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भोपाल। मध्यप्रदेश में बिजली कंपनियों मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करती है, इसके बावजूद भी ग्रामीण क्षेत्र में बिजली लाइनों की स्थिति अच्छी नहीं है। हवा में झूलते कमजोर गुणवत्ता के बिजली के तार किसानों पर मौत बनकर टूटे हैं। यही वजह है कि साल भर के भीतर प्रदेश मेें 54 किसानों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी विधानसभा में भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय के सवाल के जवाब में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने दी।
विधायक मालवीय ने पूछा कि विद्युत लाइन के खराब तार बदलने की क्या प्रक्रिया है? कितने वर्षों में तार बदले जाते हैं तथा जनवरी 2025 से अब तक प्रदेश में विद्युत लाइन के तार टूटकर चपेट में आने से कितने लोगों या किसानों की मृत्यु हुई है। मंत्री तोमर ने कहा है कि विद्युत तारों को बदलना उनकी भौतिक स्थिति जैसे विद्युत तार अधिक जर्जर या क्षतिग्रस्त हो जाना या बार-बार टूटने की स्थिति होने पर या लोड बढ़ जाने पर स्टीमेट बनाकर बदले जाते हैं। विद्युत वितरण कंपनियों में विद्युत तार बदलने को लेकर कोई टाइम लिमिट तय नहीं है। 1 जनवरी 2025 से अब तक की अवधि में विद्युत लाइन के तार टूटकर उनके संपर्क में आने से प्रदेश में कुल 54 लोगों, किसानों की मृत्यु हुई है।
मप्र पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी हाईटेंशन लाइन की मरम्मत के लिए हर माह रूटीन ग्राउंड पेट्रोलिंग एवं वर्ष में दो बार टॉप पेट्रोलिंग कराई जाती है। इसके साथ ही जरूरत होने एवं लाइन में व्यवधान आने पर ट्रिपिंग पेट्रोलिंग कराई जाती है। साथ ही विद्युत व्यवधानों, दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सालभर विद्युत अधोसंरचना के रखरखाव का कार्य किया जा रहा है। सर्वे के दौरान क्षतिग्रस्त एवं जर्जर तारों की पहचान कर उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए उन्हें बदला जाता है। कोई भी शिकायत मिलने पर उसे प्राथमिकता से दर्ज कर तकनीकी दल द्वारा स्थल निरीक्षण के बाद सुधार की कार्यवाही करते हुए खराब तारों को बदल कर विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाती है।
बिजली कंपनियों में 55 हजार कर्मचारी आउटसोर्स
ऊर्जा मंत्री तोमर ने कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी के सवाल के जवाब में बताया कि प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में 55 हजार से अधिक कर्मचारी आउटसोर्स कंपनियों के जरिए काम कर रहे हैं। इन्हें श्रम आयुक्त द्वारा तय न्यूनतम मासिक वेतन दिया जा रहा है। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर में 15,522, म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल में 21,574 और म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इंदौर में 18,410 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। ये कर्मचारी उच्च कुशल, कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल श्रेणियों में काम कर रहे हैं। सभी कर्मचारियों को 12150 से 16494 रुपए प्रति महीने का वेतन मिल रहा है। साथ ही दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख की सहायता मिलती है। मंत्री ने साफ किया कि यह कर्मचारी बिजली कंपनियों के नहीं है।
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