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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की ओर से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बयान सामने आया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने राष्ट्र के नाम अपने टेलीविजन संबोधन में घोषणा की कि ईरान ने पड़ोसी देशों पर सैन्य हमले रोकने का निर्णय लिया है। उन्होंने क्षेत्रीय देशों से माफी भी मांगी और स्पष्ट किया कि ईरान का किसी भी अन्य देश पर हमला करने का इरादा नहीं है।
अपने संबोधन में पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को प्राथमिकता देता है। उन्होंने पड़ोसी देशों को आश्वस्त करते हुए कहा कि ईरान एक शांतिप्रिय राष्ट्र है और सैन्य कार्रवाई को रोकने का फैसला इसी सोच के तहत लिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। राष्ट्रपति ने कड़े शब्दों में कहा, “जो लोग ईरान का बिना शर्त आत्मसमर्पण देखने का सपना देख रहे हैं, वे अपने इस ख्वाब को कब्र तक साथ ले जाएंगे।” उनके इस बयान को एक ओर शांति का संदेश और दूसरी ओर देश की ताकत और आत्मसम्मान का संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों ने कही यह बात
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़े सैन्य तनाव और मिसाइल हमलों की घटनाओं के बाद ईरान का यह नरम रुख अंतरराष्ट्रीय दबाव और घरेलू परिस्थितियों का परिणाम हो सकता है। पश्चिम एशिया में कई देशों के बीच बढ़ते टकराव के कारण युद्ध की आशंकाएं भी तेज हो गई थीं, ऐसे में ईरान का यह बयान क्षेत्रीय माहौल को शांत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
पेजेश्कियान ने रूसी राष्ट्रपति से की बात
इस संबोधन से पहले पेजेश्कियान ने रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन से भी बातचीत की थी। रूस के राष्ट्रपति ने इस दौरान क्षेत्र में जारी विवादों को सुलझाने के लिए बल प्रयोग के खिलाफ अपने देश का स्पष्ट रुख दोहराया। पुतिन ने कहा कि रूस किसी भी प्रकार के सैन्य टकराव के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थन करता है।
शत्रुता समाप्त करना बेहद जरूरी
रूसी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय तनाव को कम करना और शत्रुता को तुरंत समाप्त करना बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के रास्ते पर आगे बढ़ने की अपील भी की। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और रूस के बीच हुई यह बातचीत और उसके बाद आया यह बयान पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति में महत्वपूर्ण संकेत देता है। यदि सभी पक्ष बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं, तो क्षेत्र में लंबे समय से बने तनाव को कम करने की संभावना बढ़ सकती है।
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