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बजट सत्रः वित्तमंत्री ने संसद में पेश की इकोनाॅमिक सर्वे रिपोर्ट : भारत की जीडीपी दर 6.8 से 7.2 फीसदी रहने का अनुमान, जानें और भी सब कुछ

भारत की जीडीपी दर 6.8 से 7.2 फीसदी रहने का अनुमान, जानें और भी सब कुछ

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट पेश की। इस सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर गति से आगे बढ़ रही है। आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में बताया गया कि भारत के लिए मौजूदा वैश्विक हालात तुरंत किसी बड़े आर्थिक संकट की बजाय बाहरी अनिश्चितताओं का संकेत देते हैं। वैश्विक अस्थिरता के बावजूद देश की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है। महंगाई दर ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर आई है, हालांकि आने वाले समय में इसमें थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, घरों, कंपनियों और बैंकों की वित्तीय स्थिति पहले से बेहतर हुई है। सरकारी निवेश लगातार आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रहा है। उपभोग की मांग मजबूत बनी हुई है और निजी निवेश की संभावनाएं भी सुधर रही हैं। ये सभी कारक बाहरी झटकों से निपटने में मदद करते हैं और विकास की रफ्तार को बनाए रखते हैं।सर्वे में यह भी कहा गया है कि आने वाले साल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई आधार वर्ष (रीबेसिंग) से महंगाई के आकलन पर असर पड़ सकता है। इसलिए कीमतों में बदलाव को समझते समय सावधानी बरतनी होगी।मुख्य व्यापारिक साझेदार देशों में धीमी वृद्धि, टैरिफ के कारण व्यापार में रुकावट और पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव से कभी-कभी भारत के निर्यात और निवेशकों के भरोसे पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ताएं इस साल पूरी होने की उम्मीद है, जिससे बाहरी मोर्चे पर अनिश्चितता कुछ कम हो सकती है।पिछले कुछ वर्षों में किए गए नीतिगत सुधारों का मिलाजुला असर यह है कि भारत की मध्यम अवधि की विकास क्षमता अब लगभग 7 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। घरेलू कारक विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं और आर्थिक स्थिरता मजबूत बनी हुई है, जिससे जोखिम संतुलित नजर आते हैं।सर्वे में कहा गया है कि मध्यम अवधि में वैश्विक अर्थव्यवस्था का आउटलुक कमजोर बना हुआ है और नीचे की ओर जोखिम ज्यादा हैं। दुनियाभर में आर्थिक वृद्धि सीमित रहने की उम्मीद है, जिससे कच्चे माल की कीमतें भी लगभग स्थिर रह सकती हैं।दुनिया के कई देशों में महंगाई कम हुई है, इसलिए मौद्रिक नीतियां आगे चलकर विकास को समर्थन देने वाली हो सकती हैं। लेकिन कुछ बड़े जोखिम अब भी मौजूद हैं। यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से उम्मीद के मुताबिक उत्पादकता नहीं बढ़ी, तो शेयर और अन्य परिसंपत्तियों की कीमतों में गिरावट आ सकती है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजार प्रभावित हो सकते हैं।इसके अलावा, अगर देशों के बीच व्यापार विवाद लंबे समय तक चलते रहे, तो निवेश पर असर पड़ेगा और वैश्विक विकास और कमजोर हो सकता है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि फिलहाल स्थिति संतुलन में है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम अब भी बने हुए हैं।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

द बैड्स ऑफ बॉलीवुड विवाद : दिल्ली हाईकोर्ट ने समीर वानखेड़े की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, केस लौटाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने समीर वानखेड़े की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, केस लौटाया

नई दिल्ली। इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) अधिकारी समीर वानखेड़े ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। पुरुषेंद्र कौरव की सिंगल बेंच ने आदेश दिया कि केस को उस कोर्ट में भेजा जाए, जो इस तरह के मामले को सुनने की सही अधिकारिता रखता हो। यह केस वापस सही कोर्ट में दाखिल किया जाना चाहिए।वेब सीरीज में दिखाया गया गलत और आपत्तिजनक कंटेंटवानखेड़े ने आरोप लगाया है कि वेब सीरीज द बैड्स ऑफ बॉलीवुड में उनके खिलाफ जानबूझकर गलत और अपमानजनक कंटेंट दिखाया गया। उनका कहना है कि इस वेब सीरीज ने न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और सम्मान को नुकसान पहुंचाया, बल्कि उनके परिवार पर भी असर डाला है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की इमेज को इस सीरीज में नकारात्मक तरीके से दिखाया गया, जिससे आम लोगों का कानून और सरकारी एजेंसियों पर भरोसा कमजोर हुआ।वानखेड़े ने कोर्ट से मुआवजा दिलाने की मांगवानखेड़े ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें स्थायी आदेश और मुआवजा दिया जाए। इसके तहत रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, नेटफ्लिक्स, ट्विटर (अब एक्स कॉर्प), गूगल, फेसबुक और अन्य संबंधित पक्ष शामिल हैं। उनका कहना था कि इस वेब सीरीज ने जानबूझकर उनके खिलाफ पक्षपाती और अपमानजनक कंटेंट दिखाया है।

