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गणेश साकल्ले
भारत-अमेरिका के बीच शनिवार को हुए टी-20 मैच पर ट्रेड डील का साया भी लगातार मंडराता रहा। एक पल को तो ऐसा लगा मानो ट्रेड डील की शर्तों में भारत का हारना भी शामिल हो। जिस तरह भारतीय बल्लेबाज एक-एक कर पवेलियन लौट रहे थे, उसे देख क्रिकेट-प्रेमी भी हैरान रह गए। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो वे गेंदबाजों के हाथों से निकलती गेंदों से कम और डोनाल्ड ट्रंप की आंखों से ज्यादा भयभीत हो रहे हों।
आखिर जब दुनिया का ‘दादा’ सबको डराकर रख रहा हो तो हमारे बेचारे बल्लेबाज क्यों न सहमें? उनका भी घर-परिवार है। पता नहीं, दादा कब पहलवानी पर उतर आएं और अपने कारिंदे भेजकर उठवा लें। जब ट्रंप खुलेआम वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा कर जेल में ठूंस सकते हैं, तो उनके सामने हमारे क्रिकेटरों की क्या बिसात!
खेल के पूरे माहौल पर डर इतना हावी था कि हमारे बल्लेबाज तो ठीक, अमेरिकी बल्लेबाजों की भी घिग्घी बंधी हुई थी। दोनों ही सहमे-सहमे नजर आए। शॉट भी बड़े संकोच से लगाए जा रहे थे, मानो मादुरो जैसा भय उनके मन-मस्तिष्क में बैठ गया हो। दोनों टीमें टी-20 का मुकाबला खेलते हुए भी टेस्ट मैच जैसी सावधानी बरतती नजर आई।
पर अमेरिकी दबंगई के सामने कभी-कभी कुछ फिदेल कास्त्रो भी निकल आते हैं। भारतीय टीम के कप्तान सूर्य कुमार यादव ऐसे ही नजर आ रहे थे। उन्होंने अमेरिकी टैरिफ और ट्रंप के भय से ऊपर उठकर तूफानी पारी खेली। 49 गेंदों में 84 रन बनाकर उन्होंने जता दिया कि क्रिकेट अब भी जियोपोलिटिक्स से बाहर है। हालांकि अभी यह कहना मुश्किल है कि सूर्या ने यह दम देश की खातिर दिखाया या मोदी के दबाव में, लेकिन आखिर सूर्या ने ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर जोरदार बल्लेबाजी करके देश की डूबती नैया को बचा लिया। कोई भी कह सकता है कि सूर्या की अंतरात्मा की यह आवाज हमारे नेताओं की अंतरात्मा की आवाज से बिल्कुल अलग रही होगी। इस बीच, अब दूसरा डर यह सता रहा है कि कहीं ट्रंप सूर्या की इस पारी का श्रेय खुद ना ले लें।
इधर, टीम इंडिया की जीत से इंडिया गठबंधन के नेताओं को थोड़ी हताशा जरूर हुई होगी। वे क्रिकेट में भी ट्रंप के आगे झुकने जैसे आरोपों के बाउंसरों की झड़ी लगाने को तैयार बैठे थे। पर लगता है दुर्भाग्य उनका पीछा छोड़ ही नहीं रहा।
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