लोगों पर पड़ रहा है, जिसमें एलपीजी और पेट्रोल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने मौजूदा हालात की तुलना कोविड काल से की, लेकिन उस समय हुई जनहानि और कठिनाइयों का जिक्र नहीं किया।अमेरिका और इस्राइल के हितों को ध्यान में रख फैसले ले रही सरकारराहुल गांधी ने यह भी बताया कि वे केरल में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने बैठक की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें संरचनात्मक खामियां हैं, जिन्हें सुधारा नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका और इस्राइल के हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है, न कि देश और किसानों के हित में। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है।

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