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भोपाल। स्लीपर कोच बसों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है। अब स्लीपर बसों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (एफडीएसएस) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। मध्यप्रदेश परिवहन विभाग ने भी इस निर्देश को सख्ती से लागू करते हुए साफ कर दिया है कि जिन बसों में यह सिस्टम नहीं होगा, उनका रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा।
सेंसर से तुरंत मिलेगा खतरे का संकेत
एफडीएसएस सिस्टम के तहत बस के इंजन और अन्य संवेदनशील हिस्सों में हीट और स्मोक सेंसर लगाए जाते हैं। जैसे ही तापमान असामान्य रूप से बढ़ता है या धुआं बनता है, सेंसर तुरंत अलर्ट देता है और सिस्टम सक्रिय होकर आग को फैलने से रोकने की कोशिश करता है। इससे बड़े हादसे की आशंका कम हो जाती है।
इन कारणों से लगती है बसों में आग
बसों में आग लगने के पीछे कई कारण सामने आते हैं। इनमें इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट, इंजन का ओवरहीट होना, डीजल का रिसाव, अवैध मॉडिफिकेशन, सुरक्षा उपकरणों की कमी, बसों की मॉनिटरिंग में लापरवाही और फिटनेस जांच में ढिलाई प्रमुख हैं।
लंबी दूरी और रात में ज्यादा खतरा
स्लीपर बसें आमतौर पर लंबी दूरी के लिए और रात के समय संचालित होती हैं। लगातार संचालन के कारण इंजन अधिक गर्म हो सकता है और तकनीकी खराबी की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में एफडीएसएस सिस्टम यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आग की बड़ी घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
केस-1
अशोकनगर जिले के इसागढ़ रोड पर बामनावर गांव के पास पिचैर से इंदौर जा रही एक स्लीपर बस में अचानक आग लग गई। बस के पिछले हिस्से से धुआं और लपटें उठने लगीं, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। चालक ने तुरंत बस रोककर सभी यात्रियों को सुरक्षित उतार दिया। सूचना पर पहुंची दमकल ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन बस पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई।
केस-2
मैहर जिले के नादन थाना क्षेत्र में कटनी से रीवा जा रही एक चलती बस में अचानक आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते पूरी बस जलकर राख हो गई। बस में मौजूद ड्राइवर और दो हेल्परों ने खिड़की और दरवाजों से कूदकर अपनी जान बचाई।
पहले से चल रही बसों की भी होगी जांच
परिवहन आयुक्त उमेश जोगा ने बताया कि स्लीपर कोच बसों में एफडीएसएस सिस्टम लगाना अब अनिवार्य है। प्रदेश में बसों का रजिस्ट्रेशन इसी के आधार पर किया जाएगा। साथ ही पहले से संचालित बसों के सुरक्षा मानकों की जांच के लिए आरटीओ को भी निर्देश दिए गए हैं।
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