Latest News

वॉशिंगटन। अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के करीब 23 दिन हो गए हैं, लेकिन यह वार अब तक निर्णायक मोड़ में नहीं पहुंचा है। यही नहीं दोनों ओर से जारी भीषण जंग ने दुनिया भर के देशों को चिंता में डाल दिया है। तेल आपूर्ति मार्गों व क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर दुनिया भर में टेंशन बनी हुई है। इन सबके बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सेना “पूरी तरह खत्म” हो चुकी है।
व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को समाप्त करने के करीब पहुंच गया है। उन्होंने कहा, “हम अपने लक्ष्यों को हासिल करने के बहुत करीब हैं और मध्य पूर्व में ईरान के आतंकी शासन के खिलाफ चल रहे अपने बड़े सैन्य अभियान को अब खत्म करने पर विचार कर रहे हैं।”
ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करना चाहता है अमेरिका
ट्रंप ने अपने लक्ष्यों को गिनाते हुए कहा कि अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता, लॉन्च सिस्टम और उनसे जुड़ी हर चीज को पूरी तरह कमजोर करना चाहता है। इसके अलावा ईरान के रक्षा उद्योग को नष्ट करना और उसकी नौसेना व वायुसेना, साथ ही एंटी-एयरक्राफ्ट हथियारों को खत्म करना भी लक्ष्य थे। उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार बनाने से हर हाल में रोकेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि वह परमाणु क्षमता के करीब भी न पहुंच सके।
सैन्य स्थिति पूरी तरह से अमेरिका के फेवर में
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि सैन्य स्थिति पूरी तरह अमेरिका के पक्ष में है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम जीत चुके हैं। हमने सब कुछ खत्म कर दिया है और हम पूरी तरह से आजाद होकर काम कर रहे हैं। सैन्य नजरिए से देखें तो वे खत्म हो चुके हैं।” हालांकि कई देशों ने युद्ध रोकने की अपील की है, लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया कि वह युद्धविराम के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा, “जब आप सामने वाले को पूरी तरह खत्म कर रहे हों, तो युद्धविराम नहीं करते। हम ऐसा करने की सोच नहीं रहे हैं।”
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी ट्रंप ने की बात
ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बात की, जो दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। उन्होंने कहा कि जिन देशों को इस रास्ते की जरूरत है, उन्हें इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने कहा, “अमेरिका इस मार्ग पर निर्भर नहीं है। यूरोप, कोरिया, जापान, चीन और कई अन्य देशों को इसकी जरूरत है, इसलिए उन्हें आगे आना होगा।” उन्होंने इस रास्ते को फिर से खोलने को “आसान सैन्य कदम” बताया, लेकिन साथ ही कहा कि इसके लिए काफी सहयोग और संसाधनों की जरूरत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि नाटो अब तक इस मामले में कदम उठाने की हिम्मत नहीं दिखा पाया है।
Advertisement
