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नई दिल्ली। देश की सियासत में एक बार फिर तीखा वार देखने को मिल रहा है, जहां भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। दुबे लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तारीखवार उन समझौतों और निर्णयों को उजागर कर रहे हैं, जिन्हें वे देशहित के खिलाफ बताते हैं। “कांग्रेस का काला अध्याय” नाम से शुरू की गई उनकी यह शृंखला केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि दस्तावेजों के जरिए अतीत के फैसलों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश है।
निशिकांत की शृंखला ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जहां इसे आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। इसी क्रम में निशिकांत दुबे ने बुधवार को कांग्रेस का काला अध्याय 9 एपिसोड एक्स पर पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है, आज, यानी 25 मार्च 1914 को शिमला में ब्रिटिश इंडिया, चीन सरकार और तिब्बत ने मिलकर एक समझौता किया, जिसके अंतर्गत नेपाल और तिब्बती समझौता 1856 तथा जम्मू कश्मीर तिब्बती समझौता 1842 लागू हुआ। तिब्बत और भारत के बीच सीमा निर्धारण मैकमोहन लाइन के तहत किया गया।
नेहरू ने तिब्बतियों को बनाया चीन का नागरिक
हालांकि मई 1951 में नेहरू ने चीन के आधिपत्य को सत्रह समझौते के अनुसार तिब्बतियों को चीन का नागरिक बना दिया। बचा काम 29 अप्रैल 1954 में तिब्बत पर चीन के पूर्ण नियंत्रण का समझौता कर लिया तथा इस समझौते के तहत चीन को बेरोकटोक भारत आने की छूट दे दी। देश को तबाह करने की काली करतूत के जिम्मेदार केवल और केवल नेहरु जी ही हैं।
श्रीलंका को लेकर राजीव गांधी को घेरा
इसके पहले 24 मार्च को निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था, 24 मार्च 1990 को श्रीलंका से भारतीय सेना हारकर जबरदस्ती भगाई गई और लौटी। भारतीय सेना की अंतिम टुकड़ी को विदा करने वालों में आज के हमारे विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर भी थे, जो उन दिनों श्रीलंका में कार्यरत थे। भारतीय सेना तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जिद और जुनून के कारण जबरदस्ती 1987 में अपने ही तमिल भाइयों को मारने पहुंची थी।
इंदिरा को भी खड़ा किया कटखरे में
गांधी परिवार का यह जुनून नया नहीं था। इसके पहले 24 मार्च 1971 को भी इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को श्रीलंका के छात्र आंदोलन पर नियंत्रण के लिए वहां भेजा था लेकिन 1971 के पाकिस्तान युद्ध के दौरान श्रीलंका ने पाकिस्तान का साथ दिया। हमारे हजारों जवान 1987 से लेकर 1990 तक मारे गए। श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रेमदास ने भारतीय जवानों पर तरह-तरह के आरोप लगाए और राजीव गांधी को चिट्ठी लिखी। पहली बार विदेशी धरती पर भारतीय प्रधानमंत्री के ऊपर हमला हुआ और देश के सम्मान को ठेस पहुंची।
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