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केरल विधानसभा चुनाव : राहुल ने किया चुनावी अभियान का आगाज, अदूर में जनसभा कर वाम दलों और भाजपा पर लगाया बड़ा आरोप

राहुल ने किया चुनावी अभियान का आगाज, अदूर में जनसभा कर वाम दलों और भाजपा पर लगाया बड़ा आरोप

अदूर (केरल)। केरल में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होना है। इससे पहले राजनीतिक दलों ने अपना फोकस चुनाव प्रचार कर दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सोमवार को अपने चुनावी अभियान का आगाज किया। उन्होंने केरल के अदूर में एक जनसभा को संबोधित कर चुनाव प्रचार की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने सत्तारूढ़ वामपंथी दलों और भाजपा के बीच गुप्त मिलीभगत का आरोप लगाया। साथ ही राहुल ने चुनावी लड़ाई को यूडीएफ और वाम-भाजपा के अप्रत्यक्ष गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला बताया।राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ यूडीएफ है और दूसरी तरफ वाम और भाजपा का गठबंधन है। उन्होंने छिपे हुए हाथ का हवाला देते हुए तर्क दिया कि भाजपा वाम को राष्ट्रीय स्तर पर एक वास्तविक चुनौती के रूप में नहीं देखती है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का वास्तविक रूप से विरोध करने वाले नेताओं को दबाव और जांच का सामना करना पड़ता है। अपने खिलाफ मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और वामपंथी नेतृत्व को इस तरह की गहन जांच का सामना नहीं करना पड़ता है।सबरीमाला मुद्दे पर राहुल ने पीएम को घेराराहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर केरल के विवादास्पद मुद्दे सबरीमाला पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया ताकि सीपीआई (एम) को राजनीतिक रूप से नुकसान न पहुंचे। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि केरल में वामपंथी सरकार अब सच्ची वामपंथी विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करती और इसके बजाय भाजपा के समान ष्कार्पोरेट-हितैषीष् नीतियां अपना रही है।यूडीएफ को जनहितेषी विकल्प के रूप में किया पेशउन्होंने रबर किसानों की दुर्दशा की ओर इशारा करते हुए दावा किया कि इस क्षेत्र की उपेक्षा की गई है और श्रमिकों और छोटे उत्पादकों की रक्षा करने में विफल रहने के लिए केंद्र और राज्य दोनों की आलोचना की। यूडीएफ को जनहितैषी विकल्प के रूप में प्रस्तुत करते हुए राहुल गांधी ने कई महत्वपूर्ण आश्वासनों की घोषणा की। जिसमें राज्य द्वारा संचालित बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा, कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए 1,000 रुपए का मासिक भत्ता और कल्याणकारी पेंशन को बढ़ाकर 3,000 रुपए करना शामिल है।राहुल ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए किया बड़ा वादाराहुल गांधी ने प्रत्येक परिवार के लिए 25 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा कवर, लघु उद्यम को बढ़ावा देने के लिए 5 लाख रुपए के ऋण और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक समर्पित मंत्रालय के गठन का भी वादा किया। गांधी ने कहा कि केरल को आयात पर निर्भर रहने के बजाय लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और कृषि को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा, ष्जिस माइक्रोफोन से मैं बोल रहा हूं वह श्मेड इन चाइनाश् है, इसे केरल में बनाया जाना चाहिए।

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नरक चतुर्दशी विशेष

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 3

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पितृ पक्ष का महत्त्व - एपिसोड 1

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गुप्त नवरात्री पर विशेष

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पूरी और प्रभु जगन्नाथ पर विशेष

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आज की बुलेटिन 28 June

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मनोरंजन

संजय कपूर के परिवार से जुड़ा हाई-प्रोफाइल विवाद फिर सुर्खियों में : प्रिया के मानहानि मामले में अब 22 अप्रैल को होगी सुनवाई, संपत्ति-वसीयत से जुड़ा है मामला

प्रिया के मानहानि मामले में अब 22 अप्रैल को होगी सुनवाई, संपत्ति-वसीयत से जुड़ा है मामला