बिज़नेस

कीमती धातुओं ने फिर बनाया नया रिकार्ड : 3.20 लाख के करीब पहुंची सिल्वर, गोल्ड की कीमतों भी आया तेज उछाल

3.20 लाख के करीब पहुंची सिल्वर, गोल्ड की कीमतों भी आया तेज उछाल

मुंबई। बढ़ते वैश्विक तनावों के बीच सोने और चांदी ने मंगलवार के कारोबारी सत्र में एक और नया रिकॉर्ड बना लिया है। एमसीएक्स पर कीमती धातुओं की कीमतें पिछले दिन के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। गोल्ड फरवरी वायदा 1,47,996 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, तो वहीं सिल्वर मार्च वायदा 3,19,949 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।सोमवार के ट्रेडिंग सेशन में एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना जहां रिकॉर्ड 1,45,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था, तो वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 3,01,315 रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सिल्वर की कीमत 94.320 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। तो वहीं गोल्ड 4,708.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे पहले के सत्र में सोने ने 4,689.39 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।चांदी की कीमतों में 2.35 का आया उछालखबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1.55 प्रतिशत यानी 2,255 रुपए की तेजी के साथ 1,47,894 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी 7,279 रुपए यानी 2.35 प्रतिशत की उछाल के साथ 3,17,554 रुपए प्रति किलोग्राम पर थी। यह तेजी उस समय आई थी जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड मुद्दे का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया।ट्रंप की यूरोपीय देशों की धमकी के बाद कीमती धातुओं में आ रहा उछालकीमती धातुओं में यह उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड मुद्दे का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी के बाद आई। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी दोहराया कि यूरोपीय देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर टैरिफ लगाने की धमकी पर वे अमल करेंगे।मांग बढ़ने से कीमती धातुओं की कीमतों में आ रही तेजीविशेषज्ञों के अनुसार, कीमती धातुओं में आई यह तेजी सुरक्षित निवेश के साथ-साथ चांदी की औद्योगिक मांग को भी दिखाती है। चांदी का उपयोग सोलर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ रहा है। विश्लेषकों ने कहा कि तकनीकी रूप से कॉमेक्स पर चांदी का रुख अभी मजबूत बना हुआ है। 85 से 88 डॉलर प्रति औंस का स्तर आने वाले समय में कीमतों को सहारा दे सकता है।मुनाफा वसूली के कारण कीमतों में आ सकती है गिरावटऑगमोंट की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मुनाफावसूली के कारण कीमतों में थोड़ी गिरावट आ सकती है और चांदी 84 डॉलर प्रति औंस या 2,60,000 रुपए प्रति किलो तक आ सकती है, इसके बाद फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि बहुत तेज बढ़त के बाद निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं, लेकिन उनका मानना है कि आपूर्ति की चिंताओं और औद्योगिक मांग बढ़ने के कारण लंबे समय में सोने और चांदी का रुझान मजबूत बना रहेगा।

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होटल ग्रीन पैलेस पर पुलिस की छापेमारी #politicalnews #raid #crime #latestnews #latest #trending

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Hera Pheri 3 की देरी का कारण सामने आया #entertainment #trending #herapheri #bollywood #trending

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#jhansi : अजब प्यार की गज़ब कहानी #politicalnews #trending #news #breakingnews #latestnews #viralfeed

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Splitsvilla विजेता आकृति नेगी का ब्रेकअप कन्फर्म #breakingnews #newstoday  #tv27newsdigital

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सपा नेता मोईद खान बरी #politics #politicalnews #latestnews #samajwadiparty #crime #trending #viral

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खेल

एक खराब दिन सबकुछ बिगाड़ सकता है : विश्व कप से पहले पूर्व कोर्च ने टीम इंडिया को दिया संदेश

