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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष का शुक्रवार को दो सप्ताह हो गए हैं। जंग के 14वें दिन भी दोनों पक्षों के बीच भीषण हमले जारी हैं। अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दाग रहे हैं। वहीं ईरान भी मुंहतोड़ जवाब देने से पीछे नहीं हट रहा है। इस जंग में अब तक जहां सैकड़ो निर्दोष लोगांे की मौत हो चुकी है। वहीं हजारों घायल हुए हैं। मृतकों में मासूम बच्चे भी शामिल हैं।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर फिर कड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ईरान के “आतंकवादी शासन” को सैन्य और आर्थिक रूप से पूरी तरह खत्म कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ मीडिया संस्थान स्थिति को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचाया गया है, जबकि मिसाइलों और ड्रोन क्षमताओं को भी लगातार नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास “असीमित सैन्य क्षमता और गोला-बारूद” है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई जारी रहेगी।
अमेरिका को मिडिल ईस्ट में बंद कर देने चाहिए ठिकाने
इस बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने पद संभालने के बाद पहला सार्वजनिक बयान जारी करते हुए अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को मिडिल ईस्ट में मौजूद अपने सैन्य ठिकाने बंद कर देने चाहिए, अन्यथा उन पर हमले जारी रहेंगे। ईरान ने धमकी दी है कि अगर यूएसए और इजरायल ने उसके अपने एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया तो वह इस इलाके की तेल और गैस इंडस्ट्री में तबाही मचा देगा। ईरानी सेना के सेंट्रल ऑपरेशनल कमांड खतम अल-अनबिया के एक प्रवक्ता ने कहा, ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और पोर्ट पर जरा सा भी हमला होने पर हम इस इलाके के तेल और गैस को आग लगा देंगे।
घटनाक्रम पर भारत की पैनी नजर
इसी बीच भारत भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव, नागरिकों की मौत और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को हो रहे नुकसान पर गहरी चिंता जताई और शांति बनाए रखने की अपील की।
सऊदी की सेना ने मार गिराए दो दर्जन ड्रोन
बता दें कि क्षेत्रीय स्तर पर भी तनाव बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को सऊदी अरब की सेना ने दो दर्जन से ज्यादा ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। यह कार्रवाई ईरान समर्थित हमलों और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की धमकियों के बाद की गई। इसी संघर्ष के बीच इराकी कुर्दिस्तान में तैनात एक फ्रांसीसी सैनिक की मौत की भी खबर सामने आई है।
वैश्विक बाजार पर दिख रहा युद्ध का असर
इस बीच वैश्विक बाजार पर भी इस युद्ध का असर दिख रहा है। अमेरिका द्वारा समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीदने की अनुमति दिए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड करीब 99.75 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 94.85 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गया है। कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष लगातार फैलता जा रहा है और दुनिया भर की नजरें अब इस संकट के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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