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मुंबई । बॉलीवुड अभिनेत्री लीजा रे ने मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत की और फिर 1994 में फिल्म 'हंसते खेलते' से एक्टिंग में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया, जिनमें 'कसूर', 'बॉलीवुड/हॉलीवुड' और 2005 में ऑस्कर नामांकित 'वॉटर' शामिल हैं।
उनकी इमेज हमेशा ग्लैमरस और दमदार अदाकारा की रही, लेकिन 2001 में अपने करियर के सबसे ऊंचे मुकाम पर उन्होंने अचानक बॉलीवुड से दूरी बना ली। उन्होंने अब अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताया कि आखिर उन्होंने ऐसा फैसला क्यों लिया था।
इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए लीजा रे ने कहा कि वह खुद को इंडस्ट्री में उस तरह नहीं देख पा रही थीं, जैसे वह वास्तव में थीं। उन्होंने कहा, "मुझे सिर्फ सुंदर मॉडल के रूप में देखा जा रहा था।" इन सब में उनकी असली आवाज और व्यक्तित्व दबा दिया गया था। इस दौरान मेरे पास कई फिल्मों के ऑफर थे, लेकिन मैंने प्रसिद्धि के बजाय खुद को जानने और समझने के लिए समय देना चुना।"
उन्होंने कहा, ''अपने ब्रेक के दौरान मैं लंदन चली गई और वहां एक कॉलेज में रहकर शेक्सपियर और कविता का अध्ययन किया। मैंने म्यूजियम और कला के बीच समय बिताया और बौद्ध धर्म-योग के बारे में जाना। मैंने लोगों की नजरों में दिखने के बजाय अपना जीवन सीखने, आत्मा और जिज्ञासा पर आधारित बनाने की कोशिश की।''
इस गहन आत्म-खोज के बाद लीजा ने इंडिपेंडेंट फिल्मों की ओर कदम बढ़ाया। उन्होंने कहा, ''उस वक्त फिल्में आमतौर पर कम बजट में बनती थीं, लेकिन मेरा मकसद केवल पैसा कमाना नहीं था। मैं विश्वास और उम्मीद के साथ फिल्में बनाती थीं। यह मेरे लिए खुद को जानने और समझने का एक अवसर था। मेरी फिल्मों में हल्की-फुल्की और गंभीर दोनों प्रकार की फिल्में शामिल थीं। इनमें हर किरदार के माध्यम से मुझे अपने व्यक्तित्व की खोज करने में मजा आया।''
पुरानी तस्वीरों और फिल्मों के बारे में बात करते हुए लीजा ने कहा, ''भले ही वे मुझे अपनी पुरानी सुंदरता की याद दिलाती हैं, लेकिन मेरा असली मकसद कभी भी फेम या सुंदर दिखने का नहीं था। मेरे लिए असली काम जीवन में गहराई लाने, अर्थ खोजने और लोगों की बाहरी उम्मीदों का बोझ हटाने का था। समय ने मुझे मिटाया नहीं, बल्कि मेरे असली होने को उजागर किया। यह सफर मेरे लिए अपने आप को समझने और अपनाने का अनुभव साबित हुआ।''
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