विश्व कप से पहले पूर्व कोर्च ने टीम इंडिया को दिया संदेश

नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी से भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में हो रही है। भारतीय टीम डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में टूर्नामेंट में उतरेगी। टीम इंडिया ने टी20 विश्व कप 2024 का खिताब फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर जीता था। पिछले 2 साल में भारतीय टीम काफी बदल चुकी है। हेड कोच रहे राहुल द्रविड़ और कप्तान रहे रोहित शर्मा, विराट कोहली, और रवींद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी इस टीम का हिस्सा नहीं हैं। गौतम गंभीर की कोचिंग और सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम अपने खिताब की रक्षा करने विश्व कप में उतरेगी। पूर्व कोच राहुल द्रविड़ ने विश्व कप से पहले भारतीय टीम के लिए खास संदेश दिया है। कोई टीम अच्छी पारी खेलकर कर सकती है परेशानएक निजी कार्यक्रम में राहुल द्रविड़ ने कहा कि विश्व कप में हम फेवरेट के तौर पर उतरेंगे और सेमीफाइनल तक जरूर पहुंचेंगे, लेकिन मेरा अपना अनुभव ये कहता है कि मैच में कौन सी टीम बेहतर खेलती है इसपर काफी कुछ निर्भर करेगा। कोई अच्छी पारी खेलकर आपको परेशान कर सकता है। टीम इंडिया कितनी भी मजबूत क्यों न हो, एक खराब दिन सबकुछ बिगाड़ सकता है। एक खराब दिन आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है।अनुभवों के आधार पर द्रविड़ ने कही यह बातराहुल द्रविड़ के इस बयान का अर्थ भारतीय टीम का हर सदस्य और हर भारतीय क्रिकेट फैन अच्छी तरह समझता है। वनडे विश्व कप 2003 में पूरे टूर्नामेंट में अच्छा खेलने के बाद टीम इंडिया फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार गई थी। राहुल द्रविड़ ने उस विश्व कप में विकेटकीपर बल्लेबाज की भूमिका निभाई थी। ठीक 20 साल बाद 2023 में भी ऐसा ही हुआ था। रोहित शर्मा की कप्तानी वाली टीम इंडिया पूरे विश्व कप में अजेय रही। माना जा रहा था कि भारतीय टीम ही चैंपियन बनेगी, लेकिन फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से एक बार फिर हमें हार का सामना करना पड़ा। राहुल द्रविड़ इस टीम के हेड कोच थे। राहुल ने इन्हीं अनुभवों के आधार पर कहा है कि एक खराब दिन हमारी सारी उम्मीदों और सपनों को तोड़ सकता है। इसलिए हमें हमेशा सावधान रहना होगा। प्रचंड फार्म में टीम इंडियाभारतीय टीम टी20 फॉर्मेट में प्रचंड फॉर्म में चल रही है। भारत और श्रीलंका में विश्व कप का आयोजन और मौजूदा फॉर्म को देखते हुए टीम इंडिया को फेवरेट माना जा रहा है। अगर भारतीय टीम टी20 विश्व कप जीतने में कामयाब रहती है, तो लगातार दो टी20 विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बनेगी, साथ ही कुल 3 विश्व कप खिताब के साथ सर्वाधिक टी20 विश्व कप जीतने वाली टीम बन जाएगी। भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका में 2007 में खेला गया टी20 विश्व कप का पहला संस्करण जीता था।

लाइफस्टाइल

सेहत : सुबह के नाश्ते से रात के खाने तक, आपकी सेहत का भरोसेमंद साथी है दलिया

 सुबह के नाश्ते से रात के खाने तक, आपकी सेहत का भरोसेमंद साथी है दलिया

नई दिल्ली। सुबह की शुरुआत अगर हल्के, स्वादिष्ट और सेहतमंद नाश्ते से हो जाए तो पूरा दिन अच्छा निकलता है। ऐसे में दलिया एक ऐसा भोजन है, जो सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक आपकी सेहत का भरोसेमंद साथी बन सकता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर जंक फूड या बाहर का तला-भुना खाना खा लेते हैं जो पेट और सेहत दोनों के लिए नुकसानदायक होता है, लेकिन अगर आप रोज के खाने में दलिया शामिल कर लें, तो यह शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ आपको कई बीमारियों से भी बचाने में मदद करता है। दलिया पचने में हल्का होता है और पेट पर बोझ नहीं डालता, इसलिए इसे किसी भी समय खाया जा सकता है।दलिया में भरपूर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। नियमित रूप से दलिया खाने से कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में काफी राहत मिलती है। यही वजह है कि डॉक्टर और आयुर्वेद विशेषज्ञ भी इसे रोजाना खाने की सलाह देते हैं।अगर वजन कम करना चाहते हैं तो दलिया आपके लिए बेहतरीन विकल्प है, क्योंकि यह कम कैलोरी वाला भोजन है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और आप ओवरईटिंग से बचते हैं।दलिया दिल की सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर और जरूरी पोषक तत्व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं, जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी दलिया अच्छा विकल्प है, क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है और यह ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देता। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर लोगों के लिए दूध वाला दलिया ऊर्जा देने वाला आहार है, जबकि सब्जियों या दाल के साथ बना नमकीन दलिया लंच या डिनर के लिए परफेक्ट रहता है। रात के खाने में हल्का दलिया खाने से नींद भी अच्छी आती है और पेट साफ रहता है। बस ध्यान रखें कि इसमें ज्यादा तेल-मसाले न डालें।

