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भोपाल। निगम-मंडलों, प्राधिकरण एवं स्थानीय स्तर की अन्य नियुक्तियों के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं की लम्बी प्रतीक्षा जल्द ही खत्म होने वाली है। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में निगम-मंडलों के साथ ही महाविद्यालयों की जनभागीदारी और स्थानीय नगर निगमों, प्राधिकरणों में नियुक्ति के लिए सूची फायनल होकर दिल्ली पहुंच चुकी है और केन्द्र से हरी झंडी मिलते ही संभवतः इसी सप्ताह सत्ता की नियुक्तियों की सूचियां जारी हो सकती हैं।
पार्टी-संगठन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में करीब चार दर्जन नामों के अलावा करीब 300-400 कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर के अन्य शासी निकायों में समायोजित करने की तैयारी की जा चुकी है। जिलाध्यक्षों और पार्टी के स्थानीय जनप्रतिनिधियो के समन्वय के तैयार कार्यकर्ताओं की सूची जो प्रदेश संगठन के पास पहुंची हैं, उनमें भी एक-एक नाम पर फिर से मंथन किया जा चुका है। इसके बाद सूची फायनल कर केन्द्रीय नेतृत्व के पास भेजी जा चुकी हैं। जैसे ही केन्द्र से हरी झंडी मिलेगी, प्रदेश नेतृत्व यह सूची जारी कर देगा।
जमीनी कार्यकर्ता पर फोकस क्यों?
राज्य स्तर के निगम-मंडलों और स्थानीय प्राधिकरणों में जहां पार्टी के वरिष्ठ और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अवसर मिलेगा। इनमें कुछ पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और टिकट से वंचित रहे दावेदार कार्यकर्ताओं को भी शामिल किया जाएगा। वहीं जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूती देने वाले प्रदेशभर के कार्यकर्ताओं को स्थानीय नगरीय निकायों में वरिष्ठ पार्षद और महाविद्यालयों में जनभागीदारी समितियों सहित स्थानीय स्तर के अन्य पदों पर नियुक्त करेगी।
15 मार्च तक सभी मोर्चा कार्यकारिणी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संकेत दिए हैं कि भाजपा के सभी मोर्चाओं की कार्यकारिणी आगामी 10 दिनों में घोषित हो जाएंगी। इन प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणयों में कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को अवसर मिलेगा। वहीं पार्टी के अलावा सभी मोर्चा-संगठनों की जिला स्तर पर इकाई भी जल्द ही गठित की जाएंगी। इस तरह ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं को सत्ता और संगठन में अवसर दिया जाएगा।
मंत्रि-मंडल में फेरबदल तय, लेकिन फिलहाल टला
केन्द्रीय नेतृत्व के निर्देश और प्रदेश संगठन के समन्वय से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी समय में अपने मंत्रि-मंडल में विस्तार करेंगे। इस दौरान कुछ मंत्रियों-राज्यमंत्रियों की कुर्सी जा सकती है।उनके स्थान पर पूर्व में छूटे कुछ विधायकों को सरकार में अवसर मिलेगा। लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार में कई मंत्रियों के विभाग बदलना तय है। जिन मंत्रियों के पास प्रमुख दो या अधिक विभाग हैं। उनके एक महत्वपूर्ण विभाग छीनकर छोटे विभाग दिए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री के पास कुछ विभाग भी मंत्रियों में बांटे जा सकते हैं।
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