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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की कार्रवाई ने वैश्विक तेल सप्लाई चेन पर बड़ा असर डालना शुरू कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सउदी अरामको के रास तनुरा प्लांट को निशाना बनाया। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र पहले से ही इजरायल और अमेरिका से जुड़े तनाव से गुजर रहा है। इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर दुनिया की अहम समुद्री लाइफलाइन होर्मुज जलडम-मध्य पर दिखाई दे रहा है।
रियल-टाइम शिप ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म समुद्री यातायात के ताजा आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज जलडम-मध्य और पर्शियन गल्फ के आसपास जहाजों की आवाजाही लगभग ठहर गई है। मैप पर सैकड़ों कार्गो वेसल और ऑयल टैंकर समुद्र में एक ही स्थान पर खड़े नजर आ रहे हैं। सुरक्षा जोखिमों के कारण जहाज आगे बढ़ने से बच रहे हैं।
बंदरगाह के पास लगी कार्गो जहाहों की भीड़
ईरान के प्रमुख बंदरगाह बंदर अब्बास के पास कार्गो जहाजों की भीड़ देखी जा रही है। माना जा रहा है कि या तो जहाजों की निकासी रोकी गई है या फिर वे हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर संयुक्त अरब अमीरात के तट, खासकर दुबई और शारजाह के पास बड़ी संख्या में ऑयल टैंकर खुले समुद्र में लंगर डाले खड़े हैं। होर्मुज के मुहाने पर फुजैराह के पास भी जहाजों की लंबी कतार देखी जा रही है, जो आमतौर पर ईंधन भरने का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
होर्मुज जलडम-मध्य से हर दिन गुजरता है 2 करोड़ बैरल तेल
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडम-मध्य से दुनिया का लगभग 20 से 30 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है, यानी करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन। यदि यह रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। इसका सीधा असर भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर हैं।
भारत 85 फीसदी आयात करता है कच्चा तेल
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। सप्लाई में रुकावट से विदेशी मुद्रा भंडार और राजकोषीय संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, समुद्री बीमा प्रीमियम और फ्रेट चार्ज बढ़ने से वैश्विक व्यापार महंगा होगा। इलेक्ट्रॉनिक सामान, खाद्यान्न और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है। होर्मुज में खड़े जहाज सिर्फ समुद्री ट्रैफिक नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं कि क्या तनाव कम होगा या यह संकट और गहराएगा।
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