राजनीती

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम रोक : मामले पर अब 19 मार्च को होगी सुनवाई, सीजेआई ने सख्त टिप्पणी करते हुए क्या कहा जानें

मामले पर अब 19 मार्च को होगी सुनवाई, सीजेआई ने सख्त टिप्पणी करते हुए क्या कहा जानें

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट नें गुरुवार को यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की। यही नहीं, भेदभाव विरोधी नियमों पर शीर्ष अदालत ने रोक भी लगा दी। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। ऐसे में अब नए आदेश तक 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी हम समाज को जातियों से मुक्त नहीं कर सके हैं। अब क्या इस नए कानून से हम और पीछे की ओर जा रहे हैं? केंद्र को नोटिस जारी, 19 मार्च को अगली सुनवाईमुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इन रिट याचिकाओं की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नए नियम अस्पष्ट हैं। कोर्ट के कहा कि नए यूजीसी नियमों का दुरुपयोग हो सकता है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और यूजीसी के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी हम समाज को जातियों से मुक्त नहीं कर सके हैं। अब क्या इस नए कानून से हम और पीछे की ओर जा रहे हैं? याचिकाकर्ता ने कहा कि रैगिंग होगी और रैगिंग करने वाले छात्र शिकायत भी करेंगे। वहीं जस्टिस बागची ने कहा कि संविधान राज्य को एससी-एसटी के लिए विशेष कानून बनाने का अधिकार देता है। यदि 2012 के नियमों में व्यापक सुरक्षा की बात की गई है तो क्या सामाजिक न्याय की सुरक्षा वाले कानून में बचाव के उपाय होने चाहिए? हमें ऐसे स्तर पर नहीं जाना चाहिए जहां हमने संयुक्त राज्य अमेरिका की तरह स्कूलों को अलग कर दिया हो।याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने बताई अपनी दलीलेंवहीं याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने कहा, आज, सीजेआई ने हमारी दलीलों की सराहना की। हमें कहना होगा कि यह हमारे लिए बहुत बड़ी जीत है। जैसा कि हम खास तौर पर तीन मुद्दों के बारे में बात कर रहे थे, एक है सेक्शन 3सीजो जातिगत भेदभाव के बारे में बात करता है और उस खास सेक्शन में, सामान्य जाति को बाहर रखा गया है और बाकी सभी जातियों को शामिल किया गया है। तो, यह खास सेक्शन यह संदेश दे रहा है कि एससी-एसटी और ओबीसी के साथ सामान्य जाति द्वारा भेदभाव किया जा रहा है।उन्होंने आगे कहा कि यह सीजेआई के सामने हमारी दलील थी और उन्होंने हमारी दलील की सराहना की और खास तौर पर कहा कि हम जो कह रहे हैं वह सही है और अगर ऐसे सेक्शन हैं, तो यह निश्चित रूप से सामान्य जाति के लिए बहुत कठोर और भेदभावपूर्ण होगा और इसमें संशोधन किया जाना चाहिए। दूसरा हिस्सा इक्विटी कमेटी के संबंध में है जो इन नए यूजीसी सेक्शन के सेक्शन 18 के तहत बनाई गई है। इन खास नियमों में सामान्य समुदाय के लिए कोई खास प्रतिनिधित्व नहीं बताया गया है। सीजेआई ने भी हमारी इस दलील को माना और सुझाव दिया कि एक खास कमेटी बनाई जानी चाहिए, जिसमें शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हों, जिन्हें इस खास विषय का ज्ञान हो और अब यह मामला 19 मार्च के लिए सूचीबद्ध है और उम्मीद है कि कुछ अच्छा होगा।

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