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वाशिंगटन। अमेरिका के लॉ-मेकर्स ने एक बार फिर मांग उठाई है कि दवाओं पर साफ-साफ लिखा जाए कि वे किस देश में बनी हैं। उनका कहना है कि भारत सहित कुछ देशों ने कोविड-19 महामारी के दौरान दवाओं और उनके कच्चे माल के निर्यात पर रोक लगा दी थी, जिससे यह साफ हुआ कि अमेरिका की दवा आपूर्ति अभी भी दूसरे देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है और खतरे में है।
यह मांग अमेरिकी सीनेट की एजिंग पर बनी विशेष समिति की सुनवाई के दौरान उठी। सुनवाई का विषय था - “लेबलिंग में सचरू अमेरिकी नागरिकों को यह जानने का हक है कि उनकी दवाएं कहां से आती हैं।” समिति के अध्यक्ष रिक स्कॉट ने अपनी नई विधेयक पहल ‘क्लियर लेबल्स एक्ट’ का ऐलान किया। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका में बिकने वाली सभी पर्ची वाली दवाओं पर यह बताना जरूरी होगा कि दवा और और उनके मुख्य इंग्रेडिएंट्स कहां बने हैं।
जांच में हैरान करने वाली बातें आईं सामने
रिक स्कॉट ने कहा कि इस जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे लोगों को हैरान कर देंगी। उनके मुताबिक अमेरिका में दी जाने वाली करीब 91 प्रतिशत दवाएं जेनेरिक होती हैं और इनमें से लगभग 94 प्रतिशत दवाओं के सक्रिय घटक विदेशों में बनते हैं, जिनमें ज्यादातर उत्पादन चीन और भारत में होता है।
नेशनल सिक्योरिटी का भी बड़ा खतरा
उन्होंने कहा कि जानकारी की कमी की वजह से मरीजों, डॉक्टरों और दवा विक्रेताओं को यह भी नहीं पता होता कि वे जो दवा इस्तेमाल कर रहे हैं, वह कहां बनी है। साथ ही, विदेशों में बने कारखानों की निगरानी करना भी अमेरिकी एजेंसियों के लिए मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा, हमें न सिर्फ पब्लिक हेल्थ का गंभीर खतरा है, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी का भी बड़ा खतरा है। अगर विदेशी सप्लायर एक्सपोर्ट बंद कर देते हैं, तो अमेरिका के पास जान बचाने वाली दवाओं तक पहुंच पक्की करने का कोई पक्का प्लान नहीं है।
हाल के इतिहास की ओर किया इशारा
उन्होंने हाल के इतिहास की ओर इशारा किया। स्कॉट ने कहा, कोविड महामारी के दौरान, भारत ने जरूरी दवा सामग्री के एक्सपोर्ट को रोक दिया था। तो यह फिर से हो सकता है। सुनवाई के एक हिस्से की अध्यक्षता करने वाली सेनेटर एश्ले मूडी ने कहा कि आम उपभोक्ता के लिए यह जान पाना लगभग नामुमकिन है कि उसकी दवा कहां से आई है। उन्होंने कहा कि एफडीए इंपोर्ट अलर्ट में विदेशी फैसिलिटी में समस्याओं का जिक्र किया गया है, जिसमें ष्कैंसर पैदा करने वाली अशुद्धियां, गलत बैच रिकॉर्ड और नॉन-स्टेराइल स्थितियांष् शामिल हैं।
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