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भोपाल। मध्यप्रदेश की बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं के साथ मनमानी करती दिखाई दे रही हैं। स्मार्ट मीटर लगाने के नाम पर जहां हजारों के बिल थमाएं जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जब पर पड़ने वाले अनापेक्षित रूप से लादे जा रहे आर्थिक बोझ से लोगों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। इसकी बानगी लगातार बढ़ रही शिकायतों से देखा जा रहा है।
बता दें कि सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में सभी घरों में स्मार्ट मीटर लगाने का है। उद्देश्य यह भी है कि बिजली बिलिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके। बावजूद इसके इनमें मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों द्वारा अपनाए जा रहे तरीके लोगों की जेब पर भारी पडने लगे हैं। इसके चलते उपभोक्ताओं द्वारा भोपाल में ही की जाने वाली शिकायतों की संख्या प्रतिदिन 2 हजार के पार जा रही है। जबकि मप्र बिजली उपभोक्ता ऐसोसिएशन के मुताबिक प्रदेश में माह भर का यह आंकड़ा लाख तक पहुंच जाता है।
समय पर रीडिंग नहीं, एक साथ भेज रहे 4 माह का बिल
उपभोक्ताओं का आरोप है कि जिन घरों में पहले से मीटर लगे हैं, उन्हें बदलने के लिये बिजली कंपनी के कर्मचारी महीनों रीडिंग के लिये नहीं पहुंचते हैं। इसके बाद यूनिट के आधार पर 4-4 माह के एवरेज बिल थमा दिये जाते हैं। इसके बाद ना तो बिल में रियायत दी जाती है और न ही अधिकारी शिकायत पर किसी तरह की सुनवाई ही करते है। जबकि मीटर सही रीडिंग देते हुए काम कर रहे हैं। फिर भी अशोका गार्डन क्षेत्र से जुड़े के मामले में औद्योगिक क्षेत्र कार्यालय अधीक्षण यंत्री धानेंद्र तिवारी ने इसके पीछे तर्क दिया है कि पुराने मीटर धीमी रफ्तार से चलते हैं और सही बिल नहीं देते हैं।
विरोध पर मनमानी पड़ रही भारी
बिजली कंपनियों के जबरिया रूख के खिलाफ लोग सड़क पर उतर रहे हैं। मप्र बिजली उपभोक्ता ऐसोसियेशन इसके लिये जन जागरूकता के कार्यक्रम भी कर रहा है। बावजूद इसके कंपनियों की मनमानी रूकने का नाम नहीं ले रही है। संगठन के विनोद लोगरिया का कहना है कि रिवेम्प्ड डिस्ट्रिव्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतगर्त कार्रवाई की जा रही है। जबकि विद्युत संशोधन विधेयक 2023 को सरकार मंजूर भी नहीं करा पाई है।
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