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मप्र में अवैध शराब पर नहीं लगा रहा अंकुश : ठेकेदारों के लिए सरकार ने तैयार किया प्लान, दिखाई देगा नई आबकारी नीति

ठेकेदारों के लिए सरकार ने तैयार किया प्लान, दिखाई देगा नई आबकारी नीति
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admin

Jan 12, 202612:31 PM

भोपाल। मध्यप्रदेश में अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश नहीं लग रहा है। आए दिन अवैध शराब से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में नई आबकारी नीति में अवैध शराब पर लगाम कसने को लेकर आबकारी नीति में जरूरी प्रावधान किए जा सकते हैं। जिसमें सबसे बड़ा प्रावधान शराब दुकानों की लिमिट तय की जा सकती है। यानी किसी भी ठेकेदार को एक निर्धारित संख्या से ज्यादा शराब दुकानों के लाइसेंस नहीं मिलेंगे। इससे नए लोगों को शराब के धंधे में उतरने का मौका मिलेगा। साथ ही अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए आबकारी अधिनियम में भी संशोधन किया जा सकता है।

वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने हाल ही में शराब नीति को लेकर लिए गए सुझावों पर चर्चा के दौरान इसके संकेत दिए हैं। देवड़ा के अनुसार 1915 में बने आबकारी अधिनियम मेें संशोधन किया जा सकता है। सामान्यत: वर्ष 1915 का आबकारी अधिनियम मादक पदार्थों के निर्माण, बिक्री, परिवहन और कब्जे को नियंत्रित करता है, जिसमें धारा 54 आबकारी अधिकारियों को बिना वारंट के तलाशी की शक्ति देती है। इसको और अधिक सशक्त बना जाएगा।

नीति में बड़े संशोधन की संभावना

वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारी ने बताया कि आबकारी अधिनियम की अव्यावहारिक कंडिकाओं को समयानुकूल बनाने के लिए संशोधन प्रारूप तैयार किया जा रहा है। जिससे अवैध शराब पर सख्ती से रोक लगाई जा सके और राजस्व बढ़ाया जा सके। 1915 का आबकारी अधिनियम राज्य के भीतर मादक पदार्थों के हर पहलू को नियंत्रित करने वाला एक पुराना कानून है। जिसमें समय-समय पर संशोधन किए गए हैं। इस इसमें फिर से बड़ा संशोधन होने की संभावना है।

आबादी के हिसाब से कम हैं दुकानें

मप्र में अवैध शराब की बिक्री रोकने लिए बड़ी जनसंख्या वाले दो राज्य राजस्थान और उप्र का उल्लेख किया गया है। जिसमें दोनों राज्यों में आबादी के हिसाब से दुकानों की संख्या जयादा है। जबकि मप्र में शराब दुकानों की संख्या आबादी के हिसाब से कम है। पिछले लंबे समय से मप्र में नई दुकानों की संख्या नहीं बढ़ाई गई। नई शराब नीति के प्रारूप में शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने का सीधा उल्लेख नहीं है, लेकिन शराब दुकानों की ही उपदुकान खोलने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। हालांकि प्रारूप में शासन स्तर पर बदलाव होने की पूरी संभावना है। वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारी ने बताया कि पिछले साल भी ठेकेदारों के लिए शराब दुकानों की लिमिट तय की गई थी। साथ ही उपदुकान खोलने का प्रस्ताव है।

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