नई दिल्ली। दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के परिवार से जुड़ा हाई-प्रोफाइल विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल, संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर द्वारा अपनी ननद मंधिरा कपूर के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई फिलहाल टाल दी गई है। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल की तारीख तय की है। जानकारी के मुताबिक, सुनवाई के दौरान प्रिया कपूर की तरफ से पेश वकील ने अदालत से समय मांगा, ताकि मंधिरा कपूर द्वारा दायर अर्जी का जवाब तैयार किया जा सके। इस अर्जी में मंधिरा कपूर ने कोर्ट से मांग की है कि प्रिया कपूर उन सभी दस्तावेजों को पेश करें, जिनके आधार पर उन्होंने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया है।कोर्ट ने मंधिरा कपूर को जारी किया था नोटिसइससे पहले की सुनवाई में अदालत ने मंधिरा कपूर को समन जारी किया था। प्रिया कपूर ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि मंधिरा कपूर लगातार पॉडकास्ट, सोशल मीडिया और मीडिया इंटरव्यू के जरिए उनके खिलाफ झूठे और भ्रामक बयान दे रही हैं। प्रिया का कहना है कि इन बयानों का मकसद उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना है।आरोपों को खारिज कर चुकी हैं मंधिरादूसरी ओर, मंधिरा कपूर इन आरोपों को खारिज कर चुकी हैं और उनका कहना है कि उन्होंने जो भी कहा है, वह सच है और जरूरत पड़ने पर वह इसे अदालत में साबित करेंगी। उन्होंने दावा किया कि पूरे मामले को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है और असल मुद्दा परिवार की संपत्ति और विरासत का है।संजय कपूर अपने पीछे छोड़ गए हैं करोड़ों की संपत्तिदरअसल, यह पूरा विवाद संजय कपूर की मौत के बाद उनकी संपत्ति और वसीयत को लेकर शुरू हुआ। बताया जाता है कि संजय कपूर अपने पीछे करीब 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति छोड़ गए हैं। इस संपत्ति को लेकर परिवार के अलग-अलग सदस्यों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। खासतौर पर वसीयत में किन लोगों के नाम शामिल हैं और किन्हें बाहर रखा गया है, यह मुद्दा सबसे बड़ा विवाद बन चुका है।वसीयत में हैं कई गड़बड़ियां: मंधिरा का आरोपमंधिरा कपूर ने पहले भी आरोप लगाया है कि वसीयत में कई गड़बड़ियां हैं और इसमें परिवार के कुछ सदस्यों, खासकर करिश्मा कपूर और उनके बच्चों समायरा और कियान के अधिकारों को नजरअंदाज किया गया है। वहीं प्रिया कपूर का पक्ष है कि वह कानूनी रूप से सही हैं और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।

बिज़नेस

सर्राफा बाजार में सुनामी : चांदी 12,000 टूटी, सोना भी फिसला जोर से, क्या रहे गिरावट के कारण जानें

चांदी 12,000 टूटी, सोना भी फिसला जोर से, क्या रहे गिरावट के कारण जानें

नई दिल्ली। गुरुवार को वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल के बीच सोने और चांदी की कीमतों में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी के दाम में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी करीब 2.5 प्रतिशत तक फिसल गया। दोपहर करीब 12ः30 बजे चांदी की कीमतों में तेज टूट शुरू हुई और कुछ ही समय में यह लगभग 12,000 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो गई। वहीं सोने की कीमतों में करीब 4,500 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई। फिलहाल चांदी करीब 2.35 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे कारोबार कर रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया है। हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ने के बाद तेल से जुड़े ठिकानों पर हमले हुए हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। आमतौर पर ऐसे हालात में सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार निवेशकों का रुख अलग नजर आ रहा है।अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से बाजार में बढ़ा दबावइसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया फैसले ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है और संकेत दिए हैं कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना कम है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का जिक्र किया, जिसके बाद निवेशकों ने कीमती धातुओं में मुनाफावसूली शुरू कर दी।4.20 लाख के रिकार्ड स्तर को छुआ था चांदी नेगौरतलब है कि पिछले दो वर्षों में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी देखी गई थी। जनवरी 2026 में चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, लेकिन इसके बाद से कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। जानकारों का कहना है कि मौजूदा गिरावट निवेशकों की मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक संकेतों का मिश्रित असर है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर निर्भर करेगी।

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खेल

बंद दरवाजों के पीछे खेला जाएगा पीएसएल : कंगाल पीसीबी की फिर हुई इंटरनेशनल बेइज्जती

