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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक से प्रकाशित सामग्री पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर लिया है। यह केस बुधवार शाम करीब 4ः 40 बजे रजिस्टर किया गया। यही नहीं इस मामले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई हुई। इस बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई जाधव के स्थान पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमलया बागची और जस्टिस एम पंचोली शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल उठाने वाली सामग्री पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। चीफ जस्टिस ने सख्त लहजे में कहा है कि यह न्यायपालिका पर पहली गोली चलाने जैसा है। उन्होंने कहा कि आज न्यायपालिका मीडिया में ‘रक्तरंजित’ नजर आ रही है, जो बहुत गंभीर चिंता का विषय है.।
समाज में जाएगा गलत संदेश
चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि जब यह किताब बाजार व सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, तो बाद में प्रकाशन वापस लेना किस प्रकार प्रभावी होगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर शिक्षकों और छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि न्यायपालिका भ्रष्ट है, तो इससे समाज में भ्रम और गलत संदेश जाएगा।
ये सोची समझी हरकत
चीफ जस्टिस ने कहा कि ये सोची समझी हरकत है। इस मामले में कौन जिम्मेदार है मैं पता करूंगा। उन्होंने कहा कि मामला यहां खत्म नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि बेहद कैलकुलेटेड तरीके से चीजों को दिखाया गया है। ज्यूडिशियरी की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि जज के कॉमेंट को सेलेक्टिव तरीके से परोसा गया चीफ जस्टिस ने कहा ज्यूडिशियरी के बारे में अधूरी छवि पेश की गई। ज्यूडिशियरी की गरिमा और उसके संवैधानिक दायित्व के बारे में जानकारी न देकर सिर्फ सेलेक्टिव तरीके से गरिमा को ठेस पहुंचाया गया। इस बीच वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा राजनीति में जो करप्शन है उसका क्या?
मैंने हमेशा निभाया अपने दायित्व कोः सीजेआई
सीजेआई ने कहा, “संस्था का प्रमुख होने के नाते मैंने हमेशा अपने दायित्व को निभाया है। मैं किसी को भी न्यायपालिका की छवि धूमिल करने की इजाजत नहीं दूंगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। कानून अपना काम करेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की सामग्री संस्थागत गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास प्रतीत होती है और अदालत इस मामले से सख्ती से निपटेगी।
विवादित सामग्री को हटाने सरकार उठाएगी आवश्यक कदम
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल माध्यमों में मौजूद विवादित सामग्री को हटाने के लिए सरकार आवश्यक कदम उठाए। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि संबंधित मंत्रालय को टेकडाउन आदेश जारी करने की वैधानिक शक्ति है। कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में गहन जांच होगी और जब तक पूरी तरह जवाबदेही नहीं ठहराई जाती, तब तक कार्यवाही बंद नहीं की जाएगी। सरकार ने इस मामले में कोई प्रतिकूल रुख नहीं अपनाने और अदालत की संतुष्टि तक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार और एनसीईआरटी का बचाव करते हुए कहा कि इस अध्याय का उद्देश्य न्यायपालिका को बदनाम करना नहीं था, बल्कि बच्चों को यह समझाने की कोशिश थी कि न्याय मिलने में देरी होने पर किस प्रकार लोग न्याय से वंचित महसूस करते हैं।
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