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नई दिल्ली। 18 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत-यूरोपीय संघ ने फ्री ट्रेड डील पर मुहर लगा दी है। दोनों देशों के बीच इस डील का ऐलान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया।दोनों देशों ने टैरिफ में बड़ी कटौती और कुछ प्रोडक्ट्स पर टैरिफ समाप्त करने की सहमति जताई है। इसे व्यापार जगत की सबसे बड़ी संधियों में से एक माना जा रहा है, जो सीधे तौर पर भारतीय ऑटो बाजार और उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आई है।
इस समझौते के तहत यूरोपीय कारों पर लगने वाले भारी-भरकम टैक्स में बड़ी कटौती की गई है, जिससे भारत में लग्जरी गाड़ियों की कीमतें कम होने का रास्ता साफ हो गया है। यूरोपीय संघ का कहना है कि इस कदम से भारतीय बाजार में निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी होगी और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और भी ज्यादा मजबूत होंगे। वहीं पीएम मोदी ने कहा कि यह एफटीए केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट है।
एफटीए में ईयू के 27 देश शामिल
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि इस एफटीए में ईयू के 27 देश शामिल हैं। साथ ही इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बताया। पीएम के मुताबिक, यह ऐतिहासिक समझौता हमारे किसानों और हमारे छोटे उद्योगों के लिए यूरोपीय मार्केट तक पहुंच को आसान बनाएगा, मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा और हमारे सर्विसेज सेक्टर के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा।
एफटीए निवेश को देगा बढ़ावा
इसके अलावा, यह एफटीए भारत और यूरोपीय संघ के बीच निवेश को बढ़ावा देगा, नए नवाचार साझेदारियों को प्रोत्साहित करेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा। यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा समृद्धि का खाका प्रस्तुत करता है।
भारत-यूरोपीय संघ सहयोग विश्व के लिए अच्छा कदम
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत और यूरोपीय संघ सहयोग विश्व के लिए अच्छा कदम है। बहुपक्षवाद और अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों का सम्मान हमारी साझा परंपरा है। हम एक मत हैं कि आज की चुनौतियों का समाधान करने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार आवश्यक है। हम इंडो-पैसिफिक से लेकर कैरेबियन तक ट्राइ-लैटरल प्रोजेक्ट्स का विस्तार देंगे। इससे सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, क्लीन एनर्जी और महिला सशक्तिकरण को समर्थन मिलेगा।
8 लाख भारतीय रहते हैं यूरोप में
प्रधानमंत्री के मुताबिक, मौजूदा समय में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार 80 अरब यूरो का है और करीब 8 लाख भारतीय यूरोप के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं। भारत और ईयू द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए करीब एक दशक से बातचीत कर रहे थे। दोनों पक्षों की ओर से इस मदर ऑफ ऑल डील बताया गया। इस समझौते से दुनिया के 2 अरब लोगों को फायदा होगा और विश्व की करीब 25 प्रतिशत अर्थव्यवस्था पर इसका असर देखने को मिलेगा।
क्या-क्या चीजें होंगी सस्ती?
भारत और यूरोपीय यूनियन के इस डील के बाद बहुत सी चीजें कम दर में मिलने वाली हैं। कार से लेकर केमिकल्स तक की चीजों के दाम कम हो सकते हैं. साथ ही वाइन, बीयर और डिंक्स वाले उत्पाद भी सस्ते हो सकते हैं। यह समझौता शराब, खाद्य उत्पाद, रसायन, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और एयरोस्पेस जैसे प्रमुख चीजों के दाम में कटौती कर सकता है।
डील को लेकर यूरोपीय संघ के बड़े ऐलान
यूरोपीय संघ के निर्यातकों को शुल्क में हर साल 4 अरब यूरो तक की बचत होगी.
बीयर पर टैरिफ घटाकर 50 फीसदी किया गया है।
शराब पर लगने वाले टैरिफ में 40 फीसदी की कटौती की जाएगी।
कार, कमर्शियल व्हीकल को 110फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया जाएगा, लेकिन हर साल 250,000 का कोटा रखा गया है।
जैतून के तेल, मार्जरीन और वनस्पति तेलों पर लगे शुल्क समाप्त किए जाएंगे।
फलों के रस और प्रोसेस फूड प्रोडक्ट्स पर लगने वाले शुल्क समाप्त किए जाएंगे।
यूरोपीय संघ के लगभग सभी रासायनिक उत्पादों पर लगे टैरिफ को समाप्त किया जाएगा।
मशीनरी पर लगने वाले 44 फीसदी तक के शुल्क को काफी हद तक समाप्त कर दिया जाएगा।
केमिकल्स पर लगने वाले 22ः तक के शुल्क को काफी हद तक समाप्त किया जाएगा।
दवाओं और मेडिकल प्रोडक्ट्स पर 11 फीसदी तक के शुल्क को काफी हद तक समाप्त किया गया है।
एयरक्राफ्ट और स्पेसक्रॉफ्ट पर लगने वाले टैरिफ को शून्य कर दिया गया है।
भारत को एक्सपोर्ट्स होने वाले यूरोपीय संघ के 90 फीसदी से अधिक सामानों पर लगने वाले शुल्क या तो समाप्त कर दिए जाएंगे या कम कर दिए जाएंगे।
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करने में भारत की मदद के लिए अगले दो वर्षों में यूरोपीय संघ द्वारा 500 मिलियन यूरो की सहायता दी जाएगी।
यूरोपीय संघ के ट्रेडमार्क, डिजाइन, कॉपीराइट और व्यापार रहस्यों के लिए मजबूत सुरक्षा
नए व्यापार और रोजगार के अवसर खुलने की उम्मीद है।
छोटी कंपनियों बिजनेस को और मजबूती मिलेगी।
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