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रिसर्च से लेकर टेस्टिंग तक के बीच का समय करना होगा कम : डीआरडीओ के वैज्ञानिकों से लेकर बोले रक्षा मंत्री, आपके संयुक्त प्रयासों का परिणाम है आपरेशन सिंदूर

डीआरडीओ के वैज्ञानिकों से लेकर बोले रक्षा मंत्री, आपके संयुक्त प्रयासों का परिणाम है आपरेशन सिंदूर
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admin

Jan 27, 202601:32 PM

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आज के दौर में, खासकर लड़ाई के मैदान में, अब सिर्फ मजबूत होना काफी नहीं है, बल्कि तेज होना भी उतना ही जरूरी है। जो देश तेजी से सोचता है, तेजी से निर्णय लेता है और तेजी से तकनीक को इस्तेमाल में लाता है, वही आगे निकल जाता है। रक्षा मंत्री ने यह बात मंगलवार को नई दिल्ली में डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कही।

रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि रिसर्च से लेकर प्रोटोटाइप तक, प्रोटोटाइप से लेकर टेस्टिंग तक, और टेस्टिंग से लेकर डिप्लॉयमेंट तक के बीच का समय कम करना होगा। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों में समय पर उपकरणों को सेवा में शामिल करना हमारी परफॉर्मेंस का सबसे बड़ा पैरामीटर होना चाहिए। यही आज की असली चुनौती है।

रक्षा मंत्री ने भविष्य की रक्षा जरूरतों को लेकर वैज्ञानिकों से किया संवाद

गौरतलब है कि ये वे वैज्ञानिक थे जिन्होंने रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय रिसर्च की है। रक्षा मंत्री ने भविष्य की रक्षा आवश्यकताओं को लेकर इनके साथ संवाद किया। इन वैज्ञानिकों को गणतंत्र दिवस परेड के विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। रक्षामंत्री ने इनसे कहा कि आप हर तरीके की परीक्षा में खरे उतरे हैं। आपकी टेक्नोलॉजी की परीक्षा तो युद्ध के मैदान में भी हो चुकी है। अभी हाल ही में, ऑपरेशन सिंदूर में इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमें दिखा। ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि हमारे स्वदेशी सिस्टम, भारत की ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत कर रहे हैं। यह सब डीआरडीओ के वैज्ञानिकों, इंजीनियर्स और टेक्निकल टीम के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

देश में भी अपनाई जा सकती है को-डेवलपमेंट अप्रोच

रक्षामंत्री ने कहा कि उत्पादन व उद्योगों के बीच समन्वय की मजबूती भी हमारे फोकस में होना चाहिए। डीआरडीओ आमतौर पर डिजाइन और प्रोटोटाइप पर फोकस करता है, लेकिन प्रोडक्शन करना उद्योगों का रोल है, इसलिए इस गैप को कम करना जरूरी है। इंटरनेशनल मॉडल की तरह हमारे यहां भी को-डेवलपमेंट अप्रोच अपनाई जा सकती है, जहां डिजाइन से प्रोडक्शन तक उद्योग शुरुआती स्तर से ही जुड़े हो।

रिसर्च के क्षेत्र में रिस्क लेने का भी करना चाहिए साहस

रक्षामंत्री ने देश के इन जाने-माने वैज्ञानिकों से कहा कि आपकी जिम्मेदारियां भी बहुत ज्यादा हैं इसलिए मैं समझता हूं, आपको रिसर्च के क्षेत्र में रिस्क लेने का भी साहस करना चाहिए। आप उन क्षेत्रों से अब आगे बढ़िए जहां प्राइवेट सेक्टर ने पहले ही अपनी विश्वसनीयता विकसित कर ली है। रक्षामंत्री ने कहा कि यह डीआरडीओ और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच नॉलेज शेयरिंग का ही प्रमाण है कि लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

कई उपलब्धियां कर रही हमारा इंतजार

उन्होंने कहा कि ऐसी ही अनेक उपलब्धियां हमारा इंतजार कर रही हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप शिक्षा जगत के साथ मिलकर, पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के साथ, नॉलेज शेयर करें। रक्षामंत्री ने कहा कि दशकों तक हमारी रक्षा आवश्यकताएं विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भर रहीं। उस समय परिस्थितियां भी ऐसी थीं और ऑप्शन भी सीमित थे। लेकिन आज भारत एक अलग दौर में खड़ा है। आज हमारी सोच बदली है, हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है और हमारी दिशा भी स्पष्ट है।

परिर्तन के केन्द्र में डीआरडीओ की अहम भूमिका

उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन के केंद्र में डीआरडीओ की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण रही है। डिफेंस सेक्टर से जुड़ा शायद ही कोई क्षेत्र होगा, जहां डीआरडीओ की उपस्थिति न हो। आपने यह साबित किया है कि भारतीय इनोवेशन किसी भी मामले में वैश्विक स्तर से पीछे नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में उनसे आगे खड़ा है। रक्षामंत्री ने कहा कि 2047 तक, जिस विकसित राष्ट्र के निर्माण का लक्ष्य हम सबने रखा है, उसमें बहुत बड़ा योगदान आप सभी का होने वाला है। आप सभी के प्रयासों से, भारत न सिर्फ वैज्ञानिक रूप से, बल्कि सोच और आत्मबल के स्तर पर भी, और अधिक सशक्त बनेगा।

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