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मिडिल ईस्ट संकट में भारत की बड़ी डिप्लोमैटिक सफलता : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता, जयशंकर की मेहनत लाई रंग

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता, जयशंकर की मेहनत लाई रंग
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admin

Mar 12, 202611:25 AM

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई अहम टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। हाल ही में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में करीब 90 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।

भारत की सक्रिय कूटनीति आई काम

ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत ने सक्रिय कूटनीति का परिचय देते हुए ईरान के साथ संवाद स्थापित किया। विदेश मंत्री जयशंकर और अराघची के बीच हुई बातचीत का मुख्य उद्देश्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखना और कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाना था। बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दे दी, जिससे भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति की चिंता काफी हद तक कम हो गई है।

जयंशकर ने कई अन्य वैश्विक शक्तियों से भी की बात

सूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर केवल ईरान से ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक शक्तियों से भी संपर्क साधा। उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी बातचीत कर समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखने और वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया।

इन देशों के जहाजों पर सख्त प्रतिबंध लागू

गौरतलब है कि ईरान ने यह विशेष रियायत ऐसे समय में दी है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर इस मार्ग से गुजरने को लेकर सख्त प्रतिबंध लागू हैं। हालांकि भारत के साथ अपने विशेष संबंधों को ध्यान में रखते हुए ईरान ने भारतीय जहाजों को छूट दी है। इसे भारत की मजबूत और संतुलित विदेश नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

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