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भोपाल। राजधानी भोपाल की ट्रैफिक व्यवस्था आम और खास दोनों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। इस सिरदर्दी की वजह खराब पड़े ट्रैफिक सिग्रल और तमाम विकास कार्य हैं। जिसमें मेट्रो निर्माण शामिल है। सबसे अधिक दिक्कत पुराने भोपाल में है। यहां चैराहों और तिराहों पर खराब पड़े सिग्रल की वजह से यातायात अस्त व्यस्त है। भोपाल में कुल ट्रेफिक सिग्रल की संख्या 69 है। इसमें 23 बंद पड़े हैं। सिग्रल न होने से बेतरतीब वाहन यहां जाम लगा देते हैं।
जानकारी के अनुसार ट्रैफिक को सुव्यवस्थित करने के लिए नगर निगम के सहयोग से करीबन 10 साल पहले चैराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए थे। सिग्रल व्यवस्था शुरुआत में ठीक रही। वर्तमान हालात ये हैं कि कई जगह सिग्रल की की टाइमिंग सही नहीं है। कहीं सिर्फ पीली बत्ती ही जलती- बुझती दिखती है।
भोपाल में इन चैराहों पर बंद पड़े हैं ट्रैफिक सिग्नल
पुलिस के अनुसार करोंद, डीआईजी, नूतन कॉलेज के पास, शाहपुरा शिवमंदिर, कोलार चूनाभट्टी, बैरसिया बस स्टैंड चैक, नादरा बस स्टैंड, अल्पना तिराहा, नयापुरा चैराहा, हमीदिया अस्पताल चैराहा, लाल घाटी, पिपलानी, अन्ना नगर चैराहा, महात्मा गांधी चैराहा भेल, रत्नागिरी चैक, कोकता चैराहा, बिठ्टन मार्केट, 10 नबंर आदि शामिल है।
रोटरिया हटवाने या छोटा करने से भी नहीं मिला शहर को फायदा
राजधानी की चैराहों पर लगने वाले जाम से मुक्ति दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने करीबन तीन साल पहले कुछ चैराहों से आधा दर्जन रोटरियां हटवाई. वहीं कुछ रोटरियों को छोटा किया. बावजूद इसके संबंाित चैराहों पर ट्रैफिक के हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। उदाहरण के लिए राजधानी के व्यस्ततम चैराहों करोंद, नारियलखेड़ा, भोपाल टाकीज, अल्पना तिराहा, प्रभात चैराहा, रोशनपुरा आदि की रोटरियां हटा दी गई, इसके बाद भी जाम खत्म नहीं हुआ।
इन वजहों से हो रहा ट्रैफिक जाम
मैनिट भोपाल के ट्रैफिक एक्सपर्ट प्रो. सिद्धार्थ रोकड़े का कहना है कि भोपाल शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से रोटरियां हटाने, उन्हें छोटा करने और बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने जैसे कई बड़े कदम उठाए गए, लेकिन इसके बावजूद शहर में ट्रैफिक की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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