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भोपाल। मध्यप्रदेश में नया शैक्षणिक सत्र अगले महीने 1 अप्रैल से शुरू होगा। इससे पहले शैक्षणित सत्र की तैयारियों को लेकर बैठकें शुरू हो गई है। जिसमें सरकारी स्कूलों में बच्चों के शाला छोडने के मामले बेहद गंभीर हैं। इन्हें रोकने के लिए या कमी लाने के लिए रणनीति बनाकर काम करें। जिसमें ऑनलाइन टीसी जारी करने, कक्षा 5वीं एवं कक्षा 8वीं में अध्ययरन छात्रों का शत-प्रतिशत, कक्षा 6वीं एवं नवीन कक्षा में प्रवेश सुनिश्चित करने के नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं। संभागायुक्त संजीव सिंह ने विभागीय समीक्षा बैठक में संभाग के जिलों के जिला पंचायत सीईओ एवं अन्य अधिकारियों को यह निर्देश दिए।
आयुक्त ने कहा कि पहली कक्षा में प्रवेश की विशेष कार्य योजना बनाकर नामांकन में वृद्धि करने के लिए घर-घर सर्वे अभियान, प्रवेश उत्सव का आयोजन, जनजागरूक गतिविधियां, शासकीय योजनाओं का प्रचार - प्रसार एवं गत वर्ष की विद्यालय की उपलब्धियां बताकर काम करें। विकासखंड स्तर पर 1 अप्रैल तक सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों को पुस्तक वितरण कर पोर्टल पर इंट्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 3 से 6 वर्ष आयु के सभी बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए ग्राम एवं विद्यालय स्तर पर महिला बाल विकास के समन्वय से बच्चों की पहचान कर ग्राम सभा-पालक संघ बैठक एवं आंगनबाड़ी - शाला में प्रवेश कराना सुनिश्चित किया जाए। सभी स्कूलों में जनभागीदारी के माध्यम से स्मार्ट क्लासेस प्रारंभ करने कराने के निर्देश दिए। संभागायुक्त नेे स्मार्ट क्लास के संबंध में कहा कि संबंधित शिक्षक को टीवी की मॉनीटरिंग एवं उस पर दी जाने वाली शिक्षा का पूरा ज्ञान होना चाहिए।
हितग्राहियों से फीडबैक लें अधिकारी
संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि संकल्प से समाधान का डाटा सभी अधिकारी बनाएं। जिसके अंतर्गत जाति प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड आदि का कार्य आटो मेशन से करें। उन्होंने कहा कि सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारी का मुख्य कार्य यह होना चाहिए कि वे फील्ड में जाकर पंचायत स्तर और अपने - अपने विभाग की योजनाओं के कौन-कौन से हितग्राही हंै, उनसे फीडबैक प्राप्त करें। कोई कमियां हो तो उसे तुरंत दूर किया जाना चाहिए।
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