Latest News

भोपाल। नवनियुक्त कर्मचारियों को क्रमशः 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने के मामले में सरकार की मंशा पर कर्मचारी संगठनों ने हैरानी जताई है। इनका कहना है कि हाईकोर्ट द्वारा निरस्त किये गये आदेश के खिलाफ यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो वह स्वयं के परिपत्र की अवहेलना करेगा।
दरअलस हाईकोर्ट जबलपुर के उस निर्णय के विरुद्ध मप्र सरकार अपील में सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। इस निर्णय में हाईकोर्ट ने नवनियुक्त कर्मचारियों को प्रथम तीन वर्ष में 70, 80 और 90 प्रतिशत स्टाइपेंड देने की व्यवस्था को निरस्त कर दिया है। मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंजी सुधीर नायक का कहना है कि अपील करने से शासन की संवेदनशील कर्मचारी हितैषी छवि को धक्का पहुंचेगा। सरकार यदि अपने ही हजारों कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट में घसीटेगी तो शासन और कर्मचारियों के बीच का सामंजस्य समन्वय और सौहार्द भंग होगा, जो कि सुशासन की दृष्टि से हानिप्रद रहेगा। निगम मंडल कर्मचारी महासंघ के प्रांताध्यक्ष अजय श्रीवास्तव नीलू ने अपील करने के निर्णय को अनुचित निरुपित किया है।
यह भी कारण
सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में क्रमांक 29852-09 में पारित निर्णय दिनांक 31-10-2009 के द्वारा हर छोटे बड़े न्यायलयीन निर्णय के विरुद्ध अपील करने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई थी। मप्र शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के परिप्रेक्ष्य में विभागों को परिपत्र दिनांक 18-05-2010 के माध्यम से निर्देश दिए गए थे कि श्शासन के सभी अधिकारी जिम्मेदार वादी बनें। यदि मामले ऐसे हैं कि पक्षकार को किसी फोरम पर न्याय मिल रहा है तो उसे मात्र इसलिए अपील दर अपील नहीं खींचा जाना चाहिए कि निर्णय शासन के विरुद्ध है.... ताकि अकारण मुकदमेबाजी पर रोक लग सके।
Advertisement