कंगाल पीसीबी की फिर हुई इंटरनेशनल बेइज्जती

नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) हमेशा से ही पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) की तुलना इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से करता रहा है। हालांकि, बीसीसीआई की तरह पीसीबी कभी भी पीएसएल का आयोजन नहीं कर सका है। इसका ताजा उदाहरण आगामी सीजन की शुरुआत से पहले ही सामने आ गया है। पाकिस्तान सुपर लीग 2026 का आयोजन बंद दरवाजों के पीछे किया जाएगा, मतलब दर्शकों को स्टेडियम में आने की परमिशन नहीं होगी। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि पीएसएल के सभी मुकाबले अब छह की जगह महज दो शहरों में खेले जाएंगे। पीसीबी ने अपने इस फैसले का कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन संकट को बताया है। पीसीबी ने खर्च कटौती का दिया हवालापाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का कहना है कि खर्चे में कटौती करने की खातिर टूर्नामेंट का आयोजन सिर्फ दो वेन्यू पर करने का निर्णय लिया गया है। पीएसएल की शुरुआत 26 मार्च से होनी है और फाइनल मुकाबला 3 मई को खेला जाना है।आईपीएल के आयोजनों में कोई कमी नहींअमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर जितना पाकिस्तान पर हो रहा है, उतना ही भारत पर भी हो रहा है। तेल की कीमतों में यहां भी उछाल आया है और बाकी चीजों के दाम भारत में भी बढ़े हैं। हालांकि, इसके बावजूद आईपीएल 2026 के आयोजन में कोई कमी नहीं रखी गई है। पीएसएल का आयोजन तो छह शहरों में किया जाना था, जबकि आईपीएल 2026 कुल 10 शहरों में खेला जाना है। इसके बावजूद खर्चे में कटौती के नाम पर बीसीसीआई ने टूर्नामेंट के शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं किया है। यह दर्शाता है कि पीसीबी के मुकाबले बीसीसीआई का कद काफी ऊंचा है।पीएसएल छोड़कर आईपीएल से जुड़ रहे विदेशी खिलाड़ीसिर्फ यही नहीं, बल्कि इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने के लिए विदेशी खिलाड़ी बिना कुछ सोचे ही पाकिस्तान सुपर लीग को छोड़कर भारत आ रहे हैं। ब्लेसिंग मुजारबानी और दासुन शनाका इसके ताजा उदाहरण भी हैं। पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने पीएसएल छोड़कर आईपीएल में खेलने जा रहे खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही है। हालांकि, इसके बावजूद खिलाड़ी आईपीएल की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। इसका पहला कारण आईपीएल में मिलने वाला पैसा तो है ही, लेकिन इसके साथ ही पीएसएल के मुकाबले आईपीएल की ज्यादा लोकप्रियता भी है। पीएसएल को लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के दावे एक बार फिर खोखले साबित हो रहे हैं। वहीं, आईपीएल की बराबरी करना पीएसएल और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए अभी दूर की कौड़ी ही लगता है।

लाइफस्टाइल

क्या है लेटेंट टीबी? : नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, जानें लक्षण और बचाव

 नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, जानें लक्षण और बचाव

नई दिल्ली । टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो बैक्टीरिया माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरकुलोसिस के कारण होती है और मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। साथ ही दिमाग, हड्डी, किडनी और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। यह हवा के जरिए फैलती है। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो टीबी खतरनाक हो सकती है और जान भी ले सकती है। लेकिन टीबी की एक स्थिति ऐसी होती है, जिसमें टीबी के बैक्टीरिया शरीर में मौजूद होते हैं, लेकिन वे निष्क्रिय अवस्था में रहते हैं।24 मार्च को हर साल विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद लेटेंट टीबी के बारे में जागरूक करता है। यह वह स्थिति है जिसमें टीबी के बैक्टीरिया शरीर में मौजूद होते हैं, लेकिन वे निष्क्रिय अवस्था में रहते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं दिखते, न ही वह बीमार महसूस करता है और न ही वह दूसरों में संक्रमण फैलाता है।आयुर्वेद इंस्टीट्यूट के अनुसार, लेटेंट टीबी को सक्रिय टीबी रोग से अलग समझना जरूरी है। इसमें संक्रमित व्यक्ति टीबी का वाहक बना रहता है, लेकिन रोग नहीं फैलाता। हालांकि, अगर समय पर ध्यान न दिया जाए और इलाज न किया जाए, तो यह निष्क्रिय संक्रमण किसी भी समय सक्रिय टीबी में बदल सकता है, जो खांसी, बुखार, वजन घटना, रात में पसीना आना और थकान जैसे लक्षण पैदा करता है। लेटेंट टीबी आमतौर पर उन लोगों में पाई जाती है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है, जैसे एचआईवी संक्रमित, डायबिटीज के मरीज, कैंसर रोगी, या जो लंबे समय से स्टेरॉयड दवाएं ले रहे हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी इसका खतरा अधिक होता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में भर की बड़ी आबादी लेटेंट टीबी से संक्रमित है। भारत जैसे देश में यह संख्या और भी ज्यादा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लेटेंट टीबी का पता लगाना और समय पर इलाज करना बहुत जरूरी है। आसान ब्लड टेस्ट या ट्यूबरकुलिन स्किन टेस्ट से इसका पता लगाया जा सकता है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो डॉक्टर आमतौर पर 3 से 9 महीने तक की दवा देते हैं, जिससे संक्रमण को सक्रिय होने से रोका जा सकता है।एक्सपर्ट के अनुसार, अगर परिवार में किसी को लंबी खांसी, बुखार या वजन घटने की शिकायत है, तो तुरंत जांच कराएं। लेटेंट टीबी को नजरअंदाज करने से बाद में सक्रिय टीबी हो सकती है, जो न सिर्फ व्यक्ति के लिए बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए खतरा बन सकती है।

