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नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार दूसरे दिन बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। शुक्रवार को बाजार खुलते ही दबाव में आ गया और कुछ ही घंटों में निवेशकों की संपत्ति में करीब 7 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। इससे पहले गुरुवार को भी निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। गिरावट के चलते बीएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर लगभग 433 लाख करोड़ रुपये रह गया है।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 923.58 अंक यानी करीब 1.21 प्रतिशत गिरकर 75,117.6 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं निफ्टी 50 भी 310 अंक या 1.32 प्रतिशत टूटकर 23,323 के स्तर पर आ गया। बैंकिंग शेयरों में भी भारी दबाव रहा और बैंक निफ्टी में 1000 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 26 लाल निशान में रहे, जबकि केवल 4 शेयरों में ही बढ़त देखने को मिली। टाटा स्टील, बीईएल, इंडिगो और एलएंडटी जैसे दिग्गज शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार की गिरावट के कई कारण
बाजार की इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आया उछाल है। दरअसल ईरान द्वारा दो तेल टैंकरों पर हमले की खबर के बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते सप्लाई बाधित होने की आशंका पैदा हो गई। इसी कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, जिससे वैश्विक बाजारों में भी दबाव बढ़ गया।
इन कंपनियों के शेयर गिरे
वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी भारतीय बाजार की धारणा को प्रभावित किया। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 225, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी भारी बिकवाली रही और डॉव जोन्स 700 अंकों से अधिक गिरकर इस साल पहली बार 47,000 के स्तर से नीचे बंद हुआ।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार पर बना रही दबाव
इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को एफआईआई ने भारतीय बाजार में 7,049 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशक करीब 39,000 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं।
निवेशकों की नजर अमेरिका की बैठक पर
अब निवेशकों की नजर अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक पर टिकी हुई है, जो 17 मार्च को होने वाली है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल यह उम्मीद की जा रही है कि फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन उसके संकेतों का असर वैश्विक बाजारों पर जरूर पड़ेगा।
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