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भोपाल। आयुष्मान के नये नियम को लेकर राजधानी भोपाल में अस्पताल संचालकों का आक्रोश सामने आया। यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल डायरेक्टर एसोसिएशन के तत्वाधान इसके लिये यह आयुष्मान कार्यालय के बाहर जुटे थे। यह सरकार से आदेश वापस लेने की मांग कर रहे थे।
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष धनंजय मिश्रा ने बताया कि जल्दबाजी में लिये इस फैसले के कारण आयुष्मान भारत जैसी योजना कुछ कॉपरेट अस्पतालों तक ही सीमित रह जाएगी। क्योंकि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के कई निजी अस्पताल योजना से बाहर होने की स्थिति में आ गए हैं। जिनकी संख्या 800 से अधिक है। इसके बाद लाखों आयुष्मान कार्डधारकों के इलाज के विकल्प सीमित रह जाएंगे।
गुणवत्ता और सेवाओं की पुष्टि करता है सर्टिफिकेट
सरकार के नये नियम के अनुसार अप्रैल 2026 से केवल वही अस्पताल आयुष्मान योजना में बने रहेंगे। जिनके पास राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली प्राधिकरण का एनएबीएच सर्टिफिकेट होगा। जिन अस्पतालों के पास यह मान्यता नहीं है, वे योजना से बाहर कर दिए जाएंगे। यह सर्टिफिकेट अस्पतालों की गुणवत्ता, सुरक्षा और सेवाओं की पुष्टि करता है। इसमें 600 से ज्यादा पैरामीटर की जांच की जाती है। यह स्वास्थ्य सेवाओं के लिए देश का सबसे उच्च स्तर का सर्टिफिकेट माना जाता है। सरकार का मानना है कि एनएबीएच सर्टिफिकेट मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण इलाज दिलाने का भरोसा देता है।
खजाने में सेंधमारी पर उठाया सरकार ने कदम
महत्वपूर्ण है कि आयुष्मान भारत योजना के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले प्राइवेट अस्पतालों को लेकर मप्र में बड़ा खुलासा हुआ था। इस खुलासे से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था। क्योंकि जांच में पता चला था कि भौतिक रूप से बंद हो चुके कई निजी अस्पताल पोर्टल पर चालू मिले। ये अस्पताल सरकार से लगातार क्लेम वसूल रहे थे। जिसके बाद कईयों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।
295 के पास ही एनएबीएच प्रमाणित
पूरे प्रदेश में 984 सरकारी और 640 प्राइवेट यानी कुल 1,624 अस्पताल आयुष्मान योजना से संबद्ध हैं। इनमें से सिर्फ 295 अस्पतालों को ही एनएबीएच प्रमाणित है। भोपाल में 29 सरकारी और 194 प्राइवेट अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं। बावजूद इसके इनमें कम अस्पताल ही एनएबीएच से मान्यता प्राप्त हैं।
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