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गणतंत्र दिवस पर नई उड़ान : लद्दाख स्काउट्स भारत में आइस हॉकी को नई पहचान दिलाने को तैयार टीम मुझसे यही चाहती है : कीवियों की धुनाई करने के बाद बोले अभिषेक, युवी का रिकार्ड तोड़ना नामुमकिन से ज्यादा, पर...पद्म भूषण अवार्ड मिलने पर इमोशनल हुईं प्लेबैक सिंगर : फैंस का अदा किया शुक्रिया, क्या कहा जानेंविश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर में गणतंत्र दिवस की धूम : राष्ट्रभक्ति के रंगों में रंगे बाबा महाकाल, रात में केसरिया लाइटों से जगमगाया मंदिर शिखरअंतरिक्ष की उड़ान को कर्तव्य पथ पर सम्मान : महामहिम ने शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से किया सम्मानित

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बंगाल की सियासत में उथल-पुथल : भाजपा-CPI(M) कार्यकर्ताओं की दरियादिली के मुरीद हुए TMC MLA, एक्स पर की खूब तारीफ

भाजपा-CPI(M) कार्यकर्ताओं की दरियादिली के मुरीद हुए TMC MLA, एक्स पर की खूब तारीफ

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियातस से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। इतना ही नहीं यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका भी है। दरअसल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक मनोरंजन बापरी भाजपा और सीपीआई(एम) दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं की विनम्रता और दरियादिली की तारीफ की। हुगली जिले के बालागढ़ से टीएमसी विधायक बापरी ने सोमवार सुबह यह पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने दो निजी अनुभवों का जिक्र किया, एक में भाजपा कार्यकर्ता शामिल थे और दूसरे में सीपीआई(एम) के युवा कार्यकर्ता, यह बताने के लिए कि शिष्टाचार और उदारता जैसे मूल्य राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर होते हैं, यहां तक कि विरोधी पार्टियों के बीच भी। बापारी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में जिस पहली घटना का जिक्र किया है, वह कुछ साल पहले की है, जब वह सेंट्रल कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक पार्टी मीटिंग से लौट रहे थे।वापस आते समय, डंकुनी टोल प्लाजा पर भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध-प्रदर्शन के कारण उनकी गाड़ी रोक दी गई। बापारी ने अपनी पोस्ट में कहा, “मेरे असिस्टेंट पार्थ ने मुझसे गाड़ी से बाहर न निकलने को कहा। मैंने उनकी बात नहीं मानी। मैं गाड़ी से बाहर निकला और भाजपा समर्थकों से उनके विरोध का कारण पूछा। उन्होंने मुझे पहचान लिया। बहुत ही नरमी से उन्होंने मुझसे माफी मांगी और मुझे आगे बढ़ने को कहा। मैं उनका कट्टर विरोधी हूं। इसके बावजूद, विपक्षी पार्टी के कट्टर कार्यकर्ताओं से सम्मान मिलना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात थी।”उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समय में जब अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के बीच झड़पें आम बात हो गई हैं, वे बिना किसी सुरक्षा के पूरे राज्य में घूमते हैं और कभी-कभी तो पब्लिक गाड़ियों में भी सफर करते हैं। मुझ पर कभी किसी ने हमला नहीं किया। मुझे नहीं लगता कि कोई कभी ऐसा करेगा। मैंने पूरी जिंदगी लोगों का प्यार कमाया है।दूसरी घटना जो उन्होंने बताई, वह रविवार की है, जब वह कोलकाता इंटरनेशनल बुक फेयर से पब्लिक गाड़ी से लौट रहे थे। यह समझते हुए कि हाल ही में घुटने की सर्जरी की वजह से मुझे खड़े होने में दिक्कत हो रही है, गाड़ी में बैठे तीन बात कर रहे युवाओं में से एक ने मेरे लिए अपनी सीट खाली कर दी। शर्मिंदा होकर मैंने मना कर दिया। फिर उनमें से एक ने मुझसे कहा कि उसने मुझे पहचान लिया है। उसने यह भी कहा कि, एक पक्के सीपीआई(एम) युवा कार्यकर्ता होने के नाते, वह और उसके दो दोस्त अक्सर मेरे अलग-अलग सोशल मीडिया पोस्ट पर मेरे साथ राजनीतिक चर्चा करते हैं। इसके बाद उनके साथ काफी देर तक बातचीत हुई। मैं उनकी कुछ बातों से सहमत हुआ, और वे भी मेरी कुछ बातों से सहमत हुए। जिस बात ने मुझे सबसे ज्यादा हैरान किया, वह यह थी कि यह जानते हुए भी कि मैं तृणमूल कांग्रेस का विधायक हूं, उन्होंने मुझे बहुत इज्जत दी और मेरी तारीफ भी की। उन्होंने आगे दावा किया कि हालांकि उन्हें नहीं पता कि एक विधायक के तौर पर वह कितने सफल रहे, लेकिन उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि वह सम्मान है जो उन्हें आम लोगों से मिला, चाहे उनकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी रही हो।राजनीतिक जानकारों का मानना ​​है कि पश्चिम बंगाल में अलग-अलग राजनीतिक विचारों वाले नेताओं के बीच आपसी दोस्ती कोई नई बात नहीं है। पश्चिम बंगाल के दो दिग्गज मुख्यमंत्रियों - स्वर्गीय सिद्धार्थ शंकर रॉय और स्वर्गीय ज्योति बसु - की दोस्ती और एक-दूसरे के प्रति सम्मान सभी को पता था।शहर के एक राजनीतिक जानकार ने कहा कि इसी तरह, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री एलके आडवाणी और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के बीच भी आपसी सम्मान था और दोनों में एक कॉमन बात यह थी कि दोनों आधुनिक साहित्य के जानकार थे। इसी तरह, भट्टाचार्य और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, डॉ मनमोहन सिंह भी एक-दूसरे की तारीफ करते थे।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

