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नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के जवाबी हमलों ने खाड़ी देशों की ऊर्जा व्यवस्था को झकझोर दिया है। इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले के बाद ईरान ने कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया। इस हमले में सबसे अधिक नुकसान कतर को हुआ है, जहां रास लाफान स्थित दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी कॉम्प्लेक्स को भारी क्षति पहुंची है।
कतर की सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के सीईओ और ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने खुलासा किया कि उन्होंने पहले ही अमेरिका को ऐसे खतरे को लेकर चेताया था। उनका कहना है कि अगर ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला होगा, तो उसका कड़ा जवाब मिलेगा और क्षेत्रीय सप्लाई पर गंभीर असर पड़ेगा।
ईरानी हमले से एलएनजी का निर्यात 17 फीसदी पड़ा ठप
ईरानी हमले के कारण कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा ठप हो गया है। रास लाफान में स्थित अत्याधुनिक “कोल्ड बॉक्स” यूनिट्स को भारी नुकसान पहुंचा है, जो गैस को तरल रूप में बदलने की प्रक्रिया का मुख्य हिस्सा होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 में से 2 कोल्ड बॉक्स पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।
नुकसान की भरपाई करने में लग सकते हैं पांच साल
अल-काबी के अनुसार, इस नुकसान की भरपाई में तीन से पांच साल तक का समय लग सकता है। इसका सीधा असर यूरोप और एशिया की गैस सप्लाई पर पड़ेगा, जो कतर से बड़े पैमाने पर एलएनजी आयात करते हैं। साथ ही, कतर की महत्वाकांक्षी विस्तार योजना, जिसके तहत 2027 तक उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 126 मिलियन टन प्रति वर्ष करने का लक्ष्य था, अब प्रभावित हो सकती है।
हमले के बाद सुरक्षा कारणों से रास लाफान से 24 घंटों के भीतर करीब 10,000 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और सभी ऑपरेशंस बंद कर दिए गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस दौरान कोई हताहत नहीं हुआ।
अल-काबी ने दी चेतावनी
अमेरिका ने स्वीकार किया है कि उसे सप्लाई में अस्थायी रुकावट का अंदाजा था और इसके लिए तैयारी की गई थी। फिर भी, इस संघर्ष का व्यापक असर पूरे खाड़ी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। अल-काबी ने चेतावनी दी कि यह युद्ध क्षेत्र को 10-20 साल पीछे धकेल सकता है, जिससे व्यापार, पर्यटन और ऊर्जा आय पर गंभीर असर पड़ेगा।
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