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वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से चल रहा असमंजस लगभग खत्म हो गया है। दरअसल, सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बात की। इतना ही नहीं उन्होंने खुद ही व्यापार समझौते को लेकर बड़ी जानकारी भी शेयर की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल भारत पर लागू 25 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी करने का ऐलान किया। भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को भारतीय-अमेरिकी बिजनेस लीडर्स ने खुलकर समर्थन दिया है।
वहीं, नीति से जुड़े कुछ पुराने जानकारों ने इसे सही दिशा में कदम बताया, लेकिन साथ ही कहा कि जब तक समझौते की पूरी जानकारी सामने नहीं आती, तब तक सावधानी जरूरी है। वेंचर कैपिटल निवेशक और रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ी फंडरेजर आशा जडेजा मोटवानी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के भीतर इस समझौते को लेकर पहले से तैयारी चल रही थी। उन्होंने बताया, फरवरी में ही यह साफ संकेत मिल चुके थे कि व्यापार समझौता होने वाला है। हालांकि, यह उम्मीद नहीं थी कि यह इतनी जल्दी सामने आ जाएगा।
आशा जडेजा ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की ऊर्जा नीति में बदलाव के लिए तैयार होंगे।उन्होंने कहा, ष्मुझे पता था कि प्रधानमंत्री मोदी एक ऐसे व्यापार समझौते के लिए तैयार होंगे जो उन्हें रूसी तेल की जगह अमेरिकी तेल या अमेरिकी सहयोगी देशों के तेल का इस्तेमाल करने की इजाजत दे। उन्होंने कहा कि शुल्क यानी टैरिफ को लेकर जो नतीजा निकला है, वह इससे बेहतर हो ही नहीं सकता।
उनका यह भी कहना है कि अब वॉशिंगटन भारत को ऊर्जा, रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में बेहद अहम साझेदार मानता है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ते फिर से मजबूत हो गए हैं और दोनों देशों के निजी क्षेत्र को अब बिना देरी के साझेदारी और व्यापारिक समझौते आगे बढ़ाने चाहिए।
अमेरिका के पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ कॉमर्स फॉर ट्रेड डेवलपमेंट रेमंड विकरी ने इस समझौते को थोड़े सतर्क नजरिए से देखा। उन्होंने कहा कि इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पिछले कुछ समय से भारत-अमेरिका रिश्तों में जो गिरावट आ रही थी, वह रुक गई है। उनके मुताबिक, हाल के तनाव की वजह टैरिफ, वीजा से जुड़ी दिक्कतें और दूसरे विवाद रहे हैं।
रेमंड विकरी ने 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए गए टैरिफ का स्वागत किया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि यह कटौती किन उत्पादों पर लागू होगी और किन पर नहीं। उन्होंने कृषि, डेयरी, दाल और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार की ओर से बताए जा रहे 500 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त खरीद के आंकड़े पर भी संदेह जताया। उनका कहना है कि जब मौजूदा भारत-अमेरिका व्यापार करीब 200 बिलियन डॉलर का है, तो यह आंकड़ा बहुत बड़ा लगता है।
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