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हरदा। हरदा जिले की ग्राम पंचायत पलासनेर में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत बनाए गए स्टॉप डैम में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। लगभग 14.50 लाख रुपये की लागत से बने इस डैम में निर्माण के कुछ ही समय बाद 5 फीट का बड़ा छेद हो गया है, जिससे इसका उद्देश्य विफल होता नजर आ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के अधिकारी, सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और संबंधित इंजीनियर की मिलीभगत से डैम निर्माण में घटिया सामग्री और कम गुणवत्ता का काम कराया गया। इसके चलते पानी डैम के ऊपर से बहने के बजाय नीचे से निकल रहा है।
डैम का उद्देश्य किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह लगभग बेकार साबित हो रहा है। शिकायतकर्ता नारायण प्रसाद चौहान ने 2 मार्च को जिला कलेक्टर और 9 मार्च को नर्मदापुरम संभाग आयुक्त को लिखित शिकायत भेजकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। चैहान का आरोप है कि फर्जी मस्टर रोल तैयार कर स्थानीय मजदूरों को काम नहीं दिया गया और लाखों रुपये का गबन किया गया।
जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंजली जोसेफ ने मामले की जांच की पुष्टि की है और कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण अब सवाल कर रहे हैं कि यदि सरकारी जल संरक्षण अभियानों में ही ऐसी लापरवाही और भ्रष्टाचार हो रहा है, तो योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक कैसे पहुंच पाएगा। कुल मिलाकर, पलासनेर का यह डैम मामला सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी की आवश्यकता को उजागर करता है।
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