पद्म भूषण अवार्ड मिलने पर इमोशनल हुईं प्लेबैक सिंगर : फैंस का अदा किया शुक्रिया, क्या कहा जानें

फैंस का अदा किया शुक्रिया, क्या कहा जानें

मुंबई। भारत सरकार ने प्लेबैक सिंगर अलका याग्निक को पद्म भूषण सम्मान से नवाजा है। इस सम्मान की घोषणा के बाद अलका ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर परिवार, दोस्तों और सरकार के साथ ही प्रशंसकों का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि सबका है। यह उनकी दशकों की मेहनत का फल है।अलका याग्निक ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट करते हुए लिखा कि यह सम्मान उनके लिए बेहद खास है। अलका याग्निक को यह सम्मान उनकी लंबी और सफल संगीत यात्रा के लिए मिला है। इस सम्मान से उत्साहित होकर अलका ने इसे एक साझा खुशी बताया और कहा कि यह पुरस्कार उनके सभी सहयोगियों और फैंस के प्यार का नतीजा है।सरकार का जताया आभारअलका ने लिखा, मुझे पद्म भूषण देने के लिए मैं भारत सरकार की बहुत आभारी हूं। फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में दशकों के बाद यह सम्मान मिलने से मैं बहुत इमोशनल हो गई हूं। उन्होंने इस उपलब्धि को अपने लंबे सफर का एक खास पड़ाव बताया और कहा कि यह पल उनके लिए बेहद खास है। अपने पोस्ट में अलका ने उन सभी लोगों का दिल से शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उनके संगीत सफर को संभव बनाया। उन्होंने लिखा, ष्फिल्ममेकर्स, कंपोजर्स, लिरिसिस्ट्स, को-सिंगर्स, म्यूजिशियंस, टेक्नीशियंस, प्रेस, मीडिया और हर उस इंसान को दिल से धन्यवाद जो हमारी फिल्मों की जान हैं। यह सफर आपके बिना मुमकिन नहीं होता।ष्आपका प्यार हमारी ताकतअलका ने कहा, मेरे दोस्तों, परिवार और सुनने वालों... आपका प्यार हमेशा मेरी ताकत रहा है। गायिका का मानना है कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि पूरे संगीत जगत और उनके साथ काम करने वाले हर व्यक्ति का है। उन्होंने पोस्ट को समाप्त करते हुए लिखा, ष्यह संगीत, यह यात्रा और यह पल हम सभी का है। आप सभी को ढेरों प्यार।सफल प्लेबैक सिंगर्स में से एक अलका याग्निकअलका याग्निक भारतीय सिनेमा जगत की लोकप्रिय और सफल प्लेबैक सिंगर्स में से एक हैं। उन्होंने 90 के दशक से लेकर आज तक हजारों गाने गाए हैं, जिनमें से कई सदाबहार बन गए। एक दो तीन जैसे गीतों ने उन्हें घर-घर पहुंचाया। उनकी मधुर आवाज ने कई पीढ़ियों को झूमने पर मजबूर किया।

