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बड़वानी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बड़वानी में होलिका दहन से पूर्व आदिवासियों के बीच पहुंचकर भगोरिया उत्सव में शामिल हुए। मुख्यमंत्री बड़वानी जिले में आयोजित भगोरिया उत्सव में शामिल होने मंत्रीमंडल के साथ पहुंचे। मुख्यमंत्री ने आदिवासियों की पारंपरिक वेशभूषा पहनी और उनके साथ ढोल की थाप पर आदिवासियों के वाड्यूओन की धुन पर पारंपरिक नृत्य किया। उनके साथ मंत्रिमंडल के अन्य सहयोगी और स्थानीय जन प्रतिनिधि भी भगोरिया उत्सव में शामिल हुए। वहीं शहर में आयोजित भगोरिया उत्सव में शामिल होने बड़वानी पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने सीएम डॉक्टर मोहन यादव का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में शामिल होने मंच पर पहुंचे सीएम ने कहा- जनजातीय संस्कृति की विविधता एवं समृद्धता अद्भुत है और भगोरिया पर्व अनुशासन और आनंद का पर्व है।
मुख्यमंत्री हेलिपैड से सीधे शिखरधाम पहुंचे और 800 वर्ष पुराने भीलट देव मंदिर में पूजा-अर्चना की। उनके साथ उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री तुलसी सिलावट, गौतम टेटवाल और विजय शाह सहित कई मंत्री मौजूद रहे। मंदिर में दर्शन के बाद कैबिनेट बैठक प्रारंभ हुई, जिसमें 25 से अधिक मंत्रीगण शामिल हुए। खासबात यह रही कि नागलवाड़ी स्थित शिखरधाम में डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कृषि कैबिनेट बैठक हुई है। जहां शिखरधाम में भीलटदेव मंदिर की तलहटी पर बने 8 एकड़ के गार्डन को अस्थायी मंत्रालय का रूप दिया गया था।
शिखरधाम में हुई कृषि कैबिनेट

यहां कृषि प्रदर्शनी, ग्रीन रूम, कैबिनेट हॉल और भोजनशाला के लिए विशाल एसी डोम शेड तैयार किए गए थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा सहित 25 से अधिक मंत्री उपस्थित हैं। शिखरधाम में बनाए गए अस्थायी मंत्रालय में कैबिनेट हॉल में बैठक हुई। जहां निमाड़ अंचल के सात जिलों के कृषि विकास, सिंचाई, मसाला फसलों को बढ़ावा और किसानों की आय वृद्धि जैसे मुद्दों पर मंथन हुआ। साथ ही भिलट देव शिखरधाम मंदिर पर बने करीब 80 लाख रुपए की लागत के भिलट देव व्याख्यान केंद्र का सीएम ने लोकार्पण किया, जो मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा निर्मित और खनिज साधन विभाग द्वारा स्वीकृत है।
कृषि कैबिनेट में बड़वानी अंचल के लिए हुए अहम फैसले
कृषि कैबिनेट बैठक में उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस, सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने का प्रस्ताव, सूक्ष्म सिंचाई के लिए हजारों करोड़ का प्रावधान, प्राकृतिक खेती, खाद्य तेल मिशन और दलहन उपार्जन जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।कुल 6 योजनाओं को स्वीकृति दी। बैठक के बाद सीएम डॉ मोहन ने खुद जानकारी दी। कहा- पहली कृषि कैबिनेट बड़वानी अंचल में करने का निर्णय लिया। इस साल किसान कल्याण वर्ष 2026 मना रहे हैं। खेतों के साथ टेंट तंबू में भी निर्णय होते हैं। 16 योजनाओं में निर्णय लिए गए। 27 हजार 746 करोड़ से अधिक का भार सरकार पर आएगा। बैठक में 6 विभागों की 16 योजनाएं मंजूर हुई है। बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
बड़वानी में आधुनिक सब्जी मंडी बनेगी
4 हजार 264 करोड़ की खाद्य प्रसंस्करण की योजनाएं मंजूर। 8166 करोड़ की सहकारिता की योजनाएं। अब तक 38 हजार करोड़ से अधिक की योजनाएं किसानों को मिली हैं। भीलटदेव क्षेत्र पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। सच्चा वादा, पक्का काम थीम पर काम कर रहे हैं। बड़वानी में आधुनिक सब्जी मंडी बनेगी। बड़वानी की मंडी आदर्श मंडी के रूप में विकसित होगी।
भगोरिया हाॅट में शामिल हुए सीएम मोहन

कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री और मंत्रीगण जुलवानिया के प्रसिद्ध भगोरिया हाट में शामिल होने के लिए रवाना हुए। जहां उन्होंने जनजातीय समाज से संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता की। इस दौरान सीएम ने जहां आदिवासी कलाकारों के साथ जमकर डांस किया। वहीं खाट में बैठकर उनसे संवाद भी किया। मतलब सुबह दर्शन, लोकार्पण और कृषि कैबिनेट बैठक के बाद अब पूरा काफिला भगोरिया के रंग में रंगा नजर आया।
भगोरिया उत्सव में उमड़े हजारों समाजजन
बता दें कि आदिवासी समाज का बहुप्रतीक्षित और पारंपरिक भगोरिया हाट 24 फरवरी से विधिवत शुरू हुआ था। भगोरिया हाट हजारों की संख्या में समाजजन उमड़े। शहर के प्रमुख मार्गों और हाट परिसर में सुबह से ही चहल-पहल रही। कहीं ढोल-मांदल की थाप पर युवक-युवतियां झूमते नजर आए, तो वहीं बुजुर्गों ने पारंपरिक गीतों से माहौल को जीवंत बना दिया। रंग-बिरंगी पारंपरिक पोशाकों, चांदी के आभूषणों और लोक वेशभूषा में सजे युवा आकर्षण का केंद्र बने रहे। युवतियों के श्रृंगार और युवाओं के पारंपरिक साफा-फेंटा ने सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की। पूरा वातावरण आदिवासी संस्कृति की खुशबू से महक उठा।
देश भर में पहचान बना चुका है भगोरिया उत्सव
उत्साह और उमंग का उत्सव भगोरिया पव प्रदेश के साथ ही देश में भी अपनी पहचान बना चुका है। खासतौर पर रंग-बिरंगी पारंपरिक पोशाकों, चांदी के आभूषणों और लोक वेशभूषा के लिए जाना जाता है खासतौर पर चांदी के आभूषणों के लिए प्रसिद्ध है३ दरअसल पश्चिमी मध्य प्रदेश के भील, भिलाला और बारेला आदिवासी समुदायों में चांदी केवल धातु नहीं, बल्कि पहचान, परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक रही है। पीढ़ियों से इन समुदायों ने सोने की बजाय चांदी को प्राथमिकता दी है। हालांकि इस वर्ष चांदी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने भगोरिया जैसे पारंपरिक त्योहार की रौनक को फीका कर दिया।
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