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छिंदवाड़ा का जहरीला सिरप कांड : एसआईटी ने कोर्ट में पेश की फाइनल रिपोर्ट, गुनहगारों की बढ़ी मुश्किलें

एसआईटी ने कोर्ट में पेश की फाइनल रिपोर्ट, गुनहगारों की बढ़ी मुश्किलें

भोपाल। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 23 बच्चों की मौत से जुड़े बहुचर्चित जहरीले कफ सिरप कांड में जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को न्यायालय में पूरक और अंतिम चालान पेश कर दिया। इस चालान में हाल ही में गिरफ्तार किए गए दो शिशु रोग विशेषज्ञों डॉ. एस.एस. ठाकुर और अमन सिद्दीकी के खिलाफ साक्ष्यों और जब्त दस्तावेजों का विस्तृत विवरण शामिल है।इस मामले की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब परासिया के बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम की शिकायत पर थाना परासिया में प्रकरण दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच के दौरान शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया गया था। बाद में जांच का दायरा बढ़ाते हुए तमिलनाडु से जुड़े तीन आरोपियों सहित कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन सभी के खिलाफ एसआईटी ने पहले ही आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया था।नए तथ्यों और साक्षों के आधार पर एसआईटी ने और दो डाॅक्टरों को किया था अरेस्टजांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने दो और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया। इसके बाद पूरक चालान दाखिल कर जांच को पूर्ण घोषित कर दिया गया है। एसआईटी प्रमुख एवं डीएसपी जितेंद्र जाट ने बताया कि सभी गवाहों के बयान, वैज्ञानिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विवेचना पूरी कर ली गई है और अब आगे की कार्रवाई न्यायालय में होगी।विशेषज्ञों की मेडिकल रिपोर्ट ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई। जिन बच्चों की मौत हुई थी, उनके पोस्टमार्टम और क्लीनिकल जांच में समान लक्षण पाए गए। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि सभी मौतें जहरीले कफ सिरप के सेवन से हुईं, जिससे जांच को स्पष्ट दिशा मिली।पीड़ित परिवारों ने जांच पर उठाए सवालहालांकि, पीड़ित परिवारों ने जांच पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि परासिया के स्टेशन रोड स्थित एक अन्य डॉक्टर ने भी बीमार बच्चों को यही कफ सिरप लेने की सलाह दी थी, लेकिन उसके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि उसके क्लीनिक के सामने स्थित दो मेडिकल स्टोरों को सील किया जा चुका है। पीड़ित पक्ष के वकील संजय पटोरिया का कहना है कि न्यायालय के निर्देश पर इस मामले में आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के कुछ पहलुओं पर अभी और कार्रवाई की आवश्यकता है।

पॉडकास्ट

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 2

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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Podcast E124

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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आज की बुलेटिन 26 June

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आज की बुलेटिन 24 June

मनोरंजन

सौम्या टंडन : धुरंधर की सफलता के बाद अब बादशाह की सवारी करेंगी अभिनेत्री, शुरू की घुड़सवारी की ट्रेनिंग

धुरंधर की सफलता के बाद अब बादशाह की सवारी करेंगी अभिनेत्री, शुरू की घुड़सवारी की ट्रेनिंग

मुंबई । अभिनेत्री सौम्या टंडन इन दिनों स्पाई एक्शन फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' को लेकर सुर्खियों में छाई हैं। इस बीच, अभिनेत्री ने अपने नए शौक का खुलासा किया और बताया कि उन्होंने उसकी ट्रेनिंग भी शुरू कर दी हैं। अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताया कि उन्हें घुड़सवारी का काफी शौक था, जिसकी उन्होंने ट्रेनिंग शुरू कर दी है।फिल्म की सफलता के बाद सौम्या अब अपनी नई रुचि पर फोकस कर रही हैं। घुड़सवारी उनके लिए न सिर्फ नया शौक है बल्कि एक सपने को पूरा करने की दिशा में पहला कदम भी है। सौम्या ने कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। इसमें वे घोड़ों के साथ नजर आ रही हैं। वहीं, कुछ तस्वीरों में वे घुड़सवारी सीखते हुए भी दिख रही हैं। सौम्या ने लिखा, "पहला दिन और पहली घुड़सवारी की क्लास।"अभिनेत्री ने बताया कि उन्हें बचपन से ही घोड़े बहुत पसंद रहे हैं। उन्होंने लिखा, "घोड़े बहुत सुंदर और नाजुक जानवर होते हैं। मैं हमेशा उनसे आकर्षित रही हूं। मैं बचपन में एक बड़े फार्म का सपना देखती थी, जहां खूबसूरत घोड़े और कुत्ते हों। मैं खुद उन घोड़ों पर सवारी करते हुए खुद को देखती थी।" सौम्या ने लिखा, "पहला दिन थोड़ा मुश्किल रहा, लेकिन मैंने घुड़सवारी सीखना शुरू कर दिया है, तो पहला दिन काफी खतरनाक और थकाऊ था। मेरी पीठ में दर्द हो रहा है, लेकिन इस क्लास में मुझे एक नया दोस्त मिल गया। वह दोस्त है एक सुंदर सफेद घोड़ा, जिसका नाम ‘बादशाह’ है।"सौम्या ने मजाकिया अंदाज में बताते हुए लिखा, "मैंने बादशाह से बहुत बातें कीं। सच कहूं तो वह बहुत अच्छा सुनने वाला था या शायद उसके पास और कोई चारा नहीं था, लेकिन उसने मेरी सारी बातें ध्यान से सुनीं। मुझे लगता है कि हमारे बीच एक खास कनेक्शन बन गया है। हम अच्छे दोस्त बन गए हैं।" अंत में सौम्या ने लिखा, "फिर मिलेंगे बादशाह, जल्दी ही। उम्मीद है एक दिन हम साथ में घोड़ी चलाएंगे और तेज दौड़ लगाएंगे।"