बिज़नेस

कीमती धातुओं ने फिर बनाया नया रिकार्ड : सोने का भाव पहुंचा सर्वोच्च स्तर पर, आल टाइम हाई पर पहुंची चांदी

सोने का भाव पहुंचा सर्वोच्च स्तर पर, आल टाइम हाई पर पहुंची चांदी

मुंबई। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन, बुधवार को कीमती धातु (सोना और चांदी) एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनाते हुए अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिका में महंगाई के नरम आंकड़े और दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी में खरीदारी कर रहे हैं। बुधवार के कारोबारी सत्र में एमसीएक्स पर सोने ने जहां 1,43,500 रुपए प्रति 10 ग्राम का सर्वोच्च स्तर छुआ, वहीं चांदी भी 2,87,990 रुपए प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। बीते कुछ दिन पहले भी इन कीमती धातुओं ने अपना रिकॉर्ड स्तर छुआ था।हालांकि खबर लिखे जाने तक (दोपहर 12.16 बजे के करीब) एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,059 रुपए या 0.74 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,43,300 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। तो वहीं, मार्च डिलीवरी वाली चांदी 9,942 रुपए या 3.61 प्रतिशत की उछाल के साथ 2,85,129 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी।दिसंबर के लिए अमेरिकी कोर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) के आंकड़ों में महीने-दर-महीने महंगाई 0.2 प्रतिशत और साल-दर-साल 2.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो उम्मीद से कम रहे, जिससे बाजार को भरोसा मिला कि अमेरिका का केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरें घटा सकता है। इससे सोने की कीमतों को सपोर्ट मिला।विशेषज्ञों का कहना है कि कम महंगाई और अमेरिका के रोजगार से जुड़े मिले-जुले आंकड़ों को देखते हुए केंद्रीय बैंक जनवरी में ब्याज दरें स्थिर रख सकता है, लेकिन साल भर में दो से तीन बार दरों में कटौती हो सकती है, जिससे सोने की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

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गणतंत्र दिवस पर तिरंगे में रंगे सोमनाथ महादेव #tv27newsdigital #somnath #temple #republicday #viral

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धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की साजिश #politicalnews #cmyogi #debate #breakingnews #latest

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वाघा बॉर्डर पर  जवानों का जोश हाई! #republicday #wagahborder #viralfeed #viralnews #viral #trending

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आदित्य ठाकरे ने उठाया शिवसेना सिंबल विवाद पर सवाल #politicalnews #adityathackeray #currentaffairs

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कैजुअल लुक में airport पर स्पॉट हुईं Kareena Kapoor #entertainment #bollywood #viral #trending

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Traditional outfit में जुहू में स्पॉट हुईं Hansika Motwani #entertainment #southindian #bollywood

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खेल

गणतंत्र दिवस पर नई उड़ान : लद्दाख स्काउट्स भारत में आइस हॉकी को नई पहचान दिलाने को तैयार

