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अमले को शस्त्र से सशक्त नहीं बना पाया वन विभाग : डंडे के भरोसे जंगलों की सुरक्षा को मजबूर अमला, परिणामः न रूका अतिक्रमण और न ही वन्यप्राणियों का शिकार

डंडे के भरोसे जंगलों की सुरक्षा को मजबूर अमला, परिणामः न रूका अतिक्रमण और न ही वन्यप्राणियों का शिकार
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admin

Mar 09, 202601:24 PM

भोपाल। बढ़ते अतिक्रमण और वन्यप्राणियों के शिकार की घटनाएं जहां प्रदेश में रूकने का नाम नहीं ले रही है। वहीं दूसरी ओर इस पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी संभालने वाला वन विभाग सुरक्षा में तैनात अमले को शस्त्र से सशक्त नहीं बना पाया है। इसके चलते इसका कार्यपालिक अमला डंडे के भरोसे जंगलों की सुरक्षा को मजबूर है।

इसका खामियाजा राज्य के वन संसाधन को बतौर नुकसान उठाना पड़ रहा है। कारण यह भी है कि कार्यपालिक अमले की कमी के बीच तैनात कर्मचारी जान की परवाह में वन अपराधियों के संगठित गिरोहों का सीधा मुकाबला करने से जहां बचता है। वहीं दूसरी ओर अपराधी इसका फायदा उठाते हुए अतिक्रमण और वन्यप्राणियों के शिकार से बाज नहीं रहा है।

साल दर साल बढ़ी घटनाएं

वन अपराध का आंकड़ा साल दर साल बढ़ा है। वन अपराध प्रकरण का आंकड़ा जहां 60 हजार तक चला जाता है। वहीं अतिक्रमण से संबंधित प्रकरण सालाना 2 हजार तक दर्ज किये जाते हैं। अवैध परिवहन, अवैध उत्खनन ही नहीं अवैध शिकार के प्रकरणों में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

नहीं हैं बंदूक चलाने के अधिकार

जंगल की सुरक्षा में तैनात अमले को सरकार द्वारा शस्त्र धारण के अधिकार तो दिये हैं पर इसके परिचालन पर पाबंदी है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि इस संबंध में नियम प्रक्रिया के प्रस्ताव मंजूरी के लिये शासन स्तर पर लंबित है। लटेरी घटना में प्राण बचाने वन अमले द्वारा की गई गोली चालान के बाद हुई एफआईआर से नाराज कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप अपनी बंदूके जमा करा दी थी। करीब 2 साल पहले हुई इस घटनाक्रम को देखते हुए तत्कालीन वनबल प्रमुख व्हीएन अंबाडे द्वारा पुनरू मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कराई गई, बावजूद इसके कार्यकाल के दौरान वह भी इसे मंजूर नहीं करा पाये। प्रस्ताव अभी भी विचाराधीन है।

पुलिस के समान मिले गोली चलान के अधिकार

मप्र वन कर्मचारी मंच के अशोक पांडेय का कहना है कि स्वयं में यह बड़ा सवाल है कि डंडे के सहारे अमला कब तक जंगलों की सुरक्षा करेगा। इसलिये पुलिस के शस्त्र संचालन का अधिकार मिलना चाहिये। खासकर गश्ती दल के कर्मचारियों के लिये यह जरूरी है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो जांच और एफआईआर का सामना कर्मचारियों को करना पड़ सकता है।

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अमले को शस्त्र से सशक्त नहीं बना पाया वन विभाग : डंडे के भरोसे जंगलों की सुरक्षा को मजबूर अमला, परिणामः न रूका अतिक्रमण और न ही वन्यप्राणियों का शिकार