बिज़नेस

सेंसेक्स में सूनामी, निफ्टी भी बिखरा : भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार, रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंचा रूपया भी

भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार, रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंचा रूपया भी

नई दिल्ली। जिसका डर था वही हुआ, विदेशों से मिल रहे खराब संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार खुलते ही औंधे मुंह गिर गया है। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,800 अंकों यानि 2 प्रतिशत का गोता लगाया है। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 575 अंक के आसपास बिखर गया है। इस बीच बीएसी लार्जकैप में शामिल सभी शेयर लाल निशान पर कारोबार करते हुए नजर आए। इतना ही नहीं शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 41 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 93.94 पर पहुंच गया है। सप्ताह के पहले दिन सोमवार को शेयर बाजार में हाहाकार देखने को मिला। बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 74,532.96 की तुलना में बुरी तरह टूटकर 73,732 पर खुला। इसके कुछ ही मिनटों में ये गिरावट और भी तेज हो गई, जिसके चलते सेंसेक्स करीब 1600 अंक गिरकर 72,977 के लेवल पर आ गया। वहीं इसके कुछ मिनटों बाद ही ये गिरावट और बढ़ गई और सेंसेक्स 1800 अंक से ज्यादा फिसलकर 72,724 पर कारोबार करने लगा। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाइटन और अदानी पोर्ट्स सबसे पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। एचसीएल टेक एकमात्र विजेता के रूप में उभरी।न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि एनएसई का निफ्टी-50 भी खुलने के साथ ही औंधे मुंह गिर गया। .ये इंडेक्स अपने पिछले शुक्रवार के बंद 23,114 की तुलना में फिसलकर 22,824 पर ओपन हुआ था और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए ये मिनटों में 480 अंक की भारी गिरावट के साथ 22,634 के लेवल पर आ गया और कुछ देर के कारोबार के बाद 575 अंक टूटकर 22,538 पर ट्रेड करता दिखा। एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावटवैश्विक संकेत बेहद कमजोर रहे और एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 4ः से ज्यादा गिरकर 51,280 पर आ गया। सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 2.20 फीसदी गिरकर 4,839 पर, हांगकांग का हैंगसेंग 3.41 फीसदी टूटकर 24,415 पर बंद हुआ। ताइवान का वेटेड इंडेक्स 2.65ः गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया।अमेरिकी बाजार भी दबाव मेंशुक्रवार को अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स 0.96 फीसदी गिरकर 45,577 पर बंद हुआ, एस एंड पी 500 में 1.51 फीसदी की गिरावट रही और नैस्डैक 2 फीसदी टूटकर 21,647 पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और दबाव बना रह सकता है।ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 112.9 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचावैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.62 प्रतिशत बढ़कर 112.9 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,706.23 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये (लगभग 9.6 अरब अमेरिकी डॉलर) निकाल लिए हैं।शुक्रवार को सेंसेक्स 325.72 अंक या 0.44 प्रतिशत बढ़कर 74,532.96 पर बंद हुआ। निफ्टी 112.35 अंक या 0.49 प्रतिशत बढ़कर 23,114.50 पर समाप्त हुआ।

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खेल

टी20 वर्ल्ड कप से दूरी पड़ी भारी! : बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर जांच की तलवार, ईद के बाद शुरु होगा एक्शन

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर जांच की तलवार, ईद के बाद शुरु होगा एक्शन