लद्दाख स्काउट्स भारत में आइस हॉकी को नई पहचान दिलाने को तैयार

लेह । देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ते भारत में आइस हॉकी का खेल भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके केंद्र में है इंडियन आर्मी की विशेष माउंटेन इन्फेंट्री रेजिमेंट—लद्दाख स्काउट्स। बर्फ से ढके पहाड़ों और कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करने वाली यह रेजिमेंट भारत में आइस हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।इस समय 2026 खेलो इंडिया विंटर गेम्स के छठे संस्करण का पहला चरण लेह (लद्दाख) में खेला जा रहा है। आइस हॉकी और आइस स्केटिंग जैसे खेलों में देश के बेहतरीन एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। एक बार फिर, इन खेलों में लद्दाख स्काउट्स के प्रतिनिधि, यानी आर्मी की टीम, शानदार प्रदर्शन करते हुए अजेय नजर आ रही है। गणतंत्र दिवस के मौके पर आर्मी टीम पुरुषों के फाइनल में चंडीगढ़ से भिड़ेगी। लद्दाख स्काउट्स का असली योगदान सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं है। आइस रिंक के बाहर उनकी सोच और कोशिशें कहीं ज्यादा अहम हैं। उनका सपना है कि आइस हॉकी को केवल लेह और लद्दाख तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे देश के मैदानों और तटीय इलाकों तक पहुंचाया जाए। वे चाहते हैं कि यह खेल पूरे भारत में पहचाना जाए और युवाओं के लिए एक नया विकल्प बने।माना जाता है कि लद्दाख स्काउट्स ने 1970 के दशक के आखिर में आइस हॉकी खेलना शुरू किया था। उस समय न तो सही सतह थी और न ही आधुनिक उपकरण। सैनिक बर्फ पर फिसलते हुए इस खेल का आनंद लेते थे। 1980 के दशक के अंत में उन्होंने इसे गंभीरता से लेना शुरू किया। इस खेल के लिए जरूरी संसाधन विकसित किए गए और महंगे उपकरण मंगाए गए।साल 2000 में जब लद्दाख स्काउट्स को एक पूर्ण इन्फेंट्री रेजिमेंट का दर्जा मिला, तब आइस हॉकी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और भी बढ़ गई। आज भारत में सिर्फ दो ओलंपिक-साइज आर्टिफिशियल आइस रिंक हैं—एक देहरादून में और दूसरा लेह के इनडोर नवांग दोरजे स्टोबदान स्टेडियम में। 2026 खेलो इंडिया विंटर गेम्स में हिस्सा ले रही आर्मी टीम के कप्तान पार्थ जगताप मानते हैं कि आइस हॉकी को लोकप्रिय बनाने के लिए देशभर में और रिंक बनाने की जरूरत है। उनके मुताबिक, अभी यह खेल ज्यादातर लेह तक सीमित है और अगर इसे आगे बढ़ाना है तो बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश की जरूरत होगी। उन्होंने खेलो इंडिया पहल की तारीफ करते हुए कहा कि मीडिया कवरेज और सरकारी सहयोग से इस खेल के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है। पिछले साल लद्दाख स्काउट्स की ओर से भारतीय महिला आइस हॉकी टीम को आखिरी समय में दी गई फंडिंग बेहद अहम साबित हुई। इसी मदद से भारतीय महिला टीम ने यूएई में आयोजित आईआईएचएफ महिला एशिया कप में अपना पहला ब्रॉन्ज मेडल जीता। आइस हॉकी का खेल महंगा है। पूरे आइस हॉकी गियर की कीमत चार लाख रुपये तक हो सकती है। आइस रिंक बनाना बेहद महंगा है। एक साधारण रिंक पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। यही इस खेल की सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में इस खेल को देश में विकसित करने में कॉर्पोरेट जगत की भूमिका अहम हो जाती है। लद्दाख स्काउट्स ने इस दिशा में पहल करते हुए कॉर्पोरेट सहयोग का विचार भी रखा है। सैनिक सिर्फ सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि कई बार वे समाज के लिए ऐसी जिम्मेदारियां भी उठा लेते हैं, जो उनकी ड्यूटी से कहीं आगे होती हैं। आइस हॉकी इसका बेहतरीन उदाहरण है।

