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भोपाल। कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में दोषी करार दतिया विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार देर रात आधिकारिक तौर पर आदेश जारी किया। बता दें कि राजेंद्र भारती को फर्जीवाड़े के मामले में 3 साल की सजा सुनाई जाने के बाद विधिक नियमों के प्रावधान के तहत यह फैसला लिया गया।
सूत्रों की मानें तो गुरुवार देर रात रात करीब साढ़े दस बजे प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा विधानसभा पहुंचे। इसके बाद सचिवालय खोलकर दतिया विधानसभा सीट रिक्त घोषित करने का पत्र चुनाव आयोग को भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई। हालांकि इस बारे में कांग्रेस जैसे ही भनक लगी पीसीसी चीफ जीतू पटवारी विधानसभा पहुंच गए। उनके साथ पूर्व मंत्री पीसीसी शर्मा भी थे। दोनों सीधे सचिव के कमरे में पहुंच गए और देर रात सचिवालय खोलने के बारे में सवाल-जवाब भी किया। हालांकि शर्मा कोई जवाब दिए बिना आॅफिस से बाहर निकल गए।
यह लिखा आदेश में
आधिकारिक राजपत्र में लिखा है, मध्यप्रदेश की सोलहवीं विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 22-दतिया से निर्वाचित सदस्य राजेंद्र भारती के खिलाफ दिल्ली की अदालत ने निर्णय पारित किया है। अपराध सिद्ध होने के फलस्वरूप तीन साल के कारावास और 1 लाख रुपए के जुर्माने की सजा दी गई है। उन्हें (राजेंद्र भारती) दंडित किए जाने के कारण सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (10 जुलाई 2013) के पालन में संविधान के अनुच्छेद 191 (1) (सी) सहपठित लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के तहत राजेंद्र भारती 2 अप्रैल 2026 से विधानसभा की सदस्यता से निरर्हित हो गए हैं। अतः मध्यप्रदेश विधानसभा में एक स्थान रिक्त हो गया है।
विधानसभा के प्रमुख सचिव के चेंबर में पहुंचे
जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने के लिए बीजेपी के इशारे पर रात को विधानसभा सचिवालय खोला गया। कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने भी आरोप लगाया कि- रात में सदस्यता समाप्त करने का काम कर रहे थे, जबकि मामले में स्टे है। यह बर्दास्त नहीं
लंबे समय से चर्चा में था मामला
यह मामला लंबे समय से चर्चा में था और इसकी सुनवाई को लेकर भी विवाद हुआ था। दरअसल, राजेंद्र भारती ने अपने खिलाफ चल रहे मुकदमे को ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट से दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा व उनके परिवार के लोग इस मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
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