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भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने गेहूं खरीदी के पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च कर दी है। साथ ही गेहूं और उड़द खरीदी पर बोनस देेने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने निवास पर किसान संघ के प्रतिनिधि मंडल से किसानों के मुद्दे पर चर्चा की। किसान संघ की ओर से बताया कि मंडियों में गेहूं, सरसों और धान के भाव समर्थन मूल्य से भी कम मिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। भारत सरकार के न्यनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए के ऊपर राज्य सरकार इस वर्ष गेहूं खरीदी पर 40 प्रति क्विंटल बोनस देगी। जिससे गेहूं 2625 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिकेगा। साथ ही उड़द खरीदी पर 600 रुपए प्रति क्विंटल के बोनस की घोषणा की गई है। किसान उड़द लगाएं, ताकि ठीक से उनको इस बोनस का लाभ मिले और अगली फसल की तैयारी भी हो जाए। किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली प्रदान करेंगे, ताकि रात के समय बिजली से सिंचाई के कारण होने वाले संकटों से बचा सकें।
किसानों के हित संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों के हित संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। फसलों की पूरी कीमत मिले, यह सरकारी की कोशिश है। सोयाबीन की तरह सरसों को भी भावांतर योजना में शामिल किया गया है। जिससे किसानों को समर्थन मूल्य के बराबर सरसों के दाम मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मप्र, देश का फूड बास्केट है, जहां दलहन, तिलहन और सब्जी उत्पादन अच्छी मात्रा में हो रहा है। हमारे राज्य के किसान आगे बढ़ें और समृद्ध हों, इसके लिए सरकार निरंतर किसान हितैषी निर्णय ले रही है। कुछ स्थानों पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन में कठिनाई सामने आई है। इसे ध्यान में रखकर पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च की जा रही है।
किसान संघ के साथ इन विषयों पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि भारतीय किसान संघ की ओर से किसानों के हित में प्राप्त सुझावों पर भी राज्य सरकार विचार करेगी। किसान संघ के साथ बैठक में भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा राशि बढ़ाने, जंगली जानवरों द्वारा फसल नुकसान पर मुआवजे, मंडी अधिनियम के प्रावधानों, फसल गिरदावरी, अविवादित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन के लिए समय-सीमा निर्धारित करने, विद्युत प्रदाय और सिंचाई व्यवस्था जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
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