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भोपाल। सुनियोजित साजिश से शिकायतकर्ता को विश्वास में लेकर कंपनी स्थापित की। शिकायकर्ता की तीन बहुकीमती अचल संपत्तियों बैंक में बंधक रखकर कंपनियों के नाम पर ऋण लिया। ऋण की राशि का दुरुपयोग किया तथा जाली दस्तावेजों का उपयोग कर शिकायतकर्ता से धोखाधड़ी किए जाने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, अपराधिक साजिश, गंभीर दस्तावेजी जालसाजी एवं जाली दस्तावेज का उपयोग किए जाने पर विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध किया है।
मामले की लिखित शिकायत 12 जून 2019 को शिकायतकर्ता दीपक भावसार, निवासी भोपाल ने ईओडब्ल्यू से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल दुबे, संगीता दुबे, प्रताप नारायण दुबे, अतुल दुबे, भुवनेश्वर पाण्डे एवं स्वाति शुक्ला सहित अन्य व्यक्तियों द्वारा सुनियोजित षड्यंत्र के तहत उसकी भोपाल स्थित तीन बहुमूल्य संपत्तियों को पंजाब नेशनल बैंक, सियागंज, इंदौर में को-लेटरल के रूप में बंधक रखवाकर लगभग 3 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट प्राप्त की गई तथा उस राशि का दुरुपयोग निजी एवं पारिवारिक कंपनियों में स्थानांतरित कर किया गया। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर ईओडब्ल्यू ने आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120-बी, 467, 468 एवं 471 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है
आरोपियों ने बनाई ये कंपनियां
14 मार्च 2017 को आरोपियों ने स्पेक्ट्रो फर्टकेम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी का पंजीयन कराया गया, जिसमें शिकायतकर्ता को डायरेक्टर बनाया। जबकि कंपनी का संचालन मुख्य रूप से प्रताप नारायण दुबे एवं भुवनेश्वर पाण्डे द्वारा किया जा रहा था। शिकायतकर्ता के फ्लैट, दुकान और मेंडोरी में स्थित कृषि भूमि को बैंक में बंधक रखकर ऋण लिया। 3 करोड़ रुपये की स्वीकृत लिमिट में से बैंक शुल्क कटने के बाद लगभग 2.81 करोड़ रुपये की राशि जून 2017 से अक्टूबर 2017 के बीच आरोपियों ने उनके स्वयं के अथवा परिजनों के स्वामित्व वाली कंपनियों डीडी सुपर बायो ऑर्गनिक प्रायवेट लिमिटेड, डीडी केमिकल्स, स्वाति इंजीकॉम, मृत्युंजय केमटेक, अमेया एजेंसी, रिधिमा ऑर्गेनिक और महाकाल केमिकल्स जैसी कंपनियों में ट्रांसफर कराया। इनमें कुछ कंपनियों की वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं थी तथा कुछ कंपनियां निष्क्रिय अथवा अस्तित्वहीन पाई गईं। सर्वाधिक राशि लगभग 2.06 करोड़ रुपये डीडी सुपर बायो ऑर्गेनिक प्रायवेट लिमिटेड में भेजी गई। शेष राशि कार्यालय किराया, गोदाम किराया, वेतन और आरोपी राहुल दुबे की निजी सुरक्षा पर खर्च की गई।
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