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नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल उसकी मौजूदा शासन व्यवस्था को हटाने की कोशिश करते हैं, तो वह इजरायल के परमाणु ठिकानों पर सीधे हमले कर सकता है। एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी के हवाले से सामने आए इस बयान ने पूरे क्षेत्र में चिंता और तनाव को और बढ़ा दिया है।
अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि ईरान की संप्रभुता या उसकी राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का जवाब “रणनीतिक और कठोर” तरीके से दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बेंजामिन नेतन्याहू, जो इजरायल के प्रधानमंत्री हैं, और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चल रहे सैन्य अभियानों को लेकर बयान दिया था। दोनों नेताओं ने कहा था कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ऐसे हालात पैदा करना है जिससे ईरानी जनता मौजूदा शासन के खिलाफ खड़ी हो सके और बदलाव संभव हो।
सत्ता परिवर्तन की कोशिशें किसी भी हालत में नहीं होंगी स्वीकार
तेहरान ने इन बयानों को अपने आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप करार दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि बाहरी शक्तियों द्वारा सत्ता परिवर्तन की कोशिश किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल की रणनीति केवल ईरान के सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। कथित तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (प्त्ळब्) और उससे जुड़े अर्धसैनिक संगठनों के ठिकानों के अलावा पुलिस स्टेशनों को भी निशाना बनाया गया है।
तेहरान में कई पुलिस ठिकानों पर हुए हमले
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि तेहरान में कई पुलिस ठिकानों पर हमले हुए हैं, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों का मकसद केवल ईरान की सैन्य क्षमता को कम करना नहीं है, बल्कि शासन की पकड़ को भी कमजोर करना है। मध्यम स्तर के कमांडरों, फील्ड यूनिट्स और कमांड सेंटरों को निशाना बनाए जाने से प्रशासनिक नियंत्रण प्रभावित हो सकता है और विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने की क्षमता भी घट सकती है।
जल्द समाप्त नहीं होने वाला अभियानः इजराइली सूत्रों का दावा
इजराइली सूत्रों का कहना है कि यह अभियान जल्द समाप्त होने वाला नहीं है और तब तक जारी रह सकता है जब तक वास्तविक राजनीतिक बदलाव के संकेत दिखाई नहीं देते। दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि यदि उसकी संप्रभुता को चुनौती दी गई या शासन गिराने की दिशा में कोई कदम उठाया गया, तो उसका जवाब पहले से कहीं अधिक कड़ा और व्यापक होगा।
ईरान द्वारा इजराइल के परमाणु प्रतिष्ठानों को संभावित निशाना बनाने की चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। कई देशों और संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियां यह संकेत दे रही हैं कि मध्य पूर्व में तनाव फिलहाल कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।
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