ढाका। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) का टी20 विश्व कप 2026 से बाहर रहने का फैसला एक बार फिर से चर्चा में है। बांग्लादेश की नई सरकार ने इस मामले की जांच शुरू करने का फैसला लिया है। युवा एवं खेल राज्य मंत्री अमीनुल इस्लाम ने कहा है कि ईद के बाद एक नई जांच कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी इस बात की पड़ताल करेगी कि क्या भारत और श्रीलंका में आयोजित इस टूर्नामेंट से हटने का फैसला स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी में विफलता का नतीजा था।मंत्री अमीनुल इस्लाम ने कहा कि सरकार यह समझना चाहती है कि क्या यह स्थिति टाली जा सकती थी। उन्होंने कहा, “हमें यह गहराई से जांचना होगा कि हम विश्व कप में हिस्सा क्यों नहीं ले पाए और हमारी स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी में कमी कहां रह गई।” उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ टूर्नामेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय खेल संबंधों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में मौजूद कमियों को भी उजागर करता है।अनियमितताओं से जोड़कर देखा जा रहा जांच कोसरकार इस जांच को बीसीबी के हालिया चुनावों में कथित अनियमितताओं से जोड़कर भी देख रही है। मंत्री के मुताबिक क्लब और जिला स्तर के कई स्टेकहोल्डर्स ने शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनकी जांच पहले से चल रही है। बीसीबी ने हाल ही में मंत्रालय से पिछली जांच बंद करने की अपील की थी, लेकिन इसके ठीक अगले दिन नई जांच की घोषणा ने बोर्ड और सरकार के बीच बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया है।विवाद की यहां से हुई थी शुरुआतविवाद की शुरुआत तब हुई थी जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था। आईसीसी के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद बोर्ड अपने रुख पर कायम रहा, जिसके बाद बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया। उनकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया। अब इस पूरे मामले पर सबकी नजरें हैं, क्योंकि जांच के नतीजे न सिर्फ बांग्लादेश क्रिकेट प्रशासन बल्कि वैश्विक क्रिकेट में उसकी साख पर भी बड़ा असर डाल सकते हैं।

लाइफस्टाइल

पेट से जुड़े रोगों के लिए खा रहे हैं अजवाइन : सेवन की यह गलती बिगाड़ सकती है पाचन

सेवन की यह गलती बिगाड़ सकती है पाचन

नई दिल्ली । गलत खान-पान और शारीरिक गतिविधि के कम होने के कारण आज के समय में पेट से जुड़े विकार सबसे ज्यादा परेशान करते हैं। भूख का कम लगना या खाने के बाद पेट फूलना जैसी परेशानियां होने लगती हैं। पहले तो इन परेशानियों को छोटा समझकर नजर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन यहीं छोटी-छोटी दिक्कतें सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित करती हैं। कई लोग रोग पाचन से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए रोजाना अजवाइन खाते हैं, लेकिन यह नहीं जानते हैं कि कैसे और कितनी मात्रा में अजवाइन खाना लाभकारी होता है।अजवाइन में थाइमोल नाम का यौगिक पाया जाता है, जो पाचन से जुड़ी परेशानियों में राहत देता है और इसकी गर्म तासीर सर्दी और खांसी से भी बचाती हैं। हालांकि अजवाइन का सेवन करने से पहले उसके सेवन का तरीका भी जान लेना जरूरी है। कुछ लोग अजवाइन को कच्चा ही खा लेते हैं और किसी भी समय खाली पेट या फिर रात के समय इसका सेवन बेधड़क करते हैं लेकिन यह तरीका बिल्कुल गलत है।अजवाइन को खाने से पहले हल्का भून लेना चाहिए। अजवाइन को इतना भूनना चाहिए कि उसके रंग में किसी तरह का परिवर्तन न हो लेकिन उसमें से हल्की-हल्की सुगंध आने लगे। ऐसे में आधे से कम चम्मच का सेवन करना चाहिए और सेवन भी हमेशा गुनगुने पानी के साथ करना करना चाहिए। गुनगुने पानी के साथ सेवन से अजवाइन के गुण बढ़ जाते हैं और पाचन तेजी से ठीक होता है। इससे पेट की जठराग्नि तेज होती है और भूख भी समय पर लगती है।अब सवाल है कि किस समय अजवाइन का सेवन करना लाभकारी है। कुछ लोग सुबह के वक्त खाली पेट अजवाइन का पानी या सूखी अजवाइन का सेवन करते हैं, लेकिन यह तरीका बिल्कुल गलत है। अजवाइन को हमेशा भोजन के बाद ही लेना चाहिए। खाना खाने के बाद तकरीबन आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से इसका सेवन किया जा सकता है। ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि अजवाइन का सेवन तब ही करें जब पाचन में परेशानी हो, बिना परेशानी के उसे अपने दिनचर्या का हिस्सा न बनाएं। गर्म तासीर होने की वजह से यह पेट में जलन कर सकती है। इसलिए जब गैस और पेट फूलने की परेशानी हो, तभी इसका सेवन करें।

