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अब बाबा विश्वनाथ की नगरी में सुनाई देगी विक्रमोत्सव की गूंज : 3 से 5 अप्रैल तक होगा भव्य आयोजन, सम्राट विक्रमादित्य के वैभवशाली कालखंड का होगा मंचन

3 से 5 अप्रैल तक होगा भव्य आयोजन, सम्राट विक्रमादित्य के वैभवशाली कालखंड का होगा मंचन
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admin

Mar 28, 202601:24 PM

भोपाल। मप्र सरकार भारतीय ज्ञान और परंपरा को गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। यही नहीं सरकार इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए नई-नई पहलें भी कर रही है। इसी क्रम में गौरवमयी अभियान विक्रमोत्सव-2026 के अंतर्गत मोक्षदायिनी नगरी वाराणसी में आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक भव्य “महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य” का मंचन किया जा रहा है। बता दें कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से शुरू हुई यह सांस्कृतिक यात्रा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पहुंच रही है।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का महाकुंभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य केवल एक शासक नहीं, बल्कि भारतीय न्यायप्रियता, वीरता और सुशासन के जीवंत प्रतीक हैं। वाराणसी में होने वाला यह महानाट्य जन-जन को उस वैभवशाली कालखंड से परिचित कराएगा। जब सम्राट विक्रमादित्य ने आज से लगभग 2100 वर्ष पूर्व आक्रांता शकों का समूल नाश कर श्विक्रम संवतश् का प्रवर्तन किया था, यह संवत विश्व की प्राचीनतम काल-गणनाओं में से एक है, जो भारतीय विज्ञान और खगोल शास्त्र की श्रेष्ठता को दर्शाता है।

अद्वितीय शौर्य और न्याय का चित्रण

वाराणसी में होने वाली तीन दिवसीय विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के शकारि और साहसांक बनने की गाथा को जीवंत किया जाएगा। नाटक में दिखाया जाएगा कि कैसे एक लोक-कल्याणकारी राजा ने अपने राजकोष से धन देकर प्रजा को ऋणमुक्त किया और एक ऐसा साम्राज्य स्थापित किया जहाँ न कोई दरिद्र था और न ही कोई दुखी। साथ ही, सम्राट की नवरत्न परंपरा, जिसमें कालिदास, वराहमिहिर और धन्वंतरि जैसे महान विद्वान शामिल थेकृके माध्यम से श्रेष्ठ भारत के निर्माण के संकल्प को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। दिल्ली के लाल किले पर सफल मंचन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसकी सराहना के बाद, वाराणसी का यह मंचन एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विक्रमोत्सव की ऐतिहासिक सफलता

उल्लेखनीय है कि उज्जैन में आयोजित विक्रमोत्सव 2026 ने डिजिटल आउटरीच में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ की रिपोर्ट के अनुसार, 7 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच इस आयोजन की डिजिटल रीच 17.72 करोड़ से अधिक रही है। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ और मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह महानाट्य वाराणसी में न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय एकता के सूत्र को और अधिक सुदृढ़ करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संकल्पों के अनुरूप यह आयोजन श्विकसित भारतश् की राह में श्सांस्कृतिक पुनर्जागरणश् का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

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अब बाबा विश्वनाथ की नगरी में सुनाई देगी विक्रमोत्सव की गूंज : 3 से 5 अप्रैल तक होगा भव्य आयोजन, सम्राट विक्रमादित्य के वैभवशाली कालखंड का होगा मंचन