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भोपाल। मध्यप्रदेश के शिक्षक 8 अप्रैल से विशेष पात्रता परीक्षा टीईटी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया। ये प्रदर्शन जनपद ब्लॉक से लेकर राजधानी तक होगा। इसके माध्यम से आदेश को स्थगित करने की मांग करेंगे। बता दें कि शिक्षक संगठनों का प्रतिनिधि मंडल दिल्ली जाकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन की फाइल लगाई है, जिसे कोर्ट ने विचारार्थ मंजूर कर लिया है। हालांकि सुनवाई कब होगी? इसकी तारीख तय नहीं हुई है। मध्य प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों एवं अध्यापकों ने 12 प्रमुख संगठनों के बैनर के साथ इस मुद्दे पर संघर्ष करने के लिए अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा का गठन किया है।
शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि शिक्षकों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि सेवा सुरक्षा और अधिकारों की है। मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि टीईटी अनिवार्यता और सेवा अवधि की गणना को लेकर सरकार पर पुनर्विचार के लिए दबाव बनाया जाएगा। इसके तहत 8 अप्रैल से प्रदेशव्यापी आंदोलन की शुरुआत होगी, जो 18 अप्रैल को भोपाल में मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा तक पहुंचाकर समाप्त होगी। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि बिना स्पष्टता के जारी इस आदेश ने 1.5 लाख से अधिक शिक्षकों को असमंजस में डाल दिया है।
आंदोलन का ये रहेगा कार्यक्रम
8 अप्रैल- जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन
11 अप्रैल- ब्लॉक स्तर पर धरना और जनप्रतिनिधियों का ध्यानाकर्षण
18 अप्रैल- भोपाल में मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा
रिटायर जज एसके गंगेले करेंगे पैरवी
संगठन अध्यक्ष कौशल ने बताया कि टीईटी पर विचार करने एक मल्टी पिटीशन केस सुप्रीम कोर्ट में विचारार्थ स्वीकार कर लिया गया है। इस पूरे मामले की पैरवी मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के रिटायर जज एसके गंगेले करेंगे। संगठन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन केस नंबर 1385 रजिस्टर्ड हो गया है।
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