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नई दिल्ली। ईरान पर इजरायल के ताबड़तोड़ हमले थमने का नाम नहीं ले रहे, और अब इस संघर्ष ने एक और बड़ा मोड़ ले लिया है। ताजा हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी की मौत ने तेहरान की सत्ता और सैन्य ढांचे को हिला कर रख दिया है। यह सिर्फ एक सैन्य अधिकारी की मौत नहीं, बल्कि ईरान की रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक ताकत पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
अली मोहम्मद नैनी, जो आईआरजीसी के मुखर चेहरों में से एक थे, अक्सर दुनिया को ईरान की मिसाइल और ड्रोन ताकत का संदेश देते नजर आते थे। उन्होंने हाल ही में दावा किया था कि ईरान छह महीने तक चलने वाले भीषण युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन इजरायल के इस सटीक हमले ने उस दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
इजरायल की दो टूकः अभी खत्म नहीं होगा अभियान
इजरायल ने साफ कर दिया है कि उसका अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उसके अनुसार, अब तक 130 से ज्यादा रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, न्।ट बेस और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। इजरायली वायुसेना लगातार पश्चिमी और मध्य ईरान में हमले कर रही है, ताकि ईरान की जवाबी क्षमता को पूरी तरह कुंद किया जा सके।
लारिजानी की मौत ने झकझोर दिया था ईरान की राजनीति को
इससे पहले 17 मार्च को हुए हमले में अली लारिजानी की मौत ने पहले ही ईरान की राजनीति को झकझोर दिया था। उन्हें देश का अस्थायी शीर्ष नेता माना जा रहा था, और उनकी हत्या ने सत्ता के भीतर गहरी अनिश्चितता पैदा कर दी है। अब नैनी की मौत ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।
इजरायल की रणनीति यहीं तक सीमिति नहीं
विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल की यह रणनीति सिर्फ सैन्य ठिकानों को नष्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ईरान के नेतृत्व और कमांड संरचना को व्यवस्थित तरीके से खत्म करने की कोशिश कर रहा है। लगातार हो रहे इन हमलों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और भी ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है। मध्य पूर्व में बढ़ता यह तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
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