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नई दिल्ली। देशभर में गुरुवार को सेना दिवस पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना के मूल मंत्र नाम, नमक और निशान को दोहराया है। यह भारतीय सेना का एक आदर्श वाक्य है। यह वाक्य देश के प्रति कर्तव्य को पूर्ण समर्पण व निष्ठा के साथ निभाने से जुड़ा है।
अपने संदेश में थलसेना प्रमुख ने कहा कि बीता वर्ष राष्ट्रीय संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए सतत सतर्कता और निर्णायक परिचालनात्मक प्रतिक्रियाओं का साक्षी रहा। इसका उत्कृष्ट उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर में देखने को मिला है। इसके साथ ही, भारतीय सेना ने देशभर में तथा मित्रवत पड़ोसी देशों में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में प्रभावी भूमिका निभाई है।
सेना प्रमुख ने वीर माताओं और नोरियों को दी शुभकमानाएं
सेना प्रमुख के अनुसार, भारतीय सेना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों (यूएनपीके) के माध्यम से वैश्विक शांति में विश्वसनीय योगदान जारी रखा है। भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना के सभी रैंकों, पूर्व सैनिकों, वीर माताओं, वीर नारियों, रक्षा नागरिक कर्मियों और उनके परिवारजनों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कर्तव्य पथ पर अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को नमन करते हुए उनके अदम्य साहस और त्याग को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सेना प्रमुख ने पीएम मे नवाचारों के दृष्टिकोण पर भी की बात
थलसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और नवाचार के दृष्टिकोण की भी बात की। उन्होंने इस दृष्टिकोण के अनुरूप इस वर्ष की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अन्य सर्विसेस (नौसेना, वायु सेना) और एजेंसियों के साथ तालमेल को सुदृढ़ करना, स्वदेशी रक्षा समाधानों के विकास को प्रोत्साहित करना तथा नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।
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