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ट्रंप-नेतन्याहू के दावों पर ईरान का पलटवार : कहा- भरे हैं हमारे भंडार, खत्म नहीं होंगे हमारे हथियार

कहा- भरे हैं हमारे भंडार, खत्म नहीं होंगे हमारे हथियार
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admin

Mar 20, 202601:13 PM

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बीते करीब तीन सप्ताह से भीषण युद्ध जारी है। एक ओर जहां अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान पर मिसाइलों की बारिश कर रहे हैं। तो वहीं ईरान भी अपने कदम पीछे न खींचते हुए मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। इस जंग के बीच मिसाइल क्षमता को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के राष्ट्रपति बेंजानियम नेतन्याहू के दावों का ईरान ने करारा जवाब दिया है।

ईरान की सेना की प्रमुख इकाई इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने साफ कहा है कि देश में मिसाइल उत्पादन लगातार जारी है और किसी भी तरह की कमी नहीं है। आईआरजीसी के मुताबिक, युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को बनाए रखा है। बयान में कहा गया कि “मिसाइलें लगातार बन रही हैं और हमारे भंडार में कोई कमी नहीं आई है।” यह प्रतिक्रिया सीधे तौर पर इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के उस दावे के जवाब में देखी जा रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता पूरी तरह खत्म कर दी गई है।

यह बोले थे नेतन्याहू

नेतन्याहू ने हाल ही में कहा था कि इजरायल ने ईरान पर कई दिशाओं से हमले किए हैं, जिससे उसकी सैन्य और परमाणु क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान अब यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) करने की स्थिति में नहीं है और वह वैश्विक स्तर पर दबाव बनाने की ताकत खो चुका है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान द्वारा दी जा रही मिसाइल हमलों की धमकियां अब खोखली हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने किया था यह दावा

वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने भी पहले दावा किया था कि ईरान का नेतृत्व कमजोर हो चुका है और वह इस संघर्ष में पीछे हट रहा है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान के गैस फील्ड पर हुए हमले की जानकारी होने से इनकार किया और कथित तौर पर नेतन्याहू को ऐसे हमलों से बचने की सलाह दी।

खाड़ी क्षेत्र में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहा ईरान

हाल के घटनाक्रम में इजरायल द्वारा ईरान के पार्स गैस फील्ड पर हमले की खबरें सामने आई थीं, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इस बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों के दावे और जवाबी दावे केवल सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति और तनावपूर्ण होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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