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मिडिल ईस्ट वार : चाय-नाश्ते से लेकर चाट तक पहुंची महंगाई की आंच, एलपीजी संकट ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

चाय-नाश्ते से लेकर चाट तक पहुंची महंगाई की आंच, एलपीजी संकट ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
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admin

Mar 11, 202612:22 PM

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत में भी साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर एलपीजी (लिक्विड पेट्रोलियम गैस) की सप्लाई पर पड़े असर के कारण देश के कई शहरों में महंगाई बढ़ती नजर आ रही है। गैस कंपनियों ने एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है और कमर्शियल सिलेंडर के ऑर्डर पर रोक से छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े होटल-रेस्तरां तक चिंता में हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।

चाय-नाश्ते से लेकर रेस्तरां में मिलने वाले खाने तक की कीमतें बढ़ गई हैं। कई जगहों पर जो चाय पहले 10 रुपये में मिलती थी, वह अब 15 से 20 रुपये तक पहुंच गई है। गैस की किल्लत के कारण नाश्ते की चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं और कई दुकानदारों ने मजबूरी में अपने दाम बढ़ा दिए हैं।

सप्लाई प्रभावित होने से देश में एलपीजी संकट गहराया

दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट में तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो गई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है और इन आयात का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से आता है। ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने से देश में एलपीजी संकट गहराने लगा है।

भारत में हर साल 31 मिलियन टन एलपीजी की होती है खपत

भारत में हर साल करीब 31 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। इसमें से लगभग 87 प्रतिशत गैस घरेलू उपयोग के लिए जाती है, जबकि बाकी हिस्सा होटल, ढाबों और रेस्तरां में इस्तेमाल होता है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए तेल कंपनियों को निर्देश दिए हैं, जिसके कारण कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हो रही है।

कमर्शियल सिलेंडर की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। कई दुकानदारों का कहना है कि ब्लैक मार्केट में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर 2500 से 2800 रुपये तक में बिक रहा है। कुछ जगहों पर सिलेंडर लेने के लिए बोली तक लगाई जा रही है।

खाने-पीने की चीजों पर दिख रहा गैस की कमी का असर

गैस की कमी का असर खाने-पीने की चीजों पर भी साफ दिख रहा है। जहां पहले पूरी-सब्जी की प्लेट 25 रुपये में मिलती थी, वह अब 30 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, गोलगप्पे की प्लेट में भी कटौती देखने को मिली है। कई जगह 20 रुपये में पहले 8 गोलगप्पे मिलते थे, अब उसी कीमत में केवल 5 गोलगप्पे दिए जा रहे हैं।

बड़े होटल और रेस्तरां भी इस संकट से अछूते नहीं हैं। कई रेस्तरां ने अपने मेन्यू में बदलाव करना शुरू कर दिया है। कुछ जगहों पर थाली से मटर पनीर जैसे आइटम हटा दिए गए हैं, जबकि कहीं थाली की कीमत बढ़ा दी गई है। कई होटल गैस की जगह इलेक्ट्रिक तंदूर और इंडक्शन जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करने लगे हैं।

मुंबई में 20 फीसदी तक होटल रेस्तरां बंद

मुंबई होटल एसोसिएशन के अनुसार, एलपीजी संकट के कारण लगभग 20 प्रतिशत होटल और रेस्तरां पहले ही बंद हो चुके हैं। यदि जल्द ही गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि केंद्र सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए तेल कंपनियों के अधिकारियों की एक समिति बनाई है, जो एलपीजी सप्लाई की समीक्षा कर रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर कारोबारियों का कहना है कि संकट अभी भी बना हुआ है और इससे आम लोगों पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

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