राजनीती

जन्मदिवस विशेष : संघर्ष, अध्ययन और संस्कारों से गढ़ा नेतृत्व—डॉ. मोहन यादव

संघर्ष, अध्ययन और संस्कारों से गढ़ा नेतृत्व—डॉ. मोहन यादव

अनूप पौराणिकमध्यप्रदेश की राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल पद प्राप्त नहीं करते, बल्कि अपने विचार, व्यवहार और कार्यशैली से नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ते हैं। डॉ. मोहन यादव ऐसे ही नेताओं में शामिल हैं, जिनका जीवन संघर्ष, अध्ययन, संगठन और संस्कारों के संतुलन का सशक्त उदाहरण है। 25 मार्च 1965 को उज्जैन में जन्मे डॉ. यादव का प्रारंभिक जीवन सादगी और अनुशासन से परिपूर्ण रहा। धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना से समृद्ध उज्जैन की भूमि ने उनके व्यक्तित्व को गहराई और संतुलन प्रदान किया, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।उनकी शैक्षिक यात्रा उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी आधारशिला रही है। विज्ञान, प्रबंधन (एमबीए), विधि और राजनीतिक शास्त्र में पीएचडी जैसी विविध शिक्षा ने उन्हें व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया। उनके लिए शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और शासन को समझने का उपकरण रही। यही कारण है कि उनके निर्णयों में संवेदनशीलता के साथ-साथ तर्क, तथ्य और दूरदृष्टि का संतुलन दिखाई देता है।डॉ. मोहन यादव का सार्वजनिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू हुआ। माधव विज्ञान महाविद्यालय में छात्रसंघ के पदों पर रहते हुए उन्होंने नेतृत्व की प्रारंभिक झलक प्रस्तुत की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने संगठन, अनुशासन और सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया को निकट से समझा। नगर स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की जिम्मेदारियों ने उन्हें एक सशक्त संगठनकर्ता के रूप में स्थापित किया। यही अनुभव उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव बना।राजनीतिक जीवन में संघर्ष भी उनके साथ-साथ चला। वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा बड़नगर विधानसभा से टिकट मिलने के बाद परिस्थितियोंवश उसे लौटाना उनके जीवन का एक कठिन निर्णय था। लेकिन इस चुनौती ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उनके धैर्य और निष्ठा को और मजबूत किया। उन्होंने प्रतीक्षा को अपनी शक्ति बनाया और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा। यह प्रसंग उनके व्यक्तित्व की गहराई और परिपक्वता को दर्शाता है।प्रशासनिक अनुभव के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने नगर विकास और अधोसंरचना को नई दिशा दी। उनके कार्यकाल में विकास योजनाओं को इस प्रकार लागू किया गया कि शहर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान सुरक्षित बनी रहे। यह संतुलन उनके नेतृत्व की विशेषता है—जहाँ विकास और विरासत साथ-साथ चलते हैं। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पर्यटन को आर्थिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाया। उनके नेतृत्व में प्रदेश को लगातार दो वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण है।विधायक के रूप में लगातार तीन बार जनता का विश्वास जीतना उनकी जनसंपर्क क्षमता और लोकप्रियता को दर्शाता है। वे संवाद आधारित राजनीति में विश्वास रखते हैं, जहाँ जनता के साथ सीधा जुड़ाव प्राथमिकता होता है। उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जब मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी रूप से लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाई। नए महाविद्यालयों की स्थापना, कौशल आधारित शिक्षा और पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण ने शिक्षा को रोजगार और नवाचार से जोड़ा।डॉ. मोहन यादव केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। विभिन्न संगठनों में उनकी भूमिका ने युवाओं को प्रेरित करने का कार्य किया। उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहलें कीं, जिनमें विक्रमादित्य परंपरा का पुनर्स्थापन और सांस्कृतिक आयोजनों का विस्तार शामिल है। 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करना उनके लंबे राजनीतिक और सामाजिक साधना का परिणाम था। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उनके निरंतर परिश्रम, संगठन निष्ठा और जनविश्वास का प्रतीक है।उनकी जीवन यात्रा यह स्पष्ट करती है कि नेतृत्व कोई संयोग नहीं होता, बल्कि यह निरंतर प्रयास, धैर्य और आत्मसंयम से विकसित होता है। डॉ. मोहन यादव का नेतृत्व इस बात का उदाहरण है कि जब व्यक्ति अपने मूल्यों, शिक्षा और संगठन के प्रति समर्पित रहता है, तो वह न केवल सफलता प्राप्त करता है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बनता है।(लेखक :- युवा पत्रकार और शोधार्थी है)

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