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नई दिल्ली। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष की ओर से सबसे पहले बोलने के लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी खड़े हुए, लेकिन उन्होंने बजट पर बात करने की बजाय चीन का मसला उठा दिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बार-बार रोकने के बाद भी राहुल चीन के मुद्दे पर बोलने अड़े रहे। हालांकि इस दौरान उन्हें सपा अध्यक्ष और लोकसभा में सांसद अखिलेश यादव का भी सपोर्ट मिला। अखिलेश यादव ने कहा कि चीन से जुड़ा मामला बहुत संवेदनशील है। लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने की इजाजत दी जानी चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा कि अध्यक्ष मोहदय, चीन का सवाल बहुत संवेदनशील है। अगर कोई सुझाव ऐसा है देश के हित में, तो मैं समझता हूं विपक्ष के नेता को पढ़ देना चाहिए। इतना ही नहीं बहुत संवेदनशील है। मुझे याद है डॉक्टर राम मनोहर लोहिया, जॉर्ज फर्नांडिज और और नेता जी हमेशा यह बात जताते रहे कि हमे हमेशा चीन से सावधान रहना है। अगर चीन से सावधान नहीं रहेंगे तो हमने पहले भी जमीनें खो दी हैं।
राहुल गांधी के बोलते ही संसद में हंगामा
दरअसल, लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राहुल गांधी के भाषण के शुरू होते ही हंगामा हो गया। राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की किताब है। आप सब ध्यान से सुनें कि मैं क्या पढ़ रहा हूं? इससे पता चल जाएगा कि कौन देशभक्त है और कौन नहीं। बस इसी के साथ संसद में जोरदार हंगामा शुरू हो गया।
चार चीनी टैंक डोकलाम में भारत की तरफ आ रहे थे
राहुल गांधी ने अपने भाषण में फिर आगे कहा कि चार चीनी टैंक डोकलाम में भारत की धरती पर आ रहे थे। वो 100 मीटर ही दूर थे। राहुल के बस इतना बोलते ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताई और अपनी सीट से खड़े होकर हस्तक्षेप किया और बोले कि अप्रकाशित पुस्तक का सदन में जिक्र नहीं किया जाता। उन्होंने अपने बयान में कहा कि राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने भी आपत्ति जताई और कहा कि किसी भी अप्रकाशित किताब का संसद में हवाला नहीं दिया सकता।
राहुल के समर्थन में आए अखिलेश
लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, श्मैं चाहता हूं कि लोकसभा में विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) वह किताब सदन के सामने पेश करें, जिससे वह कोट कर रहे हैं, क्योंकि जिस किताब का वह जिक्र कर रहे हैं, वह पब्लिश नहीं हुई है।
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