लाइफस्टाइल

सेहत : ब्रेन फॉग कहीं दिल की बीमारी का संकेत तो नहीं? जानें वैज्ञानिक कारण

ब्रेन फॉग कहीं दिल की बीमारी का संकेत तो नहीं? जानें वैज्ञानिक कारण

नई दिल्ली । आज की तेजतर्रार जिंदगी में अक्सर लोग थकान, तनाव और भूलने की आदत को आम परेशानी मान लेते हैं। लेकिन, कभी‑कभी यह केवल मानसिक थकान नहीं होती, बल्कि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। कई डॉक्टर मानते हैं कि बार‑बार ध्यान भटकना, नाम भूलना या दिमाग का भारी लगना सिर्फ दिमाग की कमजोरी नहीं, बल्कि दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। हार्ट डिजीज हमेशा सीने में दर्द या सांस फूलने के जरिए ही सामने नहीं आती। कई बार यह धीरे‑धीरे दिमाग के लक्षणों के जरिए सामने आती है। ब्रेन फॉग दिमाग की उस हालत को कहते हैं जब आपको चीजें याद नहीं रहतीं, सोचने में दिक्कत होती है, और आप खुद को थोड़ा सुस्त महसूस करते हैं। अक्सर लोग इसे उम्र बढ़ने या तनाव का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।दिमाग और दिल के बीच गहरा संबंध है। जब दिल सही से काम करता है, तो दिमाग भी सही ढंग से काम करता है और जब दिल कमजोर होता है, तो दिमाग भी थक जाता है। यही वजह है कि ब्रेन फॉग सिर्फ दिमाग की समस्या नहीं, बल्कि दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसे पहचानना, जांच कराना और समय पर इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है।डॉक्टर बताते हैं कि यह केवल सतही कमजोरी नहीं होती, बल्कि कई मामलों में दिमाग तक पहुंचने वाले ब्लड सर्कुलेशन में कमी का कारण होती है। जब दिल ठीक से ब्लड पंप नहीं करता, तो दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता, जिससे मेमोरी, फोकस, और सोचने‑समझने की क्षमता प्रभावित होती है।जनरल ऑफ सेरेब्रल ब्लड फ्लो एंड मेटाबॉलिज्म में 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दिल की हल्की कमजोरी भी दिमाग तक ब्लड फ्लो घटा सकती है। इसका असर सीधे याददाश्त, ध्यान और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ता है। अगर आप अक्सर भूलते हैं, ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते या सोचने में सुस्ती महसूस करते हैं, तो यह सिर्फ दिमाग की समस्या नहीं, बल्कि दिल की चेतावनी भी हो सकती है।ऐसे में अपने दिल की जांच कराएं। छोटे‑छोटे बदलाव जैसे ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट या ब्लड फ्लो का निरीक्षण करना आपके लिए बड़े फायदे ला सकता है।

राजनीती

अंतरिक्ष की उड़ान को कर्तव्य पथ पर सम्मान : महामहिम ने शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से किया सम्मानित

महामहिम ने शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से किया सम्मानित

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांति कालीन वीरता सम्मान अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा की और 2025 में अपनी स्पेस फ्लाइट पूरी की थी। विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद वह अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने थे। इस मिशन के दौरान उन्होंने असाधारण साहस, त्वरित निर्णय क्षमता और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण का परिचय दिया, जिसके लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है।अंतरिक्ष यात्रा के दौरान किए थे कई वैज्ञानिक प्रयोगअंतरिक्ष में अपने प्रवास के दौरान शुक्ला ने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और कृषि से जुड़े परीक्षण भी किए। उन्होंने अंतरिक्ष में मेथी और मूंग के बीज को सफलतापूर्वक उगाया, जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।शुभांशु का सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए बनेगा प्रेरणाविशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा और यह संदेश देगा कि मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। उनकी पेशेवर दक्षता, नेतृत्व क्षमता और शांत निर्णय लेने की कला को इस सम्मान के जरिए सराहा गया है। इस उपलब्धि को भारतीय वायुसेना और पूरे देश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। उनका साहस और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।राष्ट्रपति ने 70 जवानों को वीरता पुरस्कार देने दी हरी झंडीइससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की रक्षा में असाधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान दिखाने के लिए 70 सशस्त्र बलों के जवानों को वीरता पुरस्कार देने की मंजूरी दी है। इनमें से छह पुरस्कार मरणोपरांत दिए जाएंगे।वीरता पुरस्कारों में एक अशोक चक्र, तीन कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र (एक मरणोपरांत), एक बार टू सेना मेडल (वीरता), 44 सेना मेडल (वीरता) (पांच मरणोपरांत), छह नौसेना मेडल (वीरता), और दो वायुसेना मेडल (वीरता) शामिल हैं।

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