राजनीती

लाल आतंक पर संसद में चर्चा : शाह ने नक्सलियों को दिया सख्त संदेश, कांग्रेस पर भी जमकर बरसे, कहा- नहीं झुठलाया जा सकता सत्य को

शाह ने नक्सलियों को दिया सख्त संदेश, कांग्रेस पर भी जमकर बरसे, कहा- नहीं झुठलाया जा सकता सत्य को

नई दिल्ली। लोकसभा में आज नक्सलवाद जैसे गंभीर और लंबे समय से देश को प्रभावित करने वाले मुद्दे पर अहम चर्चा हुई, जिसमें सत्ता और विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं ने अपने विचार रखे। बहस के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, अमित शाह, असदुद्दीन ओवैसी, कंगना रनौत और अनुराग ठाकुर जैसे दिग्गजों ने अपनी बात रखी। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने सुरक्षा और विकास के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखे हैं। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि सरकार नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है और 2026 तक इस दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की गई है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद को लेकर शाह ने कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया। अमित शाह ने कहा कि सबसे पहले मैं रेड कॉरिडोर के नाम से पहचाने जाने वाले पूरे क्षेत्र, जिसमें 12 राज्य और 70 प्रतिशत का भूभाग शामिल थे, उसमें रह रही जनसंख्या की तरफ से सदन को धन्यवाद देना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग-लगभग समाप्त हो चुका है। बस्तर के अंदर हर गांव में स्कूल बनाने की मुहिम चली। बस्तर के अंदर हर गांव में राशन की दुकान खोलने की मुहिम चली। मैं इतना ही पूछना चाहता हूं कि जो लोग कह रहे हैं कि अब तक आदिवासियों का विकास क्यों नहीं हुआ? तो, वो खुद बताएं कि 70 सालों से उन्होंने क्या किया?झुठलाया जा रहा सत्य कोशाह कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद देश के हर गरीब को घर मिला, गैस मिला, शुद्ध पीने का पानी मिला, 5 लाख तक का स्वास्थ्य का बीमा मिला, प्रति व्यक्ति, प्रतिमाह 5 किलो मुफ्त अनाज मिला... लेकिन, ये बस्तर वाले क्यों छूट गए थे? उन्होंने कहा कि मैं इसलिए कह रहा हूं कि सत्य को झुठलाया जा रहा है। ये बस्तर वाले इसलिए छूट गए थे, क्योंकि वहां लाल आतंक की परछाई थी, इसलिए वहां विकास नहीं पहुंचा। मोदी सरकार में आज वो परछाई हट गई है, और इसलिए आज बस्तर विकास कर रहा है। ये नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो हथियार उठाएगा, उसका हिसाब चुकता होगा।गिरेबां में झांककर देखो दोषी कौनउन्होंने कहा, मैं पूछना चाहता हूं कि 75 साल में 60 साल तो शासन आपने किया, आदिवासी अभी तक विकास से क्यों वंचित रहे? आदिवासियों का विकास तो अब नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 60 साल आपने (कांग्रेस) उन्हें घर नहीं दिया, पानी नहीं दिया, स्कूल नहीं बना, बैंक की फैसिलिटी नहीं पहुंचने दिया, इसलिए पहले थोड़ा अपनी गिरेबां में झांककर देखो कि दोषी कौन है।माओवादी हिंसा आंतरिक सुरक्षा की बड़ी चुनौतीकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कई आदिवासी सांसद केवल वोट बैंक की राजनीति के कारण पार्टी के साथ खड़े रहे, लेकिन उन्होंने अपने समाज के विकास के लिए ठोस काम नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद स्वीकार किया था कि माओवादी हिंसा देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती है, फिर भी उस समय प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोपअमित शाह ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने नक्सलवाद की समस्या को कभी गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी इलाकों में विकास कार्यों की कमी के कारण वहां असंतोष बढ़ा, जिससे नक्सलवाद को बढ़ावा मिला। उनके अनुसार, सरकार की कमजोर नीतियों ने इस समस्या को और गहरा किया।2014 के बाद बदलाव का दावाशाह ने कहा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद कई बड़े और निर्णायक फैसले लिए गए। उन्होंने धारा 370 और 35ए हटाने, राम मंदिर निर्माण, जीएसटी लागू करने और महिलाओं को 33त्न आरक्षण देने जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन वर्षों में देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा मजबूत हुई है।नक्सलवाद मुक्त भारत का लक्ष्यअमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त भारत का सपना अब साकार होता दिख रहा है। उन्होंने इसे सरकार की मजबूत नीतियों और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई का परिणाम बताया और इसे देश के लिए एक बड़ा सकारात्मक बदलाव बताया।

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